श्रेयस अय्यर शतक से चूके पर कांटे की टक्कर में पंजाब निकला गुजरात से आगे

    • Author, विमल कुमार
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में अक्सर वन-डे मैचों के दौरान या फिर टेस्ट मैचों में भी रनों का ही अंबार देखने को मिलता है.

टी20 मैचों में दूसरी पारी में टीमों को बल्लेबाज़ी करने में और सहूलियत मिलती है क्योंकि ओस के चलते विरोधी टीम को परेशानी होती है.

लेकिन, इन तमाम बातों के बीच पंजाब किंग्स ने गुजरात टायटंस को एक रोमांचक मुकाबले में 11 रनों से मात दे दी.

ये ऐसा मुकाबला था जिसका फ़ैसला दोनों पारियों के आखिरी 5 ओवर में देखने को मिले.

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शतक से चूके अय्यर

कप्तान श्रेयस अय्यर आख़िरी ओवर में 97 रन पर खेल रहे थे लेकिन स्ट्राइक न मिलने के कारण सेंचुरी से चूक गए. अय्यर ने शशांक सिंह को कहा कि उन्हें कप्तान के शतक की परवाह किए बिना हर गेंद पर हमला बोलना है.

शशांक सिंह ने मोहम्मद सिराज के आख़िरी ओवर में बेफिक्र अंदाज़ में में 5 चौके लगा दिये.

मैच के बाद शशांक ने बताया, "श्रेयस ने मुझे पहले ही कह दिया था कि मेरे 100 की चिंता मत करना."

अय्यर भले ही शतक बनाने से चूके हों लेकिन उनकी 97 रनों की पारी को किसी भी तरीके से आईपीएल के किसी शतक से कम नहीं आंका जा सकता है.

हाल ही में टीम इंडिया की चैंपियंस ट्रॉफी की कामयाबी में सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले अय्यर ने अपनी दुबई वाली फॉर्म को अहमदाबाद में और बेहतर ही किया और महज़ 42 गेंदों पर 5 चौके ही नहीं बल्कि 9 छक्के जड़ दिए.

230 से ज़्यादा की स्ट्राइक रेट से बनी इस पारी में सबसे ख़ास रहा तेज़ गेंदबाज़ प्रसिद्ध कृष्णा के ख़िलाफ उनका पलटवार.

32 गेंदों पर 66 रन बनाने वाले अय्यर के ख़िलाफ़ जब कृष्णा अपने तीसरे ओवर की पहली गेंद से उनके पंजे पर चोट पहुंचायी तो उसके बाद दर्द अय्यर ने गेंदबाज़ को दिए.

इसके बाद अगली 5 गेंदों पर अय्यर ने 24 रन लूटकर ये दिखाया कि शॉर्ट-पिच गेंदबाज़ी वाली थ्योरी की वो किस तरह से धज्जियां उड़ा सकते हैं.

छह छक्के लगाने वाले प्रियांश का धमाकेदार डेब्यू

लेकिन, अय्यर से पहले आक्रामकता की शुरुआत की युवा ओपनर प्रियांश आर्य ने.

आर्य ने 23 गेंदों पर 7 चौकों और 2 छक्कों की मदद से 47 रन बनाये जिसमें उन्होंने कगीसो रबाडा और मोहम्मद सिराज जैसे धुरंधर गेंदबाज़ों के ख़िलाफ़ ज़बरदस्त शॉट्स लगाए.

आर्य पहली बार सुर्खियों में पिछले साल दिल्ली प्रिमियर लीग के दौरान आए थे जब उन्होंने एक मैच में 6 गेंदों पर 6 छक्के लगाए थे.

इसके चलते आईपीएल ऑक्शन के दौरान पंजाब में 30 लाख की बेस प्राइस वाले इस अनकैप्ड युवा पर 3.8 करोड़ खर्च करने में हिचकिचाहट नहीं दिखाई थी.

पंजाब के कोच रिकी पोटिंग यूं ही आसानी से युवा खिलाड़ियों के बारे में सार्वजिनक तौर पर तारीफ़ नहीं करते हैं और जब वो ऐसा करते हैं तो खिलाड़ी या तो हार्दिक पंड्या या फिर ऋषभ पंत बनकर उभरता है.

पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान ने इस सीज़न के शुरू होने से पहले ही आर्य को, भविष्य के शानदार बल्लेबाज़ के तौर पर देखने की बात कही थी.

अपने पहले ही मैच में आर्य ने दिखाया है कि पोटिंग की राय को वो सही साबित करने की दिशा में पहला क़दम उठा चुके हैं.

शशांक की चमक

अगर आर्य का स्ट्राइक रेट 204 और अय्यर का 230 का रहा तो शंशाक सिंह ने 275 के स्ट्राइक रेट से तूफानी पारी खेलते हुए गुजरात के गेंदबाज़ों को हक्का-बक्का कर दिया.

पिछले सीज़न अपने खेल से धूम मचाने वाले शशांक ने जिस अंदाज़ में राशिद ख़ान जैसे दिग्गज की धुनाई की वो हैरतअंगेज़ रहा.

अगर पंजाब की टीम आख़िरी 4 ओवर में 77 रन जोड़ पायी तो इसके लिए शशांक के 25 गेंदों पर 44 रनों की भूमिका बेहद निर्णायक रही.

इसमें सबसे अहम बात रही मोहम्मद सिराज जैसे गेंदबाज़ को 5 चौके एक ही ओवर में जड़ना.

जीत के लिए 244 रनों की पीछा करने उतरी मेज़बान टीम को लगातार मुकाबले में बनाए रखने के लिए साई सुदर्शन और जोश बटलर के अर्द्धशतकों के अलावा कप्तान शुभमन गिल और रदरफ़ोर्ड की पारियों ने भी सराहनीय योगदान दिया.

वैशाख का इम्पेक्ट

लेकिन तभी नाटकीय अंदाज़ में एंट्री होती है कर्नाटक के तेज़ गेंदबाज़ और पंजाब के लिए इस मैच में इंपेक्ट गेंदबाज़ के तौर पर विजयकुमार बैशाख की.

जब वो गेंदबाज़ी करने के लिए मैदान में उतरे तो आख़िरी 6 ओवर में गुजारत को 74 रन चाहिए थे और उनके पास 8 विकेट बचे हुए थे.

इस समीकरण के साथ लक्ष्य मुश्किल ज़रा भी नहीं दिख रहा था.

लेकिन इस खिलाड़ी ने अपने 15वें और 17वें ओवर में यार्कर पर यार्कर करते हुए समां बांध दिया और सिर्फ 2 ओवर में 10 रन खर्च किए.

विकेट भले ही उन्हें नहीं मिला लेकिन विरोधी टीम के बल्लेबाज़ों में उन्होंने झुंझलाहट पैदा कर दी.

वैशाख के उन दो ओवरों की अहमियत का अंदाज़ा इस बात से लग जाता है कि उससे पहले पंजाब के 4 ओवर्स में 17, 17,14 और 17 रन पड़े थे.

मैच पूरी तरह से गुजरात की पकड़ में नज़र आ रहा था.

वैशाख के इन दो बेहतरीन ओवरों के बीच में मार्को यानसेन ने भी डेथ ओवर्स के दौरान पारी के 16वें ओवर में सिर्फ 8 रन खर्च किये और दबाव पूरी तरह से गिल की टीम पर आ गया.

मैच हारने के बाद कप्तान गिल ने खुद माना कि उनके बल्लेबाज़ों का उन तीन ओवरों के दौरान सिर्फ 18 रन बनाना उनकी टीम की हार की सबसे बड़ी वजह रही.

आख़िरी पांच ओवर बने निर्णायक

सही मायनों में देखा जाए तो बल्लेबाज़ों के दबदबे वाले मुकाबले में आखिरी 5 ओवर्स के खेल ने दोनों टीमों के नतीजे को बदलने में सबसे प्रभावशाली असर डाला.

अगर पंजाब ने आखिरी 5 ओवर में 77 रन बनाये तो उनके गेंदबाज़ों ने आखिरी 5 ओवर में सिर्फ 50 रन खर्च किये.

टी20 क्रिकेट और ख़ासतौर पर आईपीएल में डेथ ओवर्स में इतनी सुस्ती दिखाने के बाद बहुत कम मौकों पर ही टीमें मैच जीत पाती हैं और गुजरात भी इसका अपवाद नहीं रहा.

कोलकाता नाइट राइडर्स को पिछले साल चैंपियन बनाने वाले कप्तान अय्यर ने नये सीज़न की शुरुआत एक नयी टीम से की है जिसने 18 साल की आईपीएल यात्रा में कभी भी ट्रॉफी नहीं जीती है.

अगर अय्यर और उनके साथी इस जीत के साथ आगे निरंतरता भी दिखाने में कामयाब होते हैं तो शायद वो भी सपने देखने की हिम्मत कर सकते हैं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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