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गाय को गले लगाने से क्या वाक़ई में मन को शांति मिलती है?
चौतरफा आलोचनाओं के बाद एनिमल वेलफ़ेयर बोर्ड आफ़ इंडिया ने 14 फ़रवरी को 'काउ हग डे' मनाने की अपनी अपील को वापस ले लिया है.
शुक्रवार को एक बयान जारी कर बोर्ड ने कहा है कि मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के निर्देश पर एनिमल वेलफ़ेयर बोर्ड के द्वारा जारी की गई अपील को वापस ले लिया गया.
ग़ौरतलब बोर्ड की इस अपील की चौतरफा आलोचना हुई और विपक्ष ने आरोप लगाया कि ये असल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए किया गया.
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने ट्वीट किया था कि 'अब सरकार ने हमारे वेलेंटाइन डे का भी प्लान बना लिया है.'
हर साल दुनिया भर में 14 फ़रवरी को वैलेंटाइन डे मनाया जाता है. वहीं 12 फ़रवरी को हग डे मनाया जाता है.
अब सवाल ये उठता है कि क्या गाय को गले लगाने से कुछ हासिल होता है? इसका जवाब नीचे कहानी में आपको मिलेगा जो बीबीसी के पन्ने पर पहली बार अक्तूबर 2020 में प्रकाशित हुई थी.
बकरियों के बीच योग से लेकर घंटियों की आवाज़ में सोने तक, सेहत की दुनिया में नए-नए ट्रेंड आ रहे हैं.
इनका मक़सद है मन की शांति हासिल करना. और अब नीदरलैंड्स की अपना ख्याल रखने की एक परंपरा सेहत की दुनिया का नया ट्रेंड बन रही है.
स्थानीय भाषा में इसे 'काऊ नफ़लेन' कहते हैं जिसका मतलब है गायों को गले लगाना.
ये परंपरा गायों से सटकर बैठने के दौरान मिलने वाली मन की शांति पर आधारित है.
गायों को गले लगाने वाले किसी फार्म का दौरा करते हैं और वहां किसी एक गाय के साथ घंटों तक सटकर बैठते हैं.
थेरेपी का हिस्सा
गाय की पीठ थपथपना और उसके साथ सटकर बैठना या उसे गले लगा लेना, ये सब थेरेपी का हिस्सा हैं.
अगर गाय पलटकर आपको चाटती है तो वो बताती है कि आपके और उसके बीच विश्वास कितना गहरा है.
गाय के शरीर का गर्म तापमान, धीमी धड़कनें और बड़ा आकार उन्हें सटकर बैठने वालों को शांति का अहसास देता है.
ये एक सुखदायक अनुभव होता है. यही नहीं इससे गायों को भी सुखद अहसास होता है. ये उनकी पीठ खुजलाने जैसा है.
उनसे सटकर बैठना, उन्हें चाटने देना ये सब इस चिकित्सकीय अनुभव का ही हिस्सा हैं.
ऑक्सिटोसिन हार्मोन
नीदरलैंड्स में गायों के एक फार्म की मालिक कहती हैं, "गायें आमतौर पर बेहद शांतिपूर्ण होती हैं, वो बेवजह लड़ती नहीं हैं और किसी को परेशान नहीं करती हैं."
वो कहती हैं, "गले लगाने के लिए तैयार की गईं विशेष गायें तो और भी शांत होती हैं. जब एक गाय बोर हो जाती है तो वो उठकर चल देती है."
माना जाता है कि गायों को गले लगाने से मनुष्यों के शरीर में ऑक्सिटोसिन निकलता है और इससे उन्हें अच्छा अहसास होता है.
ये हार्मोन अच्छे सामाजिक संपर्क के दौरान निकलता है.
माना जाता है कि ऑक्सिटोसिन संतुष्टी की भावना लाता है, तनाव कम करता है और दोस्तों के साथ होने पर मन की शांति का अहसास कराता है.
मन की शांति का अहसास
ये माना जाता है कि पालतू जानवरों को गले लगाने से जो मन की शांति का अहसास होता है वो बड़े जानवर के साथ और ज़्यादा बढ़ जाता है.
जैसे जब हम सोफे पर किसी बिल्ली को गोद में बिठाकर जो महसूस करते हैं वो अब गाय जैसे बड़े जानवर के साथ होने पर और बढ़ जाता है.
करीब एक दशक पहले नीदरलैंड्स के ग्रामीण इलाक़ों में जानवरों के साथ समय बिताने की ये संस्कृति शुरू हुई थी.
अब ये एक बड़े अभियान का हिस्सा है जिसके तहत लोगों को प्रकृति और देसी ज़िंदगी के क़रीब लाया जा रहा है.
अब तो रोटरडेम, स्विट्ज़रलैंड और यहां तक कि अमरीका के भी फार्म लोगों को गायों को गले लगाने का अनुभव दे रहे हैं.
ये तनाव दूर करने का एक तरीका भी बनता जा रहा है.
गले लगाने का ये अनुभव जानवरों के लिए भी सुखदायक हो सकता है.
साल 2017 में किए गए एक शोध के मुताबिक गायों को जब उनकी गर्दन और पीठ के कुछ खास हिस्सों पर मसाज किया गया तो वो शांत हुईं, फैलकर लेटीं और उनके कान भी नीचे गिर गए. ये शोध एप्लाइड एनिमल विहेवियर साइंस जर्नल में प्रकाशित हुआ था.
अब ऐसा भी हो सकता है कि डॉक्टर तनाव के शिकार लोगों को गायों के साथ समय बिताने के लिए कहें.
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