You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
इसराइल लेबनान में यूएन के शांति सैनिकों से क्यों ख़फ़ा है?
- Author, वेर डेविस
- पदनाम, मध्य पूर्व संवाददाता
इसराइल और संयुक्त राष्ट्र के बीच हाल ही के दिनों में तनाव फिर बढ़ा है.
इसकी वजह दक्षिणी लेबनान में यूएन के लिए काम करने वाले शांति सैनिकों की मौजूदगी है.
हालांकि, इस विवाद की जड़ सालों से दोनों के बीच कायम अविश्वास और आरोप-प्रत्यारोप हैं.
ताज़ा घटनाक्रम में, यूएन पीसकीपिंग ऑपरेशन के प्रमुख ने सोमवार को इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के एक आग्रह को नकार दिया.
इसमें प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने यूनिफ़िल यानी 'यूनाइटेड नेशंस अंतरिम फ़ोर्स इन लेबनान' को ‘युद्ध क्षेत्र से बाहर निकल जाने की बात कही थी.
संयुक्त राष्ट्र शांति सेना की स्थापना 1978 में दक्षिणी लेबनान में इसराइली हमले के बाद हुई थी.
2006 में जब इसराइल और हिज़्बुल्लाह के बीच युद्ध हुआ तो इसके बाद वहां शांति और निगरानी बनाए रखने के लिए इसकी भूमिका बढ़ गई थी.
मैंने संयुक्त राष्ट्र से निर्धारित 120 किलोमीटर की ‘‘ब्लू लाइन’’ सीमा पर यूएन की शांति सेना की गश्ती को फिल्माया है. यह यूएन की ओर से निर्धारित वो सीमा है, जो इसराइल और लेबनान को अलग करती है.
इस दौरान दक्षिणी लेबनान में 50 लाख वर्ग मीटर ज़मीन को नष्ट करते हुए देखा है, वहाँ यूनिफ़िल ने पहले के युद्ध में बच गए विस्फोटकों और 51 हज़ार से ज़्यादा बारूदी सुरंगों को नष्ट किया है.
मगर, इसराइल ने यूनिफ़िल पर अन्य प्रमुख ज़िम्मेदारियों में से एक में बुरी तरह असफल होने का आरोप लगाया, जो यूएन सिक्योरिटी काउंसिल रिजॉल्यूशन 1791 के तहत यूएन के दक्षिणी लेबनान में लेबनानी सेना के अलावा अन्य सुरक्षा बलों से मुक्त क्षेत्र बनाने से जुड़ी है.
इसराइल के मंत्री ने सोशल मीडिया पर क्या लिखा?
इसराइली कैबिनेट मंत्री एली कोहेन ने हाल ही में सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा था, ‘‘यूएन एक असफल संगठन और यूनिफ़िल एक ग़ैरज़रूरी सेना है, जो रिजॉल्यूशन 1791 को लागू करने में असफल रही है और हिज़्बुल्लाह को दक्षिणी लेबनान में स्थापित होने से रोकने में विफल रही है.’’
इसराइल ने आरोप लगाया कि उस क्षेत्र में हिज़्बुल्लाह के फिर एकत्रित होने और हथियार बंद होने के मामले में यूनिफ़िल ने आंख बंद कर रखी है.
ईरान के समर्थन वाला ये शिया संगठन विशाल सेना का रूप ले चुका है, जो आधिकारिक लेबनानी सेना से भी बड़ा है.
हिज़्बुल्लाह को इसराइल, यूके, यूएस समेत अन्य देशों ने चरमपंथी संगठन घोषित कर रखा है.
इसराइल समर्थक दबाव समूह 'यूएन वॉच' का दावा है कि यूनिफ़िल ने ‘‘कुछ नहीं किया’’ जबकि ‘‘हिज़्बुल्लाह इसराइल पर आक्रमण करने के लिए सुरंग खोद रहा था. इसराइली नागरिकों का अपहरण कर रहा था और उन पर हमला कर रहा था.’’
यूएन वॉच और इसराइली सरकार के मीडिया ऑफिस ने हाल ही के दिनों में ऐसे कई बयान दिए हैं, जिनमें आरोप लगाया गया कि हिज़्बुल्लाह स्वतंत्र रूप से यूएन के ठिकानों और चौकियों के अलावा ब्लू लाइन के पास काम करने में सक्षम था.
इसराइली सैनिकों ने जब सीमा पार करके लेबनान में प्रवेश किया तो उन्हें बड़ी संख्या में बारूदी सुरंगे, भारी गोला-बारूद और उपकरण मिले, जो इसराइल पर हमला करने के लिए रखे गए थे.
नेतन्याहू ने वीडियो मैसेज में क्या कहा?
इस सप्ताह बिन्यामिन नेतन्याहू ने यूएन सेक्रेटरी जनरल को संबोधित करते हुए एक वीडियो मैसेज में कहा कि 'यही कारण है कि इसराइल यह मांग कर रहा है कि यूनिफ़िल बलों को दक्षिणी लेबनान के युद्ध क्षेत्र से दूर किया जाए.'
इसराइली प्रधानमंत्री ने एंटोनियो गुटेरस से अपील की कि हिज़्बुल्लाह को यूएन के शांति सैनिकों का इस्तेमाल “मानव ढाल” (ह्यूमन शील्ड) के तौर पर करने की अनुमति न दी जाए.
उन्होंने कहा, "सेक्रेटरी जनरल का यूनिफ़िल बलों को वहां से निकालने से इनकार करना उनको हिज़्बुल्लाह के बंधक बनाकर उनको और हमारे सैनिकों की जान को ख़तरे में डाल रहा है.’’
एक अक्तूबर को किए गए इसराइल के ज़मीनी हमले में 5 यूनिफ़िल शांति सैनिक घायल हो गए थे, इसके बाद व्यापक स्तर पर इसराइल की आलोचना की गई थी.
कई घटनाओं में इसराइल ने यूनिफ़िल के स्पष्ट ठिकानों को निशाना बनाया जबकि एक मामले में इसराइली टैंक यूनिफ़िल परिसर में जबरन घुस गए थे.
इसराइल ने इन घटनाओं को लेकर स्पष्टीकरण की पेशकश भी की, मगर फिर ऐसा न हो, इसके लिए यूनिफ़िल बलों को उस क्षेत्र से हटाये जाने की बात कही, जिसका जवाब स्पष्ट तौर पर ‘‘ना’’ में मिला.
यूनिफ़िल के एक प्रवक्ता ने इसराइली सेना पर ‘‘जानबूझकर’’ उसके ठिकानों पर गोलीबारी करने का आरोप लगाया.
यही नहीं, यूनिफ़िल में योगदान देने वाले 40 देशों ने पिछले सप्ताह कहा, ‘‘हाल ही में शांति सैनिकों पर हमला किए जाने की वे कड़ी निंदा करते हैं.’’
स्विट्ज़रलैंड की यूएन एंबेसेडर पास्केल बेरिस्वेल ने न्यूयॉर्क में यूएन सिक्योरिटी काउंसिल की सभा में, सभी पक्षों से अपील की है कि "यूएन परिसरों और यूनिफ़िल सदस्यों की सुरक्षा का सम्मान करें.’’
उन्होंने अपने बयान में, "यूनिफ़िल को सहयोग देने की बात दोहराई और क्षेत्रीय स्थिरता के समर्थन में अपनी भूमिका को रेखांकित किया."
संयुक्त राष्ट्र के निकाय ग़ज़ा के मामले में इसराइल को ज़िम्मेदार ठहराने की कोशिश कर रहे हैं, जहां पिछले सप्ताह से इसराइली सैनिक उत्तरी इलाक़े से हमास के लड़ाकों को खदेड़ने के लिए बड़े हमले में शामिल रहे हैं. इसमें जबालिया शरणार्थी कैंप भी शामिल है.
इसराइली डिफ़ेंस फोर्सेस ने कहा कि उन्होंने हज़ारों नागरिकों को तथाकथित ‘‘सुरक्षित इलाक़ों’’ के लिए संघर्ष क्षेत्र छोड़ने को लेकर स्पष्ट आदेश जारी किये हैं.
मगर उत्तर में चार लाख लोग फंसे होने के कारण ग़ज़ा में कुछ इलाक़े सुरक्षित कहे जा सकते हैं. कई रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसराइल के ताज़ा हमले में कम से कम 300 लोग मारे जा चुके हैं.
इसके चलते संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकार कार्यालय ने कठोर शब्दों में एक बयान जारी किया.
इसमें कहा गया, ‘‘आईडीएफ हज़ारों फ़लस्तिनियों को फंसा रहा था, इनमें नागरिक भी शामिल हैं, जो अपने घरों और आश्रय स्थलों में फंस गए, उनके पास न खाना था और न जीवन जीने के लिए ज़रूरी चीजें.’’
इस बयान में इसराइल पर उस इलाक़े को शेष ग़ज़ा से पूरी तरह काट देने का आरोप लगाया गया. और कहा गया कि इसराइली सैनिकों ने क्षेत्र से भाग रहे नागरिकों पर गोलियां चलाई, जो एक युद्ध अपराध भी हो सकता है.
आगे क्या करेगा इसराइल?
इसराइल ने कहा कि वो उत्तरी ग़ज़ा में ज़्यादा खाना और मेडिकल सामग्री भेज रहा है, जबकि हमास इस कोशिश में है कि आम लोग जबालिया छोड़कर न जाए, वो लोगों को रोकने की कोशिश कर रहा है.
वर्तमान में इसराइली प्रशासन में कई लोगों का मानना है कि मूल बात यह है कि पिछले कई सालों से संयुक्त राष्ट्र और यह संगठन सहज और संरचनात्मक तौर पर इसराइल विरोधी रहे हैं.
इसराइल अब यूएनआरडब्ल्यूए के ख़िलाफ़ अभूतपूर्व क़ानूनी कदम उठाने जा रहा है.
यह संयुक्त राष्ट्र का निकाय है. इसका गठन 70 साल से भी पहले किया गया था. इसका उद्देश्य मध्य पूर्व में फलस्तिनी शरणार्थियों की मदद करना था. इनमें ग़ज़ा और वेस्ट बैंक भी शामिल हैं.
इसराइल लंबे समय से यूएनआरडब्ल्यूए पर आरोप लगाता रहा है कि यह निकाय उसके हितों के ख़िलाफ़ सक्रिय रूप से काम कर रहा है.
वह कहता है कि यूएनआरडब्ल्यूए के सदस्य हमास द्वारा 7 अक्तूबर को किए गए हमले में सीधे तौर पर शामिल थे.
हज़ारों बंदूकधारियों ने ग़ज़ा से सीमा पार की और दक्षिणी इसराइल में घुस कर हमला कर दिया जिसमें 1200 लोग मारे गए और 251 लोगों को बंधकों के तौर पर ग़ज़ा में लेकर चले गए.
यूएन के साथ ख़राब होते रिश्ते
सात अक्तूबर के हमले में यूएनआरडब्ल्यूए के 12 सदस्यों के शामिल होने का भी आरोप है.
यूएनआरडब्ल्यूए के कुल कार्यबल में 13 हज़ार लोग हैं.
यूएन में इसराइल के राजदूत डैनी डेनन ने सुरक्षा परिषद से कहा कि यूएनआरडब्ल्यूए ने हमास को अपने सिपाहियों में घुसपैठ करने की अनुमति दी है. “यह घुसपैठ इतनी गहरी और संस्थागत है कि इसे सुधारना असंभव है.”
इसे ख़त्म करने की मांग के लिए, एक समिति ने इसराइली संसद में एक क़ानून पास किया है, जो यूएनआरडब्ल्यूए को इसराइल के इलाक़े में काम करने से प्रतिबंधित करता है.
इसके बाद इसराइली सरकार और इस एजेंसी के बीच सारे संपर्क ख़त्म हो जाएंगे.
यूएनआरडब्ल्यूए ने इसकी प्रतिक्रिया में कहा कि यह क़ानून अपनाया जाता है तो निकाय द्वारा ग़ज़ा और वेस्ट बैंक में किए जा रहे मानवीय कार्य “बाधित” हो सकते हैं.
फिलिप लेज़ारिनी ने कहा कि वरिष्ठ इसराइली अधिकारी “यूएनआरडब्ल्यूए को नष्ट करने पर अड़े हुए हैं”, जबकि वो ग़ज़ा में मानवीय सहायता मुहैया करवाने वाला मुख्य प्रबंधक है.
वह ग़ज़ा की 22 लाख की जनसंख्या के बड़े हिस्से के लिए स्कूल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सामाजिक सेवाओं का संचालन करता है.
लेकिन यूएन और इसके सदस्य देशों की आलोचनाएं इसराइल को ग़ज़ा और लेबनान या उसके कब्ज़े वाले इलाक़े में उसके सैन्य लक्ष्यों को पाने से नहीं रोक पाएंगी. सबसे अहम है कि उसे संयुक्त राज्य अमेरिका का समर्थन मिल रहा है.
उल्लेखनीय तौर पर इसराइल अब संयुक्त राष्ट्र महासचिव को अपने यहां प्रवेश देने से रोकने तक पहुंच गया है.
विदेश मंत्री, इज़राइल काइट्ज ने कहा कि 'एंटोनियो गुटेरेस अब महत्वहीन हो चुके हैं, क्योंकि, उन्होंने ईरान के इसराइल पर किए गए मिसाइल हमले की स्पष्ट रूप से निंदा नहीं की थी.'
इसके बाद गुटेरेस ने हमले की कड़ी निंदा की. लेकिन फिर इसराइल ने प्रतिबंध नहीं हटाया गया.
हालांकि इसराइल अपने अस्तित्व का श्रेय यूएन को दे सकता है, इस निकाय ने 1947 में इसके लिए वोट दिया था.
लेकिन इस संगठन के साथ इसराइल के रिश्ते कभी भी इतने बुरे नहीं रहे हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित