चीन की एक आर्ट जो पार्किंसन बीमारी की रफ़्तार धीमी कर सकती है

इमेज स्रोत, GETTY IMAGES
चीन में हुए एक अध्ययन में सामने आया है कि ताई ची नाम का चीनी मार्शल आर्ट का अभ्यास करने से एक गंभीर दिमाग़ी बीमारी पार्किंसन के लक्षणों को कई सालों के लिए टाला जा सकता है.
पार्किंसन एक दिमाग़ी बीमारी है, जिसमें मरीज की स्थिति धीरे-धीरे बिगड़ती चली जाती है. इससे पीड़ित व्यक्ति के लिए वक़्त के साथ अपनी शारीरिक गतिविधियों पर नियंत्रण बनाए रखना मुश्किल होता जाता है.
लेकिन जर्नल ऑफ न्यूरोलॉजी न्यूरोसर्जरी एंड साइकाइट्रिक में प्रकाशित हुए अध्ययन में दावा किया गया है कि ताई ची पार्किंसंन बीमारी की गति को धीमा कर सकती है.
इस अध्ययन में पार्किंसन बीमारी से पीड़ित 334 मरीज़ों को शामिल किया गया था. इनमें से 147 मरीज़ों के समूह ने हफ़्ते में दो बार एक घंटे के लिए ताई ची का अभ्यास किया.
बीबीसी संवाददाता फिलिपा रॉक्बी ने अपनी रिपोर्ट में इस अध्ययन के बारे में बताया है कि जो लोग एक हफ़्ते में दो बार इस मार्शल आर्ट का अभ्यास करते हैं, उन्हें उन लोगों की तुलना में कम परेशानियां झेलनी पड़ती हैं जो इस मार्शल आर्ट का अभ्यास नहीं करते.
क्या होती है पार्किंसन बीमारी

पार्किंसन बीमारी को समझने के लिए दुनिया भर में शोध जारी हैं. लेकिन अब तक जो कुछ पता है, उसके मुताबिक़ इस बीमारी से पीड़ित शख़्स का अपनी शारीरिक गतिविधियों पर नियंत्रण कम होता जाता है.
उदाहरण के लिए, उसे कंपन और मांसपेशियों में अकड़न होने जैसी दिक्कतें होती हैं. इसके साथ ही इस बीमारी से जूझ रहे शख़्स को शारीरिक संतुलन एवं समन्वय बनाने में भी परेशानी आती है.
चीन की शंघाई जिओ टोंग यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ़ मेडिसिन के अध्ययन में पांच साल तक पार्किंसन के सैकड़ों मरीज़ों के स्वास्थ्य पर नज़र रखी गई.
इसमें एक समूह जिसमें 147 लोग थे उन्होंने नियमित रूप से ताई ची का अभ्यास किया जबकि 187 लोगों के समूह ने अभ्यास नहीं किया.
इस पारंपरिक चीनी कसरत में धीमे और सौम्य मूवमेंट के साथ साथ गहरी सांस लेना शामिल था.
द चैरिटी पार्किंसन यूके ने ताई ची को धीमे मूवमेंट वाली शारीरिक गतिविधि बताया है जो जिंदगी और मूड को बेहतर बनाने में मदद करती है.
शोधकर्ताओं ने ताई ची का अभ्यास कर रहे समूहों में लक्षणों, मूवमेंट और संतुलन का अध्ययन करके पाया गया उसमें इस बीमारी की गति धीमी थी.
इस समूह के मरीज़ों में –
- चक्कर खाकर गिरने में कमी
- पीठ दर्द में कमी
- यादाश्त और एकाग्रता से जुड़ी दिक्कतों में कमी.
- नींद और जीवन की गुणवत्ता में सुधार.
इससे पहले पार्किंसन से पीड़ित जिन लोगों ने ताई ची का छह महीने तक अभ्यास किया उनमें कई मामलों में सुधार देखा गया जैसे वे बेहतर तरीके से चल पा रहे थे, उनके संतुलन और पोस्चर में भी सुधार देखा गया.
‘काफ़ी कम लोगों पर किया गया शोध’

इमेज स्रोत, GETTY IMAGES
जर्नल ऑफ़ न्यूरोलॉजी न्यूरोसर्जरी और साइकाइट्री में लिखे लेख पर डॉ. जनरल ली और उनके अन्य सहलेखक बताते हैं, “उनके अध्ययन से पता चलता है कि ताई ची के अभ्यास से पार्किंसंन बीमारी पर प्रभावशाली असर पड़ता है.
लेकिन वे यह भी मानते हैं कि ये शोध अभी काफ़ी कम लोगों पर हुआ है और इससे ये साबित नहीं होता है कि मरीज़ों के एक समूह में पॉज़िटिव बदलाव की वजह सिर्फ़ ताई ची है.
भारत में भी लाइफ़स्टाइल डिसऑर्डर की वजह से पार्किंसन के मरीज़ों की संख्या बढ़ती दिख रही है.
दिल्ली के बीएल कपूर एवं मैक्स अस्पताल के न्यूरोसर्जरी विभाग में काम कर चुके डॉक्टर विकास गुप्ता ने बीबीसी सहयोगी पत्रकार रूफ़ी ज़ैदी से इस बारे में बात की.
उन्होंने कहा, ‘’ताई ची पार्किंसन के असर को कम कर सकता है. हालांकि, सिर्फ़ यह कहना कि ताई ची से पार्किंसन में फ़ायदा मिलता है. ये सही नहीं होगा.’’
‘’अगर आप कोई भी ऐसा काम करते हैं जिससे आपकी लाइफ़स्टाइल एक्टिव रहती है तो उससे मरीज़ को फ़ायदा ज़रूर मिलेगा. पार्किंसन को लेकर जो नया अध्ययन प्रकाशित हुआ है, उस पर मैं तब तक कोई टिप्पणी नहीं कर सकता जब तक इस बात की पुष्टि करने वाले कुछ और अध्ययन प्रकाशित नहीं होते.’’
क्या है ‘ताई ची’ और क्या हैं इसके फ़ायदे

इमेज स्रोत, GETTY IMAGES
ताई ची मार्शल आर्ट की ही एक विधा है. इसकी शुरूआत चीन में हुई. इसमें स्लो या धीमे मूवमेंट होते हैं और गहरी सांस ली जाती है.
ताई ची से शरीर को शारीरिक और भावनात्मक रूप से फ़िट भी रखा जा सकता है.
डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों के लिए ताई ची बहुत फायदेमंद साबित होती है.
मुंबई के लीलावती, हिन्दूजा और धीरूभाई अंबानी अस्पताल में मरीज़ों को ताई ची की ट्रेनिंग देने वाले संदीप देसाई की मानें तो ताई ची के अनगिनत फ़ायदे हैं.
ताई ची शरीर के संतुलन को बेहतर करने के साथ ही स्पाइनल इंजरी और घुटने की चोट को ठीक करने में मददगार साबित होता है.
बीबीसी की सहयोगी पत्रकार रूफ़ी ज़ैदी से बात करते हुए संदीप कहते हैं, ‘’ताई ची शरीर के संतुलन को बेहतर करता है. स्पाइनल इंजरी और घुटने की चोट को ठीक करने में मददगार साबित होता है.
ताई ची से शरीर के पोस्चर को ठीक किया जा सकता है. यह सिर्फ़ शरीर ही नहीं बल्कि मन भी शांत करता है. नियमित ताई ची करने से ब्लड प्रेशर, इम्यून सिस्टम बेहतर होता है तो वहीं फेफड़ों पर पड़ने वाले दबाव को भी कम किया जा सकता है. इससे शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है और शरीर का बैलेंस भी बेहतर होता है.”
डॉक्टर विकास गुप्ता बताते हैं, ‘’पिछले कुछ समय से भारत में पार्किंसन से पीड़ित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है क्योंकि जीवन प्रत्याशा यानी लाइफ़ स्पैन भी पहले के मुक़ाबले बढ़ा है, इसलिए यह समस्या भी पहले के मुकाबले ज्यादा देखने को मिल रही है.’’
ताई ची विशेषज्ञ संदीप देसाई का मानना है कि ताई ची को पार्किंसन जैसी बीमारियों के रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम में शामिल करना चाहिए और इसके प्रति लोगों में जागरुकता बढ़ाई जानी चाहिए.
मूल कहानी को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)












