भारत-चीन तनाव के बीच मंगलवार को कमांडर स्तर की बैठक - आज की बड़ी ख़बरें

भारत- चीन तनाव

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लद्दाख में नियंत्रण रेखा पर जारी तनाव को लेकर भारत और चीन के बीच मंगलवार को कॉर्प्स कमांडर स्तर की तीसरी बैठक होगी.

इससे पहले की दो बैठकें छह जून और 22 जून को हुई थीं.

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, यह बैठक लद्दाख के चुशुल में सुबह साढ़े 10 बजे होगी. यह बैठक भारत वाले हिस्से में होगी, जबकि इससे पहले की दो बैठकें चीन वाले हिस्से मोल्दो में हुई थीं.

मंगलवार को होने वाली बैठक में दोनों पक्ष तनाव को कम करने को लेकर चर्चा करेंगे और स्थिति को सामान्य बनाने के लिए ज़रूरी क़दमों पर सहमति बनाने की कोशिश करेंगे.

दोनों देशों के बीच पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में मई महीने की शुरुआत से ही तनाव बना हुआ है. 15 जून को भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प भी हुई थी.

इस घटना में एक कर्नल समेत 20 भारतीय सैनिकों की जान गई थी जबकि अन्य कई घायल हुए थे. वहीं चीन ने भी नुक़सान होने की बात स्वीकारी है मगर उसकी ओर से इस संबंध में अधिक जानकारी नहीं दी गई है.

इसराइल ख़तरनाक रास्ते पर बढ़ रहा है- संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार प्रमुख

यूएन

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संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार प्रमुख मिशेल बैचलेट ने कहा है कि पश्चिमी तट के कुछ हिस्से के विलय की इसराइल की योजना ग़ैर क़ानूनी है.

उन्होंने चेतावनी दी है कि इसके नतीजे विनाशकारी हो सकते हैं. माना जा रहा है कि इसराइल कुछ दिनों के अंदर पश्चिमी तट की अपनी बस्तियों और जॉर्डन वैली के विलय की योजना शुरू करेगा.

मिशेल बैचलेट ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू से अपील की है कि वो अपना ये प्रस्ताव छोड़ दें.संयुक्त राष्ट्र में मानवाधिकार मामलों की उच्चायुक्त मिशेल बैचलेट ने कहा- विलय ग़ैर क़ानूनी है. वो चाहे पश्चिमी तट का 30 प्रतिशत हो या पाँच प्रतिशत.

उन्होंने इसराइल से अपील की कि वो अपने पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों और जनरलों की बात सुने और साथ ही दुनिया भर से उठ रही आवाज़ों पर भी ध्यान दें.

उन्होंने कहा कि इसराइल को इस ख़तरनाक रास्ते पर आगे नहीं बढ़ना चाहिए. माना जा रहा है कि इसराइल एक जुलाई से विलय की योजना पर काम कर सकता है, जो अमरीका के मध्य पूर्व शांति योजना का एक हिस्सा है.

नेपाल के पीएम ओली ने भारत और भारतीय दूतावास पर लगाए आरोप

नेपाल

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नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली अपनी पार्टी में बुरी तरह से घिरे हुए हैं.

नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी की स्टैंडिंग कमिटी की बैठक में उनकी ख़ूब आलोचना हुई और इस्तीफ़े की मांग भी ज़ोर पकड़ रही है. इन सबके बीच प्रधानमंत्री ओली ने कहा है कि उन्हें हटाने के लिए नई दिल्ली और काठमांडू में साज़िश रची जा रही है.

नेपाल के प्रमुख अख़बार काठमांडू पोस्ट के मुताबिक़ ओली ने रविवार को कहा, ''संसद से नेपाल का नया नक्शा पास करने के कारण मुझे हटाने की साज़िश रची जा रही है.''

ओली ने ये बातें रविवार को मदन भंडारी फाउंडेशन में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही. ओली ने कहा, ''अभी चल रही बौद्धिक चर्चाएं, नई दिल्ली से आ रही मीडिया रिपोर्ट, काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास की गतिविधियां और अलग-अलग होटलों में चल रही बैठकों से यह समझना मुश्किल नहीं है कि कैसे लोग सक्रिय रूप से मुझे हटाने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन वो सफल नहीं होंगे.''

नेपाली मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक़ ओली अपनी पार्टी में और कई मोर्चों पर आलोचना झेल रहे हैं. कोविड-19 से निपटने को लेकर भी प्रधानमंत्री ओली की आलोचना हो रही है.

यहां तक कि पार्टी के सीनियर नेता पुष्प कमल दहाल प्रचंड भी ओली को आड़े हाथों ले रहे हैं. हालांकि यह बात भी कही जा रही है कि नेपाल का नया नक्शा जारी करने के बाद स्थिति थोड़ी बदली है. ओली के इस क़दम की किसी भी पार्टी ने आलोचना नहीं की. नए नक्शे में नेपाल ने कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को नेपाल में दिखाया गया है.

नेपाल

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ओली आलोचना से बचने के लिए पार्टी की स्टैंडिंग कमिटी की बैठक में शामिल होने से बच रहे हैं. रविवार को ख़ुद को हटाने की साज़िश की बात कहकर ओली ने साफ़ कर दिया है कि वो पार्टी से भी दो-दो हाथ करने के लिए तैयार हैं.

नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी की सेंट्रल कमिटी के सदस्य महेश्वर दहाल ने कहा, ''जब प्रधानमंत्री को पार्टी की चल रही बैठक में अपनी बात और मतभेद को रखना चाहिए तो वो अपना विचार बाहर रख रहे हैं. यह अच्छा से ज़्यादा बुरा करेगा. यह हैरान करने वाला है कि ओली पार्टी की बैठक से बच रहे हैं और अलग-अलग फोरम में अपनी बात कह रहे हैं. इससे पार्टी के बीच मतभेद ही बढ़ेगा.''

अब नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के भीतर यह मांग भी उठने लगी है कि या तो ओली पार्टी प्रमुख रहें या प्रधानमंत्री. पार्टी के सीनियर नेता प्रचंड, माधव कुमार नेपाल झाला नाथ खनाल, बामदेव गौतम और नारायण काजी श्रेष्ठ के बारे में कहा जा रहा है कि वो इस मांग से सहमत हैं.

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