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तकनीक की दुनिया में गोरे मर्दों का बोलबाला क्यों?
- Author, एलेन पाओ
- पदनाम, बीबीसी कैपिटल के लिए
नई तकनीक जड़ता को तोड़ती है. इसने इंसान की मानसिकता बदली है. लेकिन जब हम टेक इंडस्ट्री में विविधता के बारे में बातें करते हैं तो सबसे बड़ी बाधा आज के टेक लीडर्स की जड़ मानसिकता के रूप में सामने आती है.
एक सजातीय समूह ने, जिसमें ज़्यादातर गोरे मर्द शामिल थे, टेक इंडस्ट्री की स्थापना की और इसमें पैसे लगाए. शुरुआत से ही उन्होंने ऐसा माहौल बनाया कि जो लोग उनके जैसे दिखते हों उनके क़ामयाब होने की संभावना ज़्यादा रहेगी.
पुरुष निवेशकों के पूर्वाग्रह ने उनको महिला संस्थापकों की कंपनियों में निवेश करने से रोका. गोरे लोगों ने अपने नस्लीय समूह और क्षेत्र से बाहर भी निवेश नहीं किया. यह समस्या आज भी बरकरार है.
पिछले साल अमरीका में उद्यम पूंजी का बड़ा हिस्सा गोरे मर्दों की कंपनियों में लगा. महिला संस्थापकों की कंपनियों में उद्यम पूंजी का सिर्फ़ 9 फीसदी पैसा गया और काले या लैटिन संस्थापकों की कंपनियों में केवल 3 फीसदी निवेश हुआ.
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गोरे मर्दों का प्रभुत्व
उद्यम पूंजीपतियों में 90 फ़ीसदी गोरे मर्द हैं. इनमें से कई लोग अपने समूह से आगे की दुनिया नहीं देख पाते, जहां दूसरे लोग भी मौजूद हैं. मेट्रिक्स से पता चलता है कि महिलाओं और पिछड़े नस्लीय और जातीय समूह के लोगों को कितना कम टेक फ़ंड मिलता है.
बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (BCG) के 2018 के एक अध्ययन के मुताबिक महिला संस्थापकों को उनके पुरुष समकक्षों को मिलने वाली फ़ंड का आधे से भी कम हिस्सा मिलता है. 'डिजिटल अनडिवाइडेड' की प्रोजेक्ट डायने रिपोर्ट में पाया गया कि काली महिला संस्थापकों को औसतन 42 हजार डॉलर का फ़ंड मिला, जबकि औसत फंड 11 लाख डॉलर का है.
'डिजिटल अनडिवाइडेड' ने यह भी हिसाब लगाया है कि पिछले दशक में कुल उद्यम पूंजी का केवल 0.3 फ़ीसदी हिस्सा ही लैटिन अमरीकी महिलाओं को मिला. हाल के अध्ययनों से उस नजरिये की समस्याओं और विविधता के फ़ायदे, दोनों का पता चलता है.
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विविधता के फ़ायदे
-2015 की मैकिंसे रिपोर्ट में पाया गया कि नस्लीय, जातीय और लैंगिक विविधता वाली कंपनियां बेहतर व्यावसायिक प्रदर्शन करती हैं.
-BCG की रिपोर्ट के मुताबिक महिला संस्थापकों के स्टार्ट-अप्स का वित्तीय प्रदर्शन बेहतर रहा.
-उन्होंने पांच साल में 10 फीसदी ज़्यादा राजस्व (6,62,000 डॉलर की जगह 7,30,000 डॉलर) जुटाया.
-प्रति डॉलर निवेश पर उनका राजस्व भी दोगुने से ज़्यादा (0.31 डॉलर के मुक़ाबले 0.78 डॉलर) रहा.
2012 में मैंने अपने वेंचर कैपिटल फ़र्म क्लेनर पर्किंस पर लैंगिक भेदभाव और कर्मचारी के रूप में मुझसे बदला निकालने का मुकदमा दर्ज कराया था. कंपनी का दावा था कि उसके फ़ैसले प्रदर्शन पर आधारित थे. 2015 में मैं वह मुकदमा हार गई, लेकिन इस मुकदमे ने टेक्नोलॉजी के बारे में लोगों की सोच बदल दी.
कुछ मामलों में, लोग टेक्नोलॉजी के क्षेत्र को कैसे देखते हैं, वह भी बदल गया. तब से अब तक सैकड़ों लोग भेदभाव की कहानियां साझा कर चुके हैं. ये कहानियां नज़रिये और व्यवहार, दोनों को बदल रही हैं. मिसाल के लिए, कई और कंपनियों में महिलाओं को साझीदार के रूप में जोड़ा है. इसने मुझे सिखाया कि बदलाव मुमकिन है, लेकिन यह ऊपर से होना चाहिए.
यदि किसी कंपनी में जूनियर और मिडल लेवल पर ढेरों महिलाएं हों, लेकिन उनको नौकरी पर रखने, निकालने और उनकी तनख़्वाह तय करने का अधिकार पूर्वाग्रही पुरुषों के पास हो तो उद्यम पूंजी और उद्यमशीलता में पुरुषों का वर्चस्व कायम रहेगा.
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तकनीक को बेहतर कैसे बनाएं?
तकनीक को विविधतापूर्ण और समावेशी बनाने के लिए भविष्य के कारोबारी नेताओं को अपने स्टार्ट-अप्स और कंपनियों से शुरुआत करनी होगी और तीन मूल्यों का ध्यान रखना होगा.
पहला मूल्य है समावेश. 1987 में काली महिलावादी विद्वान किंबरले क्रेंशॉ ने एक शब्द गढ़ा था- intersectionality.
क्रेंशॉ ने बताया था कैसे लिंग और नस्ल जैसी पहचान कई तरीकों से आपस में जुड़ी रहती हैं और जब ये एक-दूसरे से टकराती हैं तो पूर्वाग्रह भारी सामाजिक असमानताओं और भेदभाव का कारण बनता है.
उदाहरण के लिए, काली और लैटिन अमरीकी महिला संस्थापकों के लिए फ़ंड की बाधाएं सामान्य महिलाओं से कहीं ज़्यादा हैं.
दूसरा मूल्य है समझ की व्यापकता. नाममात्र के प्रयासों और नियुक्तियों से काम नहीं चलने वाला. इसकी जगह काम के सभी स्तरों पर और सभी समूहों में विविधता और समावेशिता लानी होगी.
तीसरा मूल्य है जवाबदेही. जब तक तरक्की और खाई को मापने और उनका प्रबंधन करने के लिए मेट्रिक्स का इस्तेमाल नहीं किया जाता तब तक यह जानना मुश्किल है कि असल में कितनी प्रगति हुई है. यह कारोबार की प्राथमिकता में नहीं है.
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आप क्या मैनेज करना चाहते हैं?
कंपनी में विविधता बढ़ाने और समावेश के लिए गंभीर किसी भी सीईओ को जनसांख्यिकीय लक्ष्यों और महत्वपूर्ण प्रदर्शन संकेतों को अपनाना चाहिए, जैसा वे कारोबार के दूसरे क्षेत्रों में करते हैं.
पहला कदम जनसांख्यिकी और संतुष्टि के स्तर का सर्वेक्षण करना है जिससे पता चलता है कि समस्याएं कहां हैं. इसके नतीजों का इस्तेमाल बेंचमार्क सेट करने और अवसरों को खोजने के लिए करें. इस प्रक्रिया से काम की चीजें पता चल सकती हैं.
मिसाल के लिए, 'प्रोजेक्ट इनक्लूड' में जब मैंने और मेरे सहयोगियों ने टेक स्टार्ट-अप्स के 2,000 से ज़्यादा कर्मचारियों का सर्वेक्षण किया तो 13 फ़ीसदी ने अपनी पहचान LGBQIA (लेस्बियन, गे, बाय-सेक्शुअल, क्वियर, इंटरसेक्स और एसेक्शुअल) बताई.
पांच फ़ीसदी कर्मचारियों ने ख़ुद नॉन-बायनरी, ट्रांसजेंडर, जेंडरफ्लूड या स्त्री-पुरुष से अलग पहचान वाला बताया. हमने यह भी देखा कि कर्मचारियों के यौन रुझान के सवाल को छोड़ देने की संभावना सबसे ज़्यादा थी. शायद इसकी सबसे बड़ी वजह भेदभाव का डर हो या फिर अपनी निजता को बचाए रखने की इच्छा.
हमने लैंगिक-समावेशी कार्यस्थलों और संस्कृतियों के लिए अपनी सिफ़ारिशों की सूची तैयार कर ली है जिसे इसी साल जारी किया जाएगा. इसमें हमने ऑल-जेंडर बाथरूम बनाने जैसे शुरुआती कदमों से लेकर सभी जेंडर के लिए इलाज और बीमा सुविधाएं देने जैसे प्रभावशाली उपायों को शामिल किया है.
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टॉप बॉस सही तो सब सही
कार्यकारी और बोर्ड-स्तर के पदों पर विविधता से भरे कर्मचारियों की नियुक्ति करने से फ़र्क पड़ता है. नौकरी की तलाश करने वाले कई आवेदक सबसे पहले संभावित नियोक्ता कंपनी की वेबसाइट देखते हैं.
वो पहले कर्मचारियों की विविधता देखते हैं, फिर अपने लिए अवसर तलाश करते हैं. वो बड़े अधिकारियों, सीईओ और बोर्ड सदस्यों को देखते हैं कि किसके पास ताक़त है और कम संख्या वाले समूहों के लोग वहां कितना आगे बढ़ सकते हैं. कई कंपनियों में बोर्ड की सीटें निवेशकों को अनुबंध के जरिये आवंटित की जाती हैं.
उद्यम पूंजी कंपनियों में विविधता न होने से बोर्ड में विविधता नहीं आ पाती जिससे कारोबारी प्रदर्शन भी प्रभावित होता है. इसलिए निवेशक अपनी टीम देखें, अपने पूर्वाग्रहों को देखें और अपने लक्ष्य निर्धारित करें. अगर आप शीर्ष पर विविधता लाते हैं तो पूर्वाग्रहों को ख़त्म करना आसान हो जाएगा.
(यह बीबीसी कैपिटल पर छपे लेख का शब्दश: अनुवाद नहीं हैं. भारतीय पाठकों के लिए इसमें कुछ संदर्भ और प्रसंग जोड़े गए हैं. मूल लेख अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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