सूर्य ग्रहण की वजह से क्या जानवरों का बर्ताव बदलता है?

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- Author, फ्रैंकी एडकिन्स
- पदनाम, बीबीसी फ़ीचर्स संवाददाता
सूर्य ग्रहण इंसान को आश्चर्यचकित करता है लेकिन जीव जगत के दूसरे सदस्य कैसा अनुभव करते हैं जब दिन के वक्त कुछ वक्त के लिए सूरज की रोशनी अचानक चली जाती है?
कुछ ख़ास मौक़ों पर, जब हमारे सौर मंडल में परिस्थितियां मेल खाती हैं, चंद्रमा कुछ पलों के लिए सूर्य और धरती के बीच आ जाता है जिससे सूर्य छिप जाता है और धरती पर अंधेरा छा जाता है.
ऐसे ही आठ अप्रैल को पड़ने वाले सूर्य ग्रहण को लेकर दुनिया भर के लोग उत्साहित हैं, क्योंकि उत्तरी अमेरिका के कुछ हिस्सों में पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखेगा और चार मिनट नौ सेकंड तक पूरी तरह से अंधेरा रहेगा
हालांकि पूर्ण सूर्यग्रहण केवल कुछ क्षणों के लिए ही होता है, लेकिन इंसान पर इसका लंबा प्रभाव पड़ सकता है, ये उन्हें आश्चर्य में डाल सकता है और वह मन में कई सवाल पैदा कर सकता है.
लेकिन दिन के वक्त अंधेरा होने पर जानवर कैसा बर्ताव करेंगे? इसका अनुमान लगाना मुश्किल है.
अपने जागने, चारा खोजने, शिकार करने और सोने के दैनिक व्यवहार को नियंत्रित करने के लिए जानवर 24 घंटे के बायोलॉजिकल क्लॉक पर निर्भर करते है, जिसे सर्काडियन रिदम भी कहा जाता है.
कई दशकों में किसी एक जगह पर होने वाला सूर्य ग्रहण इस क्लॉक या घड़ी में कुछ क्षणों के लिए अवरोध पैदा करता है, लेकिन ये जानवरों की दिनचर्या को किस तरह प्रभावित करता है इसे लेकर मौजूद जानकारी सीमित है.
इसका एक कारण ये भी है कि सभी जानवर इस खगोलीय घटना को लेकर एक तरह से प्रतिक्रिया नहीं देते.
स्वीडन की लुंड यूनिवर्सिटी में बिहेवरियल इकोलॉजिस्ट सेसिलिया निल्सन कहती हैं, "रोशनी एक अहम संकेत है जो पेड़-पौधों और जीवों को प्रभावित करता है. बायोलॉजिस्ट के तौर पर हम सूरज की रोशनी को रोक नहीं सकते, लेकिन प्रकृति ने खुद ऐसे नियम बनाए हैं जिनसे सूरज की रोशनी अपने आप अंधेरे में बदलती है और फिर निश्चित समय के बाद अंधेरा ख़त्म होकर रोशनी आती है."
जानकारी इकट्ठा करने की कोशिश

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व्लियम व्हीलर नाम के न्यू इंग्लैंड के एक कीटविज्ञानी ने सौ साल पहले ये जानने की कोशिश की कि ग्रहण के दौरान सूर्य के ग़ायब होने पर जानवर क्या करते हैं.
उन्होंने स्थानीय अख़बारों में विज्ञापन दिया और लोगों से अपील की कि 1932 के सूर्य ग्रहण के दौरान वो ये देखने की कोशिश करें कि उन कुछ पलों में जानवरों का व्यवहार कैसे बदलता है जब दिन के वक्त सूर्य छिप जाता है.
उन्हें जानवरों के व्यवहार से जुड़ी 500 कहानियां मिलीं. इनमें पक्षियों, कीड़ों, पौधों, स्तनपायी जीवों से लेकर उल्लू और मधुमक्खियों के बारे में जानकारी थी. उल्लू अंधेरा होते ही हुंकारने लगे थे जबकि मधुमक्खियां अपने छत्ते में लौटने लगी थीं.
अगस्त 2017 में जब एक बार फिर सूर्य ग्रहण हुआ और चांद लगभग 2 मिनट 42 सेकंड के लिए सूर्य के सामने आ गया तो वैज्ञानिकों ने एक बार फिर इस प्रयोग को दोहराया.
इस बार इसके नतीजे और भी चौंकाने वाले थे. अंधेरा होते ही जिराफ़ नर्वस होकर इधर-उधर दौड़ने लगे, साउथ कैरोलाइना ज़ू में कछुए मेटिंग करने लगे, ओरेगॉन, इडाहो और मिसौरी में बम्बलबी नाम की मधुमक्खियों ने भिनभिनाना बंद कर दिया.
अगला सूर्य ग्रहण सोमवार आठ अप्रैल को पड़ रहा है, जिसने एक बार फिर वैज्ञानिकों की रुचि बढ़ा दी है. मेक्सिको से लेकर मेन तक वैज्ञानिक इस खगोलीय घटना के हर पल को देखने की तैयारी कर रहे हैं.
वैज्ञानिकों ने लोगों से अपील की है कि वो इस दौरान जानवरों में किसी तरह के अजीबोगरीब व्यवहार पर ज़रूर नज़र रखें.
'पूरे दिन ज़ू में हलचल रही'

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एडम हार्टस्टोन-रोज़ साउथ कैरोलाइना के रिवर बैंक्स चिड़ियाघर और गार्डन में बतौर वैज्ञानिक काम करते हैं.
वो कहते हैं कि 2017 के सूर्य ग्रहण से पहले उन्हें लगा था कि चिड़ियाघर के जानवरों पर इसका कोई असर नहीं पडे़गा.
उन्होंने इसे बारिश और आंधी की तरह की घटना मानकर नज़रअंदाज़ कर दिया था, लेकिन ट्रेन्ड शोधकर्ता और बड़ी संख्या में नागरिक चिड़ियाघर में रखी गई 17 प्रजाति के जानवरों की जगह के सामने इकट्ठा हुए. वो सूर्य ग्रहण शुरू होने के पहले और बाद में जानवरों को देख रहे थे.
एडम हार्टस्टोन-रोज़ कहते हैं, "यह बाकी दिनों से अलग था, क्योंकि उस दिन चिड़ियाघर में काफी हलचल रही थी. यहां हज़ारों लोग थे और हर कोई उत्साहित था."
हार्टस्टोन-रोज़ का कहना है कि जिन जानवरों के व्यवहार को देखा गया, उनमें से तीन-चौथाई से अधिक की प्रतिक्रिया "अद्भुत" और "जीवन बदलने वाली" थी.
जानवरों की प्रतिक्रियाओं को चार वर्गों में बांटा गया- ऐसे जानवर जो सामान्य रूप से काम करते रहे, ऐसे जानवर जो इस तरह काम करने लगे जैसे शाम हो गई हो, ऐसे जानवर जो परेशान हो गए और एक वो जो अजीबोगरीब तरीके से व्यवहार करने लगे.

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हार्टस्टोन-रोज़ कहते हैं कि ग्रिज़ली भालू जैसे कुछ जानवर सूर्य ग्रहण जैसी दुर्लभ घटना के अनुभव के दौरान पूरी तरह से निराश रहे.
वो कहते हैं, "पूरे ग्रहण के दौरान वो आराम कर रहे थे. उनमें से एक ने अपना सिर झुका लिया, वो लगभग ये कह रहा था कि इस घटना की वो परवाह नहीं करता."
दूसरी तरफ निशाचर पक्षी बिल्कुल भ्रमित लग रहे थे. हार्टस्टोन-रोज़ कहते हैं, "दिन के वक्त टॉनी फ्रॉगमाउथ नाम के पक्षी सड़े हुए पेड़ के तने की तरह दिखने की पूरी कोशिश करते रहे. भेष बदलने में माहिर ये पक्षी रात को खाने की तलाश में रहते हैं और अपना रंग बदलते हैं.
हार्टस्टोन-रोज़ कहते हैं, "उन्होंने बिल्कुल वही किया. जब सूर्य की रोशनी वापस आई तो वो फिर पेड़ की शाखा में वापस चले गए."
ग्रहण के दौरान कुछ जानवरों में चिंता और परेशानी के लक्षण दिखे. हार्टस्टोन-रोज़ कहते हैं, "जिराफ़, जो आम तौर पर काफी शांत प्रकृति के जानवर होते हैं", ऐसे दौड़ने लगे जैसे कि जंगल में किसी शिकारी या गाड़ी को देखकर चौंक गए हों.

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यह टेनेसी के नैशविले चिड़ियाघर के जिराफ़ों की तस्वीर है जिसमें वो घबरा कर सरपट दौड़ते दिखे.
लेकिन सबसे अजीबोगरीब व्यवहार गैलापागोस के विशाल कछुओं में दिखा. हार्टस्टोन-रोज़ कहते हैं, "आम तौर पर, कछुए सुस्त प्राणी होते हैं, वो खुद को कम ही ज़ाहिर करते हैं", लेकिन ग्रहण के वक्त उनमे बड़ा बदलाव दिखा, वो अधिक सक्रिय हो गए और जब ग्रहण अपने चरम पर पहुंचा वो एक-दूसरे के साथ मेट करने लगे.
हालांकि अलग-अलग जानवरों पर सूर्य ग्रहण का क्या असर पड़ता है ये देखने के लिए चिड़ियाघर एक सूक्ष्म जगत की तरह ही अनूठा वातावरण था, लेकिन इसमें अपनी खामियां हैं.
हार्टस्टोन-रोज़ कहते हैं, "ग्रहण रोमांचक होता है और इसलिए लोग ज़ोर-शोर से चिल्ला रहे थे."
वो कहते हैं कि ये जान पाना मुश्किल है कि जानवरों की प्रतिक्रिया ग्रहण को लेकर थी या फिर इंसान के तमाशे पर.
जंगल में व्यवहार

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अमेरिका के पूर्वी तट से लेकर पश्चिमी तट तक फैले 143 मौसम स्टेशनों से डेटा इकट्ठा कर उसे भी समझने की कोशिश की गई.
इस स्टडी का नेतृत्व कर रही निल्सन कहती हैं, "हमारे पास यह एक ऐसा नेटवर्क है जो हमेशा आसमान पर नज़र रखता है. ये बड़े पैमाने पर इन दुर्लभ घटनाओं की जांच करने का बड़ा मौक़ा हो सकता है."
वैज्ञानिक सोच रहे थे कि क्या पक्षी और कीड़े जैसे उड़ने वाले जानवर रोशनी न होने को सूर्यास्त समझ कर आसमान में उड़ेंगे.
लेकिन ग्रहण के अंधेरे में उड़ान भरते पक्षियों को देखना मुश्किल है, ऐसे में मौसम स्टेशन काम के साबित हो सकते हैं.
निल्सन कहती हैं, "अलग-अलग पक्षियों पर नज़र रखने के बजाय, हम आसमान में मौजूद जैविक सामग्री की पूरी मात्रा के बारे में जान सकते हैं."
एक साधारण रडार इस आधार पर काम करता है कि वो एक सिग्नल भेजता है और फिर सोनार की तरह इसके वापस आने का इंतज़ार करता है. वापस आने वाले सिग्नल को रिफ्लेक्टिविटी कहते हैं.
निल्सन कहती हैं कि बारिश करने वाले एक बड़े बादल या एक छोटे पक्षी की रिफ्लेक्टिविटी अलग-अलग होगी.
सूर्यास्त के समय पर, आमतौर आसमान में गतिविधि अपने चरम पर होती है क्योंकि पक्षी अपने-अपने घोसलों की तरफ लौट रहे होते हैं, लेकिन क्या दिन के बीच अंधेरा होने की असामान्य घटना उनके व्यवहार में किसी तरह का बदलाव ला सकती है?
निल्सन कहती हैं, "हमने ये देखा कि वास्तव में हवा में पक्षियों की संख्या में कमी हो गई थी." जब ग्रहण हुआ तो अधिकांश पक्षी या तो आसमान से नीचे आ चुके थे या फिर उन्होंने इधर-उधर उड़ना बंद कर दिया था.
निल्सन कहती हैं कि एक सिद्धांत यह था कि उनका व्यवहार ठीक वैसा था जैसा तूफान आने से पहले होता है, जब पक्षी अपने लिए आश्रय ढूंढते हैं.
सेकंडरी प्रभाव

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नेब्रास्का में प्लेट नदी घाटी घोंसला बनाने और प्रवासी पक्षियों के लिए रुकने के लिहाज़ से एक महत्वपूर्ण स्थान है. 2017 के सूर्य ग्रहण में पक्षियों के व्यवहार को यहां समझ पाना थोड़ा आसान था.
यहां वैज्ञानिकों की एक टीम ने पक्षियों की निगरानी के लिए उनके आम रास्तों के आसपास कई टाइम-लैप्स कैमरे और आवाज़ रिकॉर्ड करने वाले रिकॉर्डर लगाए.
कियर्नी की नेब्रास्का यूनिवर्सिटी में शोधकर्ता एम्मा ब्रिनली बकले का कहना है कि ग्रहण के दौरान अलग-अलग पक्षियों ने अलग-अलग तरह की प्रतिक्रिया दिखाई.
वो कहती हैं कि जब सूर्य छिपने लगा तो वेस्टर्न मीडोलार्क तेज़ी से पेड़ों की तरफ आने लगी और कुछ जगहों पर उन्होंने चहचहाना बंद कर दिया. वहीं अमेरिकन गोल्डफिंच और सॉन्ग स्पैरो ने ग्रहण के दौरान जमॉकर आवाज़ें निकालीं.
इंसानों की तरह, जानवर भी ग्रहण के वक्त अलग-अलग तरह से प्रतिक्रिया करते हैं. कुछ स्टडी में देखा गया कि ग्रहण के दौरान मछलियां छिपने के लिए जगह तलाश करने लगीं और मकड़ियों ने जालों को नष्ट कर दिया.
एक हालिया प्रयोग में, फूलों के बीच छोटे-छोटे माइक्रोफ़ोन को लटकाया गया. इस शोध में देखा गया कि सूर्य के छिपने के कारण अंधेरा होते ही बम्बलबी ने भिनभिनाना बंद कर दिया.
ब्रिनली बकले का कहना है कि सभी बदलावों के लिए सूर्य के छिपने को श्रेय नहीं दिया जा सकता क्योंकि पूर्ण ग्रहण से पैदा होने वाले सेकंडरी प्रभाव भी होते हैं.
ग्रहण के दौरान नेब्रास्का में, तापमान में लगभग 6.7 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई और यहां आर्द्रता 12 फीसदी तक बढ़ गई. बेहद कम समय में ये बड़ा बदलाव था.
वो कहती हैं, "हमारे यहां सूर्य की रोशनी कम हो गई जिसका नतीजा ये हुआ कि तापमान में गिरावट आई और हवा में बदलाव के कारण यह बदलाव और बढ़ गया."
वो कहती हैं कि सटीक रूप से परिवर्तन का कारण क्या है ये कह पाना मुश्किल है.
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सोमवार को होने वाले सूर्य ग्रहण के मद्देनज़र उत्तरी कैरोलाइना में रिवर बैंक चिड़ियाघर ने एक बड़े सिटीजन विज्ञान अध्ययन की योजना बनाई है और इसके लिए निगरानी बढ़ाई है.
सूर्य ग्रहण सफ़ारी परियोजना के तहत हजारों लोगों को जानवरों के व्यवहार पर नज़र रखने और उसे समझने को प्रोत्साहित किया जा रहा है.
हालांकि वो चिड़ियाघरों से दूर, खेत के जानवरों और पालतू जानवरों पर शोध कर उनके व्यवहार को भी इसमें शामिल करेंगे.
अक्टूबर 2023 में एक वलयाकार ग्रहण से प्रारंभिक डेटा पहले ही एकत्र किया जा चुका है. पूर्ण सूर्य ग्रहण से अलग एक वलयाकार ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा केवल आंशिक रूप से सूर्य के सामने आता है, कुछ लोग इसे "रिंग ऑफ़ फ़ायर" कहते हैं.
नासा भी पूरे अमेरिका में फैले लगभग एक हज़ार डेटा कलेक्टर्स के साथ एक एक्लिप्स साउंडस्केप परियोजना चला रहा है.
इसके तहत ये कलेक्टर्स ऑडियो मॉथ्स नाम के छोटे आकार के डेटा रिकॉर्डर का इस्तेमाल करेंगे और वन्य जीवों की आवाज़ रिकॉर्ड करेंगे.
एडवांस्ड रिसर्च इन स्टीम एक्सेसिबिलिटी लैब के सोलर भौतिक विज्ञानी हेनरी ट्रे विंटर कहते हैं, "हम ख़ास तौर पर ये जानना चाहते हैं कि क्या ध्वनियों का [जानवरों पर] लंबे समय तक असर रहता है."
विंटर कहते हैं कि असामान्य स्थिति में जानवर जिस तरह से प्रतिक्रिया देते हैं, उससे इंसान की गतिविधि के कारण हो रहे असर के बारे में और जानकारी मिल सकती है.
वो कहते हैं, "आप किसी क्षेत्र में कटाई या निर्माण कार्य के कारण (जहां पूरी रात रोशनी रहती है) तेज़ आवाज़ का प्रभाव सुन सकते हैं."
साल 2044 से पहले ये अमेरिका से दिखाई देने वाला आख़िरी पूर्ण सूर्य ग्रहण है. इस कारण बहुत से लोग जानवरों के व्यवहार पर भी अपनी नज़रें गड़ाए रहेंगे.
हार्टस्टोन-रोज़ कहते हैं, "कोई भी ग्रहण एक अद्भुत और शक्तिशाली अनुभव है जो हमें एक दूसरे के साथ और प्राकृतिक दुनिया के साथ होता है. इस दौरान हम कई और व्यापक सवालों के जवाब भी तलाश सकते हैं."
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