निमिषा प्रिया को बचाने के लिए भारत यमन में क्या कर रहा है, विदेश मंत्रालय ने बताया

यमन

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इमेज कैप्शन, निमिषा प्रिया को 2017 में यमन में अपने बिज़नेस पार्टनर की हत्या के मामले में मौत की सज़ा मिली है

यमन में केरल की नर्स निमिषा प्रिया को मिली सज़ा-ए-मौत के मामले में गुरुवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत सना के स्थानीय प्रशासन के संपर्क में है.

सना यमन की राजधानी है. भारत के विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि निमिषा मामले में इस इलाक़े के दोस्ताना संबंध वाले देशों से भी संपर्क किया जा रहा है.

भारत के अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू ने लिखा है कि सना के हूती प्रशासन के अलावा भारत सऊदी अरब, ईरान और पास के अन्य देशों से संपर्क में है, जिनका हूतियों पर असर है.

रणधीर जायसवाल ने कहा, ''यह एक संवेदनशील मामला है और भारत सरकार इसमें हर संभव मदद मुहैया करा रही है. हमने क़ानूनी मदद मुहैया कराई है और इस परिवार को मदद करने के लिए एक वकील की भी नियुक्ति की है. इस मामले को सुलझाने के लिए हम स्थानीय प्रशासन और परिवार से लगातार संपर्क में हैं. निमिषा के परिवार को और ज़्यादा समय मिले, इसके लिए भी हमने कोशिश की है.''

हालांकि अरब के मीडिया का कहना है कि यमन में भारत की राजनयिक मौजदूगी बहुत मज़बूत नहीं है, इसलिए भी दिक़्क़तें हो रही हैं.

इसबीच तलाल अब्दो महदी के भाई अब्दुल फ़तह महदी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा है कि उनके रुख़ में कोई बदलाव नहीं है. एक अरबी वेबसाइट के मुताबिक भाई ने फ़ेसबुक पोस्ट में लिखा है कि अपराधी को हर हाल में सज़ा मिलनी चाहिए.

रणधीर जायसवाल

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इमेज कैप्शन, भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल

भारत की मुश्किलें

यूएई की न्यूज़ वेबसाइट गल्फ़ न्यूज़ ने लिखा है, ''निमिषा प्रिया के मामले में भारत के सामने बड़ी चुनौती यह है कि यमन में उसकी राजनयिक मौजूदगी बहुत कम है. भारत हूतियों के शासन को मान्यता नहीं देता है. भारत के पास हस्तक्षेप के लिए बहुत ही सीमित विकल्प हैं. भारत क़बाइली और धार्मिक नेताओं के ज़रिए निमिषा की जान बचाने की कोशिश कर रहा है. आख़िरी पलों में भारत के ग्रैंड मुफ़्ती के ज़रिए कोशिश की गई और जिस दिन मौत मिलनी थी, उसे टालने में कामयाबी भी मिली. लेकिन ख़तरा अब भी टला नहीं है.''

16 जुलाई को निमिषा प्रिया की मौत की सज़ा देने की तारीख़ तय थी लेकिन ऐन मौक़े पर इसे टाल दिया गया था.

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निमिषा प्रिया को बचाने के अभियान में लगी 'सेव निमिषा प्रिया इंटरनेशनल एक्शन काउंसिल' ने मंगलवार को बताया था कि सोमवार, 14 जुलाई को केरल के सम्मानित और प्रभावशाली मुस्लिम धर्मगुरु माने जाने वाले ग्रैंड मुफ़्ती एपी अबूबकर मुसलियार ने 'यमन के कुछ शेख़ों' से निमिषा प्रिया मामले को लेकर बात की थी.

इसी बातचीत के बात 16 जुलाई को मिलने वाली मौत की सज़ा टल गई थी.

2017 में अपने एक बिज़नेस पार्टनर की हत्या के मामले में निमिषा प्रिया को यमन की स्थानीय अदालत ने 2020 में मौत की सज़ा सुनाई थी.

निमिषा प्रिया के बिज़नेस पार्टनर यमनी नागरिक तलाल अब्दो महदी थे. निमिषा अब्दो के साथ ही यमन की राजधानी सना में एक क्लिनिक चलाती थीं.अब्दो के शव के कई टुकड़े पानी के टंकी से बरामद हुए थे.

निमिषा के वकीलों ने नौ जुलाई को कहा था कि ' निमिषा को 16 जुलाई को मौत की सज़ा को दी जाएगी.'

अरबी न्यूज़ वेबसाइट अल-यमन-अल-ग़ाद ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि यमन के शरिया क़ानून के मुताबिक़ निमिषा के परिवार वालों ने पीड़ित परिवार को 10 लाख डॉलर ब्लड मनी के तौर पर ऑफर किया था लेकिन कोई समझौता नहीं हो पाया.

निमिषा प्रिया
इमेज कैप्शन, निमिषा प्रिया के बिज़नेस पार्टनर रहे यमनी नागरिक तलाल अब्दो महदी के भाई ने किसी भी तरह के सौदे से इनकार किया है

निमिषा की राह अब भी आसान नहीं

अल-यमन-अल-ग़ाद के अनुसार, ''निमिषा को बचाने में कई अहम धार्मिक स्कॉलर भी शामिल हैं. इसमें यमन के सूफ़ी स्कॉलर शेख़ हबीब उमर बिन हाफ़िज़ भी शामिल हैं. भारत सरकार भी राजनयिक स्तर पर कोशिश कर रही है लेकिन हूतियों से अच्छे संबंध नहीं होने के कारण सफलता नहीं मिल पा रही है. निमिषा प्रिया केस अब कोई सामान्य अपराध की घटना नहीं है. इसमें क़ानून, परंपरा, राजनीति और धर्म सब शामिल हो गए हैं. ''

अरबी न्यूज़ वेबसाइट अल-क़ुद्स ने अपनी रिपोर्ट में तलाल अब्दो महदी के भाई अब्दुल फ़तह महदी की फ़ेसबुक पोस्ट का ज़िक्र किया है.

बुधवार की गई पोस्ट में उन्होंने लिखा है, ''मध्यस्थता और बातचीत में कुछ भी नया नहीं है और न ही हैरान करने वाला है. सालों से इस मामले में मध्यस्थता की पुरज़ोर कोशिश की गई है. इसके बावजूद हमारे रुख़ में कोई बदलाव नहीं आया है. हमारी मांगें स्पष्ट हैं. अपराधी को सज़ा मिलनी चाहिए. इसके अलावा हमें कुछ और नहीं चाहिए.''

''दुर्भाग्य से मौत की सज़ा टल गई है, जिसकी हमें उम्मीद नहीं थी. अदालत को पता है कि हमने किसी भी तरह के समझौते से इनकार कर दिया है. जब तक मौत मिल नहीं जाती हमारी कोशिश जारी रहेगी. किसी भी दबाव में हम झुकने वाले नहीं हैं. ख़ून का सौदा नहीं हो सकता है. इंसाफ़ मिलने में भले लंबा वक़्त लगे लेकिन हम कोई समझौता नहीं करेंगे.''

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.