लड़ाकू विमान जिसने अंतरिक्ष का रास्ता खोला

    • Author, रिचर्ड होलिंगम
    • पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर

आपने अमरीका के फाइटर प्लेन पायलट जो वाकर का नाम सुना है? बहुत मुमकिन है नहीं सुना हो. वो दुनिया के सबसे महान अंतरिक्ष यात्रियों में गिने जा सकते थे. मगर ऐसा नहीं हुआ.

चलिए आपको जो वाकर की कहानी सुनाते हैं.

जो वाकर ने 22 अगस्त 1963 को एक बेहद ख़तरनाक उड़ान भरी थी. वो नासा के X-15 नाम के रॉकेट विमान पर सवार हुए थे. उन्होंने अमरीका के कैलिफ़ोर्निया स्थित एडवर्ड्स एयरबेस से उड़ान भरी थी. सुई जैसा उनका X-15 रॉकेट प्लेन, अमरीका के मशहूर B-52 बमवर्षक विमान से बांधा गया था.

पचास हज़ार फुट की ऊंचाई पर पहुंचकर जैसे B-52 बमवर्षक विमान बम गिराता है, वैसे ही उसने वाकर के X-15 रॉकेट प्लेन को अपने शिकंजे से आज़ाद कर दिया. वाकर ने इंजन चालू किया और आसमान में छू मंतर हो गए. हवा में उनका ईंधन ख़त्म हो गया.

अगले दो मिनट में वाकर धरती से 67 मील की ऊंचाई पर जा पहुंचे थे. वहां वायुमंडल ख़त्म हो चुका था. वो अब एक विमान नहीं, अंतरिक्ष यान उड़ा रहे थे. 11 मिनट और आठ सेकेंड बाद वो ज़मीन पर वापस आ गए. वो एक सूखी झील में उतरे. उनकी लैंडिंग शानदार तरीक़े से हुई.

अंतरिक्ष में उड़ान भरने के बावजूद वाकर को कोई तमग़ा नहीं मिला. वो सिर्फ़ एक टेस्ट पायलट बनकर रह गए, जिन्होंने नासा का प्रायोगिक X-15 रॉकेट विमान अंतरिक्ष में उड़ाया था.

लेकिन जिस X-15 विमान को लेकर जो वाकर अंतरिक्ष में गए थे, वो नासा की आने वाली अंतरिक्ष की उड़ानों की बुनियाद था. बिना इस तजुर्बे के अमरीका, अंतरिक्ष में इंसान को नहीं भेज पाता.

X-15 रॉकेट की मदद से नासा ने धरती के वायुमंडल से बाहर जाने और फिर सुरक्षित वापस आने का प्रयोग किया. ये प्रयोग कामयाब रहा. तभी अंतरिक्ष की उड़ानों के मिशन कामयाब हुए.

नासा ने X-15 रॉकेट प्लेन की 199 उड़ानें की थीं. इस तजुर्बे के लिए तीन X-15 विमान बनाए गए थ. इनमें से दो आज भी बचे हुए हैं. इन्हें म्यूज़ियम में बड़े जतन से रखा गया है. इन्हें अपने पंखों के नीचे पकड़कर ले जाने वाले B-52 बमवर्षक विमान भी एडवर्ड्स एयरबेस पर रखे गए हैं.

इस वक़्त उनके रंग-रोगन का काम चल रहा है. पेंट की पुरानी परत उतारकर नई परत चढ़ाने का काम चल रहा है. इस काम की निगरानी कर रहे जेम्स स्टेम कहते हैं कि उनका इरादा इस शानदार और ऐतिहासिक विमान को अगले सौ साल के लिए सहेजना है.

स्टेम बताते हैं कि B-52 बमवर्षक इसलिए बनाए गए थे ताकि वो मिसाइलें और भारी बम अपने डैनों के नीचे ले जा सकें और दुश्मन के ठिकानों पर गिरा सकें. इनकी इस ख़ूबी का फ़ायदा उठाने के लिए नासा ने तीन B-52 बमवर्षको में फेरबदल किया. ताकि उनके ज़रिए मिसाइल के बजाय, नासा का X-15 रॉकेट प्लेन ऊंचाई पर ले जाकर छोड़ा जा सके. वहां से X-15 के पायलट को रॉकेट की रफ़्तार से धरती के वायुमंडल को चीरकर अंतरिक्ष में पहुंचना था.

इसके लिए आठ इंजनों वाले B-52 बमवर्षकों के डैनों में तब्दीली की गई थी. साथ ही उनके नीचे मिसाइल रखने की जगह उससे भारी X-15 रॉकेट विमान को फंसाने का इंतज़ाम किया गया था.

जो तीन B-52 बमवर्षक विमान नासा ने अपने इस टेस्ट के लिए तैयार किए थे. उन्हें अलग रंग में रंगा गया था. साथ ही उनके ईंधन भरने की जगह पर उसकी कामयाबी की इबारत लिखी गई है. आम तौर पर बमवर्षकों पर उनके टारगेट के बारे में लिखा जाता है, जिसे उन्होंने बम गिराकर तबाह किया हो.

मगर ये विमान तो एक ख़ास तजुर्बे के लिए बने थे. इसलिए उनका ज़िक्र होना भी ज़रूरी था. इसीलिए इन बमवर्षक विमानों पर उन X-15 रॉकेट विमानों की तस्वीरें उकेरी गई हैं, जिन्हें इन्होंने सातवें आसमान तक पहुंचने में मदद की थी.

X-15 स्पेस प्लेन की टेस्ट फ्लाइट के दौरान 1967 में एक हादसा हुआ था जिसमें माइकल एडम्स नाम के पायलट की जान चली गई थी. अंतरिक्ष से धरती पर वापसी के दौरान एडम्स का X-15 टूट गया था, वो सॉफ्ट लैंडिंग के बजाय तेज़ी से गिरते हुए धरती से टकराए थे.

जानकार कहते हैं कि एक-दो हादसों को छोड़ दें तो नासा का X-15 रॉकेट प्लेन उड़ाने का तजुर्बा बेहद कामयाब रहा था. इस दौरान 199 उड़ानें हुईं. जिन्हें कुल 12 पायलटों ने उड़ाया. एक की मौत हुई और एक बुरी तरह घायल हुआ.

इस तजुर्बे में नील ऑर्मस्ट्रॉन्ग भी थे जो चांद पर क़दम रखने वाले पहले इंसान थे. इनके अलावा जो एंगल नाम के स्पेस शटल कमांडर ने भी नासा के X-15 रॉकेट प्लेन को उड़ाया था. एंगल ने एक बार माख 25 की रफ़्तार से स्पेस शटल को ख़ुद चलाकर धरती पर उतारा था. माख 25 का मतलब है आवाज़ से 25 गुना तेज़ रफ़्तार.

अब B-52 बमवर्षक तो कभी दोबारा नहीं उड़ सकेंगे. मगर स्टेम की कोशिश है कि वो इसे इस तरह सहेज दें कि आने वाली कई पीढ़ियां इनकी कामयाबी को देख-सुन और जान सकें.

अपनी आख़िरी उड़ान के पचास साल बाद भी आज X-15 रॉकेट विमानों को पहले से ज़्यादा सराहा जाता है. आज उनकी तकनीक की मदद से वर्जिन गैलेक्टिक और एक्सकोर कंपनियां आपको अंतरिक्ष की सैर कराने का वादा कर रही हैं.

और आख़िर में आपको बताते हैं कि जो वाकर के साथ क्या हुआ? वो साल 1966 में एक हादसे का शिकार हो गए. नासा ने वर्ष 2005 में उन्हें अंतरिक्ष यात्री का दर्जा दिया.

अंग्रेज़ी में मूल लेख यहां पढ़ें, जो बीबीसी फ़्यूचर पर उपलब्ध है.