महाकुंभ: मौनी अमावस्या में आई भारी भीड़ से थमा प्रयागराज, शहर और ट्रेनों में जगह नहीं

- Author, सैयद मोज़िज़ इमाम और विष्णुकांत तिवारी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
मौनी अमावस्या के दिन प्रयागराज में स्नान के लिए जुटी भारी भीड़ अब धीरे-धीरे अपने घरों को लौटने लगी है. लेकिन श्रद्धालुओं की सुरक्षित वापसी किसी चुनौती से कम नहीं है.
कुंभ में हादसे के बाद प्रशासन चौकस है और भीड़ पर नियंत्रण की कवायद में लगा है. लेकिन वापसी के लिए बेचैन श्रद्धालुओं के लिए इंतजार का एक-एक पल भी भारी पड़ रहा है.
प्रयागराज ही नहीं आसपास के रेलवे स्टेशनों पर भी भीड़ बढ़ती जा रही है.
प्रयागराज जंक्शन पर हज़ारों लोग अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर अपनी ट्रेनों का इंतजार कर रहे हैं. इसके साथ ही अब भी कुंभ में आने वाले यात्रियों का तांता लगा हुआ है.
इससे प्रयागराज और आसपास के इलाकों की बुनियादी सुविधाओं और संसाधनों पर तो दबाव बढ़ ही रहा है. रेलवे स्टेशनों पर भी भारी भीड़ जमा हो गई है.

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साथी बिछड़े, ट्रेन ढूंढने की मुश्किलें

प्रयागराज रेलवे जंक्शन पर जमा ये भीड़ न सिर्फ प्रयागराज से सटे मध्य प्रदेश के रीवा और सतना ज़िलों से है बल्कि उत्तर प्रदेश, बिहार समेत कोलकाता और दिल्ली से लेकर चेन्नई तक के लोग यहाँ मौजूद हैं.
पटना की ओर जाने वाली कुंभ स्पेशल ट्रेन के डिब्बे में ज़मीन पर बैठी आरती देवी ने कहा, "हम नौ महिलाएँ एक ही गाँव से आई थीं लेकिन बुधवार रात की भगदड़ में पांच महिलाएँ हमसे अलग हो गईं. हमारा स्नान भी नहीं हो पाया और अब मजबूरी में हमें लौटना पड़ रहा है. गाँव से तीन लोग उन्हें ढूंढने आ रहे हैं."
प्रयागराज से 1700 किलोमीटर दूर चेन्नई से आए चंद्रू भी अपने भारी झोले के साथ स्टेशन पर ट्रेन की तलाश करते दिखे.
उन्होंने कहा, "मैं यहाँ तीन दिनों से हूँ. सबसे बड़ी समस्या भीड़ को संभालने और व्यवस्थाओं की है. लाखों लोग यहाँ आए हैं लेकिन व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं हैं. लोगों को बहुत दूर तक पैदल चलना पड़ रहा है और अब लौटते समय भी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. प्रशासन बस किसी तरह से लोगों को यहाँ से निकालने में जुटा है."
स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर चार पर तैनात उत्तर प्रदेश पुलिस के एक सिपाही ने नाम न बताने की शर्त पर बताया, "हमारे पास आदेश है कि कैसे भी करके शहर से लोगों को बाहर निकालो. हज़ारों यात्री ऐसे हैं, जो ग़लत ट्रेन में चढ़ गए हैं, लेकिन कम से कम स्टेशन ख़ाली हो रहा है. इससे भगदड़ जैसी स्थिति बनने से बचा जा सकता है. हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि लोग किसी भी ट्रेन में बैठकर अपने घरों की दिशा में निकल जाएं."
हर 13 मिनट में एक ट्रेन लेकिन भीड़ पर काबू मुश्किल

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि बुधवार को प्रयागराज में आठ करोड़ से भी अधिक लोगों का दबाव था.
अधिकारियों को मुख्यमंत्री की तरफ़ से जारी निर्देशों में सबसे अहम था कि महाकुंभ मेला क्षेत्र हो या प्रयागराज से बाहर जाने के रास्ते पर कहीं भी यातायात न रुके. रेलवे से संपर्क-समन्वय बनाकर ट्रेनों का लगातार संचालन सुनिश्चित हो.
अधिकारियों के मुताबिक़ ख़ुद मुख्यमंत्री स्थिति की मॉनिटरिंग कर रहे हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि रेलवे ने भी इस दौरान रूटीन और मेला स्पेशल ट्रेनों को मिलाकर लगभग 300 से अधिक ट्रेनें चलाई हैं.
नॉदर्न सेंट्रल रेलवे के प्रवक्ता ने बताया कि प्रयागराज से स्पेशल ट्रेनें संचालित की जा रही हैं. मंगलवार शाम को सात बजे तक तकरीबन 150 ट्रेनें चलाई गईं.
प्रयागराज जंक्शन के स्टेशन अधीक्षक शिवमूर्ति ने बीबीसी को बताया कि मौनी अमावस्या के स्नान के बाद 28 जनवरी की रात 12 बजे से 29 जनवरी की रात 10 बजे तक 90 से ज्यादा ट्रेनें प्रयागराज जंक्शन पर आई हैं.
उन्होंने कहा, "लगभग हर 13 मिनट में एक ट्रेन यहाँ पहुंच रही है. रेलवे पुलिस बल, प्रदेश पुलिस, मेला व्यवस्था की टीमें और रेलवे के कर्मचारी तैनात हैं. हर ट्रेन के हर डिब्बे में कम से कम दो पुलिसकर्मी लगाए गए हैं ताकि यात्रियों को किसी तरह की असुविधा न हो."
रेलवे के मुताबिक प्रयागराज जंक्शन, प्रयागराज छिवकी, नैनी जंक्शन और सूबेदारगंज रेलवे स्टेशन से 100 गाड़ियां चलाई गई हैं. वहीं प्रयागराज परिक्षेत्र के उत्तर रेलवे के प्रयाग स्टेशन से 19, फाफामऊ स्टेशन से तीन और पूर्वोत्तर रेलवे के रामबाग स्टेशन से सात सहित झूसी स्टेशन से 21 गाड़ियों का संचालन भी किया गया है.
रेल मंत्रालय के प्रवक्ता दिलीप कुमार ने बताया कि प्रयागराज के हर स्टेशन के प्रत्येक प्लेटफॉर्म पर क़रीब सात सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी निगरानी दिल्ली में रेल मंत्रालय के वॉर रूम से की जा रही है. यह वॉर रूम खासतौर पर कुंभ मेले की निगरानी के लिए तैयार किया गया है.

रेल मंत्रालय ने बीबीसी संवाददाता चंदन जजवाड़े से बातचीत में बताया है कि प्रयागराज के छोटे-बड़े आठ स्टेशनों से पांच दिशाओं में हर 20 मिनट पर एक ट्रेन चलाई जा रही है.
इस तरह, प्रयागराज शहर से हर चार मिनट में किसी न किसी दिशा में ट्रेन रवाना हो रही है. रेलवे ने बुधवार रात 12 बजे से आज रात 12 बजे तक 300 से ज्यादा ट्रेनें चलाने की योजना बनाई है और ज़रूरत पड़ने पर इस संख्या को और बढ़ाया जा सकता है.
रेल मंत्रालय के अनुसार, मेला शुरू होने के बाद से अब तक करीब एक करोड़ श्रद्धालु ट्रेन से यात्रा कर चुके हैं.
दरअसल मंगलवार शाम से ही प्रयागराज जाने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ रेलवे स्टेशनों पर जमा थी.
कई ट्रेनों को रद्द होने की वजह से ही स्टेशन पर एक ही ट्रेन पर चढ़ने के लिए यात्रियों के बीच जद्दोजहद दिखी.
प्रयागराज जाने के लिए लोग ट्रेनों पर लटके हुए दिखाई दिए थे. बंछरावा स्टेशन पर यात्रियों को काबू करने के लिए आरपीएफ को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी.
उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने भी 8000 से अधिक बसें भी चलाई हैं.
लेकिन बीबीसी संवाददाता ने लखनऊ-प्रयागराज हाइवे पर बछरावां के इलाक़े में जब लोगों से बात की तो पता चला कि कुंभ में हादसे के बाद लोग डरे हुए हैं और तो ट्रेन या फिर बस से ही घर लौटने का इंतज़ार कर रहे हैं. इससे बस सर्विस पर भी दबाव है.
कोलकाता से आई रानी घर वापस जाने के लिए बस स्टेशन पर थी. उन्होंने बताया कि उनका बेटा भी आया था. उसने फोन पर बताया कि वो ठीक है और घर लौट रहा है.
कुंभ की भीड़ से प्रयागराज जाने के रास्ते हुए जाम

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रंजीत कुमार टैक्सी ड्राइवर हैं. कुंभ शुरू होने के साथ ही वो रोज़ाना श्रद्धालुओं को लेकर प्रयागराज जा रहे हैं.
लेकिन 29 जनवरी को माजरा कुछ और था .रंजीत ने बताया कि लखनऊ से प्रयागराज जाने में जाम का सामना करना पड़ा और सुबह से निकलने के बाद वो शाम पांच बजे ही प्रयागराज की सीमा तक पहुंच पाए थे. लेकिन वापसी में कोई दिक्क़त नहीं थी. मार्ग पर कोई अवरोध नहीं था.
दरअसल, श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या से प्रयागराज पर बढ़ते दबाव के मद्देनजर सीमावर्ती इलाक़ों में होल्डिंग एरिया बनाए गए हैं यानी ऐसे इलाक़े जहां प्रयागराज को श्रद्धालुओं के बढ़ते काफिले को कुछ देर के लिए रोक दिया जाए.
प्रशासन ने प्रयागराज जाने पर फिलहाल रोक लगा रखी है. इसलिए लखनऊ प्रयागराज के रास्ते में कई लोगों ने श्रद्धालुओं के खाने-पीने का इंतेजाम किया है. प्रशासनिक अमला लोगों की वापसी को सुगम बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा.
प्रयागराज के अलावा वाराणसी और अयोध्या में भी भीड़ बढ़ रही है. इसे लेकर प्रशासन भीड़ को नियंत्रित करने के लिए गाड़ियों को शहर से बाहर ही रोक रखा है.
काशी विश्वनाथ मंदिर के एसडीएम शंभू शरण ने बताया कि श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए स्पर्श और टिकट दर्शन पर रोक लगा दी गई है. काशी विश्वनाथ के दर्शन के लिए तकरीबन छह से सात लाख लोग रोज़ाना आ रहे हैं.
स्थानीय पत्रकार नित्यानंद मिश्रा ने बताया कि बाहर से आने वाले भारी सवारी वाहनों 15 किलोमीटर दूर ही रोके जा रहे हैं.
वाराणसी के ज़िलाधिकारी एस राजालिंगम ने स्कूल क़ॉलेज और मैरिज लॉन को होल्डिंग एरिया में तब्दील करने का आदेश दिया है.
क्या सरकार ने हादसे से सबक लिया है?

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कुंभ में भगदड़ में 30 लोगों की मौत के बाद वहां व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रयागराज में मंडलायुक्त रहे आशीष गोयल और एडीए के वीसी रहे भानु गोस्वामी की तैनाती हुई है.
पांच विशेष सचिवों को भी तैनात किया गया है. ये सभी 12 फ़रवरी तक प्रयागराज में उपस्थित रहकर व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने में सहयोग देंगे.
13 जनवरी से शुरू हुए कुंभ मेले में छह अमृत स्नान होने हैं, जिनमें से दो हो चुके हैं जबकि तीसरा अमृत स्नान बुधवार को था.
चौथा अमृत स्नान तीन फ़रवरी, पांचवां अमृत स्नान 12 फ़रवरी और छठा और अंतिम अमृत स्नान 26 फ़रवरी को होगा.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देर रात शासन स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में प्रयागराज, कौशाम्बी, वाराणसी, अयोध्या, मिर्जापुर, बस्ती, जौनपुर, चित्रकूट, बांदा अंबेडकरनगर, प्रतापगढ़, संतकबीरनगर, भदोही, रायबरेली, गोरखपुर में तैनात वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बैठक की है.
मुख्यमंत्री ने अयोध्या, वाराणसी, मिर्जापुर और चित्रकूट के अधिकारियों से वहां विभिन्न क्षेत्रों से आ रहे श्रद्धालुओं की सुरक्षा के साथ सुविधा के प्रबंध की जानकारी ली है.
मुख्यमंत्री ने कहा है कि श्रद्धालु स्नान करके अपने घर लौट रहे हैं. एडीजी और ज़िलाधिकारी प्रयागराज यह सुनिश्चित कराएं कि एक-एक श्रद्धालु सुरक्षित अपने गंतव्य तक पहुंच जाए.
सरकार ने तीन फ़रवरी को बसंत पंचमी के अवसर पर होने वाले 'अमृत स्नान' के लिए पहले से ही तैयारी कर रही है. मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक गुरुवार को महाकुंभ मेला क्षेत्र की व्यवस्थाओं की समीक्षा करेंगें.
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