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ओल्ड बनाम न्यू टैक्स रिजीम: आपको किस टैक्स का विकल्प चुनने पर होगा फ़ायदा?
लोकसभा में मंगलवार को पेश हुए आम बजट में इनकम टैक्स को लेकर राहत दी गई है.
न्यू टैक्स रिजीम के तहत अब 3 लाख से 7 लाख रुपए की आय पर 5 फ़ीसदी के हिसाब से टैक्स देना होगा.
पहले ये स्लैब छह लाख रुपये तक था. न्यू टैक्स रिजीम के अन्य स्लैब में भी कुछ बदलाव किया गया है.
इसके अलावा स्टैडर्ड डिडक्शन को भी 50 हज़ार से बढ़ाकर 75 हज़ार रुपए कर दिया है.
इन दोनों बदलावों से टैक्सपेयर्स को अधिकतम 17,500 रुपए तक का फ़ायदा होगा. हालांकि पुराने टैक्स रिजीम में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
तीन लाख रुपये तक की आमदनी पर कोई टैक्स नहीं देना होगा.
न्यू टैक्स रिजीम में 7 लाख रुपये तक की इनकम टैक्स फ्री होगी.
इसका हिसाब किताब कुछ इस तरह है.
तीन लाख रुपये तक की कमाई पर तो कोई टैक्स देना ही नहीं है. तीन लाख से 7 लाख रुपये तक पर टैक्स दर 5 फ़ीसदी है यानी इस स्लैब के 4 लाख रुपये पर 5 फ़ीसदी की दर से टैक्स हुआ 20 हज़ार रुपये.
सेक्शन 87ए के तहत ये 20 हज़ार रुपये का टैक्स सरकार माफ़ कर देती है यानी कोई टैक्स नहीं देना है.
सैलरीड क्लास को 75 हज़ार रुपये तक के स्टैंडर्ड डिडक्शन का भी फ़ायदा दिया गया है, तो कुल मिलाकर 7 लाख 75 हज़ार रुपये तक की इनकम हो गई टैक्स फ्री.
10 लाख की कमाई पर नहीं देना होगा एक भी रुपया टैक्स
अगर आप 10 लाख रुपये की कमाई पर पूरा पैसा बचाना चाहते हैं तो ये ओल्ड टैक्स रिजीम में ही संभव है.
हालाँकि इसके लिए कई तरह की छूट को हासिल करने के लिए निवेश करना होगा. लेकिन अगर निवेश नहीं कर रहे हैं तो ओल्ड टैक्स रिजीम में भी स्लैब के मुताबिक़ ही टैक्स देना होगा.
ओल्ड टैक्स रिजीम में कैसे बचा सकते हैं टैक्स?
सरकार ने इस व्यवस्था के तहत 50 हज़ार रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन दिया है. यानी 10 लाख रुपये में से 50 हज़ार रुपये घटा दें तो अब टैक्स के दायरे में आने वाली रक़म साढ़े 9 लाख रुपये रह जाएगी.
निवेश करके बचा सकेंगे डेढ़ लाख रुपए पर टैक्स
इनकम टैक्स के सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख तक की टैक्स बचत कर सकते हैं. इंप्लॉई प्रॉविडेंट फंड यानी ईपीएफ़, पीपीएफ़, इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ईएलएसएस), सुकन्या समृद्धि योजना, नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट, पाँच साल के फिक्स्ड डिपॉजिट्स, सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम में निवेश करते हैं तो आपको टैक्स छूट मिल सकती है.
इनमें से किसी एक में या कई स्कीम्स में कुल मिलाकर अधिकतम डेढ़ लाख रुपये तक का निवेश करना होगा. अगर आपने ये किया है, तो अब साढ़े 9 लाख रुपये में से 1.50 लाख रुपये और घटा दें. अब टैक्स के दायरे में आने वाली इनकम 8 लाख रुपये रह जाएगी.
होम लोन लिया है तो 2 लाख रुपए तक की टैक्स बचत
होम लोन ले रखा है तो आप उस पर चुकाए गए ब्याज पर टैक्स छूट ले सकते हैं.
आयकर के सेक्शन 24बी के तहत एक वित्त वर्ष में 2 लाख के ब्याज पर टैक्स में छूट ले सकते हैं. इसे भी अपनी कर योग्य आय में से घटा दें. यानी, अब टैक्स के दायरे में आने वाली इनकम 6 लाख रुपए रह जाएगी.
हेल्थ इंश्योरेंस पर ख़र्च भी टैक्स फ्री
आयकर के सेक्शन 80डी के तहत मेडिकल पॉलिसी लेकर 25 हज़ार रुपए तक की टैक्स बचत कर सकते हैं. इस हेल्थ इंश्योरेंस में खुद, पत्नी और बच्चों का नाम होना चाहिए.
इसके अलावा अगर माता-पिता सीनियर सिटीजन के दायरे में आते हैं, तो फिर उनके नाम पर मेडिकल पॉलिसी ख़रीदकर 50,000 रुपये तक की अतिरिक्त छूट ली जा सकती है. यानी इस मद में कुल मिलाकर 75 हज़ार रुपये की रक़म टैक्स फ्री हो सकती है.
अब टैक्स के दायरे में आने वाली इनकम 5 लाख 25 हज़ार रुपये रह जाएगी.
नेशनल पेंशन सिस्टम में निवेश पर 50 हज़ार की टैक्स छूट
अगर अलग से नेशनल पेंशन सिस्टम यानी एनपीएस में सालाना 50,000 रुपये तक निवेश करते हैं, तो आयकर के सेक्शन 80सीसीडी(1बी) के तहत अतिरिक्त 50 हज़ार रुपये की छूट मिल जाएगी. यानी, अब टैक्स के दायरे में आने वाली इनकम 4 लाख 75 हज़ार रुपये रह जाएगी.
अब मिलेगा 87 ए का फ़ायदा
5 लाख रुपये तक की आय पर लगने वाले 12,500 रुपये के टैक्स पर छूट है, यानी पाँच लाख रुपये तक की इनकम टैक्स फ्री है. ऐसे में क्योंकि अब आपकी टैक्सेबल इनकम 4 लाख 75 हज़ार रुपये है, इसलिए आप पर टैक्स देनदारी नहीं बनती है.
न्यू टैक्स रिजीम में 10 लाख की कमाई पर कितना देना होगा टैक्स?
भले ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने न्यू टैक्स रिजीम में टैक्स स्लैब में बदलाव किया है और स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ा दिया है, फिर भी 10 लाख की कमाई पर आपको टैक्स देना ही पड़ेगा. न्यू टैक्स रिजीम के तहत किसी भी तर के निवेश पर टैक्स छूट का लाभ नहीं मिल सकता.
आपने न्यू टैक्स रिजीम का विकल्प चुना है तो अब 50 हज़ार की जगह 75000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलेगा. यानी कुल टैक्सेबल इनकम 9 लाख 25 हज़ार रुपए होगी. पहले जिन्हें इस आय पर 52,500 रुपये की टैक्स देनदारी बनती थी, उन्हें अब सिर्फ़ 42,500 रुपये टैक्स चुकाना होगा.
यानी नई टैक्स रिजीम में सालाना 10 लाख रुपये तक की आमदनी वाले 10 हज़ार रुपए और बचा लेंगे.
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