पाकिस्तान की शहलीन से शादी के लिए भारत के नमन ने किया सात साल इंतज़ार

    • Author, गुरप्रीत चावला
    • पदनाम, बीबीसी के लिए

यह भारतीय पंजाब और पाकिस्तानी पंजाब में परवान चढ़ी मोहब्बत की एक दिलचस्प दास्तान है, जो हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर काफ़ी चर्चित रही. यह आठ साल पहले शुरू हुए एक ख़ास रिश्ते की कहानी है.

इस रिश्ते को न तो सरहदें जुदा कर सकीं, न मज़हब और न ही भारत-पाकिस्तान के संबंधों की कड़वाहट.

इस प्रेम कहानी की शुरुआत अब से आठ साल पहले 2015 में हुई थी.

भारत के पंजाब के रहने वाले और पेशे से वकील नमन लूथरा और पाकिस्तान के लाहौर की शहलीन जावेद इस कहानी के दो मुख्य किरदार हैं. दोनों की पहली मुलाक़ात 2015 में हुई और उसके लगभग आठ साल बाद मई 2023 में इन दोनों की शादी हो पाई.

नमन हिंदू हैं जबकि शहलीन ईसाई. इसलिए दोनों की शादी हिंदू और ईसाई रीति रिवाज के अनुसार हुई.

शादी के बंधन में बंधने से पहले नमन और शहलीन को बहुत सी मुश्किलों का सामना करना पड़ा और फिर वो दिन आया जब शहलीन शादी के लिए भारत पहुंचीं और अब उन्होंने यहीं रहने का फ़ैसला किया है.

नमन और शहलीन की पहली मुलाक़ात

अपनी मां और दादी के साथ लाहौर गए नमन लूथरा की सन् 2015 में शहलीन से पहली मुलाक़ात हुई थी. पंजाब के शहर बटाला के रहने वाले नमन के दादा का संबंध पाकिस्तान के पंजाब के शहर लाहौर से था.

उनके दादा बंटवारे के बाद भारत चले आए थे. इसलिए नमन न तो पाकिस्तान को अपने लिए अजनबी समझते हैं और न ही वहां बसने वालों को.

शहलीन के साथ अपनी पहली मुलाक़ात के बारे में नमन ने बताया, "मेरे नाना-नानी का संबंध पाकिस्तान से है, मगर विभाजन के बाद उन्होंने भारत न जाने का फ़ैसला किया और वे वहीं पाकिस्तान में रह गए. मगर दादा-दादी जो विभाजन से पहले पंजाब में ही रहते थे, उन्होंने 1947 के बाद भारत आने का फ़ैसला किया और वे यहां आ गए."

नमन के अनुसार, 2015 में वो अपनी मां और दादी के साथ अपने रिश्तेदारों से मिलने लाहौर गए थे, जहां उनकी मुलाक़ात शहलीन से हुई थी.

शहलीन उनकी दूर की रिश्तेदार हैं. इस मुलाक़ात के बाद नमन भारत वापस आ गए, लेकिन वो शहलीन से ऑनलाइन संपर्क में रहे और जल्द ही यह संपर्क प्रेम में बदल गया. उसके बाद घरवालों की रज़ामंदी से दोनों की सगाई 2016 में हुई. वह समारोह पाकिस्तान में हुआ था.

शहलीन का कहना है कि सगाई के बाद वह 2018 में अपनी मां और मौसी के साथ भारत आई थीं, जहां उनकी मुलाक़ात नमन के घरवालों से हुई.

शादी की राह में अड़चनें

दोनों परिवार इस रिश्ते पर राज़ी थे लेकिन दोनों देशों के बीच कटु संबंधों के कारण सरहद पार करना और इकट्ठे रहना आसान नहीं था. 2018 में हुई मुलाक़ात में दोनों परिवारों ने फ़ैसला किया था कि कुछ समय बाद शादी कर दी जाएगी.

मगर 2020 की शुरुआत में कोरोना महामारी ने दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया. बहुत से देशों ने महामारी के फैलने की आशंका के कारण अपनी सीमाएं या तो पूरी तरह बंद कर दीं या अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर कड़ी पाबंदियां लगा दीं.

भारत और पाकिस्तान में भी ऐसा ही कुछ हुआ. भारत ने दूसरे देशों से आने वाली तमाम उड़ानों पर पाबंदी लगा दी. चूंकि पाकिस्तान और भारत के बीच के ख़राब संबंधों के कारण पहले ही उन देशों के बीच यात्रा करना मुश्किल था, लेकिन कोरोना के कारण हालात और बिगड़ गए.

कोरोना महामारी का असर कम होने के बाद दिसंबर 2021 में शहलीन के घरवालों ने शादी के मक़सद से भारत के वीज़ा के लिए आवेदन दिया लेकिन वीज़ा नहीं मिल सका. इसके लगभग छह महीने बाद यानी मई 2022 में एक बार फिर वीज़ा लेने की कोशिश की गई, मगर इस बार भी उनका आवेदन रद्द कर दिया गया.

तीसरी कोशिश में यानी मार्च 2023 में परिवार के केवल तीन सदस्यों ने वीज़ा हासिल करने की कोशिश की और यह कोशिश क़ामयाब हो गई. शहलीन और उनकी मां को वीज़ा मिल गया और वे अप्रैल 2023 में भारत पहुंच गईं.

शहलीन कहती हैं, "सच्चे दिल से जो चाहा जाए वह आख़िरकार मिल जाता है. जब से हमारी मंगनी हुई थी, तब से मैंने सोच रखा था कि मुझे वहां जाना है. मैंने किसी की बात नहीं सुनी. मैंने बस यही सोचा कि चाहे कितनी ही देर लग जाए मुझे बस इंतज़ार करना है."

करतारपुर साहिब: उम्मीद की एक किरण

जब शहलीन और नमन का रिश्ता तय हुआ और सगाई हुई, उसके बाद से शादी तक का फ़ासला काफ़ी लंबा था. इस दौरान टेलीफ़ोन और दूसरे सोशल मीडिया के ज़रिए उन दोनों के बीच संपर्क बना रहा.

शादी में देरी और वीज़ा मिलने में मुश्किलों के कारण उन दोनों के परिवार वाले दोबारा करतारपुर साहिब गए, जहां उनकी मुलाक़ात हो पाई.

उल्लेखनीय है कि नवंबर 2019 में सिखों के पहले गुरु श्री गुरु नानक देव जी के 550 वें जन्मदिन के अवसर पर पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारा दरबार साहिब को भारतीय नागरिकों के लिए खोल दिया गया था.

घर वालों ने कैसे क़बूला यह रिश्ता?

नमन लूथरा की मां योगिता लूथरा के लिए अपने बेटे की पाकिस्तान में शादी करने का फ़ैसला आसान नहीं था.

योगिता कहती हैं कि जब वो छोटी थीं तो अपनी मां के साथ अपने रिश्तेदारों से मिलने वो पाकिस्तान जाती थीं, लेकिन जब उनके बेटे ने पाकिस्तानी लड़की से शादी करने की बात कही, तो उन्हें एक झटका सा लगा.

वो बताती हैं कि नमन के पिता भी शुरू में इस शादी के लिए तैयार नहीं थे. उनके मुताबिक़, "बड़ा सवाल यह था कि बारात कैसे जाएगी, बहुत दूरियां हैं और रुकावटें हैं. लेकिन नमन ने अपना मन बना लिया था, इसलिए हम भी इस रिश्ते पर तैयार हो गए."

योगिता के अनुसार, नमन के पिता मान तो गए मगर उन्होंने यह शर्त रखी कि शादी बटाला में ही होगी.

उनका कहना था कि रज़ामंदी के बाद औपचारिक ढंग से शहलीन के घर रिश्ता भेज दिया गया. नमन की दादी ने, जिन्होंने पाकिस्तान छोड़ भारत में रहने का फ़ैसला किया था, यह सब काम बहुत शौक़ से किया.

नमन की दादी कहती हैं, "नमन मेरा पोता है और शहलीन मेरी पोती. जब मैंने यह रिश्ता मांगा तो मैंने नहीं सोचा था कि दोनों बच्चों को शादी के लिए बहुत देर इंतज़ार करना पड़ेगा."

उन्होंने बताया कि कभी-कभी रिश्तेदार कहते थे कि ऐसा होना मुश्किल है, कहीं और रिश्ता कर लेते हैं. लेकिन दोनों बच्चे अपने फ़ैसले पर अड़े रहे और आज ईश्वर ने दोनों परिवारों के घर ख़ुशियों से भर दिए हैं.

अपनी बेटी की शादी के लिए पाकिस्तान से भारत आईं शहलीन की मां का कहना है कि जब नमन का रिश्ता आया तो यह परिवार के लिए बड़ी समस्या थी. और सबने मिलकर इस पर काफ़ी सोच-विचार किया था.

"बहुत से लोगों ने हमें यह राय दी कि बेटियों की शादी घर के पास ही करनी चाहिए यानी उनकी ससुराल नज़दीक ही होनी चाहिए."

शहलीन की मां कहती हैं, "हमने वीज़ा लेने के लिए तीन बार कोशिश की लेकिन तीसरी बार भी केवल शहलीन और मुझे वीज़ा मिल पाया."

वो ख़ुशी से बताती हैं, "यहां (भारत में) भी शादी की रस्में लगातार 15 दिन जारी रहीं और हमने सभी इच्छाएं पूरी कीं."

सरकारी नौकरी करने वाले नमन के पिता गुरविंदर पाल भी इस शादी से ख़ुश हैं.

नमन के घरवालों का कहना है कि गुरदासपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद सनी देओल और बटाला के विधायक अमान शेर सिंह शेरी कालसी की कोशिशों से शहलीन और उनकी मां को वीज़ा मिलने में कुछ आसानी हुई.

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