अंतरराष्ट्रीय योग दिवसः अमेरिका में योग कैसे पहुंचा?
यशवंत राज
बीबीसी न्यूज़ के लिए, वॉशिंगटन से

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ये शुक्रवार की रात है और लंबे सप्ताहांत की शुरुआत भी.
डियाना कैंग मंद रोशनी वाले कमरे में खड़ी हैं, जिसकी दीवारों पर शीशे लगे हैं.
कमरे में कोनों पर लगे दो पाइप से भाप निकल रही है. अमेरिका के मैरिलैंड में स्थित उनके हॉट योग स्टूडियो में ये उनके दिन की अंतिम क्लास है.
उनसे योग सीखने वालों में से स्टीव एक्स भी हैं. वो एक बेंच पर बैठे हैं और पसीना पोछते हैं. वो पसीने से तर बतर हैं लेकिन ख़ुश हैं.
वो कहते हैं, ये क्लास कैंसर से उनके ठीक होने के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं.
क्या ये कारगर है? इस सवाल के जवाब में वो कहते हैं, “बेशक़, हॉट योग पर मुझे बहुत भरोसा है.”
हालांकि उन्होंने योग के अलग-अलग तरीकों को भी आजमाया लेकिन हॉट योगा उन्हें सबसे सही लगा.

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वॉशिंगटन डीसी के बाहर हरे भरे इलाक़े में स्थित कैंग का बिक्रम हॉट योगा स्टूडियो एक समय अमेरिका में विवाद का हिस्सा भी रहा, जिसे कोलकाता के एक अनजाने से व्यक्ति बिक्रम चौधरी ने शुरू किया था.
अपनी प्रसिद्धि के चरम पर वो एक ऐसे साम्राज्य के मालिक थे जो तीन महाद्वीपों में फैला था और उनके शिष्यों में मैडोना और लेडी गागा जैसी मशहूर हस्तियां थीं.
उनका दावा था कि उन्होंने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपतियों रिचर्ड निक्सन, रोनाल्ड रीगन और बिल क्लिंटन को भी योग सिखाया है.
साल 2017 में वो अमेरिका से भाग गए. इसके दो साल बाद 2019 में नेटफ़्लिक्स ने उन पर बनी एक डॉक्युमेंट्री प्रसारित की- ‘बिक्रमः योगी, गुरु प्रीडेटर.’
इस बुधवार को जब भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस समारोह में हिस्सा ले रहे होंगे, कैंग इस दिन लोगों को निःशुल्क योग सिखा कर ये दिन मनाएंगी.

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स्वामी विवेकानंद ने कराया परिचय
ऐसा माना जाता है कि स्वामी विवेकानंद अमेरिकियों का योग से परिचय कराया था.
वो 130 साल पहले शिकागो में हुए 1893 के विश्व धर्म संसद में शामिल होने गए थे, जहां उन्होंने अपना ऐतिहासिक भाषण दिया था, जिसकी शुरुआत ‘अमेरिका के प्यारे भाइयों और बहनों’ से की थी.
लेकिन अपने साथ योग के जिस स्वरूप को लेकर वो गए थे, वो दुनिया में अन्य जगहों पर किए जाने वाले योग से भिन्न था.
योग के एक विद्वान फिलिप डेसलिप ने एक लेख में लिखा, “जैसा आज योग को जाना जाता है, उससे वो बिल्कुल अलग था. विवेकानंद ने योग के दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक और ख़ुद में सुधार के पहलू से काफ़ी कुछ बोला.”
1920 और 30 के दशक के शुरुआती योग टीचर जादुई या रहस्यमई पहलू से योग को सिखाते या प्रचार करते थे, जिसका वैज्ञानिक परम्पराओं से कोई संबंध नहीं होता था.
इनमें से अधिकांश टीचर पहले से ही अमेरिका में अन्य पेशे में थे और हालात के मारे उन्होंने इस क्षेत्र को चुना.
साल 1923 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने एक फ़ैसला दिया कि जो गोरे नहीं है वो अमेरिकी नागरिकता पाने की योग्यता नहीं रखते. कुछ लोगों ने इस फ़ैसले की वजह से अपनी अमेरिकी नागरिकता खो दी.

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सुपर योग साइंस के प्रणेता हरि राम
इन्हीं में से योगी हरि राम एक थे. वो 1910 के दशक में मोहन सिंह के रूप में पंजाब से अमेरिका आए और यहां एक तेजतर्रार पायटल बन गए.
लेकिन नागरिकता खोने और एक निवेश में पैसा गंवाने के बाद वो धर्मगुरु बन गए, योग सीखा और पूरे देश में घूम घूम कर ‘सुपर योगा साइंस’ सिखाना शुरू कर दिया.
डेसलिप ने योगी हरि राम के बारे में भी लिखा है. वो कहते हैं कि नई सदी के साथ ही भारत में ‘हठ योगा रेनेसां’ (हठ योग पुनर्जागरण) की शुरुआत स्वामी कुवालायानंद ने की, जिसके बाद अमेरिका में भी चीजें बदलना शुरू हुईं.
स्वामी एक तर्कवादी थे जिन्होंने योग को रहस्यवाद, जादू और मंत्र की दुनिया से बाहर निकाला और इसे वैज्ञानिक आधार प्रदान किया. हठ योग में शारीरिक भंगिमाओं और सांस पर फोकस किया जाता है.
फ़िलिप कहते हैं, “भविष्य के योग का ये ये एक मॉडल था. अधिक वैज्ञानिक और तार्किक टीचरों ने आसन और व्यायाम को और समृद्ध किया. और इसलिए अमेरिका में भी 30 के दशक में एक बड़ा बदलाव आया.”
आज योग वैश्विक स्तर पर एक लोकप्रिय ट्रेंड बन चुका है, “ये सेलेब्रेटी गुरुओं द्वारा प्रचारित किया जा रहा है. टेलीविज़न पर इसका प्रचार आता है. टीवी पर योग सिखाने वाले टीचरों की भरमार है. उन्होंने सस्ती किताबें छापनी शुरू कर दीं.”
फिलिप आगे कहते हैं, “इसने योग को और आकर्षक बना दिया.”

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वे 3 योग गुरु जिनका है बड़ा असर
योग शैलियों को लोकप्रिय बनाने में भारत के तीन लोगों का बड़ा योगदान रहा हैः के पट्टाभि जोइस ने एक प्राचीन शैली अष्टांग योग को लोकप्रिय बनाया; बीकेएस अयंगर, जिनकी शैली को ही अयंगर योग के नाम से जाना गया और बिक्रम चौधरी.
पट्टाभि और अयंगर भारत में रहते थे और योग सिखाने, प्रचार करने और योग केंद्र स्थापित करने के लिए वो अमेरिका की बार बार यात्रा करते थे.
बिक्रम चौधरी अमेरिका में ही रह गए और 1990 के दशक में अपनी शैली का योग ब्रांड बन गए.
इसके बाद तो योग में कई और नई अमेरिकी पद्धतियां जुड़ती गईं. उदाहरण के लिए अनुसारा योगा इंसान की अंदरूनी अच्छाईयों पर आधारित है. ब्रोगा योगा, इसमें मांशपेशियों की एक्सरसाइज़ होती है, बीयर योगा ब्रेवरीज़ में होता है जिसके दौरान लोगों को चखने की अनुमति होती है, हेवी मेटल योगा, भारी शोर वाले मेटल म्यूज़िक में व्यायाम होता है. पॉवर योगा कड़ी मेहनत वाली शैली है और गोट योगा को बकरियों की मौजूदगी में व्यायाम का नाम दिया गया है.
सबसे ताज़ा आंकड़ा साल 2016 में योगा अलायंस और योगा जर्नल का है, जिसके सर्वे के अनुसार, अमेरिका में 3.6 करोड़ लोग योग करते हैं.
योगा क्लास और इससे जुड़े सामानों पर पर अमेरिकी 16 अरब डॉलर खर्च करते हैं. इन सामानों में पैंट जिनकी क़ीमत 100 डॉलर से अधिक हो सकती है, चटाईयां और घुटने पर पहनने वाले पैड आदि शामिल हैं.
इस सर्वे में ये भी पाया गया कि जिन पांच वजहों से लोग योग शुरू करते हैं उनमें है- फुर्तीलापन (61%), तनाव कम करने के लिए (56%); फ़िटनेस (49%); सेहत में सुधार के लिए (49%) और शारीरिक रूप से फ़िट रहने के लिए (44%).

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यहाँ खांटी अमेरिकी योगा
सूसान नुईबावर मैरिलैंड में योगा स्टूडियो चलाती हैं. उनके मुताबिक़, “योग ने पीठ के दर्द, बिना सर्जरी के हार्निया ठीक होने और बिना दवा के डिप्रेशन दूर करने में मदद की है.”
विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि अगर नियमित रूप से योग किया जाए तो इससे शारीरिक और मानसिक सेहत में सुधार होता है.
सूसान कहती हैं, “नियमित योग करने वाले जितने लोगों को मैं जानती हूं उस लिहाज से ये शारीरिक और भावनात्मक रूप से हमें अधिक लचीला बनाता है.”
योग देखने और समझने के लिए वो भारत भी आ चुकी हैं. यहां आकर वो दंग रह गईं क्योंकि यहां ये बिल्कुल अलग दिखा, “मैं मानती हूं कि मैं किसी भी बड़े आश्रम में नहीं गई.” लेकिन जो अंतर दिखा उससे वो प्रभावित हुईं.

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कुछ लोग कहते हैं कि अमेरिका में योग खांटी अमेरिकी स्टाइल का है. जैसे अमेरिकी पिज़्ज़ा. ये इटली से आया था और ब्रेड में टापिंग्स जैसा कुछ था. अमेरिका में ये इतालवी प्रवासियों द्वारा लाया गया और फिर आज जिस रूप में दुनिया पिज़्ज़ा को जानती है वैसा बना दिया.
जिस तरह योग की अलग अलग शैली है, उसी तरह पिज़्ज़ा का भी अलग अलग वर्ज़न है.
1930 के दशक के हठ योगा रेनेसां का हवाला देते हुए फिलिप कहते हैं, “ये बहुत आधुनिक है, अंतरराष्ट्रीय है. रेनासां की शुरुआत से ही जो लोग योग के लिए प्रतिबद्ध थे, उन्होंने इसे लगातार संशोधित किया, सुधार किया और संतुलित बनाया.”
जैसे जैसे ये बिज़नेस फलने फूलने लगा, योग करने वालों को इसके व्यावसायिकरण की चिंता सताने लगी क्योंकि बहुत से अपरिपक्व इंस्ट्रक्टर और प्रमोटर बड़े पैमाने पर इसमें छा गए.
कोविड-19 महामारी का ज़िक्र करते हुए सुसान कहती हैं, “ये देख कर मैं दुखी हो गई कि किस तरह महामारी के दौरान योगा टीचिंग पेशे को सस्ती चीज़ बना दिया गया.”
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