ओडिशा ट्रेन दुर्घटना: शुरुआती जांच रिपोर्ट में किस चीज़ पर जताया गया शक - प्रेस रिव्यू

ओडिशा के बालासोर में रेल हादसा

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ओडिशा के बालासोर में हुए भीषण रेल हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 275 हो गई है.

शुक्रवार की शाम करीब सात बजे बाहानगा बाज़ार रेलवे स्टेशन के पास कोलकाता से चलकर चेन्नई तक जाने वाली कोरोमंडल एक्सप्रेस, सर एम विश्वेश्वरैया-हावड़ा सुपरफास्ट एक्सप्रेस और एक मालगाड़ी की टक्कर हुई.

इतना बड़ा हादसा कैसे हुआ इसके लिए रेल अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय जांच टीम बनाई गई है.

टीम ने शुरुआती जांच में संकेत दिया है कि हादसे का कारण सिग्नल फेलियर हो सकता है. इस ख़बर को द हिंदू अखबार ने पहले पन्ने पर जगह दी है.

शुरुआती जांच रिपोर्ट की एक प्रति द हिंदू अखबार के पास है, जिसके हवाले से उसने बताया है कि कोरोमंडल एक्सप्रेस को शुरू में अप मेन लाइन में प्रवेश करने के लिए ग्रीन सिग्नल दिया गया था लेकिन उसे बाद में वापस ले लिया गया.

इसके बाद ट्रेन अपनी पटरी छोड़कर लूप लाइन वाले ट्रैक पर शिफ्ट हो गई और वहां खड़ी एक मालगाड़ी से टकरा गई.

रेलवे प्लेटफॉर्म पर मुख्य ट्रैक के अलावा दो या चार ट्रैक अतिरिक्त जोड़ दिए जाते हैं, जिनका इस्तेमाल ट्रेन को मुख्य ट्रैक से प्लेटफॉर्म पर लाने के लिए या मालगाड़ी को खड़ा करने के लिए किया जाता है. इसे ही लूप लाइन कहा जाता है.

ओडिशा के बालासोर में हुए रेल हादसे के पीड़ित

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सिग्नल के बीच फंसी ट्रेन

अख़बार का कहना है कि शुरुआती जांच दल में ज्यादातर वरिष्ठ सेक्शन इंजीनियर शामिल थे. टीम ने पाया कि ट्रेन संख्या 12841, कोरोमंडल एक्सप्रेस को अप मेन लाइन से गुज़रने के लिए ग्रीन सिग्नल दिया गया था, लेकिन फिर इसे हटा दिया गया.

अख़बार के मुताबिक़, सिग्नल को लेकर ऐसा क्यों किया गया, इसे लेकर शुरुआती जांच रिपोर्ट में कोई संकेत नहीं दिए गए हैं. साथ ही यह भी अभी साफ नहीं है कि कोरोमंडल एक्सप्रेस के पार करते समय सिग्नल हरा दिख रहा था या लाल.

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अख़बार का कहना है कि शुरुआती जांच दल में ज्यादातर वरिष्ठ सेक्शन इंजीनियर शामिल थे. टीम ने पाया कि ट्रेन संख्या 12841, कोरोमंडल एक्सप्रेस को अप मेन लाइन से गुज़रने के लिए ग्रीन सिग्नल दिया गया था, लेकिन फिर इसे हटा दिया गया.

अख़बार के मुताबिक़, सिग्नल को लेकर ऐसा क्यों किया गया, इसे लेकर शुरुआती जांच रिपोर्ट में कोई संकेत नहीं दिए गए हैं. साथ ही यह भी अभी साफ नहीं है कि कोरोमंडल एक्सप्रेस के पार करते समय सिग्नल हरा दिख रहा था या लाल.

खबर में कहा गया है कि कोरोमंडल ट्रेन अपनी मेन लाइन छोड़कर बाहानगा बाज़ार स्टेशन प्लेटफार्म वाले ट्रैक पर बढ़ रही थी जबकि उसे इस स्टेशन पर रुकना भी नहीं था. जांच में पुष्टि की गई है कि ऐसा करने पर वहां खड़ी मालगाड़ी से कोरोमंडल एक्सप्रेस से टक्कर हुई.

शुरुआती जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि इसी बीच साथ की पटरी से यशवंतपुर-हावड़ा एक्सप्रेस गुज़र रही थी. हादसे की चपेट में आने से इस ट्रेन के भी दो डिब्बे ट्रेन से उतर गए.

ख़बर के मुताबिक कोरोमंडल एक्सप्रेस शाम 6:52 बजे बाहानगा बाज़ार स्टेशन से गुज़री और हादसा शाम 6:55 बजे हुआ. रिपोर्ट में कहा गया है कि यशवंतपुर-हावड़ा एक्सप्रेस शाम 6.55 बजे स्टेशन से गुज़री.

जांच दल ने पाया कि लूप लाइन पर आई कोरोमंडल एक्सप्रेस के 21 डिब्बे पटरी से उतर गए और कुछ पलट गए. गार्ड ब्रेक वैन और एच-1 (फर्स्ट एसी) कोच अप मेन लाइन पर मिले, वहीं ट्रेन का इंजन मालगाड़ी पर चढ़ा हुआ पाया गया.

रिपोर्ट में कहा गया है कि यशवंतपुर-हावड़ा एक्सप्रेस के सबसे पिछले दो डिब्बे पटरी से उतरे हुए पाए गए.

ओडिशा में रेल हादसा

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लोको पायलट हादसे में घायल

रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि दुर्घटना की विस्तृत जांच रेलवे सुरक्षा आयुक्त करेंगे, जो नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अंतर्गत आते हैं.

हिंदुस्तान टाइम्स अखबार ने भी इस खबर को अपने पहले पन्ने पर जगद दी है. अखबार के मुताबिक हादसे को लेकर शुरुआती जांच रिपोर्ट रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी जेएन सुबुद्धि, आरके बनर्जी, आरके पंजिरा और एके मोहनतु ने दो पन्ने की हाथ से लिखी रिपोर्ट शनिवार को जमा की.

जांच रिपोर्ट में बाहानगा बाज़ार रेलवे स्टेशन के सिग्नल रूम के रिकॉर्ड्स को शामिल किया गया है.

अखबार ने रिपोर्ट के हवाले से बताया है कि स्टेशन के सिग्नल सिस्टम की रिकॉर्डिंग से पता चलता है कि ट्रेन को पहले मुख्य ट्रैक छोड़कर लूप लाइन पर आने के लिए कहा जाता है लेकिन कुछ ही सेकेंड में ट्रेन को लूप से मुख्य लाइन पर भेज दिया जाता है.

रिपोर्ट में बताया गया है कि कोरोमंडल एक्सप्रेस ने लूप लाइन पर 127 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से प्रवेश किया था.

हादसा कैसे हुआ, इस खबर को टाइम्स ऑफ इंडिया अखबार ने भी पहले पन्ने पर जगह दी है. अखबार के मुताबिक कोरोमंडल एक्सप्रेस ट्रेन के लोको पायलट ट्रेन दुर्घटना में घायल हुए हैं और वे जांच में काफी महत्वपूर्ण साबित होंगे.

गाय

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'भैंस मार सकते हैं, तो गाय क्यों नहीं?'

कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ‘कर्नाटक वध रोकथाम और मवेशी संरक्षण अधिनियम, 2020’ को संशोधित करने पर गंभीरता से विचार कर रही है.

इस बिल को राज्य में बीजेपी की सरकार ने साल 2021 में पास करवाया था.

राज्य के पशुपालन मंत्री टी वेंकटेश का कहना है किसानों के हितों को देखते हुए ऐसा किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि अगर भैंस मारी जा सकती है तो फिर गाय क्यों नहीं?

इस खबर को द टाइम्स ऑफ इंडिया ने 11वें पन्ने पर जगह दी है. खबर के मुताबिक मंत्री ने कहा कि राज्य के किसान बूढ़े होते मवेशियों से परेशान हैं.

मंत्री टी वेंकटेश ने दावा किया है कि उनके फार्म हाउस पर एक गाय मर गई थी और उसे हटाने में उन्हें खुद दिक्कतों का सामना करना पड़ा था.

अखबार के मुताबिक कर्नाटक में साल 2010 और 2012 में येदियुरप्पा के नेतृत्व में बीजेपी सरकार 1964 एक्ट को संशोधित करने के लिए दो बिल लाई थी. इसके बाद 2014 में सिद्धारमैया के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार ने इन बिलों को वापस ले लिया था.

अखबार के मुताबिक, नए कानून में गोवंश के साथ साथ बैल, सांड और 13 साल से कम उम्र की भैंस को मारने पर प्रतिबंध है.

वहीं 1964 के कानून में 12 साल से ज़्यादा उम्र की भैंस और बैल को मारने की इजाज़त थी, लेकिन उसके लिए सर्टिफिकेट की ज़रूरत पड़ती थी जो यह कहता था कि अब बैल और भैंस प्रजनन के लायक नहीं रहे हैं.

 महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस

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इमेज कैप्शन, महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस

‘लव जिहाद’ के मामलों में बढ़त- महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम

महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का कहना है कि राज्य में गुमशुदगी की शिकायतों की जांच के दौरान बड़ी संख्या में लव जिहाद के मामले सामने आए हैं.

इस खबर को इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने जगह दी है. अखबार के मुताबिक महाराष्ट्र सरकार में गृह विभाग संभालने वाले फडणवीस ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि राज्य में गुमशुदगी की शिकायतों में 90 से 95 प्रतिशत व्यक्ति का पता लगा लिया जाता है.

उन्होंने कहा कि कुछ मामलों में सामने पाया आया है कि झूठे वादे किए गए थे, या झूठी पहचान का इस्तेमाल हुआ था. यहां तक की कुछ मामलों में शादीशुदा आदमियों ने महिलाओं को गुमराह करने की कोशिश कर रहे थे.

खबर के मुताबिक फडणवीस ने कहा कि वे लव जिहाद पर कानून लाने पर विचार कर रहे हैं और संबंध में अलग अलग मौजूदा कानूनों का अध्ययन कर रहे हैं.

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