चंद्रयान-2 से पहले जब चांद से ली गई थीं तस्वीरें

फ्रैंक बोरमैन, जिम लॉवेल और बिल एंडर्स

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    • Author, रिचर्ड होलिंगम
    • पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर

ये बात 24 दिसंबर 1968 की है. अपोलो 8 मिशन के ज़रिए चांद की कक्षा में तीन अमरीकी अंतरिक्षयात्री पहुंचे थे. फ्रैंक बोरमैन, जिम लॉवेल और बिल एंडर्स चांद के उस हिस्से की झलक देखने वाले थे, जो धरती से नहीं दिखता.

बोरमैन उस दिन को याद करते हुए कहते हैं, "हमने अपने यान के इंजन को चार मिनट तक चालू रखा ताकि हम धीरे-धीरे चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश कर सकें. हम आधे रास्ते पर ही पहुंचे थे कि हमारी निगाह चांद पर पड़ी.

चंद्रमा की सतह उल्कापिंडों, गड्ढों खाइयों और ज्वालामुखी विस्फोट के अवशेषों से भरी पड़ी थी. पूरा इलाक़ा बिल्कुल ही बेरंग था. सिर्फ़ भूरे, काले या सफ़ेद रंग की चट्टानें या सतह ही दिख रही थी."

बोरमैन कहते हैं, "ये धरती से अलग, बिल्कुल अलग ही दुनिया थी. हमने इसकी पहली झलक देखी थी."

चांद के दूसरी ओर की तस्वीर

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इमेज कैप्शन, चांद के दूसरी ओर की तस्वीर

लेकिन, इस मिशन पर जो सबसे शानदार तस्वीर इन अंतरिक्षयात्रियों ने ली थी, वो चांद की नहीं, बल्कि हमारी अपनी धरती की थी. इसे कमांड मॉड्यूल को नियंत्रित कर रहे बिल एंडर्स ने लिया था.

पृथ्वी को देखते हुए एंडर्स कह उठे थे, "हे भगवान! उस तस्वीर को तो देखो.! वो हमारी धरती है जो उग रही है. वो बेहद ख़ूबसूरत है. जिम मुझे एक रंगीन फ़िल्म दो."

जिम लोवेल ने एंडर्स से कहा कि वो उगती हुई धरती की कई तस्वीरें खींच लें.

नासा की ये अपोलो मिशन की तस्वीर नंबर 2383 थी, जो पूरी दुनिया की सबसे मशहूर तस्वीरों में से एक बन गई थी. बंजर चांद के बरअक्स नीली-सफ़ेद धरती की ये तस्वीर अपोलो मिशन की नायाब उपलब्धियों में से एक थी.

फ्रैंक बोरमैन मानते हैं कि ये किसी इंसान की ली हुई सबसे अहम तस्वीरों में से एक है. बोरमैन कहते हैं कि उस वक़्त पूरे ब्रह्मांड में हमारी धरती ही थी, जो रंग-बिरंगी दिख रही थी. ये बेहद ख़ूबसूरत नज़ारा था.

पृथ्वी

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सीधा प्रसारण

अपोलो मिशन की तैयारियों के दौरान नासा के इंजीनियर और वैज्ञानिक इस बात के ख़िलाफ़ थे कि वो टीवी कैमरे ले जाएं ताकि अंतरिक्ष से लाइव प्रसारण हो सके. इससे उन्हें अंतरिक्ष के मिशन के असल मक़सद से भटकने का डर था.

लेकिन, मिशन कंट्रोल के प्रमुख क्रिस क्राफ्ट ने कहा कि कैमरे ले जाने ज़रूरी हैं ताकि अमरीकी जनता को दिखाया जा सके कि उनके पैसे से क्या हो रहा है.

अंतरिक्ष में कैमरा ले जाने वाले पहले एस्ट्रोनॉट थे अपोलो 7 के वैली शिरा, डॉन आइसेल और वाल्ट कनिंघम. कनिंघम ने बाद में कहा कि ये बहुत अच्छा तजुर्बा नहीं रहा था.

हालांकि ख़राब प्रसारण के बावजूद अपोलो के 7 मिशन के दौरान लाइव टेलिकास्ट किया गया था. पूरी दुनिया में बड़ी तादाद में अंतरिक्ष से टीवी प्रसारण को लोगों ने देखा था.

जब अपोलो 7 के यात्री धरती पर लौटे तो अच्छी तस्वीरें लेने के लिए उन्हें एमी अवॉर्ड भी मिला था.

बाद के मिशन में हालात बेहतर होते गए थे. अच्छे कैमरों और ट्रांसमिटर की मदद से अंतरिक्ष से प्रसारण की क्वॉलिटी में काफ़ी सुधार आया था. अपोलो 8 के यात्रियों ने चंद्रमा की कक्षा से लाइव शो किया था. वहीं, अपोलो 10 मिशन के दौरान चांद से रंगारंग प्रसारण हुआ था.

चक्रवात

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किसी अंतरिक्ष यान से प्रसारण तो आसान था. लेकिन, नासा ने तय किया था कि जब कोई इंसान चंद्रमा पर पहला क़दम रखेगा, तो उसका भी सजीव प्रसारण किया जाएगा.

इसके लिए जो कैमरा तैयार किया गया था, उसे वियतनाम युद्ध के दौरान जंगलों में शूटिंग के लिए ईजाद किया गया था. इस कैमरे को लूनर लैंडर के साथ लगाया गया था. आर्मस्ट्रॉन्ग ने लैंडर का दरवाज़ा खोला और सीढ़ियों से चांद पर उतरने लगे. बाद में उन्होंने इस कैमरे को चांद की सतह पर एक ट्राईपॉड पर लगा दिया.

चंद्रमा से इस प्रसारण के लिए कैलिफ़ोर्निया के गोल्डस्टोन और ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्श सूबे के पार्क्स नाम के क़स्बे में डिश एंटीना लगाए गए थे. पार्क्स में तैनात इंजीनियरों ने इस ऐतिहासिक टीवी प्रसारण के लिए महीनों तक नासा के इंजीनियरों के साथ तैयारी की थी.

21 जुलाई को चंद्रमा से प्रसारण की पूरी तैयारी हो गई. लेकिन, तभी मौसम ख़राब हो गया. इससे टेलिस्कोप को इस्तेमाल करना मुश्किल हो गया. लेकिन, टेलीस्कोप के डायरेक्टर जॉन बोल्टन ने लोगों से धैर्य बनाए रखने को कहा. जब नील ने चंद्रमा पर चलना शुरू किया, तो चांद से सीधी तस्वीरें टेलिस्कोप को मिलनी शुरू हो गई थीं.

स्पेस टेलिस्कोप

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लेकिन, चंद्रमा से पहला टीवी प्रसारण रंगीन नहीं था. ये अपोलो 12 मिशन के दौरान होने वाला था. लेकिन, उस दौरान एस्ट्रोनॉट एलन बीन जब कैमरा लगा रहे थे, तो उन्होंने उसका मुंह सूरज की तरफ़ कर दिया और सारे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जल गए.

बाद के अपोलो मिशन के दौरान जो लूनर रोवर यानी चांद पर चलने वाली गाड़ियां भेजी गई थीं, उन्हीं में कैमरे फिट कर दिए गए थे. इन कैमरों को धरती से ही कंट्रोल किया जा रहा था. इससे टीवी के इतिहास की सबसे शानदार तस्वीरें ली जा सकीं.

जब पहले इंसान नील आर्मस्ट्रॉन्ग ने चंद्रमा की सतह पर क़दम रखा था, तो इस ऐतिहासिक पल को दुनिया भर में क़रीब 60 करोड़ लोगों ने अपने टीवी सेट पर देखा था. ये उस वक़्त तक किसी भी कार्यक्रम के सबसे ज़्यादा दर्शकों का रिकॉर्ड था. लेकिन, 9 महीने बाद गए अपोलो 13 मिशन तक चंद्रमा तक इंसान के जाने में दुनिया की दिलचस्पी कमोबेश ख़त्म हो गई थी.

धुंधली तस्वीरें

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इमेज कैप्शन, चांद की सतह से ऊपर उठते अपोलो 16 की तस्वीर

जब जिम लॉवेल, जैक स्विगर्ट और फ्रेड हैस चंद्रमा पर पहुंचे, तो किसी भी अमरीकी चैनल ने इसका लाइव प्रसारण नहीं किया था. हालांकि, मिशन लॉन्च होने के दो दिन बाद ही टीवी चैनलों को अपोलो 13 का टेलीकास्ट करने को मजबूर होना पड़ा. क्योंकि मिशन ख़तरे में था. तीनों अंतरिक्ष यात्रियों की जान दांव पर लग गई थी.

इसका नतीजा ये हुआ था कि अपोलो 13 के लैंडर को चांद पर उतारने की योजना रद्द करनी पड़ी. तीनों यात्रियों ने लूनर लैंडर में जाकर अपनी जान बचाई, जबकि उस में जगह की कमी थी. इसके बाद तीनों अंतरिक्ष यात्री धरती की तरफ़ लौट चले.

अगले दो दिनों के सफ़र के दौरान उन्हें सांस लेने के लिए हवा से लेकर पीने के पानी तक की क़िल्लत झेलनी पड़ी. अंतरिक्ष यात्रियों के सकुशल धरती पर लौटने तक अपोलो 13 का लाइव प्रसारण जारी रहा था.

सैटरन फ़ाइव रॉकेट

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इमेज कैप्शन, सैटरन फ़ाइव रॉकेट

पांच साल तक चले अपोलो मिशन के दौरान टीवी कवरेज ब्लैक ऐंड व्हाइट से रंगीन हुआ. फिर चांद की रंगीन सतह भी दिखाई गई. फिर भी आज के एचडी प्रसारण के मुक़ाबले ये घटिया ही था.

अपोलो मिशन के दौरान रॉकेट के ऊपर भी कैमरे लगाए गए, जो लॉन्च के बाद कैन में बंद हो जाते थे और फिर उन्हें समुद्र से निकाला जाता था. इस दौरान धरती और ब्रह्मांड की कई ऐसी तस्वीरें भी ली गईं, जो आज भी शानदार और प्रेरणादायक लगती हैं.

इन में से दो तस्वीरें ख़ास तौर से याद की जाती हैं. पहली तो अपोलो 8 मिशन के दौरान बिल एंडर्स ने ली थी, जब चांद की सतह से धरती उगती हुई दिखाई देती है.

दूसरी तस्वीर, चंद्रमा पर जाने के आख़िरी मिशन यानी अपोलो 17 के यात्रियों ने 1972 में ली थी. इसे आज दुनिया ब्लू मार्बल के नाम से जानती है.

पृथ्वी

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अंधकार भरे ब्रह्मांड में नीली चमकदार धरती बिल्कुल अलग दिखती है. इस तस्वीर के केंद्र में अमरीका नहीं बल्कि अफ्रीका महाद्वीप है.

अब जबकि भारत समेत कई देशों ने चंद्रमा के लिए मिशन पर काम करना शुरू कर दिया है, तो ये यादगार तस्वीरें मानवता की ख़ास धरोहर बन गई हैं.

अपोलो 8 के कमांडर फ्रैंक बोरमैन के शब्दों को याद करें, तो, "मुझे नहीं लगता कि हम में से किसी ने ये भी सोचा था कि हम चांद पर जाएंगे, तो सबसे ज़्यादा अपनी धरती को निहारने में ही दिलचस्पी लेंगे."

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