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गाय के गोबर से रेडिएशन कम होने का दावा, क्या है सच्चाई
- Author, रिएलिटी चेक टीम
- पदनाम, बीबीसी
भारत में गोबर से बने एक चिप को लेकर आधिकारिक दावा किया गया है कि यह चिप मोबाइल रेडिएशन से सुरक्षा प्रदान कर सकता है.
राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के अध्यक्ष डॉ. वल्लभभाई कठेरिया ने इस चिप को लेकर घोषणा की और कहा, "यह एक रेडिएशन चिप है जिसे मोबाइल में रेडिएशन कम करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है."
लेकिन सोशल मीडिया पर इस दावे का काफी मज़ाक उड़ाया जा रहा है और यह कितना कारगर है इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण भी नहीं है.
आख़िर क्या है गाय के गोबर से बना 'चिप'
यह चिप, गुजरात राज्य के एक समूह ने तैयार किया है. यह समूह गौशाला चलाता है. इस चिप को मोबाइल के बाहरी हिस्से पर लगाने के लिहाज़ से विकसित किया गया है.
इस चिप को सार्वजनिक करने के साथ ही ये दावा भी किया गया कि यह चिप मोबाइल से निकलने वाले रेडिएशन के ख़िलाफ़ कथित तौर पर एक सुरक्षात्मक ढाल प्रदान करेगा.
इस चिप की क़ीमत पचास रुपये से लेकर सौ रुपये तक के बीच रखी गई है. डॉ. कथीरिया ने बताया कि देशभर में क़रीब 500 से ज़्यादा गौशालाओं में अब यह चिप बन रही है.
गुजरात स्थित गौशाला समूह ने बीबीसी को बताया कि वे बीते एक साल से चिप बना रहे हैं लेकिन अभी तक उन्होंने ना तो इसकी कोई वैज्ञानिक जांच की है और ना ही कोई परीक्षण.
एक गौशाला चलाने वाले दास पई का कहना है, "आयुर्वेदिक साहित्य कहता है कि गाय का गोबर और चिप को बांधने में इस्तेमाल किये गए दूसरे तत्वों में ऐसे गुण हैं जो रेडिएशन से सुरक्षा प्रदान करते हैं."
हालांकि वे इस बात को भी स्पष्ट करते हैं कि इसका अभी तक ना तो कोई परीक्षण हुआ है और ना ही कोई वैज्ञानिक जांच.
क्या गाय के गोबर में इस तरह के गुण होते हैं?
नहीं... लेकिन यह भी स्पष्ट कर देना ज़रूरी है कि यह कोई पहला मौक़ा नहीं है जब इस तरह का कोई दावा किया जा रहा है.
इससे पहले साल 2016 में आरएसएस के प्रचारक शंकर लाल ने गाय के गोबर को लेकर बिल्कुल यही दावा किया था. और उनसे पहले, इस तरह के और भी कई दावे थे कि गाय का गोबर तीनों प्रकार के रेडिएशन अल्फ़ा-बीटा और गामा को अवशोषित कर लेता है.
लेकिन वैज्ञानिकों ने इन दावों को सिरे से ख़ारिज कर दिया था. इसके साथ ही ऐसा कोई वैज्ञानिक अध्ययन भी नहीं हुआ है जो इस बात की पुष्टि करता हो कि गाय का गोबर रेडिएशन को कम करता हो.
अशोका यूनिवर्सिटी में भौतिक विज्ञानी प्रोफ़ेसर गौतम मेनन ने बीबीसी से कहा, "गाय के गोबर में जो तत्व पाए जाते हैं और जिनके बारे में हमें पता है उसके आधार पर यह स्पष्ट तौर पर कहा जा सकता है कि इसमें कोई ऐसा गुण नहीं है."
रेडिएशन से सुरक्षा के लिए जिस तत्व का सबसे अधिक इस्तेमाल होता है वो है- लेड (शीशा). इसका इस्तेमाल रेडिएशन थेरेपी में भी किया जाता है. लेकिन गोबर और उसके कथित गुणों को लेकर दावा करने वालों का कहना है कि विकिरण के ख़िलाफ़ इसके प्रभाव का प्रमाण ग्रामीण परिवेश में रहने वाले लाखों भारतीय परिवार हैं, जो अपने घरों को गोबर से लीपते हैं.
हालांकि प्रोफ़ेसर मेनन का मानना है कि ग्रामीण परिवेश में लोग ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि उन्हें गोबर आसानी से मिल जाता है. गोबर से घर को लीपने से घर का ताप तो कम हो सकता है लेकिन विकिरण से सुरक्षा मिलती हो ऐसा कुछ नहीं है.
क्या मोबाइल फ़ोन हानिकारक विकिरण का उत्सर्जन करते हैं?
मोबाइल के संभावित स्वास्थ्य प्रभाव के बारे में कुछ सालों से लोगों में जागरूकता आयी है. लोगों में चिंता बढ़ी है और ऐसी आशंकाएं भी ज़ाहिर की गई हैं कि अगर लंबे समय तक मोबाइल का इस्तेमाल किया जाए तो कैंसर या फिर अन्य गंभीर बीमारियां हो सकती हैं.
लेकिन यूएस फ़ूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन की सलाह के मुताबिक़, हाल के दशकों में हुए शोधों में यह नहीं पाया गया है कि मोबाइल फ़ोन के विकिरण के संपर्क में आने से कैंसर जैसी स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं.
"मोबाइल इस्तेमाल करने के दौरान निम्न स्तर की आयनित ना होने वाले विकिरण उत्सर्जित करता है."
ब्रिटेन में भौतिकी के विशेषज्ञ प्रोफेसर मैल्कम स्प्रीरिन कहते हैं, "मोबाइल से निकलने वाली ऊर्जा इतनी कम होती है कि वह मानव स्वास्थ्य के लिए किसी तरह का ख़तरा हो सकती है, इसका कोई प्रमाणिक सुबूत नहीं है."
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