इस देश में ज़्यादा बच्चे होने पर मां को मेडल मिलता है

- Author, टेलर वीडमैन, एज़ात रूज़िएव
- पदनाम, बीबीसी कैपिटल
कई देशों की सरकारें ज़्यादा बच्चे होने पर नागरिकों को आर्थिक प्रोत्साहन देती हैं मगर कज़ाखस्तान ऐसे देशों से बहुत आगे है.
कज़ाखस्तान में बड़े परिवारों को बढ़ावा दिया जा रहा है. यहां की सरकार चाहती है कि परिवारों में अधिक बच्चे हों. इसलिए, इस देश की जन्म दर बढ़ाने में योगदान देने वाली वाली मांओं को "हीरो मदर्स" का मेडल दिया जाता है.
किसी परिवार में छह बच्चे होने पर मां को रजत पदक दिया जाता है. सात या उससे ज़्यादा बच्चे पैदा करने पर मां को स्वर्ण पदक से नवाज़ा जाता है.
पदक पाने वाली मांओं को सरकार से ताउम्र मासिक भत्ता भी मिलता है.

ज़्यादा बच्चे, बड़ा मेडल
रौशन कोजोमकुलोवा 10 बच्चों की मां हैं. उनके पास रजत और स्वर्ण पदक दोनों हैं. अपनी इन उपलब्धियों पर कोजोमकुलोवा को फ़ख्ऱ है.
उनके घर में 8 लड़कियां और 2 लड़के हैं. खाने की मेज़ पर सभी बच्चे एक साथ खाना खा रहे हैं. सबसे छोटा बच्चा बड़े भाई की गोद में बैठकर खाना खा रहा है.
कोजोमकुलोवा अपने मेडल बैज टी-शर्ट के ऊपर लगाकर दिखाती हैं. स्वर्ण पदक मिलने के बाद वह उम्र भर सरकारी भत्ते की हक़दार हैं.

बक्तीगुल हलाइकबेवा के 6 बच्चे हैं. उनको सिल्वर मेडल मिला है और सरकार से हर महीने भत्ता मिलता है.
हलाइकबेवा का एक बेटा अभी गोद में है. वह कहती हैं, "यह सबसे छोटा है जो 4 साल का है. सबसे बड़ा 18 साल का है."

"देश में ज़्यादा बच्चे चाहिए"
जो माताएं मेडल नहीं जीत पातीं वे भी सरकार से आर्थिक सहायता पा सकती हैं. जिन परिवारों में चार बच्चे हैं उनको भत्ता दिया जाता है, जब तक कि बच्चे 21 साल के न हो जाएं.
कज़ाखस्तान के श्रम और सामाजिक कार्यक्रम विभाग की अक्साना एलुसेज़ोवा कहती हैं, "हमारी सरकार की नीति है कि हमें अपने देश में ज़्यादा बच्चे चाहिए."
"सभी लोग इस बारे में हमेशा बात करते हैं कि ज़्यादा बच्चे हों जिससे हमारी आबादी बड़ी हो."

सोवियत परंपरा
माताओं को पदक से नवाजने और आर्थिक मदद देने की प्रथा सोवियत संघ के समय शुरू हुई थी.
1944 में सोवियत संघ ने "मदर हीरोइन" पुरस्कार शुरू किया था. यह उन परिवारों को दिया जाता था जिनमें 10 या अधिक बच्चे हों.
मांओं को सम्मानित करने के लिए सोवियत सरकार उनको सितारे जैसा बैज और प्रशस्ति-पत्र देती थी.
सोवियत समय की तुलना में अब यह पुरस्कार छोटे परिवारों को भी मिलने लगा है, क्योंकि जन्म दर ऊंची रखना अब भी कज़ाखस्तान सरकार की प्राथमिकता है.
हीरो मदर कहलाने के लिए अब कम से कम 4 बच्चे होने ज़रूरी हैं.

सरकार गर्भवती महिलाओं और एकल मां को भी आर्थिक सहायता देती है, लेकिन सिर्फ़ पहले साल.
जिन मांओं के 4 से कम बच्चे हैं उनको सरकार से कोई मासिक भुगतान नहीं मिलता.
कुछ लोगों की मांग है कि इस योजना को 2 या 2 से अधिक बच्चों वाली मां के लिए भी लागू करना चाहिए.
हलाइकबेवा कहती हैं, "कुछ लोग छोटे परिवारों में ज़्यादा बच्चे पैदा करने से डरते हैं क्योंकि सरकार सिर्फ़ पहले साल उनकी मदद करती है. यह एक वजह हो सकती है."

मज़े में है परिवार
हलाइकबेवा रसोई में खाना बना रही हैं. उनका सबसे छोटा बेटा वहीं मां को पकड़कर खड़ा है.
वह कहती हैं, "मुझे हर महीने 1 लाख 44 हजार टेंगे (370 अमरीकी डॉलर या 26,270 रुपये) मिलते हैं. यह पर्याप्त है."
"मैं इतने पैसे में गुजारा करने की कोशिश करती हूं लेकिन मैं काम भी करती हूं, जिससे सब मिलाकर हमारे लिए कोई कमी न हो. मुझे किसी चीज़ की शिकायत नहीं है."
रौशन कोजोमकुलोवा भी अपनी स्थिति से संतुष्ट हैं. वह कहती हैं, "यह वैसा नहीं है जैसा पहले हुआ करता था."
"पहले हमारा मासिक भत्ता कम था. अब मैं कोई शिकायत नहीं कर रही हूं. सब कुछ बहुत अच्छा है."
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