कमलनाथ के बीजेपी में जाने या न जाने को लेकर सस्पेंस क्यों है बरक़रार – प्रेस रिव्यू

कांग्रेस नेता कमलनाथ के बीजेपी में शामिल होने को लेकर अब भी सस्पेंस बरक़रार है.

अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस सूत्रों के हवाले से लिखता है कि कमलनाथ इस समय दुविधा में हैं कि वो जाएं या न जाएं.

कांग्रेस के सूत्रों का कहना है कि कमलनाथ के समर्थक विधायकों तक पहुंचने की कोशिशें की जा रही हैं.

रविवार को कांग्रेस की मध्य प्रदेश ईकाई ने सभी विधायकों को साथ रखने के उद्देश्य से सभी को फ़ोन लगाया.

वहीं कमलनाथ से जुड़े क़रीबी सूत्रों ने कहा कि कांग्रेस उन पर दबाव बना रही है कि वो बीजेपी में न जाएं.

इसके साथ ही कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व को भी ये आभास है कि बीजेपी भी कमलनाथ को शामिल करने को लेकर दुविधा में है क्योंकि उन पर 1984 सिख विरोधी दंगों में शामिल होने के आरोप लग चुके हैं.

कमलनाथ के बेटे जा सकते हैं

अख़बार लिखता है कि कांग्रेस के सूत्रों ने कहा है कि कमलनाथ कांग्रेस छोड़ने को लेकर उत्सुक हैं लेकिन वो सिर्फ़ अपने लोकसभा सांसद बेटे नकुल नाथ को ही बीजेपी में भेज पाएंगे. हालांकि चिंता उनको लेकर नहीं बल्कि उनके क़रीबी विधायकों को लेकर है.

कमलनाथ अपने पांच दिन का छिंदवाड़ा का दौरा रद्द कर शनिवार को दिल्ली आ गए थे. ये तब हुआ था जब बीजेपी के मध्य प्रदेश ईकाई के अध्यक्ष वीडी शर्मा ने कहा था कि कमलनाथ का पार्टी में स्वागत है.

कांग्रेस के सूत्र अख़बार से कहते हैं कि कमलनाथ अपने विश्वास पात्रों और कम से कम एक दर्जन विधायकों के साथ दिल्ली में डटे हुए हैं और अपने भविष्य की योजना का ख़ाका तैयार कर रहे हैं.

इनमें से कम से कम तीन विधायक छिंदवाड़ा से हैं जबकि बाक़ी अलग-अलग जगहों से हैं और वो कमलनाथ की चुप्पी टूटने का इंतज़ार कर रहे हैं कि उनका अगला क़दम क्या होगा.

ग़ौरतलब है कि रविवार को कमलनाथ ने नई दिल्ली में अपने आधिकारिक आवास से बाहर आते हुए पत्रकारों से कहा था कि ‘अगर ऐसा होता है तो मैं सबसे पहले आपको सूचित करूंगा.’

वहीं कमलनाथ के क़रीबी सज्जन सिंह वर्मा से लेकर मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू वटवारी तक कह चुके हैं कि कमलनाथ कांग्रेस नहीं छोड़ने जा रहे हैं.

छिंदवाड़ा गया कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल

अख़बार लिखता है कि इन सब बयानों के बावजूद कांग्रेस नेता कमलनाथ के क़रीबियों को मनाने में लगे हुए हैं. बातचीत के लिए कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल भोपाल से छिंदवाड़ा भी गया है.

इस प्रतिनिधिमंडल के एक वरिष्ठ नेता ने अख़बार से कहा, “कमलनाथ के एक या दो क़रीबियों को हमने मनाने की कोशिश की. हमने उनसे कहा कि वो उप-चुनाव लड़ने के लिए तैयार नहीं हैं और न ही उनके पास दल-बदल विरोधी क़ानून से बचने के लिए संख्याबल है. कुछ नेताओं के दिमाग़ में भविष्य की योजना को लेकर संशय भी है.”

एक अन्य कांग्रेस नेता ने कहा, “हम उन्हें (पार्टी में) रखने के लिए कई तरह के तरीक़े अपना रहे हैं. हमने इन नेताओं से वादा किया है कि हम उन्हें पार्टी में बेहतर पद देंगे. हमने एक विधायक से वादा किया है कि हम उन्हें छिंदवाड़ा से लोकसभा का उम्मीदवार भी बनाएंगे.”

इस समय छिंदवाड़ा ज़िले से छह विधायक हैं जो कमलनाथ के क़रीबी समर्थक हैं. इनके अलावा कम से कम नौ और विधायक कमलनाथ के समर्थक हैं जो जबलपुर और ग्वालियर से हैं.

इनके अलावा पार्टी के पदों पर बैठे अन्य नेता हैं जो उनके भरोसेमंद हैं. साथ ही 2022 में चुने गए पांच मेयर भी उनके समर्थक हैं.

आंदोलन में कूद सकते हैं हरियाणा के किसान संगठन

भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा है कि अगर आंदोलन कर रहे किसानों की सरकार के साथ वार्ता विफल रहती है तो हरियाणा के किसान संगठन और खाप पंचायतें भी उनके समर्थन में उतर आएंगी.

द हिंदू की ख़बर के अनुसार, उन्होंने दिल्ली के किसानों से बातचीत कर उनका समर्थन जुटाने के लिए चार सदस्यों की एक कमेटी का गठन करने का भी एलान किया.

चढ़ूनी ने ये एलान कुरुक्षेत्र में किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक के बाद किया. उन्होंने कहा कि आंदोलन को आगे कैसे बढ़ाया जाएगा, यह किसानों और सरकार के बीच होने वाली वार्ता के बाद तय किया जाएगा.

भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) को उत्तरी हरियाणा में ठीक-ठाक समर्थन हासिल है. यह संगठन संयुक्त किसान मोर्चा में शामिल था, जिसने तीन कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ 13 महीने तक चले किसान आंदोलन में हिस्सा लिया था.

हालांकि, वर्तमान में जारी आंदोलन से इस संगठन ने अभी तक ख़ुद को दूर रखा है.

छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण पर क़ानून लाने की तैयारी

छत्तीसगढ़ सरकार धर्मांतरण से जुड़ा एक नया क़ानून लाने वाली है.

इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार, इसके विधेयक का मसौदा तैयार है जिसे जल्द छत्तीसगढ़ विधानसभा में पेश कर दिया जाएगा.

अख़बार सूत्रों के हवाले से लिखता है इस विधेयक को लेकर सरकार की ओर से अभी तक ज़्यादा जानकारी नहीं दी गई है और विधानसभा में पेश करने से पहले इसमें अभी कुछ और संशोधन किए जा सकते हैं.

इसमें धर्मांतरण की प्रक्रिया में पुलिस वेरिफ़िकेशन और धर्मांतरण करने से एक महीना पहले प्रशासन को जानकारी देना अनिवार्य करने जैसे बिंदू शामिल हो सकते हैं.

साथ ही, 'चालाकी से' या 'जबरदस्ती' धर्म बदलवाना अमान्य होगा. डीएम ऐसी किसी बात की जानकारी मिलने पर धर्मांतरण को अवैध घोषित करेगा और कार्रवाई भी कर सकता है.

बीजेपी के संविधान में अध्यक्ष को लेकर अहम बदलाव

भारतीय जनता पार्टी ने अपने राष्ट्रीय अधिवेशन में अपने संविधान में संशोधन किया है. इस संशोधन के तहत संसदीय बोर्ड को आपात स्थिति में अध्यक्ष से संबंधित फ़ैसले लेने की अनुमति दी गई है.

जनसत्ता में छपी ख़बर के अनुसार, संसदीय बोर्ड अध्यक्ष के कार्यकाल के विस्तार पर फ़ैसला ले सकता है.

आमतौर पर बीजेपी में अध्यक्ष का चुनाव संगठनात्मक चुनावों के ज़रिये किया जाता है. इस चुनाव में निर्वाचक मंडल की अहम भूमिका होती है, जिसमें राष्ट्रीय परिषद और प्रदेश परिषदों के सदस्य शामिल होते हैं.

पार्टी संविधान में लिखा गया था कि निर्वाचक मंडल में से कोई भी बीस सदस्य राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव लड़ने वाले व्यक्ति का नाम संयुक्त रूप से प्रस्तावित कर सकते हैं.

यह संयुक्त प्रस्ताव कम से कम ऐसे पांच प्रदेशों से आना चाहिए, जहां राष्ट्रीय परिषद के चुनाव संपन्न हो चुके हों.

अख़बार ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि भविष्य में अपने अध्यक्षों की नियुक्ति के लिए यह संशोधन किया गया है.

इससे संगठन का ध्यान उन जगहों के मज़बूत नेताओं को साथ लाने पर होगा, जहां बीजेपी बहुत मज़बूत नहीं रही है.

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