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रूस के राष्ट्रपति पुतिन का मंगोलिया दौरा इतनी चर्चा में क्यों है?
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन मंगोलिया के दौरे पर हैं.
पुतिन के ख़िलाफ़ वॉरंट जारी होने के बाद यह पहली बार है, जब वह इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट के किसी सदस्य देश के दौरे पर गए हैं. पिछले साल कोर्ट ने उनके ख़िलाफ़ वॉरंट जारी किया था.
यह हाई प्रोफाइल दौरा इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट के प्रतिरोध के तौर पर देखा जा रहा है.
यूक्रेन, पश्चिम देशों और कई अन्य संगठनों ने पुतिन को हिरासत में लिए जाने की मांग की है.
मंगोलिया और रूस के बीच लंबे समय से राजनयिक संबंध रहे हैं. पुतिन के इस दौरे के साथ एक संयोग भी जुड़ा है.
दरअसल, पुतिन का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब मंगोलिया और सोवियत सेनाओं की जापान पर जीत की 85वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है.
जीत की 85वीं वर्षगांठ पर दौरा
मंगोलिया और सोवियत सेनाओं की जापान पर जीत की 85वीं वर्षगांठ पर ये दौरा हो रहा है.
साल 1939 में हुई इस लड़ाई में दोनों ओर से हज़ारों सैनिक मारे गए थे.
इस बीच, मंगोलिया की राजधानी उलानबटोर में रूस के राष्ट्रपति पुतिन का भव्य स्वागत हुआ.
चंगेज़ ख़ान स्क्वेयर के घोड़ों पर सवार सैनिक क़तारबद्ध नज़र आए.
लाइव बैंड द्वारा मार्शल एंथम बजाया गया. यहाँ रूस के राष्ट्रपति ने मंगोलिया के राष्ट्रपति उखागी खुलेलशो से मुलाक़ात की.
पुतिन के पहुँचने से पहले सरकारी पैलेस के बाहर प्रदर्शनकारी इकट्ठा हो गए थे. उनके हाथों में कुछ पोस्टर थे. उन पर लिखा था, 'वॉर क्रिमिनल पुतिन को यहाँ से निकालो.'
वहीं, उलानबटोर के स्मारक पर भी एक प्रदर्शन रखा गया. यह प्रदर्शन उनके लिए था, जिन्होंने मंगोलिया में एक दशक तक कम्युनिस्ट शासन का सामना किया था. सुरक्षा बलों ने इन प्रदर्शनकारियों को रूस के राष्ट्रपति से दूर रखने का बंदोबस्त किया था.
इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट ने राष्ट्रपति पुतिन पर युद्ध अपराध का आरोप लगाया है.
क्या गिरफ़्तार हो सकते हैं पुतिन?
इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट ने पिछले साल रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन पर युद्ध अपराध का आरोप लगाया था. कोर्ट ने पुतिन को ग़ैर-क़ानूनी तरीक़े से बच्चों को यूक्रेन से रूस भेजे जाने का ज़िम्मेदार ठहराया था.
रूस में बच्चों के अधिकारों की कमिश्नर मारिया लवोवा-बेलोवा के ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी वॉरंट भी जारी किया गया था.
आरोपों के मुताबिक़, ये अपराध यूक्रेन में 24 फ़रवरी 2022 से तब शुरू हुए, जब रूस ने व्यापक स्तर पर हमला शुरू किया था.
रूस की तरफ़ से कहा गया कि राष्ट्रपति पुतिन के दौरे को लेकर कोई चिंता की बात नहीं थी.
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा, 'मंगोलिया में हमारे सहयोगियों के साथ बेहतर संबंध हैं. राष्ट्रपति की यात्रा को लेकर सारी तैयारियां सावधानी के साथ की गई थीं.'
रूस ने इससे पहले इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट के आरोपों को नकार दिया था और उन्होंने इस वॉरंट को अपमानजनक बताया था.
इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट ने सभी सदस्यों से कहा कि हमारा दायित्व अभियुक्त को ढूंढना था, मगर कोर्ट के पास उन्हें गिरफ़्तार करने की ताक़त नहीं है. हम केवल सदस्य देशों में उनके ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई शुरू कर सकते हैं.
मंगोलिया कहाँ है?
मंगोलिया पूर्वी एशिया में चीन और रूस के बीच मौजूद एक लैंडलॉक्ड देश है. यह महज 30 लाख आबादी वाला देश है.
साल 1990 में मंगोलिया ने राजनीतिक और आर्थिक सुधारों के मक़सद से देश में एक दलीय व्यवस्था को ख़त्म कर दिया था. ये 70 साल पुरानी सोवियत संघ के ज़माने की व्यवस्था थी.
दरअसल, मंगोलिया में मौजूद बड़ा खनिज भंडार विदेशी निवेशकों की नज़र में है. इसके चलते देश छोटा ही सही लेकिन तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में बदल रहा है.
मंगोलिया तेल और बिजली के मामले में रूस पर निर्भर है.
मंगोलिया के साथ चीन और रूस के रिश्ते
मंगोलिया दो बड़े देश चीन और रूस के बीच मौजूद है. मंगोलिया के रूस के साथ मज़बूत सांस्कृतिक संबंध हैं जबकि चीन के साथ व्यापारिक रिश्ते हैं.
20वीं सदी की शुरुआत में मंगोलिया पर चीन के चिंग राजवंश का नियंत्रण था. 1911 में जब चिंग का पतन हुआ तो मंगोलिया को लेकर चीन और रूस के बीच खींचातानी शुरू हो गई.
इस बीच, 1920 की शुरुआत में सोवियत समर्थक कम्युनिस्ट सरकार ने यहां सत्ता हासिल कर ली थी.
साल 1991 में सोवियत संघ के ख़त्म हो जाने के बाद मंगोलिया मुक्त बाज़ार अर्थव्यवस्था में शामिल हो गया और वहां लोकतंत्र स्थापित हो गया.
हालांकि, तीनों देशों यानी रूस, चीन और मंगोलिया के बीच डिप्लोमैटिक और आर्थिक रिश्ते मजबूत बने हुए हैं.
रूस से चीन तक मंगोलिया होकर जाने वाली प्राकृतिक गैस पाइपलाइन की योजना को पावर ऑफ़ साइबेरिया दो के रूप में जाना जाता है. इसकी चर्चा लंबे समय से होती आ रही है.
यह प्रस्तावित पाइपलाइन से एक साल में 50 अरब क्यूबिक मीटर प्राकृतिक गैस रूस के यमल इलाके से चीन तक मंगोलिया होते हुए पहुंचाई जाएगी.
यह प्रोजेक्ट रूस की रणनीति का हिस्सा है. साल 2022 में यूक्रेन पर शुरू किए गए हमले के बाद यूरोप में गैस की बिक्री कम हो गई है. रूस इस नुक़सान की भरपाई इस प्रोजेक्ट से करना चाहता है.
मंगोलिया पहुंचने के बाद रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने कूटनीति को बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया.
उन्होंने कहा, 'पिछले साल मंगोलिया के बाज़ार में 90 फ़ीसदी से ज़्यादा गैसोलीन और डीज़ल रूस से आया था. हम गैस के क्षेत्र में अच्छी संभावनाएं देख रहे हैं. पावर ऑफ़ साइबेरिया दो की योजना का खाका तैयार हो चुका है.'
मंगोलिया की ‘थर्ड नेबर पॉलिसी’ क्या है?
रूस और चीन जैसे दो मज़बूत देशों के साथ मंगोलिया के रिश्ते कई सालों से मज़बूत बने हुए हैं.
हाल के कुछ वर्षों में मंगोलिया ने अपने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में विविधिता लाने की कोशिश की है.
इसका मक़सद राजनीतिक और आर्थिक स्वतंत्रता को सुरक्षित करना है. 'थर्ड नेबर' यानी 'तीसरा पड़ोसी' योजना के तहत मंगोलिया कई पश्चिमी देशों के साथ अपने संबंधों को मज़बूती देने में लगा है.
पिछले साल मई में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों पहली बार मंगोलिया आए थे.
ये इतिहास में पहली बार था. उस समय फ्रांस के राष्ट्रपति के प्रवक्ता ने कहा था कि फ्रांस की कोशिश रूस के पड़ोसियों से गतिरोध को कम करते हुए उनकी पसंद के दायरे को बढ़ावा देना है.
वहीं, अगस्त 2023 में अमेरिका की उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने मंगोलिया के प्रधानमंत्री ओयुन एर्डेन लसनमस्राई का वॉशिंगटन डीसी में स्वागत किया था.
एक बयान में व्हाइट हाउस ने कहा था कि यह मुलाकात मंगोलिया और अमेरिका के बीच ‘तीसरा पड़ोसी’ के साझेदारी का जश्न मनाने के लिए थी.
तब अमेरिका और मंगोलिया ने कहा था कि आपसी पसंद के क्षेत्र में दोनों देश अपनी आर्थिक साझेदारी को बढ़ाना चाहते थे.
हालांकि, पश्चिम ने मंगोलिया के उन प्रयासों को सराहा था, जिसमें मंगोलिया ने अपने राजनयिक रिश्तों का दायरा बढ़ाने की ओर क़दम बढ़ाया था.
इस बीच, रूस के राष्ट्रपति पुतिन का मंगोलिया द्वारा गर्मजोशी से किए गए स्वागत ने उस प्रक्रिया को धक्का पहुंचाया है.
इससे यह भी साफ़ हुआ है कि रूस और उसके पड़ोसियों के बीच के रिश्ते पहले की तरह मज़बूत ही हैं.
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