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'मैं अब भी गहरी तकलीफ़ में हूं', एयर इंडिया विमान हादसे में अकेले ज़िंदा बचे शख़्स की आपबीती
- Author, नवतेज जोहल, कैटी थॉम्पसन और सोफ़ी वुडकॉक
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
एयर इंडिया के उस विमान हादसे में, जिसमें 241 लोगों की मौत हुई थी, एक ही व्यक्ति ज़िंदा बचा. उनका नाम है विश्वासकुमार रमेश.
वह ख़ुद को "दुनिया का सबसे भाग्यशाली इंसान" मानते हैं, लेकिन शारीरिक और मानसिक रूप से अब भी गहरी तकलीफ़ में हैं.
लंदन जा रहा ये विमान अहमदाबाद में हादसे का शिकार हुआ था. मलबे से ज़िंदा बाहर निकलते हुए विश्वासकुमार की तस्वीरें और वीडियो पूरी दुनिया में चर्चा में आ गए थे.
उन्होंने बीबीसी न्यूज़ से कहा कि यह एक "चमत्कार" था कि वो बच गए, लेकिन साथ ही सब कुछ खो दिया. उसी विमान में उनके छोटे भाई अजय भी कुछ सीटों की दूरी पर बैठे थे, जिनकी मौत हो गई.
उनके सलाहकारों के मुताबिक़, इंग्लैंड के लेस्टर लौटने के बाद से विश्वासकुमार पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीएसडी) से जूझ रहे हैं.
वो अपनी पत्नी और चार साल के बेटे से बात तक नहीं कर पा रहे हैं.
गुजरात के अहमदाबाद में उड़ान भरने के कुछ मिनटों बाद ही बोइंग 787 विमान आग की लपटों में घिर गया था.
हादसे के तुरंत बाद सामने आए एक वीडियो में विश्वासकुमार को मलबे से बाहर निकलते हुए देखा गया था, जबकि उनके पीछे धुआं उठ रहा था.
'किसी चमत्कार से कम नहीं'
बीबीसी न्यूज़ से बात करते हुए विश्वासकुमार रमेश भावुक दिखे.
उनका कहना है, "मैं अकेला ज़िंदा बचा हूं. अब तक यक़ीन नहीं होता. यह किसी चमत्कार से कम नहीं."
वह कहते हैं, "मेरा भाई भी चला गया. मेरा भाई ही मेरी ताक़त था. पिछले कुछ सालों से वही मेरा सबसे बड़ा सहारा था."
विश्वासकुमार ने बताया कि इस हादसे ने उनके परिवार की ज़िंदगी पूरी तरह बदल दी है.
वह बोले, "अब मैं अकेला हूं. कमरे में चुपचाप बैठा रहता हूं. पत्नी या बेटे से बात नहीं करता. मुझे बस अकेले रहना अच्छा लगता है."
भारत में इलाज के दौरान अस्पताल के बिस्तर से उन्होंने बताया था कि कैसे उन्होंने ख़ुद सीट बेल्ट खोली, मलबे से रेंगते हुए बाहर निकले और बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाक़ात की, जब वह अपने ज़ख्मों का इलाज करवा रहे थे.
इस हादसे में 169 भारतीय नागरिकों और 52 ब्रिटिश नागरिकों की मौत हुई थी, जबकि ज़मीन पर मौजूद 19 लोगों की भी जान गई.
जुलाई में भारत के एयरक्राफ़्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टीगेशन ब्यूरो ने प्रारंभिक रिपोर्ट में बताया गया कि उड़ान भरने के कुछ सेकंड बाद ही विमान के इंजनों तक ईंधन की आपूर्ति बंद हो गई थी. जांच अब भी जारी है.
एयर इंडिया की ओर से कहा गया कि विश्वासकुमार रमेश और इस हादसे से प्रभावित सभी परिवारों की देखभाल "हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है."
39 साल के विश्वासकुमार रमेश ने ब्रिटेन लौटने के बाद पहली बार मीडिया से बात की.
इस बातचीत के लिए कई न्यूज़ संस्थानों को आमंत्रित किया गया था और कमरे में एक डॉक्यूमेंट्री टीम भी शूट कर रही थी.
बीबीसी न्यूज़ ने इंटरव्यू से पहले उनके सलाहकारों से उनके स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति को लेकर विस्तार से चर्चा की.
जब विश्वासकुमार से हादसे वाले दिन की यादों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने सिर्फ़ इतना कहा, "मैं अभी उस बारे में कुछ नहीं कह सकता."
'मैं तकलीफ़ में हूं'
लेस्टर में स्थानीय समुदाय नेता संजीव पटेल और अपने परिवार के प्रवक्ता रैड सीगर के साथ बैठे विश्वासकुमार रमेश ने कहा कि हादसे की यादें दोबारा ताज़ा करना उनके लिए बेहद मुश्किल है.
इंटरव्यू के दौरान कई बार उनकी आवाज़ भर्रा आई और वह ख़ुद को संभाल नहीं पाए.
विश्वासकुमार ने बताया कि इस हादसे के बाद उनका परिवार किस गहरे दुख से गुज़र रहा है.
वह बोले, "इस हादसे के बाद शारीरिक और मानसिक तौर पर ज़िंदगी बहुत कठिन हो गई है. मेरा परिवार भी मानसिक रूप से बहुत परेशान है. मेरी मां पिछले चार महीने से हर दिन दरवाज़े के बाहर बैठी रहती हैं, किसी से बात नहीं करतीं."
वह कहते हैं, "मैं भी किसी से बात नहीं करता. किसी से बात करने का मन नहीं करता. मैं ज़्यादा कुछ बोल भी नहीं पाता. पूरी रात सोचता रहता हूं. दिमाग़ पर बहुत बोझ है."
विश्वासकुमार बोले, "हर दिन पूरे परिवार के लिए दर्दभरा होता है."
'मैं ठीक से चल भी नहीं पाता'
विश्वासकुमार रमेश ने उस हादसे में लगी चोटों के बारे में भी बताया. उन्होंने कहा कि वो अपनी सीट 11A से विमान के टूटे हिस्से से निकलकर बाहर आए थे.
वह बोले, "मेरे पैर, कंधे, घुटने और पीठ में दर्द रहता है. हादसे के बाद से मैं काम नहीं कर पाया हूं, न गाड़ी चला पा रहा हूं. जब चलता हूं तो ठीक से नहीं चल पाता. धीरे-धीरे चलता हूं, मेरी पत्नी सहारा देती है."
उनके सलाहकारों ने बताया कि भारत में इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उन्हें पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीएसडी) होने की पुष्टि की थी, लेकिन इंग्लैंड लौटने के बाद से उन्हें कोई मेडिकल ट्रीटमेंट नहीं मिला.
सलाहकारों ने कहा कि विश्वासकुमार टूट चुके हैं और उनके ठीक होने का रास्ता लंबा है. उनका कहना है कि एयर इंडिया ने हादसे के बाद उनके साथ सही व्यवहार नहीं किया, इसलिए अब वे एयरलाइन के शीर्ष अधिकारियों से सीधी मुलाक़ात की मांग कर रहे हैं.
समुदाय के नेता संजीव पटेल ने कहा, "वो मानसिक, शारीरिक और आर्थिक संकट में हैं. इस हादसे ने उनके पूरे परिवार को तबाह कर दिया है."
उन्होंने आगे कहा, "जो भी इस हादसे के लिए ज़िम्मेदार हैं, उन्हें ख़ुद आगे आकर पीड़ित परिवारों से मिलना चाहिए, उनकी ज़रूरतें समझनी चाहिए और उनकी बात सुननी चाहिए."
'ताकि मिलकर ये दर्द कम किया जा सके'
एयर इंडिया ने विश्वासकुमार रमेश को अंतरिम मुआवज़े के तौर पर 21,500 पाउंड (करीब पच्चीस लाख रुपये) देने की पेशकश की थी, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया है. लेकिन उनके सलाहकारों का कहना है कि यह रकम उनकी ज़रूरतों के लिए बहुत कम है.
सलाहकारों ने बताया कि हादसे से पहले विश्वासकुमार और उनके भाई अजय भारत के दीव में मछली कारोबार चलाते थे, जो अब पूरी तरह बंद हो गया है.
परिवार के प्रवक्ता रैड सीगर ने कहा कि उन्होंने एयर इंडिया से तीन बार मुलाक़ात का अनुरोध किया, लेकिन हर बार या तो उन्हें नज़रअंदाज़ कर दिया गया या साफ़ इनकार कर दिया गया.
उन्होंने बताया कि मीडिया इंटरव्यू दरअसल एयरलाइन से चौथी बार अपील करने का तरीका है.
सीगर ने कहा, "यह बहुत अफ़सोसजनक है कि हमें आज यहां बैठकर विश्वासकुमार को फिर से यह सब याद दिलाना पड़ रहा है. आज यहां एयर इंडिया के शीर्ष अधिकारी होने चाहिए थे, ताकि वो इस त्रासदी से प्रभावित लोगों की तकलीफ़ समझ सकें और हालात सुधारने की कोशिश करें."
उन्होंने कहा, "हम सिर्फ़ यह चाहते हैं कि वो हमारे साथ बैठें, बात करें, ताकि मिलकर इस दर्द को थोड़ा कम किया जा सके."
टाटा ग्रुप के स्वामित्व वाली एयर इंडिया ने एक बयान में कहा, "हमारे शीर्ष अधिकारी लगातार पीड़ित परिवारों से मिल रहे हैं और अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कर रहे हैं. विश्वासकुमार रमेश के प्रतिनिधियों को भी ऐसी बैठक के लिए प्रस्ताव भेजा गया है. हम संपर्क बनाए रखेंगे और सकारात्मक जवाब की उम्मीद करते हैं."
एयर इंडिया ने बीबीसी को बताया कि यह प्रस्ताव विश्वासकुमार के मीडिया इंटरव्यू से पहले ही दिया गया था.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित