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बाइडन के प्रस्ताव पर नेतन्याहू का कड़ा रुख़, इसराइली सरकार में शामिल मंत्रियों ने दी धमकी
- Author, ह्यूगा बाचेगा और एडम डर्बिन
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने फिर से दुहराया है कि जब तक हमास की सैन्य और प्रशासनिक क्षमताएं नष्ट नहीं हो जातीं और सभी बंधक रिहा नहीं हो जाते तब तक ग़ज़ा में स्थाई संघर्ष विराम नहीं होगा.
इस बीच नेतन्याहू कैबिनेट के दो धुर दक्षिणपंथी सदस्यों ने समझौते का समर्थन न करने को कहा है.
नेतन्याहू का बयान अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की उस घोषणा के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि स्थाई संघर्ष विराम तक पहुंचने के मक़सद से इसराइल ने तीन चरणों वाली योजना हमास को प्रस्तावित की है.
एक वरिष्ठ हमास नेता ने बीबीसी को बताया कि "अगर इसराइल तैयार है तो हमास भी इस समझौते पर आगे बढ़ेगा."
बातचीत की ये ख़बरें ऐसे समय में आ रही हैं जब ग़ज़ा के साथ लगी मिस्र की सीमा के पास रफ़ाह में लड़ाई जारी है और यहां शनिवार को इसराइल के हवाई हमले की ख़बरें हैं.
हालांकि इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि बाइडन की ओर से हमास और इसराइल पर सार्वजनिक रूप से डाले जा रहे दबाव का परिणाम समझौता ही होगा.
शनिवार को एक बयान में नेतन्याहू कार्यालय ने कहा कि ‘युद्ध ख़त्म करने की इसराइल की शर्त में कोई बदलाव नहीं आया है.’
बयान में कहा गया कि 'स्थाई संघर्ष विराम' पर सहमति से पहले इसराइल इन शर्तों को पूरा करने पर ज़ोर देता रहेगा.
शुक्रवार को बाइडन ने नई योजना को इसराइल की ओर से पेश एक विस्तृत प्रस्ताव बताया जो एक 'स्थाई संघर्ष विराम' का रास्ता तैयार करेगा.
प्रस्ताव के प्रथम चरण में पूर्ण संघर्ष विराम, घनी आबादी वाले इलाक़ों से इसराइली सेना की वापसी और बंधकों और फ़लस्तीनी क़ैदियों की अदला-बदली शामिल है.
इसके बाद दूसरे चरण में बाक़ी बचे ज़िंदा बंधकों को वापस किया जाएगा, जिसमें पुरुष सैनिक भी शामिल होंगे.
स्थाई संघर्ष विराम
बाइडन के अनुसार, अंतिम चरण में अंतिम बचे इसराइली बंधक के अवशेषों को वापस किया जाएगा, साथ ही घरों, स्कूलों और अस्पतालों को बनाने के लिए अमेरिका और अंतराराष्ट्रीय मदद से एक "विशाल पुनर्निर्माण योजना" लागू होगी.
हमास की ओर से स्थाई संघर्ष विराम एक प्रमुख मांग रही है और समझौता वार्ता की प्रमुख शर्त भी रही है.
नेतन्याहू के बयान के बाद हमास के एक प्रवक्ता ने कहा है कि समझौता योजना पर इसराइल टिका रहता है तो वो भी समर्थन करेगा.
क़तर में मौजूद हमास के पॉलिटिकल ब्यूरो के सदस्य बासेम नईम ने बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के न्यूज़ आवर कार्यक्रम में कहा कि संगठन ने इस योजना का स्वागत किया है लेकिन अगला क़दम इसराइल पर निर्भर करता है.
नेतन्याहू के बयान के जवाब में उन्होंने कहा कि हो सकता है कि इसराइल का मक़सद बदला न हो लेकिन इसे हासिल भी नहीं किया जा सका है.
नईम ने कहा, "अगर वो जारी रखते हैं तो वो सिवाय इसके कुछ नहीं पाएंगे कि सभी फ़लस्तीनी जनता क़ब्ज़े का प्रतिरोध करने के लिए तैयार मिलेगी."
बाइडन की ओर से पेश किए गए प्रस्ताव से ऐसा लगता है कि इसराइल और हमास दोनों को ये कहने का मौक़ा मिलेगा कि उनकीं मांगें पूरी हो गई हैं.
हमास के लिए, ये स्पष्ट रूप से एक स्थाई संघर्ष विराम का रास्ता खोलता है, जो कि उसके लिए किसी भी समझौते की प्रमुख मांग रही है. वो गारंटी चाहता है कि सारे बंधक रिहा होने के बाद इसराइली सेना ग़ज़ा में वापस न लौटे और प्रस्ताव में ये पेशकश की गई है.
हालांकि बिना शक इसका इसराइल में विरोध हो सकता है.
धुर दक्षिणपंथी मंत्रियों की धमकी
बाइडन ने इन चिंताओं को ये कहते हुए संबोधित करने की कोशिश की है कि हमास की क्षमता को इस स्तर तक विघटित किया जा चुका है कि इसराइल पर वो अब दोबारा बड़ा हमला नहीं कर सकता है.
हालांकि, उन्होंने इस बात को माना कि इसराइल में हर कोई इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करेगा लेकिन उन्होंने सरकार से अपील की कि वो दबाव के सामने न झुके.
जो लोग इस योजना की मुख़ालफ़त कर रहे हैं उनमें नेतन्याहू के गठबंधन के धुर दक्षिणपंथी सदस्य शामिल हैं, जिन्होंने इससे पहले भी 'बिना हमास को पूरी तरह नष्ट किए किसी भी समझौते की स्थिति' में सरकार से बाहर आने की धमकी दी थी. इसकी वजह से नेतन्याहू सरकार गिर सकती थी.
इनमें दो धुर दक्षिणपंथी मंत्रियों ने संघर्ष विराम समझौते के ख़िलाफ़ विरोध की चेतावनी जारी की है.
राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्वीर और वित्र मंत्री बेज़ालेल स्मोट्रिच ने कहा है कि 'जब तक हमास का समूल नाश नहीं हो जाता वे किसी भी समझौते का विरोध करेंगे.'
लेकिन इसराइल के सबसे प्रभावशाली विपक्षी नेता याएर लापिड ने संघर्ष विराम समझौते पर नेतन्याहू का साथ देने का वादा किया है.
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लापिड ने इसराइली पीएम से कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्वीर और वित्र मंत्री बेज़ालेल स्मोट्रिच जैसे अगर धुर दक्षिणपंथी सहयोगी सरकार छोड़ते हैं तो बंधक समझौते के लिए ‘हमारा समर्थन रहेगा.’
रफ़ाह बॉर्डर खोलने के लिए वार्ता
नेतन्याहू के कार्यालय का बयान, उनके उद्देश्य पूरा होने के दावे को लेकर बेहद अस्पष्ट लगा.
दिलचस्प है कि इसमें टोटल विक्ट्री (पूर्ण विजय) का ज़िक्र नहीं था, जबकि ग़ज़ा में इसराइली सैन्य अभियान के मुख्य उद्देश्य के संदर्भ में इसका बार-बार ज़िक्र किया गया था.
यह छूट, नेतन्याहू को इस आलोचना को ख़ारिज करने का मौक़ा देती है कि शांति समझौता प्रस्ताव में हमास को भारी रियायत दी गई है.
हाल के सप्ताहों में इसराइल ने रफ़ाह में हमले को तेज़ किया है और मिस्र से सटे पूरे बॉर्डर का संचालन नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है.
अमेरिकी, इसराइली और मिस्र के अधिकारी रविवार को काहिरा में मिलने वाले हैं ताकि रफ़ाह क्रॉसिंग को फिर से खोले जाने पर सहमति बन सके.
मिस्र की मीडिया में इसको लेकर कई रिपोर्टें प्रकाशित हैं.
मई की शुरुआत में जब से बॉर्डर बंद हुआ है, सहायता सामग्री का ग़ज़ा में प्रवेश बाधित हो गया है.
ग़ज़ा के दक्षिणी बॉर्डर का नियंत्रण लेने के लिए इसराइली सेना ने अभियान चलाया था.
हमास संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, जब से संघर्ष शुरू हुआ है ग़ज़ा पट्टी में 36,000 से अधिक फ़लस्तीनियों की मौत हो चुकी है.
पिछले साल अक्टूबर में हमास ने सीमा पार कर इसराइल पर हमला बोला था जिसमें 1200 लोग मारे गए थे जबकि 252 लोगों को बंधक बनाकर ग़ज़ा ले जाया गया था.
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