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राहुल गांधी पर अनुराग ने संसद में कहा- जाति का पता नहीं... अखिलेश यादव भड़के, इस टिप्पणी पर तीखी बहस
बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने 30 जुलाई को संसद में राहुल गांधी को घेरते हुए कहा, ''जिसकी जाति का पता नहीं, वो गणना की बात करता है.''
राहुल गांधी संसद में अपने भाषणों के दौरान जातिगत जनगणना की बात करते रहे हैं. बजट पर चल रही बहस के दौरान भी राहुल ने संसद में ये मुद्दा उठाया था.
मंगलवार को अनुराग ठाकुर ने कहा, ''ओबीसी, जनगणना की बात बहुत की जाती है. माननीय सभापति जी जिसकी जाति का पता नहीं, वो गणना की बात करता है.''
अनुराग ठाकुर की इस टिप्पणी पर लोकसभा में काफ़ी हंगामा हुआ और विपक्षी खेमे ने तीखी आपत्ति जताई. विपक्ष ने कहा कि अनुराग ठाकुर किसी से जाति कैसे पूछ सकते हैं.
हंगामे के बीच राहुल गांधी ने अनुराग ठाकुर की टिप्पणी पर जवाब देते हुए कहा, ''उन्होंने मुझे अपमानित किया है, मुझे बोलने दीजिए. जितना आप लोग मेरी बेइज़्ज़ती करना चाहते हैं, आप ख़ुशी से करिए. आप रोज़ करिए. मगर एक बात मत भूलिए कि जातीय जनगणना को हम यहाँ पास करके दिखाएंगे. जितना बेइज़्ज़त करना है, करिए.''
अनुराग ठाकुर के इस भाषण पर अखिलेश यादव समेत इंडिया गठबंधन के सांसदों ने विरोध जताया. दूसरी तरफ़ अनुराग ठाकुर के भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए पीएम मोदी ने अनुराग ठाकुर की तारीफ़ की है.
अनुराग ठाकुर की जाति वाली टिप्पणी पर सोशल मीडिया पर भी काफ़ी बहस हो रही है. कई लोग अनुराग ठाकुर की आलोचना कर रहे हैं.
पत्रकार शीतल सिंह ने अनुराग ठाकुर ठाकुर का वीडियो क्लिप शेयर करते हुए लिखा है, ''जाति आधारित श्रेष्ठता की अनुराग ठाकुर द्वारा बघारी गई, इस शेख़ी की बीजेपी को बहुत बड़ी क़ीमत चुकानी पड़ेगी. राहुल गांधी के लिए यह अपमानजनक टिप्पणी वरदान साबित होगी.''
शीतल सिंह ने लिखा है, ''यह टिप्पणी देश की बहुसंख्यक आबादी में राहुल गांधी को स्वीकृति दिलवाएगी. जिन जाति के लोगों को हज़ारों साल से ऊंच-नीच का अपमान मिला है/मिलता है, यह टिप्पणी राहुल गांधी के लिए अपनापन पैदा करेगी.''
शीतल सिंह की इस टिप्पणी को रीपोस्ट करते हुए वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव ने लिखा है, ''वरदान साबित होगा या नहीं यह इस पर निर्भर करेगा कि राहुल और इंडिया गठबंधन कितनी कुशलता से इसे एक अस्त्र और आख्यान बना पाते हैं. लेकिन अनुराग ठाकुर का उच्च जाति अहंकार अपनी पूरी नग्नता में तो सामने आ ही गया है. वह भी संसद में. यह “देश के ग़द्दारों को गोली मारो …” के बाद दूसरी ग़लती है, जो भाजपा की बची-खुची वैचारिक आभा को काला करेगी.''
इंडिया गठबंधन के सांसदों का विरोध
राहुल गांधी के विरोध दर्ज करने के बाद लोकसभा में अनुराग ठाकुर ने कहा, ''इनको भाषण देने से पहले पर्ची आती होगी. हर बार पर्ची आती है. उधार की बुद्धि से राजनीति नहीं चलते हैं. बोलकर हटते हो और फिर पर्ची आती है.''
इसके बाद विपक्ष के सांसदों का विरोध कम नहीं हुआ. स्पीकर की कुर्सी पर बैठे जगदंबिका पाल ये कहते भी दिखे कि सांसद के आसन के पास ना रहें और अपनी सीट पर बैठ जाएं.
इस बीच राहुल गांधी ने फिर खड़े होकर कहा, ''जो भी इस देश में दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों की बात उठाता है, उसे गाली खानी ही पड़ती हैं. मैं ये सब गाली ख़ुशी से खाऊंगा. महाभारत में अर्जुन को सिर्फ़ मछली की आंख दिख रही थी. उसी तरह मुझे मछली की आंख दिख रही है. जातिगत जनगणना हम कराकर दिखाएंगे. आपको जितनी गाली देनी है, दीजिए. हम ख़ुशी से लेंगे.''
राहुल ने कहा, ''अनुराग ठाकुर ने मुझे गाली दी है. मगर मैं अनुराग ठाकुर से कोई माफ़ी नहीं चाहता हूं. मैं लड़ाई लड़ रहा हूं. मुझे माफ़ी नहीं चाहिए. जितनी आपको गाली देनी है, दे दीजिए.''
इसके बाद अखिलेश यादव ने कहा, ''माननीय मंत्री रहे हैं. बड़े दल के नेता हैं. बड़ी बात कर रहे थे. महाभारत, शकुनि ये सब बातें कह रहे थे. दुर्योधन तक यहां ले आए. मैं इनसे ये पूछना चाहता हूं कि आपने जाति कैसे पूछ ली, ये बताइए बस. आप जाति कैसे पूछ सकते हैं? पूछकर दिखाओ जाति तुम. कैसे पूछोगे जाति तुम. आप जाति नहीं पूछ सकते हैं?''
इस पर पीठासीन जगदंबिका पाल ने कहा- कोई इस सदन में किसी की जाति नहीं पूछेगा.
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अनुराग के भाषण की चर्चा
अनुराग ठाकुर के भाषण की तारीफ़ करते हुए पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा, ''मेरे युवा और ऊर्जावान साथी अनुराग ठाकुर का ये भाषण ज़रूर सुनना चाहिए. व्यंग्य, तथ्य का ये बढ़िया मिलन इंडी गठबंधन की गंदी राजनीति को उजागर करता है.''
प्रियंका गांधी वाड्रा ने अनुराग ठाकुर के भाषण की आलोचना करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, ''सामाजिक-आर्थिक-जातीय जनगणना इस देश के 80% लोगों की मांग है. आज भरी संसद में कहा गया कि जिनकी जाति का पता नहीं, वे गणना की बात करते हैं.''
प्रियंका ने कहा, ''क्या अब देश की संसद में देश की 80% जनता को गालियां दी जाएंगी? नरेंद्र मोदी जी को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या यह उनके कहने पर हुआ है?''
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया पर लिखा, ''आज हम सभी को यह आँकने की ज़रूरत है कि इस देश की तरक़्क़ी में हमारी कितनी भागीदारी है. बीजेपी-संघ वालों की हमसे यह छिपाने की साज़िश है ताकि वो हमें पिछड़ा रख सकें और इन बहानों से आरक्षण छीनकर हमारे अधिकारों पर क़ब्ज़ा जमा सकें.''
अखिलेश से अनुराग ठाकुर की बहस
सोशल मीडिया पर अनुराग ठाकुर के भाषण के कुछ हिस्सों की भी चर्चा हो रही है.
इसमें वो वाक़या भी है, जिसमें अखिलेश यादव ने कहा था कि वो आर्मी स्कूल से पढ़े हैं.
इस पर अनुराग ठाकुर जवाब देते हैं, ''ये तो केवल मिलिट्री स्कूल के हैं. मैं आज भी टेरिटोरियल आर्मी के 124वीं रेजीमेंट में कैप्टेन की रैंक पर अपनी सेवाएं दे रहा हूं. अखिलेश जी सिर्फ़ ज्ञान मत बाँटिए.''
इसके बाद अखिलेश यादव अनुराग ठाकुर के लिए कहते हैं, ''शायद मंत्री नहीं रहे, इसलिए तकलीफ़ ज़्यादा है.''
पीएम मोदी ने अपनी नई कैबिनेट में अनुराग ठाकुर को जगह नहीं दी है. पहले की सरकारों में वो अहम पदों पर रहे हैं.
अखिलेश ने कहा, ''हम आपका दर्द चेहरे से पढ़ते हैं. दर्द मैं बताता हूं. जबसे उत्तर प्रदेश से हारे हैं, तबसे कोई नमस्कार नहीं कर रहा है. तकलीफ़ वो है आपको. वो वीडियो हमने देखा है कि कोई किसी को नमस्कार नहीं कर रहा. कोई किसी को देख नहीं रहा है. जो अपने आपको बहुत ताक़तवर कहते थे, जिसने इनको हराया उसको हटा नहीं पा रहे हैं. अब बात समझ में नहीं आई न.''
बीते दिनों यूपी में योगी आदित्यनाथ और केशव प्रसाद मौर्य के बीच अनबन की ख़बरें आई थीं. सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा था जिसमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अभिवादन नहीं किया था.
अखिलेश यादव इसी नमस्कार का हवाला दे रहे थे.
केंद्र की एनडीए सरकार के बारे में अखिलेश यादव ने कहा, ''ये चलने वाली नहीं, गिरने वाली सरकार है. साइकिल हमारा चुनाव चिह्न है. साइकिल ही आपकी सरकार चला रही है. जिस दिन साइकिल हट गई, आप कहां बैठे मिलोगे.''
अपने भाषण के दौरान अनुराग ठाकुर ने इमरजेंसी लगाने और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर भी कांग्रेस को घेरा.
ठाकुर ने कहा- दुशासन और दुर्योधन कितने ही निर्दयी थे लेकिन उन्होंने कभी इमरजेंसी नहीं लगाई थी.
राहुल गांधी ने अपने भाषण में बजट से पहले हलवा सेरेमनी को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को घेरा था. अनुराग ने कहा, ''कांग्रेस राज में घोटालों का हलवा किसने खाया? राहुल जी वो हलवा मीठा था या फ़ीका?''
मगर इन बयानों में सबसे ज़्यादा चर्चा जाति वाले बयान की हो रही है.
अखिलेश और राहुल पर भी सवाल
अनुराग ठाकुर के जाति पर बोलने के बाद अखिलेश ने कहा कि किसी की जाति नहीं पूछ सकते.
मगर अतीत में संसद से बाहर अखिलेश यादव और राहुल गांधी ख़ुद भी जाति पूछते दिखे थे. सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे वीडियो अब शेयर किए जा रहे हैं.
फ़रवरी 2024 में भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान राहुल गांधी एक पत्रकार से पूछते दिखे थे, ''आप शिव प्रसाद जी हैं. आपके मालिक का क्या नाम है. नाम बताओ. मारो मत यार उसको. मारना नहीं है. नाम बताओ उसका. वो ओबीसी हैं? नहीं. वो दलित हैं? नहीं. वो आदिवासी हैं? नहीं. अरबपति हैं वो.''
एक वीडियो अखिलेश यादव का भी शेयर हो रहा है.
इस वीडियो में अखिलेश एक पत्रकार से कहते दिखते हैं- ''नाम क्या है इनका. पूरा नाम बताइए. पुष्पेंद्र सिंह. ये तो शूद्र नहीं हैं न.''
एक दूसरे वीडियो में अखिलेश ने पत्रकार से कहते दिखे थे- ऐ छोड़ो, अपना कैमरा कहीं और ले जाओ. तुम पिछड़ा हो कि क्या हो. नाम क्या है तुम्हारा?
कोई जवाब देता है- मिश्रा.
अखिलेश कहते हैं- ''ऐ मिश्रा जी, कुछ तो शर्म करो. पत्रकारिता करो यार.''
जातिगत जनगणना
लोकसभा चुनाव में विपक्षी पार्टियों ने 'संविधान बचाओ' का मुद्दा उठाया था.
कहा जा रहा है कि यह मुद्दा बीजेपी पर भारी पड़ा और इससे विपक्ष को फ़ायदा हुआ.
बीजेपी से जुड़े नेताओं के बयानों का हवाला देते हुए इंडिया गठबंधन ने अपनी चुनावी रैलियों में कहा था कि बीजेपी नेता 400 पार का नारा इसलिए दे रहे हैं, ताकि संविधान को बदल सकें.
हालांकि बीजेपी की ओर से इस दावे का खंडन किया गया और कहा गया कि ये झूठ है.
बिहार में इससे पहले जातिवार सर्वे हुआ था. इस सर्वे के बाद बिहार में अलग-अलग जातियों की संख्या बताई गई थी.
इन आंकड़ों के मुताबिक़, बिहार में सबसे बड़ी आबादी अत्यंत पिछड़ा वर्ग की है, जो राज्य की कुल आबादी के क़रीब 36 फ़ीसदी हैं. बिहार में पिछड़ा वर्ग क़रीब 27, अनुसूचित जाति 19, सवर्ण जातियां क़रीब 15, अनुसूचित जनजाति की आबादी 1.68 फ़ीसदी है.
राहुल गांधी अपने चुनावी प्रचार के दौर से ये कहते रहे हैं कि देश में ओबीसी, पिछड़ों और दलितों की जितनी संख्या है, उतनी हिस्सेदारी उन्हें ब्यूरोक्रेसी और अहम पदों पर नहीं मिलती है.
राहुल गांधी मोदी सरकार के टॉप ब्यूरोक्रेट्स में ओबीसी की संख्या को लेकर भी सवाल उठाते रहे हैं.
हालांकि मार्च 2024 में पीएम मोदी ने इसका जवाब देते हुए कहा था, "कांग्रेस के हमारे साथी बहुत चिंता जताते हैं कि सरकार में ओबीसी कितने हैं, उसका हिसाब किताब करते हैं. मैं हैरान हूँ कि उन्हें सबसे बड़ा ओबीसी (नरेंद्र मोदी) नज़र नहीं आता है."
1980 में मंडल कमीशन की रिपोर्ट में कहा गया था कि देश में ओबीसी की आबादी 52 फ़ीसदी के क़रीब है.
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