अगर अमरीका का बंटवारा हुआ तो क्या होगा?

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- Author, रचेल नोवर
- पदनाम, बीबीसी फ्यूचर
पिछले कुछ बरस में अमरीकी जनता के बीच ध्रुवीकरण बहुत तेज़ी से बढ़ा है. रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टियों के समर्थक दिनों-दिन कट्टर होते जा रहे हैं.
जानकार कहते हैं कि जिस तरह दास प्रथा को लेकर गृह युद्ध के बाद का हाल था, अमरीका में आज के हालात कमोबेश वैसे ही हैं.
कैलिफ़ोर्निया यूनिवर्सिटी के राजनीति शास्त्री बर्नार्ड ग्रॉफमैन कहते हैं कि आज अमरीकी संसद में जितना ध्रुवीकरण है, उतना पिछले 100 साल में नहीं दिखा.
अमरीका का सबसे बड़ा राज्य कैलिफ़ोर्निया भी इस ध्रुवीकरण का शिकार है. पिछले कुछ दशक में कैलिफ़ोर्निया की जनता और बाक़ी अमरीकियों के बीच मतभेद और गहरे हो गए हैं.
इसे देखते हुए कम से कम छह ऐसे प्रस्ताव आ चुके हैं, जिनमें कैलिफ़ोर्निया को छोटे-छोटे राज्यों में बांटने से लेकर अमरीका से पूरी तरह से अलग होने के सुझाव दिए गए.
बॉस्टन की टफ्ट्स यूनिवर्सिटी में पढ़ाने वाली मोनिका टॉफ्ट कहती हैं कि कैलिफ़ोर्निया के लोग ये मानने लगे हैं कि अमरीका की केंद्रीय सरकार उनके हितों की रक्षा नहीं कर पा रही है. उनका मानना है कि कैलिफ़ोर्निया इतना बड़ा राज्य है कि इसका आर्थिक विकास तभी मुमकिन है, जब इसके छोटे-छोटे टुकड़े कर दिए जाएं.
कई मुद्दों पर कैलिफ़ोर्निया के लोग बाक़ी अमरीकियों से अलग खड़े नज़र आते हैं.
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अगर कैलिफ़ोर्निया अलग होता है तो क्या होगा
हालांकि, कैलिफ़ोर्निया के अमरीका से अलग होने की दूर-दूर तक कोई संभावना नहीं है. पर, एक पल को हम ये मान लें कि कैलिफ़ोर्निया, अमरीका से अलग हो जाता है, तो क्या होगा? अमरीका और बाक़ी दुनिया पर इस अलगाव का क्या असर पड़ेगा?
अमरीका का संविधान, किसी भी राज्य को अलग होने की इजाज़त नहीं देता. कैलिफ़ोर्निया के लोग भी अमरीका से अलग होने की मांग नहीं करते हैं. फिर भी, हम ये मान लें कि कैलिफ़ोर्निया अमरीका से अलग होता है, तो मंज़र कैसा होगा?
अमरीका में फिर गृह युद्ध छिड़ जाएगा?
अमरीका में आज किसी गृह युद्ध के हालात नहीं दिखते. पर, जब भी किसी देश का हिस्सा अलग होता है, तो हिंसा भड़कनी लाज़मी है. ख़ुद अमरीका में भी 157 साल पहले ऐसा ही हुआ था, जब अश्वेतों को दास बनाए रखने के समर्थक दक्षिणी राज्यों ने अमरीका से अलग होने का एलान कर दिया था.
उस वक़्त छिड़े गृह युद्ध में 6 लाख 20 हज़ार अमरीकियों की जान चली गई थी. अमरीका की बुनियाद हिल गई थी.
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दुनिया में इस बात की कई मिसालें मिलती हैं, जब एक देश का बंटवारा हुआ तो कितनी भयंकर हिंसा भड़की. 1947 में भारत-पाकिस्तान का बंटवारा हुआ तो दस लाख से ज़्यादा लोग मारे गए थे.
इसी तरह 1971 में जब बांग्लादेश ने पाकिस्तान से अलग होने का फ़ैसला किया, तो पाकिस्तान की सेना ने सामूहिक बलात्कार से लेकर नरसंहार तक के ज़ुल्म ढाए थे. वहीं अफ्रीकी देश इरीट्रिया ने जब इथियोपिया से अलग होने का एलान किया, तो दोनों के बीच क़रीब 30 साल तक गृह युद्ध छिड़ा रहा
लेकिन, 1993 में जब चेक और स्लोवाक रिपब्लिक अलग हुए, तो मामला बहुत शांति से निपट गया. ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन से अलग होने की प्रक्रिया भी अब तक शांतिपूर्ण ही रही है.
अगर, कैलिफ़ोर्निया अमरीका से अलग होने का फ़ैसला करता है, तो रिपब्लिकन पार्टी के समर्थक तो ख़ुशी-ख़ुशी कहेंगे कि चलो बला टली. पर, डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थक इसे शायद न मंज़ूर करें. वजह ये है कि कई दशक से कैलिफ़ोर्निया, डेमोक्रेटिक पार्टी का गढ़ रहा है. बिना इसकी सियासी ताक़त के डेमोक्रेटिक पार्टी का कोई उम्मीदवार शायद ही फिर अमरीका का राष्ट्रपति बन पाए.
वैसे, फिलहाल ऐसे कोई हालात नहीं दिखते कि कैलिफ़ोर्निया को अमरीका से अलग होने जैसा इंक़लाबी क़दम उठाना पड़े.
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राजनीति का पावरहाउस
कैलिफ़ोर्निया, अमरीका की सबसे ज़्यादा आबादी वाला सूबा है. ये अमरीका से अलग होता है, तो अमरीका में रिपब्लिकन पार्टी का प्रभुत्व क़ायम हो जाएगा. अमरीकी संसद में भी रिपब्लिकन पार्टी को बहुमत आसानी से मिल जाएगा.
जानकार कहते हैं कि 1990 के दशक से अगर अमरीका में ओबामा या क्लिंटन जैसे डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता अगर राष्ट्रपति बने हैं, तो इस में कैलिफ़ोर्निया का बड़ा योगदान रहा है.
कैलिफ़ोर्निया के अलग होने की सूरत में बची-खुची डेमोक्रेटिक पार्टी के भी उदारवाद को त्याग कर कट्टरपंथी विचारधारा का समर्थक होने की आशंका है. ठीक उसी तरह जैसे पचास और साठ के दशक में राष्ट्रपति ड्वाइट डी. आइज़नहॉवर के दौर में थी. तब डेमोक्रेटिक पार्टी ने मध्यमार्गी विचारधारा अपना कर देश के विकास को रफ़्तार दी थी.
कैलिफ़ोर्निया अगर अमरीका से अलग होता है, तो अमरीकी अर्थव्यवस्था की चूलें हिल जाएंगी. अलग होकर कैलिफ़ोर्निया, दुनिया की पांचवीं बड़ी अर्थव्यवस्था होगा. उसकी आर्थिक ताक़त ब्रिटेन से भी ज़्यादा यानी क़रीब 2.7 ख़रब डॉलर की होगी. कैलिफ़ोर्निया से अमरीकी सरकार को टैक्स की सबसे ज़्यादा आमदनी होती है. ये आमदनी, अमरीका के हाथ से निकल जाएगी.
जानकार कहते हैं कि अमरीकी करेंसी डॉलर की ताक़त दुनिया में घट जाएगी. डॉलर की जगह यूरोपीय यूनियन की मुद्रा यूरो या चीन की करेंसी युआन ले लेगी.
कैलिफ़ोर्निया के अलग होने पर अमरीका सुपरपावर नहीं रह जाएगा. ये अपने सहयोगियों पर ज़्यादा निर्भर होगा. दक्षिणपंथी झुकाव बढ़ने के बाद अमरीका, रूस और हंगरी जैसे देशों के क़रीब होगा. वहीं, पड़ोसी देश कनाडा से उसके रिश्ते उतने अच्छे नहीं रह जाएंगे, जितने अभी हैं. यही हाल मेक्सिको के साथ संबंध का होगा.
इसके मुक़ाबले कैलिफ़ोर्निया उदारवादी देशों की जमात का हिस्सा होगा. तब दुनिया चीन और अमरीका के बीच दो ध्रुवों में ही नहीं बंटी होगी. इसके बजाय हम अमरीका, चीन और कैलिफ़ोर्निया और भारत के रूप में कई बड़े ताक़तवर देशों के बीच ध्रुवीकरण देखेंगे.
कैलिफ़ोर्निया के अलग होने की सूरत में हम ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण नियंत्रण के मोर्चों पर तरक़्क़ी होते देखेंगे. लेकिन, अमरीका में बढ़ती कट्टरपंथी सोच, दुनिया के एकजुट होने में बाधा बन जाएगी.
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शरणार्थियों की जन्नत
कैलिफ़ोर्निया की सोच उदारवादी रही है. ऐसे में अमरीका आने वाले ज़्यादातर लोग कैलिफ़ोर्निया का ही रुख़ करेंगे. सिलीकॉन वैली जैसे कारोबारी इलाक़ों में नए लोग आने से तरक़्क़ी की रफ़्तार को नई धार मिलेगी.
कैलिफ़ोर्निया में खेती में बड़ी तादाद में लैटिन अमरीकी मूल के लोग लगे हैं. इनका राज्य की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान रहता है. हो सकता है कि अलग होने के बाद कैलिफ़ोर्निया, अप्रवासियों के लिए नियमों में और भी ढील दे दे.
ऐसा होने की सूरत में कैलिफ़ोर्निया के भीतर भी उत्तर और दक्षिण के बीच तनातनी बढ़ सकती है. जहां दक्षिणी कैलिफ़ोर्निया के लोग अप्रवासियों को लेकर उदारवादी हैं. वहीं, उत्तरी कैलिफ़ोर्निया के लोग अप्रवासियों की बाढ़ रोकने के समर्थक हैं.
कैलिफ़ोर्निया के अमरीका से अलग होने का एक असर ये भी हो सकता है कि मैरीलैंड से लेकर मेन और पेन्सिल्वेनिया जैसे कई उदारवादी राज्य भी अमरीका से अलग होने की मांग करने लगें. क्योंकि कैलिफ़ोर्निया के अलग होने के बाद अमरीका में रूढ़िवादी सोच का हावी होना तय है. ऐसे में उदारवादी आबादी वाले राज्यों को अलग होने के विकल्प पर गौर करने को मजबूर होना पड़ सकता है.
हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि हम सोवियत संघ के बिखराव के दौर में ऐसा देख चुके हैं. पहले, लैटविया, लिथुआनिया और एस्तोनिया ने सोवियत संघ से अलग होने का फ़ैसला किया था. इसके बाद जॉर्जिया, यूक्रेन और मॉल्दोवा भी उसी रास्ते पर चल पड़े.
हो सकता है कि कैलिफ़ोर्निया के अलग होने के बाद दक्षिणी राज्य फ्लोरिडा भी अमरीका से अलग होने का फ़ैसला कर ले. टेक्सस राज्य के कुछ लोग भी इस बारे में सोचने लग सकते हैं. ऐसा होने पर बहुत से अमरीकी राज्य, जो आर्थिक रूप से संपन्न हैं, वो अलग देश के तौर पर आज़ाद होने की सोच सकते हैं.
तो, अगर कभी ऐसा हुआ कि कैलिफ़ोर्निया, अमरीका से अलग हुआ, तो ये संयुक्त राज्य अमरीका के बिखराव की शुरुआत हो सकती है.
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