बेहतर भविष्यवाणी कैसे की जाती है

    • Author, विलियम पार्क
    • पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर

कुछ लोगों में भविष्यवाणी करने की पैदाइशी ख़ूबी होती है. ज्योतिषी और नजूमी वग़ैरह सितारों, नक्षत्रों और कुंडली के गुण दोष देखकर पहले से बता देते हैं कि क्या होने वाला है.

लेकिन आम लोग तजुर्बे और मौजूदा हालात के मद्देनज़र भविष्यवाणी करते हैं. हालांकि, बहुत से लोग भविष्यवाणी पर यक़ीन नहीं करते. लेकिन, कुछ बड़े फ़ैसलों के लिए भविष्यवाणी ज़रूरी होती है. जैसे आर्थिक क्षेत्र, मौसम या राजनीतिक हालात.

ख़ास तौर से बड़ी कंपनियां तो अपने यहां कुछ एक्सपर्ट भी रखती हैं, जो कंपनी और बाज़ार के हालात पर नज़र रख कर आने वाला कल बताते हैं. इनकी भविष्यवणी से कंपनियों को मुनाफ़ा कमाने, और सही जगह पर पैसा लगाने जैसे फ़ैसले लेने में सुविधा होती है.

ये लोग सुपर फोरकास्टर यानी पूर्वानुमान लगाने वाले आला दर्ज़े के एक्सपर्ट होते हैं.

2007 में माइक्रोसॉफ़्ट कंपनी के उस वक़्त के सीईओ स्टीव बामर ने यूएसए टूडे को बताया था कि आई-फ़ोन मार्केट में ख़ास पहचान नहीं बना पाएगा और मोबाइल मार्केट में एप्पल महज़ दो से तीन फ़ीसद ही बिक पाएगा.

लेकिन बाद में एप्पल ने पूरी मार्केट पर कब्ज़ा जमा लिया. 2012 के शुरू में एप्पल ने मोबाइल के अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में 23 फ़ीसद कारोबार पर अपना कब्ज़ा कर लिया था.

एप्पल के बारे में बामर की ये एक बड़ी ग़लत भविष्यवाणी थी. उनकी इसी भविष्यवाणी की वजह से माइक्रोसॉफ़्ट को बड़ा नुक़सान उठाना पड़ा.

बहुत से लोग बामर की आलोचना करते हुए उन्हें अमरीका का सबसे ख़राब सीईओ बुलाते हैं. बामर में सही पूर्वानुमान लगाने की ख़ूबी नहीं थी. अच्छा सुपर-फ़ोरकास्टर वो होता है, जिसका ज़हन खुला होता है. उसमें जिज्ञासा होती है, वो मौक़ा और हालात देखकर अपने फ़ैसले में बदलाव करने की क़ुवव्त रखता है.

लेकिन बामर ने ना तो मौक़ा और माहौल समझा, और ना ही खुले ज़हन से ये समझने की कोशिश की कि आई-फ़ोन की ख़ूबी क्या है. आख़िर ये फ़ोन लोगों को पसंद क्यों नहीं आएगा? इसकी वजह क्या है? और उनकी यही कमअक़्ली, उन्हें और कंपनी दोनों को ले डूबी.

सुपर-फ़ोरकास्टर

अगर ये पता हो कि किसी में सही भविष्यवाणी करने की क्षमता है तो क्या उसे कुछ गुर सिखाकर सुपर-फ़ोरकास्टर बनाया जा सकता है? बेशक ऐसा हो सकता है.

बाज़ार के लिए तजुर्बेकार सुपर फ़ोरकास्टर तैयार करने पर बीते कुछ ही वर्षों में काम शुरू हुआ है. 2011 से 2015 में इंटेलिजेंस एडवांस रिसर्च प्रोजेक्ट एक्टिविटी के तहत एक टूर्नामेंट शुरू किया गया. इसमें ऐसे लोग तलाशे गए जिनमें क़ुदरती तौर पर माहौल और हालत समझने की क्षमता हो.

इस टूर्नामेंट में क़रीब 25 हज़ार फ़ोरकास्टर ने हिस्सा लिया. इनका काम यूरोज़ोन के भविष्य से लेकर रूस में व्लादमिर पुतिन के हारने तक की भविष्यवाणी करना था. जिन फ़ोरकास्टर ने टीम में काम किया था उनका प्रदर्शन अकेले ट्रेनिंग लेने वाले फ़ोरकास्टर के मुक़ाबले काफ़ी बेहतर था.

जीतने वाली टीम बाद में बिज़नेस के लिए फ़ोरकास्ट करने वाली टीम बनी. ये प्रोजेक्ट अमरीका के ऑफ़िस ऑफ़ द डायरेक्टर ऑफ़ नेशनल इंटेलिजेंस का हिस्सा था.

द सेंटर फ़ॉर कलेक्टिव इंटेलिजेंस डिज़ाइन, नेस्ता का हिस्सा है. और नेस्ता ब्रिटेन का इनोवेशन फ़ाउंडेशन है जो बीबीसी फ़्यूचर के साथ मिलकर ऐसे लोगों की तलाश कर रहा है जो अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम की सटीक भविष्यवाणी कर सकें.

सेंटर फ़ॉर कलेक्टिव इंटेलिजेंस डिज़ाइन की संचालक कैथी पीच का कहना है कि कई बार ऐसे मामले सामने आ जाते हैं जिनकी इतिहास में भी कोई मिसाल नहीं मिलती और मौजूदा घटनाक्रम भी कोई साफ़ तस्वीर पेश नहीं करता. ऐसे में क़ाबिल और माहिर अंदाज़ा लगाने वालों की ज़रूरत होती है.

साफ़ तस्वीर पेश करना

अनिश्चितता और जटिलता के माहौल में किसी एक फ़ोरकास्टर के लिए तमाम तरह की जानकारियां हासिल करना और उनका तुलनात्मक अध्ययन करना संभव नहीं होता.

अगर यही काम टीम बनाकर किया जाए तो उसमें सटीक भविष्यवाणी करने में आसानी होगी. हरेक टीम मेम्बर की अपनी राय होगी. अगर किसी ख्याल में कोई कमी है तो दूसरा ख्याल उस कमी को पूरा करेगा जिससे तस्वीर बिल्कुल साफ़ हो जाएगी.

किस शख़्स में बेहतर भविष्यवाणी करने की क्षमता है, ये बात कैसे पता की जाए? गुड जजमेंट कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर माइकल स्टोरी कहते हैं कि भविष्यवाणी करने की क्षमता जांचने के लिए उसकी जानकारी नहीं देखी जाती. बल्कि उन्हें तस्वीरों की एक सीरीज़ दिखाकर उसके पैटर्न पर बात की जाती है.

लेकिन इसके लिए उन्हें ज़हन में पहले से मौजूद पूर्वाग्रह को पूरी तरह निकालना होता है. अगर किसी एक स्टोरी पर बात की जाएगी तो बहुत मुमकिन है कि बताने वाले की अपनी राय उसके ख्याल पर हावी हो जाए. और वो संभावनाओं को नज़र अंदाज़ कर दे.

ये बिल्कुल ताश के खेल जैसा होता है. जब हम कार्ड खेलते हैं तो हमें पता होता है कि अगर कुछ खास कार्ड हमारे पास हैं तो सामने वाले के पास कौन-कौन से कार्ड होंगे और वो अगला कार्ड कौन सा चलेगा. लेकिन उसमें बहुत सी संभावनाएं छुपी रहती हैं जिन्हें हम नज़रअंदाज़ कर देते हैं और बाज़ी पूरी तरह पलट जाती है.

कैसे होते हैं सुपर फ़ोरकास्टर?

गुड जजमेंट प्रोजेक्ट की टीम एक के बाद एक ज़बरदस्त भविष्यवाणी कर रही है. ख़ुद माइकल भी इस प्रोजेक्ट की बुनियादी टीम का हिस्सा थे.

गुड जजमेंट प्रोजेक्ट के फ़िलिप टेटलॉक का कहना है कि सुपर फ़ोरकास्टर मनोवैज्ञानिक रूप से सबसे अलग होते हैं और उनके पूर्वाग्रह उन पर हावी नहीं होते. एक आम फ़ोरकास्टर अपने ख्याल, राय और समझ को सबसे बेहतर मानता है. लेकिन सुपर फ़ोरकास्टर इन सभी को परीक्षण योग्य परिकल्पना मानता है और सबूतों की रोशनी में उनमें बदलाव भी कर लेता है.

वो नई जानकारियों को अपनी सोच का हिस्सा बनाता है. कैथी पीच का ये भी कहना है कि सुपर फ़ोरकास्टर औसत फ़ोरकास्टर के मुक़ाबले अंतिम राय देने से पहले उस पर एक बार ग़ौर ज़रूर करता है. लेकिन उनका अंतिम फ़ैसला पहले दी गए राय के बिल्कुल उलट नहीं होता. हां, थोड़ी बहुत रद्दोबदल ज़रूर होती है.

रिसर्चर कैथी पीच तो इस दिशा में भी काम कर रही हैं कि क्या महिलाएं पुरूषों के मुक़ाबले ज़्यादा बेहतर भविष्यवाणी करती हैं. इसी तरह की एक रिसर्च बताती है कि महिलाओं का ग्रुप मर्दों के ग्रुप के मुक़बाले सामूहिक रूप से ज़्यादा समझदार होता है.

लेकिन यहां ये देखना भी ज़रूरी है कि क्या महिलाओं की सामूहिक समझ सुपर फ़ोरकास्टिंग के लिए भी उतनी ही है?

आप वक़्त और माहौल को समझते हुए जितनी ज़्यादा भविष्यवाणी करेंगे, इस क्षेत्र में आप उतने ही दक्ष होते जाएंगे. यू प्रेडिक्ट द फ़्यूचर चैलेंज पर साइन अप करके और प्रतियोगिता में भाग लेकर भी आप अच्छे फ़ोरकास्टर बन सकते हैं.

(मूल लेख अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी फ्यूचर पर उपलब्ध है.)

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