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जानिए, कैसे पियानो सीखना आपकी ज़िंदगी बचा सकता है
- Author, रिबेका लॉरेंस
- पदनाम, बीबीसी कल्चर
संगीत रूहानी है. ये इंसान को ऊपरवाले की सबसे बड़ी देन है. ये रूह को तसल्ली देता है. ये तकलीफ़ को मिटा देता है. ये बहुत सारे दर्दों को भुला देता है. संगीत हमें नई दुनिया में पहुंचा देता है.
मध्यकाल के मशहूर संगीतकार तानसेन के बारे में कहा जाता है कि वो संगीत से बारिश करा देते थे. संगीत से आग लगा देते थे.
संगीत के शैदाई कहते हैं कि ये हौसला देता है. प्रेरणा देता है. तसव्वुर को नए आसमान पर ले जाता है. संगीत आत्मा को सुकून देता है. इसे तृप्त करता है. ये ज़ख़्मों पर मरहम लगाता है.
संगीत ने जेम्स को नई ज़िंदगी दी
कुछ यही बातें दुनिया को समझाने की कोशिश में जुटे हैं ब्रिटेन के संगीतकार जेम्स रोड्स. रोड्स कहते हैं कि संगीत ने उन्हें नई ज़िंदगी दी है. लोग यक़ीन नहीं करेंगे मगर रोड्स कहते हैं कि उनकी रूह में संगीत ने नई जान फूंक दी.
जेम्स रोड्स संगीत कॉन्सर्ट में पियानो बजाते हैं. पियानो के बारे में कहा जाता है कि इसे सीखना मुश्किल है. इसे बजाने के लिए बहुत रियाज़ करना पड़ता है.
मगर रोड्स ने अपनी किताब How to Play the Piano के ज़रिए ये बताया है कि कैसे बहुत आसानी से महज़ चालीस दिनों के अभ्यास से पियानो बजाना सीखा जा सकता है.
किताब से सीखकर बजा सकते हैं पियानो
रोड्स ने अपनी किताब के ज़रिए बताया है कि कैसे बहुत आसानी से लोग पियानो पर अठारहवीं सदी के मशहूर संगीतकार योहान सेबेस्टियन बाख की धुनें बजा सकते हैं.
असल में बाख पश्चिमी शास्त्रीय संगीत की नुमाइंदगी करते हैं. आज की तारीख़ में बहुत से लोग ये समझते हैं कि शास्त्रीय संगीत आम लोगों के लिए नहीं है.
जेम्स रोड्स कहते हैं कि बीसवीं सदी की शुरुआत से ही कुछ ख़ास लोगों ने शास्त्रीय संगीत को हड़प लिया. ऐसा माहौल बनाया गया कि शास्त्रीय संगीत का लुत्फ़ उठाने के लिए एक ख़ास तरह की समझ होनी चाहिए.
आपको शास्त्रीय संगीत की महफ़िलों में ख़ास लिबास पहनकर जाना होता है. आप आम इंसान जैसा बर्ताव नहीं कर सकते. आपको हमेशा सावधान की मुद्रा में ध्यान लगाकर बैठना होगा. आपको खांसी आए तो आप खांस भी नहीं सकते.
बाख़ को समझने के लिए अलग होना ज़रूरी
रोड्स कहते हैं कि शास्त्रीय संगीत की महफ़िलों को गणित की क्लास बना दिया गया. मानो वहां आप ज़रा भी बेतकल्लुफ़ हुए नहीं कि महफ़िल का मज़ा ख़त्म हो जाएगा.
जेम्स रोड्स कहते हैं कि इसी माहौल की वजह से लोग संगीत की पुरानी और रूहानी धुनों से दूर हो गए. बाख़ की धुनों को बजाना तो दूर लोग उसे सुनने-समझने से भी कतराने लगे क्योंकि कुछ लोगों ने कहा कि बाख का संगीत समझने के लिए अलग इंसान होने की ज़रूरत है.
रोड्स का कहना है कि ये कहना ग़लत है कि बाख का संगीत आम लोगों के लिए नहीं है. रोड्स ने इसी मिथक को तोड़ने के लिए किताब लिखी. जिसके ज़रिए आम लोग पियानो बजाना सीख सकते हैं. वह बाख़ या दूसरे शास्त्रीय संगीतकारों की धुनों को बजा सकते हैं. उनका लुत्फ़ ले सकते हैं.
योहान बाख़ थे जर्मनी के संगीतकार
योहान सेबेस्टियन बाख़ जर्मनी के संगीतकार थे. वो अठारहवीं सदी में जर्मनी के लिपज़िग शहर में पढ़ाया करते थे.
रोड्स बताते हैं कि बचपन में ही उनका पूरा परिवार ख़त्म हो गया. बड़े हुए तो भी उनकी मुसीबतें कम नहीं हुईं. इसीलिए बाख़ ने संगीत को अपनी तकलीफ़ें दूर करने का ज़रिया बना लिया. उन्होंने ऐसी धुनें रचीं जो आज भी सुकून देती हैं. आपकी तकलीफ़ें कम करती हैं. लोगों को नई ज़िंदगी देती हैं.
जेम्स रोड्स रोज़ाना पियानो बजाते हैं. वो कहते हैं कि पियानो पर बाख़ की धुनें सौ से भी ज़्यादा तरीक़ों से निकाली जा सकती हैं. एक ख़ास तरह से ही कोई धुन बजाई जाए ये ज़रूरी नहीं है. जिसको जिस तरह से अच्छा लगे वो संगीत का उस तरह से लुत्फ़ ले सकता है.
संगीत के लिए तय फॉर्मूला ज़रूरी नहीं
रोड्स का मानना है कि संगीत कोई गणित नहीं कि कुछ तय फॉर्मूलों पर ही चला जाए. वह कहते हैं कि किसी कॉन्सर्ट में अगर वो पियानो बजाते हैं, तो वहां मौजूद हज़ारों लोग अपने-अपने तरीक़े से उसे सुनते-समझते हैं. उसका लुत्फ़ उठाते हैं.
बाख़ की धुनों का रोज़ाना रियाज़ करने वाले रोड्स कहते हैं कि जैसे लोगों को लिखने-पढ़ने या खेलने से सुकून मिलता है. ठीक वैसे ही उन्हें संगीत की धुनें बजाने से राहत मिलती है. उनकी रूह को आराम महसूस होता है. उसके ज़ख़्मों पर मरहम लगता है.
रोड्स का मानना है कि संगीत के ज़रिए वो अपनी आत्मा को छूते हैं. उसे सहलाते हैं. उससे बातें करते हैं. ये उनके लिए ध्यान लगाने का ज़रिया है.
वाक़ई संगीत में बहुत ताक़त होती है.
(मूल लेख अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी कल्चर पर उपलब्ध है.)
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