ममता बनर्जी ने कांग्रेस को क्यों दिया अल्टीमेटम, अब क्या हैं विकल्प- प्रेस रिव्यू

ममता बनर्जी

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तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कांग्रेस को एक तरह से ये अल्टीमेटम दे दिया है कि सीट शेयरिंग पर अब आगे बात चुनावों के बाद ही होगी.

बुधवार को ममता बनर्जी ने ये साफ़ कर दिया कि सीट शेयरिंग को लेकर बातचीत का रास्ता कांग्रेस के लिए अब बंद हो चुका है और रही राष्ट्रीय गठबंधन की बात तो इस पर चुनाव के बाद ही कोई फ़ैसला लिया जाएगा.

इंडियन एक्सप्रेस में छपे एक विश्लेषण के अनुसार, इंडिया गठबंधन के लिए पश्चिम बंगाल में सीट शेयरिंग पहले भी आसान नहीं थी.

मौजूदा वक़्त में प्रदेश में ममता बनर्जी का प्रभाव अधिक है, ऐसे में इंडिया गठबंधन को लेकर उनके सख़्त रवैये का कारण कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) यानी सीपीआईएम) के साथ गठबंधन को लेकर भरोसे की कमी, कांग्रेस से मोहभंग और अल्पसंख्यकों के वोट को लेकर चिंता है.

अख़बार लिखता है कि टीएमसी के एक वरिष्ठ नेता और सांसद के अनुसार, पार्टी को उम्मीद है कि श्रीराम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के भव्य आयोजन और हाल में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में जीत के बाद प्रदेश में बीजेपी को बड़ी बढ़त मिल सकती है.

इस नेता ने अख़बार को बताया, "फ़िलहाल बीजेपी के ख़िलाफ़ मिलकर लड़ने की ज़रूरत है, जिसके लिए पार्टी प्रमुख कई महीनों से कोशिश कर रही थीं. लेकिन उनकी बात कोई सुन नहीं रहा है. बंगाल में कांग्रेस को दो सीटें देने के उनके प्रस्ताव को ख़ारिज कर दिया गया. उन्होंने ये भी प्रस्ताव दिया था कि 300 सीटों पर कांग्रेस अपने उम्मीदवार खड़े करे, बाकी सीटों पर क्षेत्रीय पार्टियां अपने उम्मीदवारों को उतारें, लेकिन इस पर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली."

"इस तरह के गठबंधन में रहने का फ़ायदा ही क्या जहाँ एक पार्टी बीजेपी के ख़िलाफ़ लड़ने को लेकर गंभीर ही न हो? कांग्रेस को ये नहीं भूलना चाहिए कि 2021 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी के रथ को ममता दीदी ने ही रोका था."

टीएमसी नेता ने ये भी कहा कि कांग्रेस "ममता बनर्जी जैसी एक महत्वपूर्ण नेता को कम कर आंक रही है और अहंकार में डूबी हुई है.

उन्होंने ये भी दावा किया कि न तो कांग्रेस ने सीट शेयरिंग को लेकर गठबंधन के सहयोगी दलों की बैठक बुलाई, न तो बंगाल से हो कर गुज़रने वाली राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा के लिए उन्हें आमंत्रित किया और ही उन्हें कोई ख़बर दी गई. हालांकि कांग्रेस ने इससे इनकार किया है.

ममता बनर्जी

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तृणमूल कांग्रेस की दलील

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वहीं तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि बंगाल में कांग्रेस के प्रदर्शन को देखकर ही वो सीट शेयरिंग की बात कर रही है.

अख़बार लिखता है कि मालदा और मुर्शिदाबाद समेत प्रदेश में पांच ऐसी लोकसभा सीटें हैं, जहाँ कांग्रेस को मज़बूत स्थिति में माना जाता है.

2019 के लोकसभा चुनावों में पार्टी ने इनमें से दो सीटों पर जीत हासिल की थी, वहीं 2021 विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पूरे राज्य में एक भी सीट नहीं जीत सकी (उन इलाक़ों में भी नहीं जहां पार्टी को मज़बूत माना जाता है). वहीं टीएमसी ने मालदा की 12 में से 8 और मुर्शिदाबाद की 22 में से 21 सीटें जीत लीं. मालदा में चार ओर मुर्शिदाबाद में एक सीट बीजेपी के नाम रही.

बंगाल में बीजेपी धीरे-धीरे अपना पैर जमा रही है. टीएमसी के कई नेताओं के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के गंभीर मामले चल रहे हैं. ऐसे में "प्रदेश में अपना प्रभुत्व" खोना ममता बनर्जी के लिए किसी बड़े जोखिम से कम नहीं.

यहां लोकसभा की 42 सीटें हैं और अपने 23 सांसदों के साथ टीएमसी लोकसभा में चौथी सबसे बड़ी पार्टी है. यहां से बीजेपी के 17 सांसद हैं. ऐसे में टीएमसी के लिए कांग्रेस को दो से अधिक सीटें दे पाना मुश्किल है.

अख़बार लिखता है कि टीएमसी के एक विधायक का कहना है कि "बीजेपी के ख़िलाफ़ टीएमसी के जीतने के संभावना अधिक है. कांग्रेस के लिए सीटें छोड़ीं इसका फ़ायदा बीजेपी को हो सकता है. दूसरा अगर राष्ट्रीय स्तर पर बीजेपी लोकसभा चुनावों में बहुमत के साथ जीतती है और कांग्रेस को हार मिलती है तो एक मज़बूत विपक्ष के लिए टीएमसी के पास सांसदों का ज़रूरी संख्याबल होना चाहिए."

बीजेपी

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ममता के लिए बीजेपी के अलावा और क्या हैं चुनौतियां?

प्रदेश के अल्पसंख्यक समुदाय का वोट भी ममता की बड़ी ताक़त रहा है लेकिन अब उसे भी चुनौती मिल रही है.

अपने इलाक़े में प्रभावशाली माने जाने वाले मौलाना नौशाद सिद्दीक़ी के नेतृत्व में इंडियन सेक्युलर फ्रंट ममता के लिए नई चुनौती बनकर उभरा है.

2021 में सीपीआईएम और कांग्रेस ने इस फ्रंट के साथ हाथ मिलाया था, इस गठबंधन को विधासभा चुनाव में एक सीट मिली थी. लेकिन बीते साल हुए पंचायत चुनावों में इस फ्रंट का प्रदर्शन अच्छा रहा था.

बीते साल मुर्शिदाबाद के अल्पसंख्यक बहुल सागरदिघी में हुए उपचुनाव के नतीजों ने भी टीएमसी को चौंका दिया था. यहां कांग्रेस के उम्मीदवार की जीत हुई थी, ये बात और है कि ये विधायक बाद में टीएमसी में शामिल हो गए.

मुसलमानों तक पहुंच बढ़ाने की कोशिशों में जुटी पार्टी ने हाल के दिनों में बीजेपी को लेकर कड़े बयान दिए हैं.

श्रीराम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के दिन ममता बनर्जी के बाद पार्टी में नंबर दो पर माने जाने वाले अभिषेक बनर्जी ने कहा का था कि उनका धर्म ऐसे पूजास्थल को स्वीकार नहीं कर सकता जो "नफरत, हिंसा और मासूमों की लाशों पर बना हो."

ममता बनर्जी ने ख़ुद भी उस दिन एक सर्वधर्म रैली निकाली थी और कई पूजास्थलों पर गईं. उन्होंने अपनी स्पीच में बीजेपी को निशाना बनाते हुए कहा "कोई मंदिर जाता है और सोचता है कि ये काफ़ी होगा."

ममता के ख़िलाफ़ वामपंथी पार्टियां भी बड़ी चुनौती बन सकती हैं, जिनके ख़िलाफ़ प्रदेश में ममता ने लंबी राजनीतिक लड़ाई लड़ी है.

अख़बार लिखता है कि माना जाता है कि अपने वोटरों को देखते हुए सीपीआईएम के साथ कांग्रेस की नज़दीकी से ममता नाराज़ हैं. वो हाल में इंडिया गठबंधन की बैठकों में वामपंथी पार्टियों को लेकर शिकायत करती रही हैं.

वहीं वामपंथी पार्टियों ने भी अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे टीएमसी के साथ हाथ मिलाने को लेकर कुछ ख़ास दिलचस्पी नहीं दिखाई है.

राम ध्वज

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राम ध्वज के निपटारे के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी

नई दिल्ली म्युनिसिपल काउंसिल (एनडीएमसी) ने बीते दिनों श्रीराम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह और गणतंत्र दिवस समारोह के लिए लगाए गए धार्मिक और राष्ट्रीय झंडों के उचित निपटारे के लिए हेल्पलाइन का व्यवस्था की है.

अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार एनडीएमसी का कहना है कि झंडे का अपमान न हो इसके लिए उसने एक सेंट्रल हेल्पलाइन जारी की है.

अख़बार लिखता है कि इसके लिए नागरिक हेल्पलाइन नंबर 1533 और मोबाइल ऐप 311 से संपर्क कर सकते हैं.

काउंसिल का कहना है कि उन्होंने 14 सैनिटरी इंस्पेक्टरों की नियुक्ती की है जो लोगों, मार्केट एसोसिएशन से ध्वजों को इकट्ठा करने के काम का निरीक्षण करेंगे. इन धवजों को एनडीएमसी के दफ्तरों में जमा करने को कहा गया है.

एम्स में 31 मार्च से कैश पेमेन्ट बंद होगा

एम्स

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इस साल मार्च 31 के बाद से दिल्ली के सबसे बड़े सरकारी एम्स अस्पताल में कैश पेमेन्ट नहीं लिया जाएगा.

अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी एक ख़बर के अनुसार दिल्ली में मौजूद एम्स अस्पताल ने एक ऑडर जारी कर कहा है 31 मार्च 2024 से पेमेन्ट के मामले में अस्पताल सौ फ़ीसदी डिजिटल हो जाएगा.

अस्पताल में टेस्ट या दूसरे जांचों के लिए पेमेन्ट कैश में नहीं स्वीकार किया जाएगा, सभी पेमेन्ट एम्स स्मार्ट कार्ड के ज़रिए होगी जिसकी व्यवस्था एक अप्रैल 2023 से कुछ काम के लिए पायलट बेसिस पर शुरू की गई थी.

अख़बार का कहना है कि इसके लिए अस्पताल में कई जगहों पर स्मार्ट कार्ड टॉप-अप काउंटरों की व्यवस्था की गई है जो चोबीसों घंटे खुले रहेंगे. इसके अलावा मरीज़ यूपीआई, डेबिट कार्ड या फिर क्रेडिट कार्ड के ज़रिए ही भुगतान कर सकेंगे.

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अस्पताल का कहना है कि एक आउटसोर्स सर्विस प्रोवाइडर के डिस्चार्ज बिलों के साथ छेड़छाड़ करने और मरीज़ों से ज़्यादा पैसे वसूलने का मामला सामने आने के बाद यह फ़ैसला लिया गया है. इस कारण मरीज़ों को न केवल मानसिक तौर पर परेशानी हुई बल्कि आर्थिक मुश्किलें भी हुईं.

अस्पताल ने कहा है कि वो चाहता है कि एम्स में मरीज़ों को लूटा न जाए और यहां के लेखा-जोखा का हिसाब भी सही तरीके से रखा जा सके.

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