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आईपीएल फ़ाइनल 2023 - धोनी बनाम पांड्या, किसका पलड़ा भारी?
- Author, विधांशु कुमार
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
आईपीएल 2023 का फ़ाइनल दरअसल दो शेरों की लड़ाई है – एक जिसने लंबे समय तक एकछत्र राज किया लेकिन अब वो अपनी ताक़त और जवानी की ढलान पर है और दूसरा जिसका सितारा हर रोज़ नई उंचाइयां छू रहा है. ये दो खिलाड़ी हैं चेन्नई सुपरकिंग्स के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और गुजरात टाइटंस के कप्तान हार्दिक पांड्या.
फ़ाइनल मैच में दोनों ही खिलाड़ियों का काफ़ी कुछ दांव पर लगा हुआ है. महेंद्र सिंह धोनी अपने आईपीएल करियर के आख़िरी पड़ाव पर हैं. उन्होंने पिछले मैच के बाद कहा था कि रिटायरमेंट पर फ़ैसला वो अगली नीलामी के आसपास ले सकते हैं.
धोनी ने चेन्नई की टीम को जीत का ऐसा क़िला बनाया है जहां आकर उम्रदराज़ खिलाड़ी या फिर बहुत सफल नहीं रहने वाले प्लेयर भी चैंपियन जैसा प्रदर्शन देने लगते हैं.
कभी उनकी टीम को डैडी-आर्मी पुकारा गया तो कभी टीम में ना -सुने गए नामों को चुनने के लिए उनकी आलोचना भी हुई. लेकिन बावजूद इनके धोनी ने एक ऐसी टीम बनाई जो जीतना जानती है. बकौल संजय मांजरेकर, धोनी चेन्नई सुपरकिंग्स में जीतने का कल्चर लेकर आए हैं जहां हारा हुआ खिलाड़ी भी जीत के लिए खेलता है.
धोनी ने चार बार आईपीएल ट्रॉफ़ी जीती है जो मुंबई इंडियंस से एक कम है. जाते जाते धोनी ये रिकॉर्ड भी अपनी टीम के नाम करना चाहेंगे.
वहीं हार्दिक पांड्या भी अपनी चमत्कारी लीडरशिप के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने पहली सीज़न में ही गुजरात को आईपीएल का टाइटल दिलवा दिया. उन्होंने एक ऐसी मज़बूत टीम खड़ी की है जिसने लोगों की फ़ेवरिट मुंबई इंडियंस को भी पानी पिला दिया. अब उनसे दूसरे टाइटल से कम की उम्मीद नहीं की जा रही है.
धोनी और पांड्या के रिश्ते
ये कोई छिपी हुई बात नहीं है कि महेंद्र सिंह धोनी और हार्दिक पांड्या मैदान के बाहर एक दूसरे के अच्छे दोस्त हैं. दोनों ने कई बार मीडिया पर एक दूसरे की तारीफ़ भी की है.
पांड्या धोनी से अकसर सलाह मांगते रहते हैं और कहते हैं कि उन्हें भारत के सबसे सफल कप्तान से बहुत कुछ सीखने को मिलता है. जब भी हार्दिक रांची में होते हैं तो वो ज़रूर धोनी से मिलने उनके घर जाते हैं. दोनों करीबी दोस्त हैं लेकिन मैदान पर जीतने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ने वाले भी हैं.
सुनील गावस्कर के अनुसार हार्दिक पांड्या उन्हें धोनी की याद दिलाते हैं. वो कहते हैं कि हार्दिक की कप्तानी में भी वो ही शांत भाव दिखाई देता है जिसके लिए महेंद्र सिंह धोनी जाने जाते हैं. वो अपनी टीम में धोनी की तरह ही खुशी और शांति का माहौल लेकर आते हैं जिसकी तारीफ़ करनी चाहिए.
वहीं धोनी के इस मौजूदा सीज़न को देखें तो उनके बिना चेन्नई के फ़ाइनल में पंहुचने की कल्पना भी नहीं की जा सकती. लेकिन सच ये भी है कि बैटिंग के लिहाज़ से वो इस सीज़न में सबसे कम भार उठाने वाले बल्लेबाज़ में से एक रहे हैं.
इतिहास किसके साथ है?
आईपीएल का फ़ाइनल वहीं पंहुच चुका है जहां से सीज़न की शुरुआत हुई थी. 31 मार्च को पहले मैच में पिछली बार के चैंपियन गुजरात और सबसे नीचे रहने वाली टीम चेन्नई अहमदाबाद में ही भिड़े थे.
चेन्नई ने पहले बैटिंग करते हुए 177 रन बनाए थे जिसका पीछा गुजरात ने 5 विकेट रहते कर लिया था.
वहीं पिछले सीज़न को दोनों मुकाबलों में गुजरात को जीत मिली थी. इस तरह चेन्नई गुजरात से 0-3 से पिछड़ रही थी.
लेकिन फिर चेन्नई ने अपनी ही टर्फ़ पर गुजरात को पटखनी दी और पहली बार पांड्या की टीम से धोनी की टीम जीत पाई.
सीज़न के पहले क्वालिफायर में चेन्नई ने फिर पहले बैटिंग की और एक धीमी विकेट पर 172 रन बनाए. गुजरात के बल्लेबाज़ लगातार आउट होते रहे और अंत में 15 रनों से चेन्नई को जीत मिली.
इस तरह दोनों टीमों के बीच अब तक खेले गए चार मुक़ाबले में गुजरात ने तीन मैच जीते हैं तो चेन्नई की टीम एक मैच जीतने में कामायब रही है.
किन खिलाड़ियों पर रहेगी नज़र
दोनों टीम के कप्तान बड़े मैच के खिलाड़ी हैं और फ़ाइनल में उनसे शानदार प्रदर्शन की उम्मीद की सकती है. लेकिन उनके अलावा दोनों ही टीमों के पास कुछ मैच-जिताऊ खिलाड़ी भी हैं जो किसी भी स्टेज पर मैच का पासा पलट सकते हैं.
इन खिलाड़ियों में सबसे पहला नाम है गुजरात के ओपनर शुभमन गिल का. चेन्नई ने जो पिछली मैच में जीत हासिल की थी उसकी बड़ी वजह थी की उन्होंने गिल को वापस पवेलियन भेज दिया था.
इस बार भी चेन्नई की जीत का मंत्र रहेगा शुभमन गिल का विकेट सस्ते में ले लेना. गिल ने इस सीज़न सर्वाधिक रन बनाए हैं और ऑरैंज कैप उनके पास है. पिछली 4 पारियों में वो 3 शतक लगा चुके हैं. उन्होंने पिछले मैच में मुंबई के खिलाफ़ 60 बॉल पर 129 रन बनाए थे.
मोहम्मद शमी और राशिद ख़ान
32 साल के मोहम्मद शमी ने इस सीज़न 16 मैच में 28 विकेट लिए हैं. टीम में उनकी अहमियत का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि अगर उन्हें टीम से हटा दिया जाए तो गुजरात की पेस डिपार्टमेंट में अल्जारी जोज़फ और कप्तान पांड्या ही मुख्य हथियार होते. हालांकि कमबैक कर रहे मोहित शर्मा ने आख़िरी ओवर्स में विकेट्स लेकर गुजरात के बोलिंग डिपार्टमेंट को मज़बूत किया है. वैसे 28 विकेट के साथ शमी पर्पल कैप होल्डर हैं.
वहीं राशिद खान भी पर्पल कैप की रेस में हैं और शमी से सिर्फ एक विकेट पीछे हैं. उनके खिलाफ तेज रन बनाना एक चुनौती है जो चेन्नई के बैटर्स को ज़रूर परेशान करेगी.
गायकवाड़ और कॉन्वे
वहीं चेन्नई के ओपनर्स ऋतुराज गायकवाड़ और डेवन कॉन्वे के कंधों पर चेन्नई की बल्लेबाज़ी रहेगी. इस बड़े मुकाबले में चेन्नई को लंबा स्कोर करना होगा और उन्हें उम्मीद होगी की कॉन्वे और गायकवाड़ बड़े स्कोर्स बनाएं.
इस सीज़न में अब तक 14 पारियों में कॉन्वे ने 52 की औसत से 625 रन बनाए हैं. जिसमें एक शतक और 6 अर्धशतक शामिल है. वहीं गायकवाड़ ने 14 पारियों में 43 की औसत से 564 रन जोड़े हैं जिसमें उन्होंने 4 बार पचास का स्कोर पार किया है.
तुषार देशपांडे और पथिराना
चेन्नई ने पहले अनजान खिलाड़ी तुषार देशपांडे पर भरोसा जताया और वो उस पर खरे उतरे. वो चेन्नई के लीडिंग विकेट-टेकर हैं. 15 पारियों में उन्होंने 21 विकेट लिए हैं.
वहीं श्रीलंका और आईपीएल के लीजेंड लसिथ मलिंगा की बोलिंग स्टाइल को कॉपी करने वाले और बेबी मलिंगा कहलाने वाले पथिराना भी चेन्नई की बोलिंग की अहम कड़ी होंगे. इस सीज़न पथिराना ने 11 पारियों में 17 विकेट लिए हैं और उनके ऊपर शुभमन गिल को जल्द आउट करने की बड़ी जिम्मेदारी भी होगी.
अगर इतिहास को देखें तो चार में से तीन मैच जीतने वाली गुजरात की टीम का पलड़ा भारी है. लेकिन अगर मोमेंटम को देखें तो पिछली मैच में जीतने वाली चेन्नई की टीम का हौसला बढ़ा है. धोनी और हार्दिक की इस टक्कर में एक रोमांचक मुक़ाबले की उम्मीद दर्शक लगाऐ बैठे हैं.
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