वो महीना जब आपको एक से दो हो जाना चाहिए...

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- Author, मार्था हेनरिक्स
- पदनाम, बीबीसी फ्यूचर
हमारे देश में कोई भी नेक काम शुभ घड़ी देख कर किया जाता है. इसके लिए बाक़ायदा मुहूर्त निकलवाया जाता है. आप जानकर हैरान होंगे कि ये चलन दुनिया भर में है. शुभ घड़ी के लिए साल भर का कैलेंडर खंगाला जाता है.
तरक़्क़ीपसंद कहलाने वाले पश्चिमी देशों मे भी शुभ मुहूर्त तलाशे जाते हैं.
18 हज़ार लोगों पर किए गए वेडिंगवायर सर्वे के मुताबिक़ अमरीका में क़रीब 40 फ़ीसद लोग थैंक्सगिविंग और वैलेंटाइन्स-डे के बीच सगाई करते हैं. दिसंबर महीना नया रिश्ता शुरू करने के लिए सबसे शुभ माना जाता है. इस महीने क्रिसमस से पहली वाली शाम सगाई करना अच्छा माना जाता है.
वहीं चिलीसॉस के दस हज़ार मर्दों पर किए गए सर्वे के मुताबिक़ मर्द भी शादी जैसे फ़ैसले केलिए इसी समय को अच्छा मानते हैं. इसी सर्वे में 23 फीसद महिलाओं ने वैलेंटाइन्स-डे को ही सगाई के लिए बेहतरीन दिन माना. लेकिन बदक़िस्मती से महज़ 12 फ़ीसद लोग ही इस दिन अपने जज़्बात का इज़हार करते हैं.
वहीं मर्दों के पसंदीदा समय यानी 24 दिसंबर की तारीख के लिए 31 फीसद वोट मिले. मर्दों को लगता है कि 24 दिसंबर के बाद शादी का पैग़ाम देने का पसंदीदा वक़्त है नए साल से पहले की शाम. या लड़की से मिलने की पहली सालगिरह. हालांकि कुछ सर्वे त्यौहारों के मौसम को भी रिश्ता पक्का करने के लिए लकी मानते हैं. लेकिन ये साफ़ नहीं है कि त्योहारों के मौसम में भी कौन सा दिन और वक़्त सबसे अच्छा है.
सगाई के शुभ मुहूर्त के बाद बारी आती है शादी की. जब सगाई के लिए शुभ घड़ी का इंताज़र होता है तो शादी के लिए क्यों नहीं. भई प्रोपोज़ करने के लिए तो ज़बानी जमा ख़र्च, कुछ फूल या तोहफ़े से काम चल जाता है.
लेकिन शादी के लिए तो बहुत सी बातें ज़हन में रखी जाती हैं. सबसे अहम है पैसा. जब हाथ में पैसा होगा तभी तो अपने खास दिन को और भी खास बना पाएंगे. वेडिंग प्लानिंग साइट द नॉट के मुताबिक़ अमरीका में शादी का सबसे अच्छा समय पतझड़ का मौसम है. वहीं ब्रिटेन में सबसे ज़्यादा शादियाँ गर्मियों में होती हैं.

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शादी और तलाक़
अमरीका में साल 2017 में सितंबर, जून और अक्टूबर महीनों को शादी के लिए सबसे ज़्यादा चुना गया. यहां सितंबर महीने में 16 फ़ीसद, जून में 15 फ़ीसद और अक्टूबर महीने में 14 फ़ीसद लोगों ने अपनी नई ज़िंदगी की शुरूआत की.
अगर किसी अन्य महीने में शादी की जाए तो कम क़ीमत में अच्छा पैकेज मिल जाता है. वहीं एक सर्वे में क़रीब तीन हज़ार लोगों ने माना कि अगर शादी के कार्यक्रम पर कम ख़र्च किया जाए तो शादीशुदा ज़िंदगी लंबे समय तक चलती है.
ये भी देखा गया है कि जो लोग रिंग सेरेमनी पर कम पैसा ख़र्च करते हैं उनकी शादी भी निस्बतन लंबे समय तक चलती है. लेकिन ये सिर्फ़ मान लेने भर की बातें हैं. इन पर कोई भी रिसर्चर अपनी आख़िरी मुहर नहीं लगाता.
शादी की तारीख़ तय करने में दूसरा मुख्य कारक शायद उम्र है. अमरीका की यूटा यूनिवर्सिटी के रिसर्चर निक वल्फिंगर की रिसर्च के मुताबिक़ 28 से 32 साल की उम्र वाले लोगों में शादी के पांच साल बाद तलाक़ लेने वालों की तादाद बहुत कम है.
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इनकी स्टडी के मुताबिक़ 32 साल या उससे से कम उम्र में शादी करने वालों में तलाक़ की संभावना क़रीब 11 फ़ीसद कम हो जाती है. जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है, तलाक़ होने की संभावना हरेक साल के साथ पांच फ़ीसद बढ़ जाती है. दरअसल जो लोग ज़्यादा उम्र में शादी करते हैं उनमें परिपक्वता ज़्यादा हो जाती है. जिसका असर उनके रिश्ते पर पड़ता है और नौबत तलाक़ तक आ जाती है.
ऐसा भी नहीं है कि अगर कम 28 से 32 की उम्र में शादी की जाए तो वो तलाक़ नहीं हो सकती. तलाक़ की संभावना वहां भी है. हालांकि ये तमाम रिसर्च सिर्फ आब्ज़र्वेशन पर आधारित हैं. किसी भी मत के लिए कोई पुख्ता सबूत नहीं हैं.
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बच्चे पैदा करने का मौसम
मज़े की बात ये कि जैसे शादी के लिए कुछ ख़ास महीने होते हैं, उसी तरह तलाक़ की तादाद भी कुछ ख़ास महीनों में बढ़ जाती है. एक स्टडी के मुताबिक़ अमरीका में मार्च और अगस्त महीने में सबसे ज़्यादा तलाक़ की अर्ज़ियां दी जाती हैं.
ये वक्त छुट्टियों का होता है. लिहाज़ा कोर्ट के चक्कर लगाना आसान रहता है. वहीं एक दलील ये भी है कि इस वक़्त अगर छुट्टियां रहती हैं तो वकील भी छुट्टियों पर रहते होंगे. लिहाज़ा ये तर्क उचित नहीं माना जा सकता.
एक अन्य रिसर्च में बताया गया है कि जनवरी महीने में सबसे ज़्यादा तलाक़ की अर्जियां दी जाती हैं. ये वक्त नए साल में नई शुरूआत का भी होता है और छुट्टियां बिताने के बाद लोग फ्री भी होते हैं. लेकिन ये तर्क भी बहुत प्रभावशाली नहीं लगता. ख़ात तौर से अमरीका के संदर्भ में तो बिल्कुल नहीं. क्योंकि इस महीने में अलग होने का मतलब है साल के अंत में टैक्स का बोझ.
मौसम के हिसाब से हमारे शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं. और फ़ैमिली प्लानिंग के लिए फर्टिलिटी पीरियड की सही जानकारी होना ज़रूरी है. डेनवर में 2018 में की गई रिसर्च में पाया गया कि अमरीका में वसंत मौसम में ज़्यादा स्वस्थ और उचित आकार वाले स्पर्म पैदा होते हैं.
ये रिसर्च 17 साल में पूरी हुई थी और क़रीब 29 हज़ार मर्दों के स्पर्म सैम्पल लिए गए थे. इसी तरह की एक रिसर्च स्विटज़रलैंड में की गई थी. जिसमें 12,245 पुरुषों से बात की गई थी. इस रिसर्च का नतीजा भी यही बताता है कि वसंत में अच्छी गुणवत्ता के स्पर्म उत्पन्न होते हैं. इस मौसम में भी सुबह का समय सबसे अच्छा होता है.
एंड्रोलॉजी की प्रोफ़ेसर अलान पेसी के मुताबिक़ ठंड का मौसम स्पर्म के लिए बेहतरीन होता है. दरअसल स्पर्म तैयार होने में क़रीब तीन महीने का समय लगता है. और इस मौसम में जो स्पर्म इजैकुलेट होते हैं वो शुरूआती दौर के होते हैं. क्रिसमस तक आते-आते वो स्वस्थ और उचित आकार के बन जाते हैं. लिहाज़ा उनकी फ़र्टिलिटी क्षमता भी ज़्यादा होती है.
इसके अलावा दिन की रोशनी भी फ़र्टिलिटी पीरयड में अहम रोल निभाती है. गर्मी के मौसम में लोग दिन की रोशनी में ज़्यादा रहते हैं जबकि सर्दी में कई जगहों पर तो सूरज निकलता ही नहीं जिसका असर स्पर्म की क्वालिटी, प्रोडक्शन और लंबाई पर भी पड़ता है. कम सेक्स करने से भी स्पर्म की क्वालिटी प्रभावित होती है. लेकिन पुख्ता तौर पर ये नहीं कहा जा सकता कि कम स्पर्म उत्पन्न होने या साइज़ में छोटा होने से गर्भधारण नहीं किया जा सकता.
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सितंबर में पैदा होने वालों की उम्र ज़्यादा होती है
बच्चों की पैदाइश को लेकर भी हरेक महीने का अपना महत्व है. मिसाल के लिए अमरीका और ब्रिटेन में सितंबर महीने में सबसे ज़्यादा बच्चे पैदा होते हैं. थिंक टैंक इंस्टिट्यूट फ़ॉर फ़िजिकल स्टडी के मुताबिक़ ब्रिटेन में सितंबर महीने में पैदा होने वाले बच्चे इम्तिहान में अच्छा प्रदर्शन करते हैं और उनका दिमाग़ बहुत तेज़ काम करता है.
जबकि अगस्त महीने में पैदा होने वाले बच्चे 20 फ़ीसद से भी कम टॉप यूनिवर्सिटी तक पहुंच पाते हैं. और 16 से 18 साल की उम्र में पढ़ाई के दौरान छुट्टियां भी औसतन ज़्यादा लेते हैं. बाद की रिसर्च में ये सभी तर्क बेबुनियाद साबित हो गए.
बच्चों की ज़ेहनी सलाहियत का सितंबर महीने से कोई ताल्लुक़ नहीं था. कहा तो ये भी जाता है कि सितंबर महीने में पैदा होने वाले बच्चों की उम्र ज़्यादा होती है. प्रेगनेंसी के दौरान अच्छा खाना नहीं खाने से हो सकता है कुछ बच्चों में कमज़ोरी रह जाए. लेकिन आम तौर से सितंबर से नवंबर महीने में पैदा होने वाले बच्चों की उम्र ज़्यादा ही रहती है.
ब्रिटेन में की गई रिसर्च के मुताबिक़ ज़्यादा गर्मी वाले इलाक़ों में सर्द मौसम में बच्चा पैदा करना पसंद किया जाता है. माना जाता है कि इस मौसम में पैदा हुए बच्चों में दिल की बीमारी, फेफड़ों का इन्फ़ेक्शन और अन्य कई बीमारियों से लड़ने की क्षमता ज़्यादा रहती है.
रिश्तों और ज़िंदगी को खुशहाल बनाए रखने के लिए इस तरह की रिसर्च हमें फ़ैसला लेने में थोड़ी मददगार साबित हो सकती हैं. लेकिन रिश्ते किसी मौसम के मोहताज नहीं होते. ज़िंदगी साथ गुज़ारने, बच्चा पैदा करने, या तलाक़ लेने का फ़ैसला इंसान तभी लेता है जब उसे इसकी ज़रूरत महसूस होती है. कोई भी नया रिश्ता शुरू करने या फ़ैसला लेने में दोनों पार्टनर की रज़ामंदी और खुशहाली ज़्यादा मायने रखती है.
(मूल लेख अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी फ्यूचर पर उपलब्ध है.)
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