आपकी पढ़ाई और तजुर्बा क्या नई क्रिप्टोकरेंसी है?

    • Author, एड जेंट
    • पदनाम, बीबीसी वर्कलाइफ़

तकनीक के इस युग में कामयाब होने के लिए कहा जाता है कि हमें ताउम्र सीखते रहना चाहिए. अपने हुनर, क्रिएटिविटी और भावनात्मक बुद्धि को मांजते रहना चाहिए.

लेकिन ऐसा कैसे करें- यह कोई नहीं बताता. हुनरमंद बनाने वाली पढ़ाई की पहचान करना मुश्किल काम है.

ऐसे में क्या हो अगर विश्वविद्यालयों के हर मॉड्यूल, ट्रेनिंग कोर्स या करियर विकल्प का मूल्य तय करने का एक तरीक़ा हो और ये भी पता लग सके कि उससे आपके हुनर को निखारने और मौक़ों को बढ़ाने में कितनी मदद मिलेगी?

वॉशिंगटन डीसी की नॉन-प्रॉफिट कंपनी लर्निंग इकोनॉमी यही कर रही है. बिटक्वाइन की ब्लॉकचेन तकनीक का इस्तेमाल करके यह कंपनी हुनर, पढ़ाई और काम के तजुर्बे को सुरक्षित तरीक़े से साझा करने का तरीक़ा ढूंढ़ रही है.

यह प्रणाली योग्यता सत्यापित करने जैसे प्रशासनिक कार्यों को व्यवस्थित कर सकती है. इससे ज़्यादा अहम यह है कि यह किंडरगार्टेन से लेकर रिटायर होने तक हमारे सीखने की प्रक्रिया को ट्रैक कर सकती है.

इसके डेटा प्रशिक्षकों के लिए मददगार हो सकते हैं और वे कामयाबी का वह रास्ता सुझा सकते हैं जो ख़ास आपके लिए हो.

'नया स्वर्ण मानक'

यह परियोजना दो साल पहले शुरू की गई थी. दो सह-संस्थापकों- सीईओ क्रिस पुरीफ़ॉय और चीफ़ टेक्नोलॉजी ऑफिसर जैक्सन स्मिथ ने पैसे जुटाए और अब तक यह परियोजना वॉलंटियर्स पर निर्भर है.

कोलोराडो के उच्च शिक्षा विभाग और फ्लोरिडा के ब्रोवार्ड काउंटी पब्लिक स्कूल ने इसकी तकनीक का परीक्षण करने का करार किया है.

ब्रोवार्ड काउंटी पब्लिक स्कूलों में ढाई लाख से ज़्यादा छात्र पढ़ते हैं. दोनों ने जनवरी 2020 में किक-ऑफ़ इवेंट किया. गर्मियों के अंत तक पायलट प्रोजेक्ट शुरू हो जाएगा.

फ़िलहाल समान विचारों वाले शैक्षणिक फाउंडेशन की मदद से यह समूह और अधिक फ़ंड जुटाने की प्रक्रिया में है.

स्मिथ को लगता है कि वे जो सिस्टम बना रहे हैं उससे एक ऐसी वैश्विक अर्थव्यवस्था बनेगी जिसमें हुनर नई मुद्रा होगी और छात्रों को उनके डेटा के बदले सीखने के लिए भुगतान किया जाएगा.

"हमारे पास यह मंत्र है- क्या हो अगर शिक्षा नया स्वर्ण मानक हो? यदि आप शिक्षा का मूल्य निर्धारित कर सकते हैं तो आप इस पर एक बाज़ार भी खड़ा कर सकते हैं."

स्मिथ का मानना है कि शैक्षणिक आपूर्ति श्रृंखला को दुरूस्त करने की ज़रूरत है.

स्कूल, नियोक्ता और सरकार, सभी कौशल विकास को मापती हैं, लेकिन उनके बीच डेटा शेयर नहीं होता.

सारी सूचनाओं को एक जगह इकट्ठा करना बहुत मूल्यवान हो सकता है लेकिन इससे निजता की सुरक्षा को लेकर ढेर सारी चिंताएं भी पैदा होंगी.

लर्निंग इकोनॉमी ऐसा तरीक़ा ढूंढ़ रही है जिससे इन सूचनाओं को एक सार्वजनिक डेटाबेस पर सुरक्षित और गुमनाम तरीक़े से साझा किया जा सके.

ब्लॉकचेन तकनीक से यह संभव है. यह हाई-टेक तकनीक क्रिप्टोकरेंसी बिटक्वाइन के लिए बनाई गई थी.

इस तकनीक से कंप्यूटरों के बड़े नेटवर्क में रिकॉर्ड्स को साझा किया जाता है. रिकॉर्ड में कोई बदलाव करने पर पूरे नेटवर्क में वह बदलाव दर्ज होता है.

रिकॉर्ड्स को इन्क्रिप्शन से सुरक्षित रखा जाता है. उसमें छेड़छाड़ मुमकिन नहीं होती और यूज़र की पहचान भी गोपनीय रहती है.

तेज़ी से और सुरक्षित तरीक़े से सूचनाएं साझा करने के लिए कई कंपनियां इस तकनीक का परीक्षण कर रही हैं. मेडिकल रिकॉर्ड रखने और अनाज की उपज के स्थान को ट्रैक रखने में इनका प्रयोग हो रहा है.

लर्निंग इकोनॉमी ने निजी डेटाबेस में मौजूद अथाह डेटा से जुड़ने के लिए इसे अपनाया है. स्मिथ कहते हैं, "यह पूरी सप्लाई चेन को एकीकृत करता है. सप्लाई चेन तैयार हो जाने पर आप असाधारण चीज़ें कर सकते हैं."

हुनर का ग्राफ़

लर्निंग इकोनॉमी के प्रस्तावों के तहत प्रत्येक यूज़र के पास एक यूनिवर्सल लर्नर वैलेट होगा.

इसमें स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी की डिग्री के रिकॉर्ड, नौकरी, ऑनलाइन कोर्स और कार्यशालाओं में भागीदारी के अलावा डुओलिंगो से सीखी गई भाषाओं के विवरण भी हो सकते हैं.

यूज़र ख़ुद अपने विवरण अपलोड नहीं करेंगे. ये काम वे लोग करेंगे जिनके पास रिकॉर्ड्स होंगे. लेकिन सिर्फ़ यूज़र ही अपने रिकॉर्ड को पूरा देख पाएंगे और वही यह नियंत्रित कर पाएंगे कि इसे किनके साथ साझा किया जाए.

संभावित नियोक्ताओं के पास या स्कूलों में पहचान और तजुर्बा साबित करने के लिए इनका उपयोग किया जा सकेगा.

एक कॉलेज से दूसरे कॉलेज के बीच क्रेडिट ट्रांसफर में नौकरशाही की प्रक्रिया ख़त्म करने में भी इनका इस्तेमाल किया जा सकेगा. इस सिस्टम की असली चीज़ होगी एकीकृत डेटा.

लर्निंग इकोनॉमी का सिस्टम व्यक्तियों की पहचान किए बिना व्यापक पैटर्न की पहचान करेगा और कुशलता के ग्राफ का विश्लेषण कर पाएगा.

स्कूल, प्रशासक और नियोक्ता सबसे उम्दा हुनर, तजुर्बे और कमी की पहचान कर सकेंगे.

सबसे अहम यह कि इस डेटा का इस्तेमाल शिक्षा और रोजगार के उन संभावित रास्तों की पहचान करने में किया जा सकेगा जो कौशल और करियर को आगे बढ़ाएं.

स्मिथ का कहना है कि उनकी कंपनी अल्फाबेट की रिसर्च ईकाई Xto के साथ मिलकर मशीनी बुद्धि से संचालित इंटरफ़ेस बना रही है जो इस डेटा के आधार पर सीखने की सलाह देगी.

"विचार यह है कि मशीनी बुद्धि के साथ काम करके आप यह तय कर सकते हैं कि सीखने में आपका लक्ष्य क्या है और यह लक्ष्य हासिल करने के लिए आपकी रणनीति क्या हो."

ख़ास आपके लिए रोडमैप

कनाडा में ओटावा के 147 स्कूलों को देखने वाले स्कूल बोर्ड की पूर्व निदेशक जेनिफ़र एडम्स का कहना है कि कई शैक्षणिक संगठनों ने अपने समाधान लागू करने की कोशिश की है.

ब्लॉकचेन से इस प्रक्रिया को विकेंद्रीकृत करना और अलग-अलग कई स्रोतों से डेटा लेना ऐसे प्रयासों को व्यापक बनाएगा और उन छोटे संगठनों के लिए एंट्री की बाधाओं को कम करेगा जिनके पास आईटी क्षमता नहीं है.

लेकिन वह एक ही एप्रोच पर निर्भर नहीं रहना चाहतीं, इसलिए शिक्षार्थियों के मार्गदर्शन के लिए अन्य तरीकों के साथ इसके इस्तेमाल का सुझाव देती हैं.

एडम्स कहती हैं, "हम इस बारे में यथार्थवादी होकर बात करें और मानें कि यह जटिल प्रक्रिया है. इस बारे में कुछ पूर्वानुमान हैं लेकिन इसका कोई निश्चित मार्ग नहीं है."

डेटा के विस्तार की गुंजाइश को देखते हुए लर्निंग इकोनॉमी इसे इकट्ठा करना चाहती है.

जेनिफ़र एडम्स को लता है कि सबसे मुश्किल काम छात्रों, स्कूलों और माता-पिता को इस बात के लिए मनाना है कि ब्लॉकचेन उनकी जानकारियों को सुरक्षित रखेगा और उनका कोई बेजा इस्तेमाल नहीं होगा.

"माता-पिता इस बारे में पूरी तरह सतर्क होंगे, इसलिए हमें उन्हें अच्छी तरह समझाना होगा कि हम इस डेटा का कैसे उपयोग करेंगे और उससे उनके बच्चे को किस तरह मदद मिलेगी."

लर्निंग इकोनॉमी को यह मालूम है. इसीलिए उसने सिस्टम और उसके डेटा पर 50-50 स्वामित्व का फॉर्मूला बनाया है.

आधा स्वामित्व उनका होगा जो इसे तैयार करते हैं, जैसे- छात्र, शिक्षक और कर्मचारी. आधा स्वामित्व उन संगठनों का होगा जो इसे इकट्ठा करते हैं, जैसे- स्कूल, प्रशासक और नियोक्ता.

वे एक निगरानी व्यवस्था भी विकसित कर रहे हैं जो डेटा के इस्तेमाल के तरीके तय करने में मदद करेगा.

स्मिथ को लगता है कि उनका सिस्टम जो डेटा इकट्ठा कर रहा है वह इतना मूल्यवान होगा कि सरकारें और नियोक्ता उसके लिए कीमत भी चुकाने को तैयार होंगे.

उन्होंने कमाई के पैसे के इस्तेमाल का एक मॉडल भी बना रखा है. वे इससे सेंट्रल रिजर्व तैयार करेंगे जिससे छात्रों और शिक्षकों को डेटा तैयार करने के लिए भुगतान किया जाएगा.

स्मिथ कहते हैं, "दुनिया अभी उसके लिए पूरी तरह तैयार नहीं है, लेकिन हम इसे साबित करने और वहां तक पहुंचने के लिए काम कर रहे हैं."

सीईओ पुरीफ़ॉय शिक्षा के मूल्य को आर्थिक पैमानों पर निर्धारित करने के ख़तरे स्वीकार करते हैं, इसीलिए उनकी योजनाएं कौशल ग्राफ पर ख़त्म नहीं होतीं. लंबे दौर में वे विस्तृत डेटा के आधार पर "लाइफ़ ग्राफ" तैयार करना चाहते हैं.

इसमें ज़िंदगी और काम से संतुष्टि, व्यक्तित्व परीक्षण और यहां तक कि कसरत के आंकड़े भी होंगे.

पुरीफ़ॉय का कहना है कि इससे सिर्फ़ शैक्षणिक और पेशेवर क़ामयाबी के आधार पर नहीं, बल्कि पूरी ज़िंदगी के आधार पर किसी शख्स को आंका जा सकेगा और यूज़र्स अपने लिए एक खुशहाल और क़ामयाब ज़िंदगी का रास्ता तैयार कर सकेंगे.

"इससे हम सिर्फ़ काम के फेर में पड़ने से बचे रहेंगे. ज़िंदगी के बारे में समग्र नज़रिया होना ज़रूरी है, खुशी और गुणात्मक चीज़ें अर्थशास्त्र से नहीं मिलने वालीं."

पुरीफ़ॉय और स्मिथ की सफलता के लिए ज़रूरी है कि ढेर सारे स्कूल, विश्वविद्यालय और नियोक्ता उनसे खरीदारी करें.

2019 के वर्ल्ड इनोवेशन समिट फ़ॉर एजुकेशन में लर्निंग इकॉनमी के वर्कशॉप में शामिल हो चुकी सारा ली का कहना है कि कई कंपनियां सीखने के लिए भुगतान करती हैं चाहे वह एप्रेंटिशशिप के जरिये हो, एमबीए की डिग्री फ़ंड करने से हो या नौकरी का प्रशिक्षण दिलाने के जरिये हो.

"हर कॉरपोरेट संस्थान में ऐसा होता है. अब जब इसे खोलना और विनिमय लायक बनाना शुरू होगा तो बहुत ही दिलचस्प होगा."

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