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तुर्की में क्या होने वाला है, क्या अर्दोआन डर के कारण ऐसा कर रहे हैं?
- Author, रजनीश कुमार
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
रेचेप तैय्यप अर्दोआन पिछले 22 सालों से तुर्की की सत्ता में हैं. अर्दोआन 1994 में इस्तांबुल के पहले इस्लामिक रूढ़िवादी मेयर बने, फिर 2003 में प्रधानमंत्री और 2014 में संसदीय व्यवस्था के तहत राष्ट्रपति चुने गए थे.
इसके बाद अर्दोआन 2018 और फिर 2023 में राष्ट्रपति चुने गए. अर्दोआन जब-जब तुर्की में सियासी संकट में घिरे है, तब-तब नई ताक़त के साथ उभरकर सामने आए हैं.
लेकिन अब अर्दोआन के सामने नया संकट है. तुर्की के संविधान के मुताबिक़ कोई भी राष्ट्रपति दो कार्यकाल तक ही पद पर रह सकता है. यानी तुर्की के 2028 के राष्ट्रपति चुनाव में अर्दोआन हिस्सा नहीं ले सकते हैं. लेकिन अर्दोआन फिर से राष्ट्रपति की रेस में शामिल होना चाहते हैं. अर्दोआन की जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी (एकेपी) के नेता कई बार ऐसी मंशा ज़ाहिर कर चुके हैं.
अर्दोआन अगर 2028 के राष्ट्रपति चुनाव में फिर से शामिल होना चाहते हैं तो उनके पास दो विकल्प हैं. पहला यह कि समय से पहले चुनाव करा लेंगे तो एक और कार्यकाल मिल सकता है. दूसरा यह कि संविधान में संशोधन कराएं, लेकिन ये दोनों विकल्प बहुत आसान नहीं हैं.
संविधान में बदलाव के लिए जनमत संग्रह कराना होगा और इसके लिए 600 सदस्यों वाली तुर्की की संसद में 360 सांसदों का समर्थन चाहिए. इसके अलावा समय से पहले चुनाव के लिए भी 360 सांसदों का समर्थन चाहिए.
एकेपी और सहयोगी नेशनलिस्ट मूवमेंट पार्टी (एमएचपी) के पास कुल 321 सांसद ही हैं. ऐसे में दोनों विकल्पों के लिए अर्दोआन के पास सांसदों की कमी है.
अर्दोआन ने हाल ही में कुर्द विद्रोहियों के साथ समझौता किया था और इसे भी 2028 में राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए समर्थन जुटाने की तैयारी के रूप में ही देखा गया.
क्या डरे हुए हैं अर्दोआन?
लेकिन बुधवार को इस्तांबुल के मेयर और रिपब्लिकन पीपल्स पार्टी (सीएचपी) के नेता इकरम इमामोअलू की गिरफ़्तारी को भी अर्दोआन के डर से जोड़ा जा रहा है. इकरम इमामोअलु के डिप्लोमा को भी रद्द कर दिया गया है. इकरम तुर्की में अर्दोआन के मुख्य प्रतिद्वंद्वी हैं और राष्ट्रपति का उम्मीदवार बनने के लिए यूनिवर्सिटी का डिप्लोमा या डिग्री अनिवार्य होती है.
इकरम तुर्की के लोकप्रिय नेता हैं और इन्हें अर्दोआन के लिए बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है. पिछले साल इकरम ने इस्तांबुल मेयर चुनाव में अर्दोआन के उम्मीदवार को मात दी थी.
इस्तांबुल तुर्की का सबसे बड़ा शहर है. यहां तुर्की की क़रीब 20 फ़ीसदी आबादी रहती है. तुर्की की अर्थव्यवस्था में क़रीब एक तिहाई योगदान इस्तांबुल का है और आधे से ज़्यादा टैक्स रेवेन्यू भी यहीं से आता है. ऐसे में इस्तांबुल का मेयर होना मायने रखता है.
इकरम की गिरफ़्तारी के बाद लोग सड़कों पर उतर गए. सरकार ने विरोध-प्रदर्शन रोकने के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगा दिया है. मेट्रो स्टेशन बंद कर दिया गया है. क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर इस्तांबुल के गवर्नर ने चार दिनों के लिए सामाजिक समारोहों पर भी पाबंदी लगा दी है.
इकरम इमामोअलू की गिरफ़्तारी की टाइमिंग पर भी सवाल उठाया जा रहा है. 23 मार्च को सीएचपी की कांग्रेस होने वाली थी और इसी में इकरम को आधिकारिक रूप से राष्ट्रपति का उम्मीदवार घोषित किया जाना था. अर्दोआन की कोशिश है कि विपक्ष के पाले में कोई भी मौक़ा नहीं छोड़ना है.
अमेरिकी थिंक टैंक मिडल ईस्ट इंस्टिट्यूट में टर्किश प्रोग्राम की निदेशक गोनुल तोल ने द इकनॉमिस्ट से कहा, ''अर्दोआन की जो पहचान है, उसके हिसाब से भी इकरम की गिरफ़्तारी बड़ा क़दम है. अर्दोआन को लगता है कि अमेरिका में ट्रंप के आने से ये सब करने की आज़ादी मिल गई है. ट्रंप ने ऐसा माहौल बनाया है, जिसमें निरंकुश शासक सोच रहे हैं कि वो कुछ भी कर सकते हैं.''
फिर से राष्ट्रपति बनने की कोशिश
अपनी गिरफ़्तारी के बाद इकरम इमामोअलू ने कहा, ''डराकर और ग़ैर-क़ानूनी गतिविधियों से जनता के इरादे को दबाया नहीं जा सकता है. मैं इस्तांबुल की एक करोड़ 60 लाख और तुर्की के आठ करोड़ 60 लाख आबादी की तरफ़ से न्याय और लोकतंत्र के पक्ष में अडिग रहूंगा. मैं मौलिक अधिकारों और स्वतंत्रता के लिए हमेशा लड़ता रहूंगा.''
इकरम ने पार्टी की प्राइमरी से अपना नाम वापस नहीं लिया और इस्तांबुल में शनिवार को रैली भी प्रस्तावित है. इकरम ने कहा कि जब से उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार बनने की घोषणा की है, तब से उन्हें टारगेट किया जा रहा है. लेकिन जिस तरह से इकरम के यूनिवर्सिटी डिप्लोमा को रद्द किया गया, उससे राष्ट्रपति चुनाव में अयोग्य ठहराए जाने का ख़तरा बढ़ गया है.
इकरम की गिरफ़्तारी के बाद से अटकलें तेज़ हो गई हैं कि अर्दोआन समय से पहले चुनाव की तैयारी कर रहे हैं. तुर्की में कई लोग कह रहे हैं कि इकरम की डिग्री को रद्द किया जाना निष्पक्ष चुनाव पर सवालिया निशाना लगाता है.
इकरम ने कहा है कि वह सरकार के फ़ैसले को क़ानूनी रूप से चुनौती देंगे, लेकिन वह इस बात की उम्मीद नहीं करते हैं कि इंसाफ़ मिलेगा. इस्तांबुल यूनिवर्सिटी ने मंगलवार शाम डिप्लोमा रद्द करने का फ़ैसला किया था. यूनिवर्सिटी का कहना है कि 27 अन्य व्यक्तियों की डिग्रियां भी रद्द की गई हैं.
सोनेर कागोप्तेय थिंक टैंक वॉशिंगटन इंस्टिट्यूट में सीनियर फेलो हैं और अर्दोआन पर एक किताब भी लिख चुके हैं.
उन्होंने इमामोअलु की गिरफ़्तारी पर लिखा है, ''इकरम विपक्ष के लोकप्रिय नेता और मेयर हैं. इसके साथ ही अर्दोआन के मुख्य प्रतिद्वंद्वी भी हैं और उन्हें भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ़्तार किया गया है. तुर्की की राजनीति अब इसके साथ ही नई दिशा में बढ़ गई है. 1999 में अर्दोआन इस्तांबुल के मेयर थे और उन्हें भी ऐसे ही मामले में जेल में डाला गया था. अर्दोआन तब मेयर के रूप में जेल गए थे और सियासी स्टार के रूप में जेल से बाहर आए थे. इमामोअलु की गिरफ़्तारी का असर भी ऐसा ही होगा.''
अर्दोआन की रणनीति क्या है?
सोनेर कागोप्तेय ने एक्स पर लिखा है, ''संस्थानों और मीडिया पर कंट्रोल के बावजूद इमामोअलु ने पिछले साल मेयर के चुनाव में अर्दोआन के उम्मीदवार को बड़े अंतर से हरा दिया था. अर्दोआन का लक्ष्य इकरम इमामोअलू की राजनीति को ख़त्म करना है लेकिन क्या उन्हें अंतरराष्ट्रीय दबाव से नहीं डरना चाहिए? मुझे नहीं लगता है कि अर्दोआन वैश्विक स्तर पर किसी दबाव को सुनेंगे. तुर्की 1999 की तुलना में बहुत अलग देश बन गया है. अर्दोआन का कंट्रोल तुर्की में हर स्पेस पर है.''
अर्दोआन 2017 में संविधान बदल चुके हैं, तब उन्होंने जनमत संग्रह के ज़रिए तुर्की को संसदीय व्यवस्था से प्रेजिडेंशियल गणतंत्र में बदल दिया था. कहा जा रहा है कि इस बार अर्दोआन न केवल कार्यकाल की सीमा को ख़त्म करेंगे बल्कि तीसरे टर्म में जीत को आसान बनाने के लिए और भी कई चीज़ें कर सकते हैं.
सोनेर कागोप्तेय ने लिखा है, ''अर्दोआन का लक्ष्य है कि कुर्द समर्थक डीईएम पार्टी और रिपब्लिकन पीपल्स पार्टी जो कि दशकों पुराना विपक्षी खेमा है, उन्हें ख़त्म कर दिया जाए. इनके रहते अर्दोआन को और लंबे समय तक राष्ट्रपति बने रहने में मुश्किल होगी.''
''इसीलिए अर्दोआन कुर्द समर्थक पार्टियों के साथ समझौते कर रहे हैं ताकि फिर से संविधान संशोधन में उनका समर्थन हासिल कर सकें. लेकिन कुर्दों के अधिकारों का तुर्की का राष्ट्रवादी विपक्षी खेमा विरोध करता है और इनमें अर्दोआन के भी समर्थक हैं. दूसरी तरफ़ डीईएम पार्टी के वोटर्स भी नहीं चाहेंगे कि अर्दोआन पूरी ज़िंदगी राष्ट्रपति बने रहें.'
अमेरिकी थिंक टैंक मिडल ईस्ट इंस्टिट्यूट में टर्किश प्रोग्राम की निदेशक गोनुल तोल ने एक्स पर लिखा है, ''2016 में 15 जुलाई को तुर्की की आर्मी के एक गुट ने अर्दोआन को सत्ता से बेदख़ल करने की कोशिश की थी. वह रात तुर्की के लोकतंत्र के लिए काला अध्याय था. तुर्की में एक बार फिर से तख़्तापलट की कोशिश हुई है और इस बार सिविलयन कोर्ट ने यह कोशिश की है.''
''इसके लिए एक चुने हुए प्रतिनिधि को हटाने के लिए कोई बंदूक का इस्तेमाल नहीं किया गया. अर्दोआन न केवल इकरम को राष्ट्रपति चुनाव से बाहर करना चाहते हैं बल्कि इस्तांबुल के मेयर से भी हटाना चाहते हैं. डिप्लोमा रद्द करने के बाद उन्होंने अपना पहला लक्ष्य हासिल कर लिया है. दूसरा लक्ष्य हासिल करने के लिए इकरम इमामोअलू को आतंकवाद के मामले में फँसाया जा सकता है और इसके बाद उन्हें इस्तांबुल के मेयर से हटा दिया जाएगा.''
दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में पश्चिम एशिया अध्ययन केंद्र में प्रोफ़ेसर रहे आफ़ताब कमाल पाशा कहते हैं कि अर्दोआन अपने विरोधियों को बर्दाश्त नहीं करते हैं. प्रोफ़ेसर पाशा कहते हैं, ''सीरिया में बशर अल-असद को हटाने के बाद तुर्की में अर्दोआन की लोकप्रियता बढ़ी थी लेकिन इतनी भी नहीं बढ़ी थी कि चुनाव जीत जाते.''
''दूसरी तरफ़ इकरम इमामोअलू तुर्की में लगातार लोकप्रिय हो रहे थे. ऐसे में अर्दोआन को लगा कि फिर से राष्ट्रपति बनना है तो विपक्ष को ख़त्म किए बिना संभव नहीं है. अर्दोआन की मनमानी अभी और बढ़ेगी क्योंकि अमेरिका की कमान ट्रंप के पास है और उन्हें लोकतंत्र और मानवाधिकार से बहुत मतलब नहीं है.''
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित