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क्या है अरबपति बनने का नुस्ख़ा? किस्मत, टैलेंट या टाइमिंग?
- Author, साइमन जैक
- पदनाम, बिज़नेस एडिटर, बीबीसी न्यूज़
माइम आर्ट पढ़ने वाले इटली के एक कम्युनिस्ट छात्र, गेंद पर नज़र रखने वाले एक प्रतिभाशाली बच्चे और एक कॉमेडियन में क्या समानता हो सकती है?
दरअसल ये तीनों आगे चलकर एक बेहद ख़ास वैश्विक समहू का हिस्सा बन गए.
बात हो रही है मिउचिया प्राडा, टाइगर वुड्स और जेरी सेनफील्ड की, जो अब दुनिया के 2800 अरबपति लोगों की लिस्ट में शामिल हैं.
इस लिस्ट में दुनिया के अलग-अलग देशों के लोग शामिल हैं.
दुनिया भर के अमीरों की सूची तैयार करने वाली अमेरिकन मीडिया फर्म फ़ोर्ब्स के मुताबिक, अरबपतियों की संख्या के मामले में पहले स्थान पर अमेरिका है, जहां 813 अरबपति हैं.
दूसरे स्थान पर हांग-कांग समेत चीन है जहां 473 अरबपति हैं और भारत तीसरे स्थान पर है, जहां 200 अरबपति हैं.
अरबों की इन संपत्तियों के बारे में अंदाज़ा लगाना कठिन है. एक अरब एक बहुत बड़ी संख्या है. इसका अंदाज़ा लगाने के लिए आप इसे ऐसे समझ सकते हैं कि 10 लाख सेकंड 11 दिन के बराबर होते हैं, जबकि एक अरब 32 साल के बराबर हैं.
कुछ लोग तो अरबपतियों के अस्तित्व को ही ठीक नहीं मानते.
दुनिया के 81 लोगों के पास चार अरब गरीब लोगों से ज्यादा संपत्ति
दुनिया के 81 अमीर लोगों की कुल संपत्ति दुनिया के चार अरब गरीब लोगों से ज्यादा है.
असमानता पर साल 2023 में ऑक्सफ़ैम ने एक रिपोर्ट में ये कहा था, “हर एक अरबपति नीतिगत भूल का परिणाम है. बढ़ती गरीबी और जीने के लिए जरूरी संसाधन के संकट के बीच रिकॉर्ड मुनाफे के साथ फलते-फूलते अरबपतियों का होना एक ऐसी आर्थिक व्यवस्था का प्रमाण है जो मानवता के लिए काम करने में विफल है.''
इसी असमानता के कारण कई देशों में आमदनी पर टैक्स की बजाय सम्पूर्ण धन पर टैक्स लगाने की बात की जा रही है.
अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी की सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन ने 5 करोड़ डॉलर की संपत्ति पर दो प्रतिशत और एक बिलियन की संपत्ति पर तीन प्रतिशत टैक्स का प्रस्ताव दिया है.
जबकि कुछ और लोगों का तर्क है कि ज्यादा धन संपदा की संभावना नए-नए रचना और आविष्कारों को प्रोत्साहित करती है जो करोड़ों लोगों के जीवन को सुधारती है.
अरबपतियों की संख्या बढ़ाना चाहते हैं कुछ अर्थशास्त्री
इन सबके बीच अमेरिकन अर्थशास्त्री माइकल स्ट्रेन तर्क देते हैं कि हमें कम नहीं और ज्यादा अरबपतियों की ज़रूरत है.
वह नोबेल पुरस्कार विजेता विलियम नॉर्डहॉस के उस सिद्धांत का हवाला देते हैं जिसमें नॉर्डहॉस ने बताया था कि तकनीकी जगत से जुड़े आविष्कारों से हासिल मुनाफ़े का दो प्रतिशत ही संस्थापकों और आविष्कारकों को जाता है, बाकी समाज को जाता है.
अरबपतियों के बारे में स्ट्रेन का कहना है “वो स्वनिर्मित आविष्कारक होते हैं जिन्होंने जीवन जीने का तरीका बदल दिया है”.
इसके पक्ष में वो बिल गेट्स और स्टीव बॉल्मर का उदाहरण देते हैं, जिन्होंने कंप्यूटिंग की दुनिया में क्रांतिकारी बदलाव लाए.
स्ट्रेन मशहूर अमेरिकी इनवेस्टर वॉरेन बफे और जेफ़ बेजोस का भी उदाहरण देते हैं. वो कहते हैं बफे और बेजोस ने खुदरा क्षेत्र को बढ़ावा दिया जबकि एलन मस्क ने ऑटोमोटिव उद्योग और अंतरिक्ष व्यापार को बदलकर रख दिया.
स्ट्रेन का कहना है कि सभी 'नीतियों की नाकामी' की वजह से अरबपति नहीं बने. बल्कि ये खुद के इनोवेशन और मेहनत की वजह से इस मुकाम तक पहुंचे हैं. "इनके अरबपति न बनने की कामना करने की बजाय हमें तो इनकी सफलता से खुश होना चाहिए."
कई अरबपति एक बड़ी रकम दान करते हैं. गेट्स और बफे़ ने 'द गिविंग प्लेज' जैसी पहल की, जिसके तहत अपने पूरे जीवनकाल में आधी से अधिक संपत्ति दान करने की प्रतिबद्धता दिखाई.
वहीं "द गिविंग प्लेज" पर भरोसा नहीं रखने वाले रैपर, बिज़नेस मुगल अरबपति जे-ज़ी ने अपनी संपत्ति के बचाव में कहा "अगर मैं गरीब होता तो अपने जैसे लोगों की मदद नहीं कर पाता. इसलिए मैं अमीर बना और उनकी मदद कर दी. मेरे लिए ये हर स्थिति में जीतने जैसा है."
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कैसे कोई अरबपति बन जाता है?
कोई यूं ही अरबपति नहीं बन जाता. उनकी सफलता भी हमें हमारे बारे में बताती है.
किसी के लिए अमीर बनना तब तक मुश्किल है जब तक वह लोगों को ऐसा कुछ नहीं देता, जिसकी उन्हें अदद ज़रूरत हो या फिर जो उन्हें भरसक खुशी पहुंचाए.
जिन अरबपतियों की चर्चा की जाती है उन्होंने कम या ज़्यादा लेकिन किसी न किसी स्तर पर दुनिया को बदला है. चाहे वो प्राडा के उत्पाद हों या फिर स्टार वॉर सिनेमा या टिक टॉक. इतना ही नहीं उनके ये सब हासिल करने के किस्से भी दिलचस्प हैं.
मसलन गूगल सर्च इंजन शुरुआती स्वरूप को इसके संस्थापक 10 लाख डॉलर में बेचना चाह रहे थे लेकिन तब उन्हे कोई खरीदार नहीं मिला. आज गूगल की कीमत 23 खरब डॉलर है जबकि उसके सह-संस्थापक सर्गी ब्रिन की निजी संपत्ति 135 अरब डॉलर है जो लगभग मोरक्को जैसे देश की जीडीपी के बराबर है.
मिउचिया प्राडा 1960 के दशक में इटली में एक वामपंथी मारिया बियांची थीं. अपना नाम मारिया बियांची से बदलकर मिउचिया प्राडा करने से पहले वो थिएटर स्कूल में ''माइम'' आर्ट पढ़ रही थीं. माइम आर्ट मूक अभिनय की एक शैली है. इसमें सिर्फ़ चेहरे के हाव-भाव, इशारों से ही बात समझाई जाती है.
अपने दम पर अरबपति बनने वाली भारत की पहली महिला किरण मजूमदार शॉ ने शुरुआत बीयर बनाने से की थी. बाद में फार्मास्यूटिकल के क्षेत्र में उन्होंने हाथ आज़माया और उनका नाम एशिया की सबसे बड़ी इंसुलिन उत्पादकों में शुमार हो गया.
अमेरिकी कॉमेडियन और एक्टर जेरी सेनफ़ील्ड के माता-पिता, दोनों ही अनाथ थे. उनके पिता ने कभी जेरी को गले नहीं लगाया. शायद यही वजह थी कि लेरी डेविड ने अपनी हिट कॉमेडी सेनफ़ील्ड में ये मशहूर लाइन रखी थी - नो हगिंग एंड नो लर्निंग.
इन अरबपतियों की सफलता अक्सर एक व्यापक ऐतिहासिक, राजनीतिक और तकनीकी रुझानों की कहानी भी बताती है.
अली बाबा के सह-संस्थापक जैक मा को भी एक साथ उभरी दो ताकतों का फ़ायदा मिला. उस समय ऑनलाइन रिटेल ज़ोर पकड़ रहा था और दूसरी तरफ़ चीन भी मज़बूत अर्थव्यवस्था बनकर उभर रहा था और वहां लोगों में संपन्नता बढ़ रही थी.
सफलता में कई हिस्सेदार होते हैं
ऐसी भी कहानियां हैं, जहां किस्मत सबसे बड़ी भूमिका में रही.
1960 के दशक के आखिरी सालों में माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स अमेरिका के उन चुनिंदा स्कूलों में से एक में जाया करते थे, जहां कंप्यूटर था.
इसी तरह रिहाना को ऑडिशन देने का मौका ही तब मिला जब एक रिकार्ड प्रोड्यूसर बारबाडोस में छुट्टियों पर थे.
वहीं कुछ लोगों के लिए परिवार सबसे मददगार साबित हुआ.
मशहूर गायिका टेलर स्विफ्ट का पूरा परिवार अपनी बेटी के करियर को आगे बढ़ाने के लिए पेंसिल्वेनिया से नैशविले चला आया.
वहीं अमेरिकी बास्केटबॉल प्लेयर माइकल जॉर्डन की मां की सलाह थी कि उन्हें एडिडास या कॉनवर्स जैसी स्पोर्ट्स कंपनियों के साथ कोई सौदा करने से पहले 'नाइकी' को सुनना चाहिए.
बाद में यही डील खेल इतिहास में सबसे बड़ा सौदा साबित हुआ.
जाहिर तौर पर इन कहानियों में कुछ वैसे क्षण भी हैं जिसमें छोटे-छोटे वाकयों ने इन अरबपतियों के जीवन और किस्मत को बदल दिया.
लेकिन जब अवसरों के दरवाज़े खुलते हैं तो आपको उनके बीच सब समेटते हुए चलना होता है.
और अगर इन सबमें कोई एक समान चीज़ होती है तो वो होती है ऊर्जा, प्रेरणा और प्रतिबद्धता जो ऐसे लोग अपने-अपने क्षेत्रों में लेकर आए हैं. साथ ही इनकी आगे बढ़ने की इच्छा.
पॉडकास्ट गुड बैड बिलियनेयर के मेरी को-प्रज़ेंटर ज़िंग त्जेंग और मैं हमेशा मज़ाक करते हैं कि अगर हमें एक करोड़ डॉलर मिल जाएं तो आप हमें उसी पल यहां नहीं पाएंगे. यहां सिर्फ़ दो कुर्सियां ही बचेंगी. क्योंकि मैं मछली पकड़ने निकल जाऊंगी और मेरी साथ किसी म्यूज़िक फ़ेस्टिवल का आनंद ले रही होंगी.
मुझे लगता है कि हमारे जैसे लोग शायद कभी कुछ बड़ा नहीं कर पाएं लेकिन हम उन अरबपति लोगों से प्रभावित, मंत्रमुग्ध, आश्चर्यचकित और कई बार कुछ सहमे से ज़रूर रहते हैं.
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