आरपीएफ़ जवान ने बुर्क़ा पहनी महिला से बंदूक़ की नोक पर बुलवाया था ‘जय माता दी’- प्रेस रिव्यू

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अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस में छपी ख़बर के मुताबिक़, 31 जुलाई को जयपुर-मुंबई सेंट्रल सुपरफास्ट एक्सप्रेस ट्रेन में चार लोगों को गोली मारने वाले रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ़) के कॉन्स्टेबल चेतन सिंह चौधरी ने कथित रूप से बुर्क़ा पहने एक महिला यात्री को बंदूक़ की नोक पर ‘जय माता दी' कहने के लिए मजबूर किया था.
जांच में ये बात निकल कर सामने आयी है.
अख़बार पुलिस के सूत्रों के हवाले से लिखता है कि मामले की जांच कर रही गवर्नमेंट रेलवे पुलिस (जीआरपी) बोरीवली ने महिला की पहचान की और उसका बयान दर्ज किया है. महिला को मामले का मुख्य चश्मदीद बनाया गया है.
सूत्रों ने ये भी बताया कि पूरा घटनाक्रम ट्रेन में लगे सीसीटीवी कैमरे में भी क़ैद हो गया.
चेतन सिंह ने 31 जुलाई को ट्रेन में अपने वरिष्ठ सहयोगी सहायक उप-निरीक्षक टीकाराम मीणा और तीन मुस्लिम यात्रियों - अब्दुल क़ादर मोहम्मद हुसैन भानपुरावाला, सैयद सैफ़ुद्दीन और असगर अब्बास शेख़ को गोली मारी थी.

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यात्रियों को मारने के बाद महिला पर तानी बंदूक़
चेतन सिंह ने सबसे पहले बी 5 कोच में टीकाराम मीणा को गोली मारी और फिर उनके बगल में बैठे भानपुरावाला को गोली मार दी.
इसके बाद उसने बी2 में बैठे सैफ़ुद्दीन को गोली मारी और सबसे आखिर में एस6 कोच में शेख़ को गोली मारी.
जब चेतन सिंह चौधरी डिब्बों से गुज़र रहे थे इसी दौरान उन्होंने कथित तौर पर बी-3 कोच में बुर्क़ा पहने महिला यात्री को निशाना बनाया. महिला ने अपने बयान में जांचकर्ताओं को बताया कि चेतन सिंह ने उन पर बंदूक़ तान दी और उन्हें "जय माता दी" कहने को कहा.
जब महिला ने ऐसा किया, तो उसने कहा-“ ज़ोर से ‘जय माता दी’ बोलो.”
पुलिस सूत्रों ने बताया कि महिला ने कथित तौर पर उसकी बंदूक़ दूर करते हुए उससे पूछा, "तुम कौन हो". जवाब में चौधरी ने महिला को धमकी दी कि अगर उसने उसके हथियार को छुआ तो वह उसे मार देगा.
इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था जिसमें चेतन सिंह चौधरी कहते दिख रहे थे- “पाकिस्तान से ऑपरेट हुएं ये, और मीडिया यही कवरेज दिखा रही है, उनको सब पता चल रहा है कि ये क्या कर रहे हैं... अगर वोट देना है, हिंदुस्तान में रहना है तो मैं कहता हूं मोदी-योगी ये दो हैं.”
चौधरी की आवाज़ का नमूना वीडियो क्लिप में आवाज़ से मेल खाता पाया गया है.
इन क्लिपों और ट्रेन में यात्रियों के विवरण के आधार पर चौधरी पर आईपीसी की धारा 153ए (धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), इसके अलावा 302 (हत्या), 363 (अपहरण), 341, 342 (ग़लत तरीके से बंदी बनाना), और आर्म्स एक्ट और रेलवे एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है.

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'म्यांमार से आने वाले कुकियों ने कभी परेशान नहीं किया'
अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू में छपी रिपोर्ट के मुताबिक़, पिछले हफ्ते संसद में गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर पलटवार करते हुए मिज़ोरम से राज्यसभा सदस्य के. वनलालवेना ने कहा कि मणिपुर के पड़ोसी राज्य मिज़ोरम ने म्यांमार से आए 40,000 से अधिक "कुकी शरणार्थियों" को शरण दी, लेकिन उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया जिससे कोई दिक़्क़त है.
गृह मंत्री अमित शाह ने मॉनसून सत्र में मणिपुर पर बयान देते हुए कहा था कि “साल 2021 में म्यांमार में जब सैन्य तख्लापलट हुआ तो बड़ी तादाद में कुकी लोग भारत के पूर्वोत्तर राज्य में आए और जंगलों में बस गए.”
वनलालवेना की पार्टी मिज़ो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) एनडीए में शामिल है.
वनलालवेना ने कहा कि उन्हें मणिपुर मुद्दे पर बोलने की अनुमति नहीं दी गई, जबकि वह राज्य सभा में मिज़ो समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले एकमात्र सदस्य हैं.
अख़बार से बात करते हुए उन्होंने कहा, “मानसून सत्र की शुरुआत के बाद से हर दिन मैंने मणिपुर पर चर्चा के लिए नोटिस दिया, लेकिन सभापति ने इसे कभी स्वीकार नहीं किया."
"11 अगस्त को जब लोकसभा में अमित शाह ने म्यांमार के कुकी लोगों को दोषी ठहराया था तो उसके अगले दिन मैंने उनके जवाब में बोलना चाहा, लेकिन मेरा माइक्रोफोन बंद कर दिया गया और मुझे अपनी बात रखने की अनुमति नहीं दी गई.”

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अशोका यूनिवर्सिटी: एक और प्रोफ़ेसर ने छोड़ा पद
अंग्रेज़ी अख़बार टेलीग्राफ़ की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, अशोका यूनिवर्सिटी ने अर्थशास्त्र के प्रोफ़ेसर सब्यसाची दास का इस्तीफ़ा स्वीकार कर लिया है.
सब्यसाची का एक अनपब्लिश पेपर सामने आया था जिसमें उन्होंने साल 2019 के लोकसभा चुनावों में हेरफ़ेर का आरोप लगाया था. इस पेपर के सामने आने से हुए विवाद बाद उन्हें यूनिवर्सिटी से निकाले जाने की बात सामने आई है.
मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि अर्थशास्त्र के एक अन्य प्रोफेसर पुलाप्रे बालाकृष्णन ने भी दास के साथ "समर्थन" में इस्तीफ़ा दे दिया है.
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