ब्रितानी सांसद क्यों चाहते हैं ऋषि सुनक करें मोदी से जगतार सिंह जोहल की रिहाई पर बात

    • Author, डैमियन ग्रेमिटिकास
    • पदनाम, राजनीतिक संवाददाता

भारत में मौत की सज़ा का सामना कर रहे एक ब्रितानी नागरिक के मामले में कई ब्रिटिश सांसदों ने प्रधानमंत्री ऋषि सुनक से दखल देने की अपील की है.

प्रधानमंत्री सुनक से अपील करने वालों में विभिन्न राजनीतिक दलों के 70 से अधिक सांसद शामिल हैं.

इन सांसदों ने ऋषि सुनक से अपील की है कि वो जी-20 शिखर सम्मेलन के लिए अपनी दिल्ली यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जगतार सिंह जोहल की 'फौरन रिहाई' पर बात करें.

उनका कहना है कि जगतार सिंह जोहल को भारत में 'पक्षपात पूर्ण तरीके से' पांच सालों से ज़्यादा समय से हिरासत में रखा गया है.

प्रधानमंत्री के प्रवक्ता ने इस मुद्दे पर चर्चा के बारे में न तो पुष्टि की है और न ही इनकार किया है.

कौन हैं जगतार सिंह जोहल?

स्कॉटलैंड के डंबर्टन के रहने वाले जगतार सिंह जोहल की उम्र अब 36 साल है. वे एक ब्लॉगर थे और सिखों के मानवाधिकारों के लिए काम करते थे.

माना जाता है कि वो इसी वजह से भारत में सरकारी अधिकारियों की नज़र में आए थे. साल 2017 में जगतार सिंह जोहल शादी करने के लिए भारत गए थे.

मानवाधिकारों के लिए काम करने वाले समूह 'रिप्राइव' का कहना है कि जब वे अपनी पत्नी के साथ शॉपिंग करने के लिए निकले थे तो उन्हें सादे कपड़े पहने लोग उठा कर ले गए थे. ऐसा करते वक़्त उनके मुंह पर कपड़ा डाल दिया गया था.

रिप्राइव के अनुसार उन्हें बुरी तरह से प्रताड़ित किया गया और ज़ोर ज़बर्दस्ती से सादे कागज़ पर दस्तखत कराए गए.

कंज़र्वेटिव पार्टी (टोरी पार्टी) के सांसद डेविड डेविस ने बीबीसी से कहा, "सरकार की पहली ज़िम्मेदारी ये है कि वो एक नागरिक को नुक़सान पहुंचने से रोके. और अगर नागरिक को कोई क्षति हो गई हो और उसके साथ नाइंसाफ़ी हुई हो तो सरकार को गंभीरता से इस पर विरोध जतलाना चाहिए. फिलहाल ऐसा होता हुआ दिख नहीं रहा है और अपनी बुनियादी जिम्मेदारी पूरा करने में विदेश विभाग नाकाम रहा है."

पहले भी ब्रिटेन के दो प्रधानमंत्री जोहल का केस भारत के सामने उठाते रहे हैं लेकिन भारत सरकार जोहल को प्रताड़ित करने या उनके साथ दुर्व्यवहार करने का खंडन करती रही है.

जेल में जोहल

अपनी चिट्ठी में सांसदों ने लिखा है, "गिरफ़्तारी के बाद जगतार सिंह जोहल से पूछताछ करने वालों ने उन्हें बिजली के झटके दिए और उन्हें पेट्रोल छिड़क कर ज़िंदा जलाने की धमकी दी. इस यंत्रणा को रोकने के लिए जगतार सिंह जोहल ने कैमरे के सामने बयान दिया और सादे कागज़ पर दस्तखत किए."

संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी मानवाधिकार एजेंसी 'द यूएन वर्किंग ग्रुप ऑन आर्बिटररी डिटेंशन' का कहना है कि जगतार सिंह जोहल को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वो सिखों के ख़िलाफ़ सरकार की कथित कार्रवाइयों पर जवाबदेही के लिए पोस्ट्स लिखते थे.

सांसदों की चिट्ठी में कहा गया है कि यूएन वर्किंग ग्रुप का ये मानना है कि जगतार सिंह जोहल को हिरासत में रखे जाने का कोई क़ानूनी आधार नहीं है.

लगभग छह साल होने जा रहे हैं, जोहल भारत की जेल में हैं. उन पर हत्या, हत्या की साज़िश, भारत में राजनीतिक हिंसा के दस मामले दर्ज हैं.

उनके परिवार का कहना है कि अदालती कार्यवाही शुरू तो हुई है लेकिन वो बार-बार स्थगित हो रही है.

क्या कहता है परिवार

जगतार के भाई गुरप्रीत सिंह जोहल डंबर्टन में वकील और लेबर काउंसलर हैं.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "परिवार को डर इस बात का है कि झूठे आरोप झूठे मुक़दमों में बदल गए. इससे ग़लत सज़ा हो सकती है और इसका नतीजा सज़ा-ए-मौत भी हो सकता है."

गुरप्रीत सिंह जोहल का कहना है कि पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन और टेरीज़ा मे ने भारत के प्रधानमंत्री के साथ इस मुद्दे पर बात की थी.

उन्होंने कहा कि "ऋषि सुनक के लिए बहुत मुश्किल होगा कि वे ये मुद्दा न उठाएं... अगर ऋषि सुनक ऐसा नहीं करते हैं तो सवाल उठेगा कि आपने ऐसा क्यों नहीं किया?"

"ये देखते हुए कि ऋषि सुनक के भारत के प्रधानमंत्री के साथ अच्छे रिश्ते हैं, यह बहुत मुश्किल काम नहीं होना चाहिए. लगभग छह साल हो गए हैं, जगतार के ख़िलाफ़ एक भी सबूत नहीं पेश किया गया है. उनके ख़िलाफ़ महज आरोप लगाए गए हैं और जब तक कि दोष साबित न हो जाए उन्हें बेकसूर माना जाना चाहिए."

गुरप्रीत सिंह आगे कहते हैं, "जगतार की रिहाई की मांग करने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए. ब्रिटेन ने अतीत में ईरान में क़ैद नाज़नीन (ज़ागरी-रैटक्लिफ़) और अनौशेह (अशूरी) के मामलों में वाजिब तरीके से ऐसा किया था."

ब्रिटेन के पीएमओ की प्रतिक्रिया

ये पूछे जाने पर कि क्या ऋषि सुनक पीएम मोदी के साथ अपनी मुलाकात में इस पर बात करेंगे या नहीं? प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने कहा, "मैंने इस कयास लगाने नहीं जा रहा हूं कि वे किन मुद्दों पर बात करेंगे और किन पर नहीं."

हालांकि ब्रितानी विदेश मंत्री जेम्स क्लेवरली ने जुलाई में गुरप्रीत सिंह जोहल को चिट्ठी लिख कर कहा था कि ये फ़ैसला किया गया है कि इस मुद्दे को लेकर भारत पर ज़ोर नहीं देना ही सबसे बेहतर रहेगा.

बीबीसी ने ये चिट्ठी देखी है.

जेम्स क्लेवरली ने लिखा है, "मुझे नहीं लगता है कि जगतार सिंह जोहल की रिहाई की मांग करने से ये नतीजा निकलेगा कि भारत सरकार उन्हें रिहा कर देगी. वास्तव में मुझे डर है कि ऐसा करने से उस सहयोग पर असर पड़ सकता है जिस पर हम निर्भर हैं.... ये सहयोग काउंसलर विजिट्स, उनकी भलाई कि चिंता और अदालत की सुनवाई में शामिल होने से जुड़ी है."

जेम्स क्लेवरली की इस चिट्ठी पर टोरी सांसद डेविड डेविस और जोहल परिवार दोनों ने ही नाराज़गी जताई है.

गुरप्रीत सिंह जोहल कहते हैं, "दरअसल वे ये कह रहे हैं कि मैं ऐसा नहीं करने जा रहा हूं और बजाय ऐसा करने के मैं उसे जेल में सड़ने दूंगा. मुझे तो ऐसा ही होता हुआ दिख रहा है."

टोरी सांसद डेविड डेविस का कहना है कि ये मामला ख़राब नज़ीर पेश करता है.

गुरप्रीत सिंह जोहल कहते हैं, "मेरा मानना है कि इस केस पर बात करने से ब्रिटेन की हिचक भारत के साथ व्यापार समझौते पर दस्तखत करने की ऋषि सुनक की ख्वाहिश के साथ जुड़ी हुई है."

"उनके फोकस से ऐसा लगता है कि भारत एक उभरता हुआ देश है और वे ये व्यापार समझौता करना चाहते हैं. वे मानवाधिकारों के ऊपर व्यापार को रख रहे हैं."

डेविड डेविस कहते हैं कि वे इस बात को लेकर स्पष्ट हैं कि व्यापार समझौता एक ब्रितानी नागरिक के क़ानूनी अधिकारों के बाद आना चाहिए.

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