लॉरेंस बिश्नोई कौन हैं, जिनके गैंग पर कनाडा ने बड़ा कदम उठाया

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कनाडा सरकार ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग को आतंकवादी समूह घोषित कर दिया है. कनाडा के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री गैरी आनंदसांगरी ने सोशल मीडिया एक्स पर इसकी जानकारी दी है.
उन्होंने लिखा है, "कनाडा में हिंसा, आतंकवाद, समुदायों को डराना-धमकाना कभी भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. हम इन धमकियों का मुक़ाबला करने के लिए ज़रूरी कदम उठा रहे हैं."
एक आतंकवादी समूह की सूची में शामिल होने का मतलब है कि कनाडा में ऐसे समूह की कोई भी संपत्ति, गाड़ियां या पैसे ज़ब्त की जा सकती हैं. इसके साथ ही कनाडा की क़ानूनी एजेंसियों को ऐसे समूह पर मुक़दमा चलाने या कार्रवाई करने का ज़्यादा अधिकार मिलता है.
कई मीडिया रिपोर्ट्स में भारतीय जाँच एजेंसियों के हवाले से दावा किया गया है कि 33 साल के लॉरेंस बिश्नोई के गैंग में क़रीब 700 शूटर हैं. इनमें से अधिकतर छोटे क़स्बों और शहरों से हैं.
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कनाडा सरकार का कहना है, "बिश्नोई गिरोह एक अंतरराष्ट्रीय आपराधिक संगठन है जो मुख्य रूप से भारत से संचालित होता है. इस गिरोह की कनाडा में मौजूदगी है और यह उन इलाक़ों में सक्रिय है जहाँ बड़ी संख्या में प्रवासी समुदाय रहते हैं."
"बिश्नोई गिरोह हत्या, गोलीबारी और आगजनी करता है, और जबरन वसूली और धमकी के ज़रिए इन समुदायों में आतंक फैलाता है."
एक साल पहले ही कनाडा की रॉयल माउंट पुलिस ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा था कि भारतीय एजेंट संगठित अपराध समूह बिश्नोई ग्रुप की मदद से कनाडा में दक्षिण एशियाई मूल के लोगों, ख़ासकर खालिस्तान समर्थकों को निशाना बना रहे हैं.
पिछले ढाई साल से गुजरात की साबरमती हाई सिक्योरिटी जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई का नाम पिछले साल मुंबई में हुई एनसीपी नेता बाबा सिद्दीक़ी की हत्या की जाँच में भी आया था.
मूलरूप से पंजाब में फ़ाज़िल्का के अबोहर के रहने वाले लॉरेंस बिश्नोई 2022 में पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या के बाद चर्चा में आए थे.
दिसंबर 2023 में राजस्थान में हुई करणी सेना प्रमुख सुखदेव सिंह गोगामेड़ी की हत्या के तार भी बिश्नोई गैंग से जुड़े थे.
अब लॉरेंस बिश्नोई के गैंग की चर्चा सिर्फ़ भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी होती रही है.
लॉरेंस बिश्नोई का पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर भारत के अन्य राज्यों में प्रभाव माना जाता है.
लॉरेंस बिश्नोई पर हत्या, हत्या के प्रयास, वसूली और धमकाने के दर्जनों मुक़दमे दर्ज हैं.
पुलिस के मुताबिक़ ये गैंग एक बड़ा ड्रग्स नेटवर्क भी चलाता है.
भारत में विपक्षी दलों ने उठाए थे सवाल
कनाडा के बिश्नोई गैंग पर आरोप लगाने के बाद कुछ विपक्षी दलों ने नरेंद्र मोदी की सरकार से भी सवाल पूछे थे. लॉरेंस बिश्नोई के गुजरात की जेल में रहने पर भी सवाल उठाए गए.
तृणमूल कांग्रेस सांसद साकेत गोखले ने सवाल किया कि जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई की भूमिका पर पर केंद्र सरकार को अपना रुख़ स्पष्ट करना चाहिए.
गोखले ने पूछा कि गुजरात की जेल में बंद बिश्नोई के पास इतनी ताक़त कहाँ से आ रही है.
उन्होंने सवाल किया, “बिश्नोई को कौन सुरक्षा दे रहा है और वो किसके आदेश पर काम कर रहा है.”
वहीं कांग्रेस और सीपीआईएम ने कहा कि केंद्र सरकार को कनाडा के साथ विवाद के मुद्दे पर विपक्ष की पार्टियों को भी विश्वास में लेना चाहिए.
सीपीआईएम ने एक बयान में कहा था कि सरकार को लॉरेंस बिश्नोई की भूमिका से जुड़े आरोपों समेत इन मुद्दों पर विपक्षी दलों को विश्वास में लेना चाहिए.
हालाँकि उस वक़्त भारत सरकार ने कनाडा के आरोपों को ख़ारिज किया था.
सलमान ख़ान को धमकी और बाबा सिद्दीक़ी की हत्या

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लॉरेंस बिश्नोई ने साल 2018 में बॉलीवुड अभिनेता सलमान ख़ान को जान से मारने की धमकी दी थी.
मुंबई पुलिस की जाँच के मुताबिक़ उनके शूटरों ने सलमान ख़ान के मुंबई स्थित घर के बाहर गोलीबारी की थी. इस संबंध में तीन शूटरों को गिरफ़्तार भी किया गया था.
उस समय राजस्थान के जोधपुर शहर में जेल में पेश किए जाने के दौरान बिश्नोई ने मीडिया से कहा था, “सलमान ख़ान को मार दिया जाएगा, जोधपुर में. तब उन्हें हमारी असली पहचान के बारे में पता चलेगा.”
बिश्नोई समुदाय काले हिरण को पूजनीय मानता हैं और लॉरेंस बिश्नोई ने सलमान से दुश्मनी का कारण भी यही बताया था. सलमान ख़ान पर काले हिरण के शिकार के मामले में मुक़दमा दर्ज किया गया था.
एनसीपी राजनेता बाबा सिद्दीक़ी सलमान ख़ान के बेहद क़रीबी थे.
उनकी हत्या के बाद सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट पर लारेंस बिश्नोई गैंग के इसमें शामिल होने का दावा किया गया.
कॉन्वेंट स्कूल में पढ़े और फिर चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज से ग्रेजुएशन करते हुए छात्र राजनीति में आए लॉरेंस बिश्नोई भारत के चर्चित अपराधियों में शामिल हैं.
कनाडा पुलिस के दावों ने उन्हें ना सिर्फ़ भारतीय एजेंटों से जोड़ा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस गैंग के असर का दावा किया है.
बाबा सिद्दीक़ी हत्या मामले में मुंबई पुलिस लॉरेंस बिश्नोई से पूछताछ करना चाहती है, लेकिन केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के एक आदेश की वजह से उन्हें रिमांड पर नहीं लिया जा सकता है.
फ़िलहाल गुजरात तट से ड्रग तस्करी नेटवर्क चलाने के आरोप में लॉरेंस बिश्नोई साबरमती जेल में बंद हैं.
पुलिस पूछताछ में रुकावट बना आदेश

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मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़, केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश और सीआरपीसी 268 के तहत अहमदाबाद की साबरमती जेल से गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को बाहर ले जाने पर एक साल के लिए प्रतिबंध है.
सीआरपीसी की धारा 268 के तहत लगाई गई रोक को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 303 के तहत एक साल के लिए बढ़ाया गया है.
जून 2024 में सलमान ख़ान के घर पर हुई गोलीबारी की घटना के मामले में मुंबई पुलिस ने लॉरेंस बिश्नोई को हिरासत में लेने के लिए कोर्ट में अर्ज़ी दी थी, लेकिन कई बार अर्ज़ी देने के बावजूद पुलिस को पूछताछ के लिए उनकी हिरासत नहीं मिली थी.
गुजरात पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बीबीसी गुजराती को बताया था, "लॉरेंस बिश्नोई को नशीली दवाओं की तस्करी के मामले में हिरासत में लिया गया था और तब से वह साबरमती जेल में हैं."
गुजरात जेल में क्यों क़ैद हैं बिश्नोई?

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गुजरात एटीएस ने 14 सितंबर 2022 को कच्छ में समुद्र से एक नाव में 40 किलोग्राम हेरोइन जब्त की. इस घटना के बाद से गुजराती मीडिया में लॉरेंस बिश्नोई का नाम ड्रग नेटवर्क से जोड़कर लिया जाता रहा है.
गुजरात एटीएस जब ड्रग नेटवर्क के ख़िलाफ़ कार्रवाइयां कर रहीं थीं तब लॉरेंस बिश्नोई पंजाब की कपूरथला जेल में बंद थे.
जब बिश्नोई को 2023 में गुजरात पुलिस ने हिरासत में लिया था, तो एटीएस के पुलिस अधीक्षक सुनील जोशी ने बीबीसी गुजराती से बात करते हुए कहा था, “हमारी जानकारी के अनुसार, उसने जेल में रहते हुए नशीली दवाओं की खेप की तस्करी की योजना बनाई थी. गुजरात के समुद्र से जो मादक पदार्थ पकड़ा गया, वह लॉरेंस के आदमियों के लिए आया था.”
सुनील जोशी ने कहा, “पुलिस ये पता लगाना चाहती है कि जेल में रहते हुए उसने ड्रग्स की खेप कैसे मंगवाई.'
क्या है मामला, जिसमें गुजरात पुलिस ने बिश्नोई को गिरफ्तार किया?
14 सितंबर 2022 को तटरक्षक बल और गुजरात एटीएस ने एक संयुक्त अभियान में, पाकिस्तान की एक नाव को पकड़ा और उसमें से 40 किलोग्राम हेरोइन जब्त की गई.
पुलिस की प्रारंभिक जाँच में पता चला कि हेरोइन को गुजरात के बंदरगाह से भारत में प्रवेश कराकर आगे पंजाब तक ले जाया जाना था.
सुनील जोशी कहते हैं, ''उस वक़्त पुलिस को मिली जानकारी के आधार पर उस नाव को ट्रैक किया गया और गुजरात पुलिस को बड़ी सफलता मिली.''
इस नाव पर सवार छह पाकिस्तानी नागरिक भी गिरफ़्तार किए गए थे.
लॉरेंस बिश्नोई के कथित तौर पर जेल के भीतर से पाकिस्तानी गैंगस्टर के साथ वीडियो कॉल करने का वीडियो भी सामने आया था. हालांकि इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी.
ड्रग नेटवर्क की इस जाँच के दौरान आगे चलकर लॉरेंस बिश्नोई का नाम सामने आया था.
उस समय वे पंजाब की कपूरथला जेल में बंद थे. आगे चलकर पुलिस जाँच में पता चला था कि लॉरेंस ने पाकिस्तान के कराची से ड्रग्स मंगवाई थी.
जब गुजरात में ये ड्रग्स पकड़ी गई थी तब मीडिया से बात करते हुए तत्कालीन डीजीपी आशीष भाटिया ने कहा था, ''जो ड्रग पकड़ा गया है उसका नेटवर्क अलग-अलग जेलों से चल रहा है. अमृतसर, फरीदकोट और कपूरथला जेल में मौजूद क़ैदी इस नेटवर्क को चला रहे थे.”
भाटिया ने बताया था, "जेल में बंद क़ैदी फ़ोन और व्हाट्सएप कॉल के ज़रिए इन डिलीवरी को तय करते हैं और फिर उनके आदमी पंजाब तक ड्रग्स को पहुँचाने का काम करते हैं."
जेल के भीतर से संचालित अपराध का नेटवर्क

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लॉरेंस बिश्नोई पर सबसे पहले छात्र राजनीति के दौरान हत्या के एक प्रयास के आरोप लगे थे.
बिश्नोई पहली बार साल 2014 में जेल गए थे.
जेल में रहते हुए बिश्नोई ने अपराध की दुनिया में क़दम रखा और साल 2014 के बाद से वो अधिकतर समय जेल में ही रहे हैं.
2015 से 2017 के बीच वो पंजाब के पटियाला की जेल में रहे.
2017 में बिश्नोई को ज़मानत मिली थी, लेकिन कुछ दिन बाद ही उन्हें एक दूसरे मामले में गिरफ़्तार कर लिया गया.
साल 2018 से 2020 के बीच वो दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद थे.
बाद में उन्हें 2020-21 में पंजाब की बठिंडा जेल भेज दिया गया. 2021 में बिश्नोई को राजस्थान के अजमेर की सेंट्रल जेल में रखा गया.
साल 2021 में ही संगठित और अंडरवर्ल्ड अपराध की दुनिया से रोकने के लिए, मकोका (महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट) के एक मामले में तिहाड़ जेल में सुरक्षा की नज़र से लाकर बंद कर दिया गया था.
जून 2022 में बिश्नोई को पंजाब पुलिस ने सिद्धू मूसेवाला की हत्या के मामले में गिरफ़्तार किया था. इस दौरान पुलिस को उनकी 14 दिन की हिरासत भी मिली थी.
नवंबर 2022 में बिश्नोई कपूरथला जेल में बंद थे, बाद में उन्हें दिल्ली की तिहाड़ जेल शिफ़्ट कर दिया गया था. यहीं से गुजरात पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था और अहमदाबाद की साबरमती जेल में बंद किया.
लॉरेंस बिश्नोई ने अपने आपराधिक जीवन का अधिकतर समय जेलों के अंदर ही बिताया और जेल में बंद अपराधियों के ज़रिए अपने नेटवर्क को मज़बूत किया.
जेल के बाहर गोल्डी बराड़ उनके सबसे क़रीबी गैंगस्टर हैं, जो कनाडा में रहते हैं.
अपने अपराधी जीवन के बारे में बात करते हुए एक टीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में बिश्नोई ने कहा था, 'मैं एक छात्र था जब मैं पहली बार जेल गया था, बाद में जेल के अंदर ही 'गैंगस्टर' बन गया... हमारे भाइयों की हत्या कर दी गई, हमने सिर्फ़ प्रतिक्रिया दी ... व्यक्ति जो भी होता है, वह अपने आसपास के वातावरण से बनता है."
मार्च 2023 में कथित तौर पर जेल के भीतर दिए गए इस साक्षात्कार के बाद कई सवाल खड़े हुए थे और हाई कोर्ट ने इसकी उच्च स्तरीय जाँच की घोषणा भी की थी.
ये सवाल उठा था कि हाई सिक्यूरिटी जेल में बंद एक हाई प्रोफ़ाइल क़ैदी कैसे साक्षात्कार दे सकता है.
पुलिस के मुताबिक़ लॉरेंस बिश्नोई ने ज़्यादातर आपराधिक घटनाओं को जेल के अंदर रहते ही अंजाम दिया है.
बिश्नोई के ख़िलाफ़ पंजाब, दिल्ली और राजस्थान में मामले दर्ज हैं. उन पर 30 से अधिक मुक़दमे दर्ज हैं जिनमें से 19 इस समय अदालतों में विचाराधीन हैं.
लॉरेंस बिश्नोई के वकील विशाल चोपड़ा ने बीबीसी से कहा था, "मेरा मुवक्किल निर्दोष है और वो अपराधी नहीं है.”
छात्र राजनीति से अपराध तक

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पंजाब के फ़ाजिल्का के अबोहर के रहने वाले लॉरेंस बिश्नोई के परिवार के पास ठीकठाक ज़मीन है और उनके पिता पुलिस से रिटायर हैं.
गांव में उनका बड़ा बंगला है जिसके चारों तरफ़ क़रीब सौ एकड़ पारिवारिक ज़मीन हैं.
माना जाता है कि बिश्नोई का भाई अनमोल बिश्नोई भी उनके गैंग के संचालन में शामिल हैं. पुलिस को मूसेवाला की हत्या के मामले में अनमोल बिश्नोई की तलाश है.
लॉरेंस बिश्नोई की मां सुनीता बिश्नोई ने एक बार सरपंच के चुनाव के लिए पर्चा दाखिल किया था लेकिन बाद में उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा था.
लॉरेंस के साथ स्कूल और कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों ने बीबीसी से बात करते हुए कहा था कि वो अच्छी पंजाबी, हरियाणवी और हिंदी बोलते हैं.
लॉरेंस का परिवार पंजाब के जिस अबोहर इलाक़े से है.
ये इलाक़ा राजस्थान और हरियाणा से भी सटा है. इस क्षेत्र में पंजाब, हरियाणा और राजस्थान की एक समान संस्कृति है.
स्कूल के दौरान ही लॉरेंस बिश्नोई अपनी बाइक पर स्कूल जाते थे और उन्हें महंगे जूते पहनने का शौक था.
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक़ लॉरेंस बिश्नोई का असली नाम सतविंदर सिंह है.
मूसेवाला की हत्या पर एक किताब के लेखक और पंजाब के अख़बार द ट्रिब्यून के पत्रकार जुपिंदरजीत सिंह को लॉरेंस बिश्नोई के एक रिश्तेदार रमेश बिश्नोई ने बताया था कि उनका नाम ब्रिटिश अधिकारी हेनरी मोंटगोमरी लॉरेंस के नाम पर पड़ा था जो सनावर की पहाड़ियों पर स्थित प्रतिष्ठित लॉरेंस स्कूल के संस्थापक भी थे.
कॉलेज के दौरान लॉरेंस बिश्नोई छात्र संगठन ‘सोपू’ से जुड़े थे. जिस समय लॉरेंस बिश्नोई छात्रों के बीच सक्रिय थे, उस समय चंडीगढ़ के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में स्थानीय संगठनों 'सोपू' और 'पुसु' का बोलबाला था.
छात्र राजनीति के दौरान हुई गुटबाज़ी से शुरू हुआ लॉरेंस बिश्नोई का आपराधिक सफ़र अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ड्रग तस्करी और टार्गेट किलिंग तक पहुँच गया है.
पुलिस के मुताबिक, लॉरेंस 'ए' श्रेणी के गैंगस्टर हैं. पंजाब पुलिस ने गैंगस्टरों की एक श्रेणी बनाई है और 'ए' श्रेणी का मतलब है वे जो कथित तौर पर अधिक गंभीर अपराधों में शामिल हैं.
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, लॉरेंस बिश्नोई को चार मामलों में दोषी भी ठहराया गया है.
पंजाब में जेल में रहने के दौरान ही लॉरेंस बिश्नोई की दोस्ती गोल्डी बराड़ से हुई थी और माना जाता है कि अब बराड़ ही इस गैंग को कनाडा से चला रहे हैं.
पंजाब पुलिस को सिद्धू मूसेवाला की हत्या के साथ-साथ कई अन्य मामलों में मुख्य साज़िशकर्ता के रूप में गोल्डी बराड़ की तलाश है.
पंजाब पुलिस के अनुसार, गोल्डी बराड़ ने 29 मई 2022 को सिद्धू मूसेवाल की हत्या की ज़िम्मेदारी ली थी.
एक निजी चैनल को दिए इंटरव्यू में लॉरेंस बिश्नोई ने अपने ग्रुप के बारे में कहा था, "ये कोई गैंग नहीं है बल्कि एक ही दर्द वाले लोग साथ आए हैं."
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