आख़िर पॉपकॉर्न कैसे बना सबसे पसंदीदा स्नैक?

    • Author, वेरोनिक़ ग्रीनवुड
    • पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर

पॉपकॉर्न को अगर दुनिया का सबसे लोकप्रिय स्नैक कहा जाए तो ग़लत नहीं होगा. फ़िल्म देखते वक़्त खाएं, या शाम की चाय के साथ. दोस्तों, परिजनों के साथ गप्पें मारते वक़्त पॉपकॉर्न खाएं, या कुछ पढ़ते-लिखते हुए अकेले खाएं. पॉपकॉर्न हर मौक़े और माहौल के साथ एकदम फ़िट बैठने वाला स्नैक है.

ये हल्का भी और सेहतमंद भी है. हां, अगर आप इसमें नमक और मक्खन या तेल मिला देंगे, तो इसकी सेहत वाली ख़ूबी नहीं रह जाएगी. पॉपकॉर्न पूरी दुनिया में ख़ूब खाया जाता है. इसकी सबसे पुरानी मिसाल अमरीकी महाद्वीपों में मिलती है. उत्तरी और दक्षिणी अमरीका में रेड इंडियन ठिकानों पर इसके दाने मिले हैं.

सबसे पहले अमरीका में खाया गया पॉपकॉर्न

एक क़िस्सा तो ये भी सुनाया जाता है कि एक पुरातत्व वैज्ञानिक को जब मक्के के दाने मिले, तो उसने उन्हें भूनने की कोशिश की.

दिलचस्प बात ये रही कि क़रीब हज़ार साल पुराने मक्के के दाने गर्म होते ही फूट पड़े. इसकी बड़ी वजह इसकी ऊपरी चमड़ी होती है, जो बेहद सख़्त और मोटी होती है.

ये क़रीब दो सौ डिग्री सेल्सियस तापमान पर ही फटती है. तब इसमें से निकलता है पॉपकॉर्न.

आज पॉपकॉर्न का नशा पूरी दुनिया के सिर चढ़कर बोल रहा है. एक अमरीकी नागरिक हर साल औसतन पचास लीटर पॉपकॉर्न खा जाता है.

वहीं ब्रिटेन में पिछले पांच सालों में पॉपकॉर्न की बिक्री में 169 फ़ीसद का उछाल देखने को मिला है.

यूं तो इसका इतिहास बहुत पुराना रहा है. लेकिन सबसे पहले इसे खाने की शुरुआत अमरीका में हुई थी. अमरीका के मूल निवासी इसे खाया करते थे. वहां बसने गए यूरोपीय लोगों ने भी पॉपकॉर्न को अपना लिया.

पॉपकॉर्न की कहानी

मगर आप को इसके बारे में बहुत सी ग़लतफ़हमियां होंगी. तो, चलिए उन्हें दूर कर देते हैं.

पहली बात तो ये कि पॉपकॉर्न मक्के के उस भुट्टे से नहीं मिलता, जो आप आम तौर पर खाते हैं. या जिसके दाने आप खाते हैं. पॉपकॉर्न, मक्के की एक ख़ास नस्ल से तैयार होता है. पुरातत्व वैज्ञानिकों ने इसके दाने उत्तर-पश्चिमी अमरीका में कई गुफ़ाओं में पाए हैं. इसके दक्षिणी अमरीका में भी इस्तेमाल होने के सबूत मिले हैं.

मशहूर अमरीकी वैज्ञानिक थॉमस हार्पर गुडस्पीड ने बड़ा दिलचस्प क़िस्सा बयां किया है. 1941 में छपी अपनी क़िताब प्लांट हंटर्स इन द एंडीज़ में वो लिखते हैं कि उन्हें चिली के वैज्ञानिकों से क़रीब हज़ार साल पुराने पॉपकॉर्न के दाने मिले थे.

एक दिन गुडस्पीड को सूझा कि उन्हें भूना जाए. हालांकि गुडस्पीड को यक़ीन नहीं था कि वो दाने भुन जाएंगे. मगर तेज़ आंच में पकाने पर वो दाने फटने लगे, जैसे अभी पिछले साल की फ़सल के दाने हों.

कैसे भूना जाता है पॉपकॉर्न?

पॉपकॉर्न वाले मक्के के दाने की ऊपरी परत, आम भुट्टों के दानों से चार गुना मोटी होती है. ये चमड़ी ही इसके फटने की असल वजह होती है. इसकी वजह से ही दाने जलने के बजाय फटने लगते हैं. तापमान बढ़ने के साथ दानों के भीतर दबाव बढ़ता जाता है. और जब ये दबाव बर्दाश्त से बाहर हो जाता है, तो दाने फट पड़ते हैं.

वैज्ञानिकों ने तजुर्बे से पाया है कि आप पॉपकॉर्न के दाने पर दबाव बढ़ाकर उसे दोगुने आकार का कर सकते हैं. ऐसे में जब वो भूनने पर फटेगा तो पॉपकॉर्न और बड़ा होगा.

दुनिया भर में पॉपकॉर्न अलग-अलग तरह से भूना जाता है. चीन में अक्सर सड़कों के किनारे लोहे के ड्रम के भीतर इन्हें भूना जाता है. इनका मुंह खुला रहता है. जब दाने फटने को होते हैं, तो भूनने वाले इसके ऊपर कैनवस का झोला लगा देते हैं. फूटते हुए दाने उसमें भर जाते हैं.

भारत में भी आपने पॉपकॉर्न को लोहे की कड़ाही में भुनते हुए देखा होगा. लेकिन, अमरीका में इसे बड़ी मशीनों में भूना जाता है.

पॉपकॉर्न भूनने की मशीन

पहली बार पॉपकॉर्न भूनने वाली मशीन 1885 में सामने आई थी. इसे अमरीका के इलिनॉय सूबे के चार्स् क्रेटर्स ने बनाया था. वो मूंगफली भूनने के लिए मशीन बना रहे थे.

इन्हें भाप के इंजनों से बांधा जाता था. जिसमें दाने और मक्खन मिलाकर रखे जाते थे. जोकर जैसा दिखने वाला एक आदमी इस मशीन की नुमाइश करता था.

खाने-पीने के इतिहासकार एंड्र्यू स्मिथ लिखते हैं कि चार्ल्स क्रेटर और उनके सहायक अपनी पॉपकॉर्न भूनने की मशीन को 1893 के वर्ल्ड फेयर में लेकर गए थे.

वहां दोनों आवाज़ लगाकर लोगों को पॉपकॉर्न चखने के लिए बुलाते थे. एक बैग मुफ़्त में देने का वादा करते थे. स्मिथ के मुताबिक इस मशीन को देखने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा था.

पॉपकॉर्न को भुनते देख लोग ख़ूब उत्साहित हुए थे. उन्हें पॉपकॉर्न का स्वाद भी पसंद आया था. आज भी चार्ल्स क्रेटर की कंपनी अमरीका में पॉपकॉर्न भूनने वाली मशीन बनाने की सबसे बड़ी कंपनी है.

पॉपकॉर्न सेहत के लिए अच्छा

आज लोग पॉपकॉर्न को अच्छी सेहत के लिए भी खाना पसंद करते हैं. भले ही आप इसे नमकीन, मक्खन वाला स्नैक समझते हों, जो फ़िल्म देखते वक़्त खाया जाता हो.

लेकिन बिना नमक और मक्खन का ये दाना बहुत कम फैट वाला होता है. मार्केटिंग करने वाले इसे बहुत सेहतमंद खाने के तौर पर बेचने में जुटे हुए हैं.

पॉपकॉर्न की यही ख़ूबी अमरीका और ब्रिटेन में इसकी बढ़ती डिमांड की बड़ी वजह है.

भले ही पैकेटबंद ज़्यादातर पॉपकॉर्न नमक और मक्खन के साथ आता है. आप घर में बस इसे गर्म करके खा सकते हैं.

वैसे घर में दाने भूनने वालों को अब पता चल रहा है कि सिर्फ़ पॉपकॉर्न ही नहीं, चावल, जौ, गेहूं और अमरनाथ के दाने भी ऐसे ही भूनकर खाए जा सकते हैं. हालांकि वो फूटकर भी पॉपकॉर्न जितने नहीं फूलेंगे.

आप फ़िल्म देखने जाएंगे तो रामदाना या अमरनाथ के दानों को तो नहीं ही खाएंगे. यानी फिलहाल पॉपकॉर्न का हमारी ज़ुबान, दिल और पेट पर राज क़ायम रहने वाला है.

(मूल लेख अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी फ़्यूचर पर उपलब्ध है.)

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