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एयर इंडिया और बोइंग के विमान कितनी बार जानलेवा हादसों के शिकार हुए हैं?
- Author, जैस्मिन निहलानी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
इस महीने 12 और 17 जून के बीच एयर इंडिया की 83 उड़ानें रद्द हुईं.
भारत के विमान नियामक डीजीसीए के एक बयान के मुताबिक़, इन रद्द हुई 83 उड़ानों में 66 बोइंग 787 मॉडल के विमान थे. इसी मॉडल का विमान 12 जून को गुजरात के अहमदाबाद में क्रैश हो गया था.
इस हादसे में 270 लोगों की मौत हो गई. यह दुनिया भर में पिछले दशक का सबसे बड़ा विमान हादसा है.
12 जून को 242 लोगों के साथ एयर इंडिया की फ़्लाइट एआई-171 अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट से लंदन के लिए उड़ान भरी.
लेकिन टेक-ऑफ़ करने के कुछ ही सेकंड के भीतर यह विमान क्रैश हो गया. इस हादसे में विमान में सवार केवल एक ही व्यक्ति की जान बची.
यह विमान एक मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल से टकरा गया, जिससे अन्य लोग भी इसकी चपेट में आ गए. इस हादसे के कारणों की जांच अभी जारी है.
आंकड़े क्या कहते हैं?
आंकड़ों के अध्ययन से पता चलता है कि पिछले 78 साल में एयर इंडिया को 30 से ज़्यादा हादसों का सामना करना पड़ा है. जिनमें से क़रीब 14 हादसों में लोगों की मौत भी हुई है.
साल 1985 में फ़्लाइट संख्या एआई-182 में हुए बम धमाके में विमान में सवार सभी 329 यात्रियों की मौत हो गई थी.
अहमदाबाद में हुआ विमान हादसा इसी के बाद, एयर इंडिया के लिए दूसरा सबसे दर्दनाक हादसा बन गया है.
डीजीसीए के सबसे नए आंकड़ों के मुताबिक़ भारत में बोइंग का सबसे बड़ा ग्राहक एयर इंडिया है.
इसके बेड़े में बोइंग के 54 विमान हैं, जिनमें से 28 बोइंग-787 सिरीज़ के हैं.
इसकी कम लागत वाली कंपनी एयर इंडिया एक्सप्रेस के पास भी 48 विमान हैं, जिनमें 43 विमान बोइंग के हैं. पिछले ही साल, इस एयरलाइन ने बोइंग के 220 विमान ख़रीदने के आदेश दिए हैं, जिनमें 20 विमान 787 सिरीज़ के हैं.
अहमदाबाद विमान हादसे के बाद एयर इंडिया के कई अन्य विमानों की उड़ानों को तकनीकी वजहों से रद्द करना पड़ा है या उनकी लैंडिंग करानी पड़ी है.
सैन फ़्रांसिस्को से मुंबई जाने वाली एयर इंडिया की एक फ़्लाइट को कोलकाता में ही लैंड करना पड़ा.
एयर इंडिया की एक बोइंग 787-8 फ़्लाइट जो हांग कांग से दिल्ली जा रही थी, उसे आधे रास्ते से ही वापस लौटना पड़ा क्योंकि पायलट को विमान में एक तकनीकी ख़राबी की आशंका हुई.
एक अन्य फ़्लाइट जो दिल्ली से वडोदरा जा रही थी, उसे वापस दिल्ली लौटना पड़ा. कथित तौर पर इस फ़्लाइट के लैंडिंग गियर में कुछ ख़राबी पाई गई.
बोइंग के साथ 2500 से ज़्यादा हादसे
बोइंग कंपनी मौजूदा समय में वित्तीय और सुरक्षा से जुड़े संकटों से जूझ रही है. इस विमान निर्माता कंपनी ने पिछले साल हर महीने एक अरब डॉलर का नुक़सान झेला है.
साल 2018 और 2019 में इसके दो 737 मैक्स विमान टेक-ऑफ़ करने के कुछ ही मिनटों बाद क्रैश हो गए थे.
इनमें से एक हादसा इंडोनेशिया में हुआ, जिसमें 189 लोगों की मौत हो गई और दूसरा इथियोपिया में हुआ, जिसमें 157 लोगों को जान गंवानी पड़ी.
इन हादसों के पीछे एक सॉफ़्टवेयर में एक गड़बड़ी को वजह बताया गया. इसका नतीजा यह हुआ कि इस मॉडल के विमानों को 18 महीनों तक उड़ने का मौक़ा नहीं मिला.
एविएशन सेफ़्टी नेटवर्क के आंकड़ों पर आधारित हमारे विश्लेषण के मुताबिक़, साल 2014 से 2025 के बीच दुनियाभर में कम से कम 40 घातक विमान हादसे हुए हैं. इनमें से 12 हादसों में बोइंग की फ़्लाइट थी.
हालांकि अहमदाबाद में क्रैश हुआ बोइंग का 787-8 ड्रीमलाइनर पहली बार किसी जानलेवा हादसे का शिकार हुआ है.
जबकि यह पहले भी दुर्घटनाओं का शिकार हुआ है, लेकिन उनमें किसी की भी जान नहीं गई थी.
इसके सभी मॉडल्स को मिला कर बात करें तो बोइंग को आज तक ढाई हज़ार से ज़्यादा विमान हादसों का सामना करना पड़ा है.
जिनमें कम से कम 500 हादसों में लोगों की मौत भी हुई है.
विमान हादसे से हवाई यात्रा की सुरक्षा पर सवाल
नागरिक उड़ानों में जानलेवा हादसों के पुराने आंकड़ों पर नज़र डालें तो पता चलता है कि ऐसे हादसे 1970 और 1980 के दशक के दौरान बहुत आम थे.
हालांकि समय के साथ जानलेवा हादसों के सालाना आंकड़ों में कमी देखी गई. जबकि फ़्लाइट्स की संख़्या में काफ़ी ज़्यादा बढ़ोतरी हुई है.
साल 1970 में, 68 लाख़ विमान उड़ा करते थे, जो साल 2024 तक बढ़कर 3 करोड़ 38 लाख़ तक पहुंच गए हैं.
इस उछाल के बावजूद विमानों के जानलेवा हादसों की संख्या काफ़ी कम रही है. साल 2024 में विमानों के जानलेवा हादसों की दर दस लाख फ़्लाइट्स में 0.12 रही है.
आंकड़े यह भी बताते हैं कि जब यात्रा समाप्ति की तरफ होती है, उसी दौरान सबसे घातक विमान हादसे होते हैं.
साल 2015 से 2024 के बीच व्यावसायिक विमानों के कुल हादसों में 37 फ़ीसदी जानलेवा हादसे लैंडिंग के दौरान हुए.
जबकि लैंडिंग में पूरी यात्रा का महज़ 1 फ़ीसदी समय लगता है. दूसरी ओर जब विमान हवा में होता है, जो पूरी यात्रा का 57 फ़ीसदी समय है, उसमें सिर्फ़ 10 फ़ीसदी ही जानलेवा हादसे देखे गए हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित