कहानी एक गुरु-शिष्य के प्यार की..

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- Author, फ़िसुन गुनेर
- पदनाम, बीबीसी कल्चर
ऑगस्ट रोडिन उन्नीसवीं सदी में फ्रांस के मशहूर संगतराश या मूर्तिकार थे. इस साल पूरी दुनिया में उनके मुरीद उनकी 100वीं बरसी मना रहे हैं.
इस मौक़े पर एक फ़िल्म भी रिलीज़ हो रही है. जिसमें पहली बार कहानी का फ़ोकस ख़ुद रोडिन हैं. वरना इससे पहले तो हमेशा ही उनसे ज़्यादा उनकी प्रेमिका कैमिल क्लॉडिल का ज़िक्र होता था.
रोडिन की कलाकृतियाँ सिर्फ़ फ़्रांस ही नहीं बल्कि सारी दुनिया में कहीं ना कहीं किसी ना किसी म्यूज़ियम में लगे हैं. 'द ऐज ऑफ ब्रॉन्ज़', 'द थिंकर', 'द किस' उनकी ख़ास कलाकृतियों में से हैं.
लेकिन शायद ही आप उनकी शिष्या और प्रेमिका कैमिल क्लॉडिल के बारे में कुछ जानते हों. कैमिल के बारे में ख़ुद रोडिन ने कहा था कि वो काम के मामले में उन पर बीस बैठती हैं.
कैमिल ने 19 साल की उम्र में ऑगस्ट रोडिन की शागिर्दी अख़्तियार की थी. कैमिल ने 20 साल की उम्र में रोडिन की देख-रेख में पहली कलाकृति गढ़ी थी. कैमिल ने अपने भाई पॉल की मूरत बनाई थी.

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उस्ताद
कैमिल क्लॉडिल में ग़ज़ब की सलाहियत थी. जिसे तराशने का काम किया था ऑगस्ट रोडिन ने. कहते हैं कि ऑगस्ट रोडिन का बहुत सा काम कैमिल की सोच से ही प्रभावित था.
उस्ताद और शागिर्दा का ये रिश्ता करीब 15 साल तक रहा. उसके बाद कैमिल को लगा कि उन्हें ख़ुद की सलाहियत मनवाने के लिए रोडिन के साए से दूर जाना होगा.
कुछ हद तक कैमिल का फ़ैसला सही भी था. उनके काम को लोगों ने खूब सराहा लेकिन कामयाबी का दौर उनकी ज़िदंगी में बहुत लंबे वक्त नहीं चल पाया.
कैमिल और रोडिन का रिश्ता इतना पेचीदा और दिलचस्प था कि इसे कई फ़िल्मों, नाटकों और उपन्यासों के ज़रिए बयां किया गया.
हालांकि आज से चालीस साल पहले लोगों को कैमिल के बारे में कुछ ख़ास नहीं मालूम था मगर 1980 के दशक से लोगों ने कैमिल की ज़िंदगी में दिलचस्पी लेनी शुरू की.

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कला की पढ़ाई
उन पर कई फिल्में बनीं. बायोग्राफी लिखी गईं और कई नाटक भी बनाए गए. साथ ही बहुत सी फिल्में सिर्फ़ कैमिल और रोडिन के रिश्ते पर ही बनाई गई.
कैमिल को बचपन से ही कला में दिलचस्पी थी. उन्हें मूर्तियां गढ़ने का शौक़ था. हालांकि कैमिल की मां को उनका ये काम बिल्कुल नहीं पसंद था.
मगर कैमिल के पिता ने हमेशा ही उनका हौसला बढ़ाया. उन्होंने एक स्थानीय कलाकार अल्फ्रेड बाउचर को कैमिल की प्रतिभा को तराशने का ज़िम्मा दिया था. बाद में कला की पढ़ाई के लिए कैमिल पेरिस आ गईं.
लेकिन कैमिल क्लॉडिल की क़ाबिलियत में असल निखार तब से आया जब से वो रोडिन की पनाह में आईं. कैमिल ने अपनी ज़िंदगी में बहुत काम किया.
लेकिन अफ़सोस कि आज उनके काम के सिर्फ़ 90 नमूने ही मौजूद हैं. कुछ तो खो गए और कुछ को ख़ुद कैमिल ने अपने हाथों से बर्बाद कर दिया.

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दिमाग़ी संतुलन
उनके काम के जो नमूने आज बचे भी हैं, उनमें भी बहुत बड़ी वाली मूर्तियां मौजूद नहीं हैं. बल्कि छोटी छोटी आकृतियां ही हैं. और इन मूर्तियों को बाद में कांसे में ढालकर नए सिरे से बनाया गया.
हालांकि अपने काम के दौरान वो काफ़ी सक्रिय थीं और अक्सर ही अपने काम की नुमाइशें लगाती थीं. अपनी मूर्तियों में कैमिल जिस तरह से इंसानी जज़्बात को उभारती थीं, उसके लिए उनके आलोचक भी उनकी तारीफ़ करते थे.
कैमिल और रोडिन के काम में बहुत समानताएं थीं. लेकिन कैमिल ख़ुद को रोडिन के दायरे से बाहर निकलना चाहती थीं. क़ाबिलियत से लबरेज़ कैमिल की ज़िंदगी में कामयाबी बहुत लंबे समय तक नहीं रही.
क्योंकि रोडिन से अलग होने के कुछ सालों बाद कैमिल का दिमाग़ी संतुलन बिगड़ने लगा था. साल 1913 में वो पागलखाने में भर्ती कर दी गईं. उन्होंने पागलख़ानों में क़रीब तीस साल का वक़्त गुज़ारा.
इस दौरान वो पूरी तरह तन्हा रहीं. इतने लंबे अर्से तक उनसे मिलने बहुत ही कम लोग पहुंचे. कैमिल का भाई पॉल जो उन्हें बहुत प्रिय था वो भी इन 30 सालों में बामुश्किल 12 बार ही मिलने के लिए आया होगा.

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रोडिन की वसीयत
उनके पिता जो उनका ख़्याल रखते थे उनकी भी मृत्यु हो चुकी थी. कैमिल को एक अजीब से ख़ौफ़ ने घेर लिया था. उन्हें अपने गुरू से ही असुरक्षा का अहसास होने लगता था.
उन्हें लगता था कि रोडिन उनके आइडिया को चुरा लेंगे और नाम कमा लेंगे. अपने इस डर को उन्हों ने कई बार अपने ख़तों में भी ज़ाहिर किया था.
हालांकि रोडिन कभी कैमिल से मिलने नहीं जाते थे. लेकिन दूर रहकर रोडिन ने हमेशा ही कैमिल का ख़याल रखा. अपने जीते जी तो वो पैसे से कैमिल की मदद करते रहे.
मरने के बाद के लिए भी उन्होंने कैमिल के लिए एक फंड बना दिया था. रोडिन ने अपनी वसीयत में लिखा था कि उनके काम का जो भी म्यूज़ियम बने, उसमें एक कमरा कैमिल के नाम हो.
उसमें कैमिल की कलाकृतियां रखी जाएं. रोडिन की मौत के बाद पेरिस में एक म्यूज़ियम बना भी. लेकिन किसी को रोडिन की ख्वाहिश पूरी करने का ख़याल नहीं आया.

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पेरिस में म्यूज़ियम
अब रोडिन की मौत की एक सदी के बाद कैमिल की बनाई कलाकृतियों का एक म्यूज़ियम बनाया गया है. इसे फ्रांस के नोजेन्ट-सुर-साइन शहर में उस जगह बनाया गया है, जहां कैमिल ने अपना बचपन गुज़ारा था.
म्यूज़ियम के अंदर कैमिल के घर का वो कमरा भी है, जहां वो रहा करती थीं. यही वो जगह थी जहां कैमिल ने अपना पहला स्क्लप्चर बनया था.
इस म्यूज़ियम में कैमिल के काम के अलावा उनके दौर के और भी कई मूर्तिकारों के काम को रखा गया है. इस म्यूज़ियम में कैमिल के पहले उस्ताद रहे अल्फ्रेड बोशर की कृतियां भी रखी गई हैं.
बाद में अल्फ्रेड ने ही कैमिल को रोडिन के पास कला निखारने के लिए भेजा. रोडिन अपनी मूर्तियों में भावनाओं को बहुत उग्रता से निखारने के लिए जाने जाते थे.
वहीं कैमिल उसमें रूमानियत और कोमलता भरने के लिए जानी जाती थीं. दोनों में अच्छे तालमेल की शायद ये भी बड़ी वजह थी.

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गहरा रिश्ता
कहा तो ये भी जाता है कि दोनों के बीच नज़दीकियां इतनी ज़्यादा बढ़ गई थी कि कैमिल को गर्भपात भी कराना पड़ा था.
रोडिन शादीशुदा थे और अपने बीवी बच्चों के साथ रहते थे लेकिन उनका कैमिल के सथ भी गहरा रिश्ता था.
बहरहाल कैमिल ने अपने जीवन में बहुत से उतार-चढ़ाव देखे. वो अपने उस्ताद की परछाईं से दूर खुद अपनी पहचान बनना चाहती थी.
लेकिन जीते जी उन्हें वो मकाम नहीं मिल सका. उनका किया काम उनकी ज़िंदगी में ही बड़े पैमाने पर ख़त्म हो गया.
लेकिन जो बचा है वो आज भी बहुत ताक़तवर, ताज़ा और अद्भुत लगता है.

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उनकी ज़िंदगी की जमा पूंजी यही है कि आज उनके नाम का म्यूज़ियम बना है. उन्हें याद किया जाता है.
और जब भी रोडिन का ज़िक्र आता है, तब उनकी महबूबा कैमिल क्लॉडिल का ज़िक्र ज़रूर आता है.
दोनों की मोहब्बत को हमारा सलाम.
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