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वो सात बड़ी चुनौतियां जो भविष्य पर असर डालेंगी
- Author, पीटर रुबीनस्टीन
- पदनाम, बीबीसी कैपिटल
पिछले साल हमने 20 साल से कम उम्र के उद्यमियों और अन्वेषकों को ढूंढ़ा था और 21वीं सदी की चुनौतियों के बारे में उनके समाधानों को आपके सामने रखा था.
बारूदी सुरंगों का पता लगाने वाले ड्रोन, सीवेज को खत्म करने वाले स्ट्रॉ, अंतरिक्ष के कचरे का पता लगाने वाले ट्रैकर और साइबर बुलिंग को रोकने वाला ऐप- ये सब उनके बड़े विचारों के नमूने हैं.
अब हम चुनौती को और मुश्किल कर रहे हैं. बीबीसी ने इंडस्ट्री के शीर्ष नेताओं और वैश्विक विशेषज्ञों से पूछा कि वे उन क्षेत्रों के बारे में बताएं जिनमें आने वाले दशकों में नये विचारों और नये समाधानों की सबसे ज़्यादा जरूरत होगी.
आने वाले महीनों में हम अगली पीढ़ी के विचारकों और दुनिया को नया रूप देने के लिए आगे आने वाले लोगों से आपको मिलवाएंगे.
वे धरती के सभी कोनों से आते हैं. वे सभी 30 साल से कम उम्र के हैं और उनका मिशन भी एक है. कल को बेहतर बनाने के लिए वे आज की समस्याओं को नई तरकीबों से सुलझाना चाहते हैं.
आने वाले वर्षों में सबसे अहम होने वाले कुछ मसलों के बारे में हमारे युवा विशेषज्ञों की राय से भी आप परिचित होंगे.
ज़्यादा स्मार्ट शहर
2050 में दुनिया की 10 अरब आबादी के आधे से ज़्यादा लोग सिर्फ़ 10 देशों में रह रहे होंगे. इन 10 देशों में से 4 को यूएन ने अभी सबसे पिछड़ा घोषित कर रखा है.
जैसे-जैसे गांवों की आबादी शहरों की ओर पलायन करेगी, नये रोज़गार पैदा करने और शहरी सेवाओं को बनाए रखने का दबाव और बढ़ेगा.
भविष्य के शहरों के लिए परिवहन प्रणाली और आवास, इन दो क्षेत्रों को सबसे ज़्यादा तवज्जो दिए जाने की ज़रूरत है.
इन क्षेत्रों में नई सोच का मतलब होगा जगह बनाने, सफाई और गतिशीलता बढ़ाने के क्षेत्र में अधिक निवेश.
प्रकृति के साथ
पुराने को बाहर करो, प्राकृतिक को अपनाओ. महीन धूलकणों ने हमारी हवा को और प्लास्टिक के छोटे-छोटे टुकड़ों ने महासागरों को भर दिया है. हमें साफ-सुथरे विकल्पों की ओर बढ़ने की ज़रूरत है.
हानिकारक सामग्रियों और ऊर्जा स्रोतों को चलन से बाहर कर देना संभव हो रहा है. रचनात्मक और जैव-केंद्रित विकल्पों ने हमें यह मौका दिया है.
अंतरिक्ष की खोज का नया युग
हम नये अंतरिक्ष युग में जी रहे हैं. अंतरिक्ष पर्यटन और चांद पर बस्तियां बसाने की संभावनाएं बढ़ रही हैं.
अंतरिक्ष तक हमारी पहुंच पहले कभी इतनी आसान नहीं थी.
दुनिया भर की शीर्ष अंतरिक्ष एजेंसियां अपने-अपने महत्वाकांक्षी मिशन में लगी हुई हैं और इंसान उनकी तरफ टकटकी लगाकर देख रहा है.
अंतरिक्ष में हमारी छलांग नये सवालों को प्रेरित कर रही है- हम दूर के खगोलीय पिंडों पर बस्तियां कैसे बसाएंगे?
क्या अंतरिक्ष में भी लोकतंत्र होगा? धरती से दूर विकसित होने वाली पहली संस्कृति कैसी होगी?
साफ और हरी तकनीक
हरी तकनीक की दुनिया में हमारी प्रगति धीमी है. धरती को बचाने के लिए जिस रफ़्तार से काम करने की ज़रूरत है वह बदल रही है.
इस दिशा में काम कर रहे अन्वेषक समय के साथ दौड़ लगा रहे हैं.
स्वच्छता हमेशा नई तकनीक की मोहताज नहीं होती. सबसे अच्छा समाधान अक्सर मौजूदा आदतों को बदलने से मिलता है.
अलग-अलग क्षेत्रों में प्रभावी और व्यावहारिक उपाय तलाश कर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है.
कभी-कभी समस्या को अलग तरीके से देखने से प्रकृति भी समाधान उपलब्ध करा देती है.
कृत्रिम मेधा (AI) का उदय
मशीनों की मेधा हमारी दक्षता बढ़ाने के लिए इस्तेमाल की जाए या हमारी उपस्थिति के विकल्प के तौर पर, इसे रोकना नामुमकिन है.
कृत्रिम होशियारी जितनी अच्छी होगी, उसे अपनाना उतना ही बेहतर होगा. ज़्यादा परिष्कृत एल्गोरिद्म का मतलब है निर्णयों और सुझावों में ज़्यादा निश्चितता.
बात जब हमारी निजी पसंद और जरूरतों की हो तो इसका मतलब सटीक वैयक्तिकरण भी हो सकता है.
व्यापार, शिक्षा और अनुभव के समूचे तंत्र पर इस विचार को लागू करके देखें तो आप यह समझने लगेंगे कि दुनिया की इस नवीनतम तकनीकी युग में कितनी संभावनाएं हैं.
खाई को पाटना
विविधता बढ़ाने और असमानता कम करने में तरक्की के बावजूद कार्यक्षेत्रों में, मीडिया प्रतिनिधित्व में और दुनिया भर के नेतृव में विभाजन की खाई चौड़ी है.
सत्ता में बैठे नेताओं की नई समावेशी नीतियों और कार्यक्रमों के साथ-साथ ज़मीनी स्तर पर काम कर रहे छोटे खिलाड़ी भी अपने लिए जगह बना रहे हैं.
2030 के लिए यूएन ने सतत विकास के जो 17 लक्ष्य तय किए हैं, उनमें से 2 लक्ष्य विभाजन की खाई पाटने से संबंधित हैं.
वे समानता को न सिर्फ़ एक मौलिक मानव अधिकार मानते हैं, बल्कि इसे एक शांतिपूर्ण, समृद्ध और टिकाऊ दुनिया के लिए आवश्यक आधार भी समझते हैं.
बदलता कामकाजी वर्ग
तेज़ी से बदल रही दुनिया में काम करने वाले लोग भी उसी रफ़्तार से बदल रहे हैं.
नौकरियां देने वाले नियोक्ता जेनरेशन ज़ेड (Gen Z) के लिए रेड कार्पेट बिछा रहे हैं, क्योंकि वे नये विचारों और नई तकनीक से लैस होकर आ रहे हैं.
कृत्रिम मेधा और स्वचालन की अबाध गति ने पुरानी पीढ़ी को नये रास्ते पर चलने के लिए मजबूर किया है.
विशेषज्ञों का कहना कि आज प्राइमरी स्कूल में पढ़ाई शुरू करने वाले 65 फीसदी बच्चे उन नौकरियों में जाएंगे जो खत्म होने वाले हैं.
हम जो अवसर सामने ला रहे हैं, उसमें पारंपरिक रोजगार मॉडल को छोड़कर कुछ अलग करना शामिल है.
हाशिये पर पड़ी क्षमता का उपयोग करने वाली व्यावसायिक रणनीतियां बनाना और सफल आजीविका के लिए इसके क्या मायने हैं, इस पर पुनर्विचार जरूरी है.
(मूल लेख अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें, जो बीबीसी कैप्टिल पर उपलब्ध है.)
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