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क्या बच्चों के कारण प्रभावित हो रहे हैं पति-पत्नी के रिश्ते?
- Author, रवि प्रकाश
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
किसी परिवार में बच्चे के जन्म की ख़बर आने से ही ख़ुशियों की लहर दौड़ जाती है.
वहीं कई दंपति ऐसे भी होते हैं जो बच्चा पैदा करने में विश्वास नहीं रखते. हालांकि उनके इस फ़ैसले के अलग-अलग कारण हो सकते हैं.
यहां मामला अपनी-अपनी पसंद का है.
बिहार के गया ज़िले की मीनू सिंह को बच्चे हमेशा ही अच्छे लगते थे.
पेशे के शिक्षिका मीनू बताती हैं कि उनकी शादी 2018 में हुई और दो साल बाद बेटी का जन्म हुआ.
बेटी पैदा होने की अपनी ख़ुशी थी लेकिन उसके बाद जीवन एकदम बदल गया.
वे कहती हैं, "मैं और मेरे पति दोनों नौकरी करते हैं. बेटी के जन्म के बाद हम दोनों उसके लालन-पालन में लग गए तो एक-दूसरे को टाइम नहीं दे पाते हैं. पहले उनका अटेंशन मेरे ऊपर होता था. अब यही बेटी के लिए है. घर के दूसरे लोग भी बेटी को ज़्यादा अटेंशन देते हैं."
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"ये देखकर अच्छा लगता है कि बेटी को सभी का प्यार मिल रहा है और उसका ख़्याल भी मेरे पति अच्छी तरह से करते हैं लेकिन कई बार ऐसा लगता कि मेरे और पति के बीच पहली वाली बात नहीं रही."
"ऐसा नहीं है कि हमारे बीच प्यार नहीं है लेकिन वो ध्यान अब बंट गया है."
पहले मुंबई और अब पटना में रह रहीं शैलजा ओझा की कहानी कुछ ऐसी ही है.
वे अपने पति विवेक रंजन और एक साल के बेटे के साथ यूं तो काफी ख़ुश हैं लेकिन उनका मानना है कि बेटे के जन्म के बाद उनके आपसी रिश्ते पर असर पड़ा है.
शैलजा ओझा ने बीबीसी हिंदी से बातचीत में कहा, “शादी से पहले और शादी के बाद हमारी ज़िंदगी शानदार थी. हमारे रिश्तों में सिर्फ़ प्यार था. 2021 में हमारी शादी हुई, हम बहुत ख़ुश थे."
वे कहती हैं, "जब मैं गर्भवती हुई तो मेरे पति मेरा बहुत ख़्याल रखते थे. पर जब 2022 में बेटे का जन्म हुआ तो स्थितियां बदल गईं. मैं मामूली बातों पर भी चिड़चिड़ी रहने लगी. मुझे गुस्सा आने लगा. हमारे बीच कहासुनी और लड़ाई होने लगी. पति ध्यान नहीं देते तो और गुस्सा आता. फिर हमने धीरे-धीरे अपने रिश्ते को संभाला लेकिन हमारी ज़िंदगी अब बदल चुकी है.”
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क्या कहती है रिसर्च
एक शोध के मुताबिक़, बच्चे का जन्म पति-पत्नी के आपसी संबंधों को प्रभावित कर रहा है.
यूनिवर्सिटी ऑफ़ बोर्न के साल 2021 में हुए शोध के बाद शोधकर्ताओं ने दावा किया कि बच्चे के जन्म के बाद हर चार में से एक मां और हर 10 में से एक पिता को मानसिक बीमारियों (मेंटल इलनेस) का सामना करना पड़ा.
यह भी देखा गया कि बग़ैर बच्चे वाले दंपति बच्चों वाले दंपतियों के मुक़ाबले एक-दूसरे से ज़्यादा संतुष्ट थे.
वहीं शोध ये भी कहता है कि जिस दंपति को बच्चे थे, उनके बीच का प्यार बच्चे के जन्म के बाद के 10 सालों में लगातार कम होता गया.
शोध में ये भी बताया गया है कि बिना बच्चे वाली 62 फ़ीसद महिलाएं ज़्यादा ख़ुश थीं.
जबकि नवजात बच्चों की मांओं में यह आंकड़ा सिर्फ़ 38 प्रतिशत था. इसकी एक वजह इनके यौन संबंधों में कमी आना या उसका प्रभावित होना भी बताया गया है.
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मानसिक बीमारी और तनाव के मामले
बच्चे के जन्म के बाद पति-पत्नी के आपसी रिश्तों पर पड़ रहे असर के कारण उन्हें कई बार डॉक्टर की सलाह के लिए जाना पड़ता है.
झारखंड के रांची स्थित कांके अस्पताल सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइकेट्री (सीआइपी) के एसोसियेट प्रोफ़ेसर डॉक्टर संजय मुंडा ने बताया कि कुछ जागरूक दंपति प्रेग्नेंसी के तुरंत बाद काउंसिलिंग के लिए आ जाते हैं, ताकि बच्चे के जन्म के बाद उनके रिश्ते पर ग़लत प्रभाव नहीं पड़े.
डॉक्टर संजय मुंडा ने बीबीसी हिंदी से कहा, “बच्चे का जन्म पति-पत्नी के रिश्ते को पूरी तरह प्रभावित करता है. यह प्रभाव सकारात्मक भी हो सकता है और नकारात्मक भी. आधुनिक वक़्त में एकल परिवारों के चलन के कारण ऐसे समय में दंपति को सलाह देने के लिए परिवार में कोई और नहीं होता. तब तनाव ज़्यादा बढ़ता है क्योंकि पहली बार मां-पिता बनने वाले युगल को इसका पूर्व अनुभव रहता ही नहीं है.”
वे बताते हैं, “बच्चे के जन्म के बाद जब उन्हें बच्चे की मांग के हिसाब से ख़ुद को बदलना होता है, तब उन्हें परेशानी होती है. ऐसे में कई बार जब ये हमसे संपर्क करते हैं तो हमें इन्हें दवाएं भी देनी पड़ती है. हम उनकी काउंसिलिंग करते हैं."
"मानो एक ट्रायंगल हो, जिसके तीन पॉइंट पर मां, पिता और बच्चा बैठे हों. काउंसिलिंग के बाद हम ऐसे युगल का बॉडी क्लॉक और उनकी मानसिक स्थिति की विवेचना कर परिस्थितियां सामान्य करने की कोशिश करते हैं.”
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सोशल मीडिया भी जवाबदेह
रांची के ही डॉक्टर अनुज कुमार कहते हैं, "न केवल एकल परिवारों का चलन बल्कि सोशल मीडिया पर सक्रियता और पति-पत्नी दोनों का नौकरी में होना भी बच्चे के जन्म के बाद उनके रिश्ते पर बुरा प्रभाव डालता है."
डॉक्टर अनुज कुमार कहते हैं कि पहले हम संयुक्त परिवारों में रहते थे. वहां बच्चे की देखरेख के लिए दादा-दादी, चाचा-चाची भी होते थे. अब ज़्यादातर लोग एकल परिवार का हिस्सा हैं. यहां सिर्फ़ पति-पत्नी और बच्चे हैं.
साथ ही वो बताते हैं, "ऐसे में बच्चों की सारी ज़रूरतें आपको ही पूरी करनी है. साथ ही आपको अपनी नौकरी भी करनी है. अगर मां-पिता दोनों नौकरी में हैं, तो दिक्कतें और बढ़ जाती हैं. इन परिस्थितियों में बच्चे के जन्म के बाद पति-पत्नी के रिश्ते बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं."
"पति चाहता है कि पत्नी बच्चे की देखभाल करे, पत्नियां अपने पतियों से यही उम्मीद करती हैं. फिर सारी समस्याएं एक-एक कर जमा होती हैं और अंततः यह लड़ाई-झगड़े और मनमुटाव में बदल जाता है. ऐसे में ज़रूरी है कि बच्चे को जन्म देने से पहले इसकी पूरी योजना बना लें.”
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क्या बच्चे का जन्म से हर दंपति प्रभावित होते हैं?
ऐसा भी नहीं कि बच्चों के जन्म से सभी युगल की ज़िंदगी पर बुरा प्रभाव ही पड़ता है. कुछ ऐसे भी दंपति हैं, जिनके आपसी रिश्तों की मजबूती की वजह भी उनके बच्चे ही हैं.
बॉलीवुड की मशहूर जोड़ी सैफ़ अली ख़ान और उनकी पत्नी करीना कपूर भी ऐसे ही दंपति में शामिल हैं. इनका मानना है कि बच्चे के जन्म के बाद उनकी बॉन्डिंग और मज़बूत हुई है.
करीना कपूर ने इसी विषय पर एक किताब लिखी है, जिसका नाम है ‘प्रेग्नेंसी बाइबल’.
इसमें सैफ़ अली ख़ान के हवाले से लिखा गया है कि 'तैमूर के जन्म के बाद उनके रिश्तों में और मज़बूती आई. उनके बीच का प्यार और बढ़ गया.'
हालांकि, इसी किताब में करीना कपूर ने प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाली तक़लीफों और तनाव का ज़िक्र भी किया है.
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