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यहां करोड़पतियों के लिए भी रहने की जगह नहीं
- Author, कैटी बैक
- पदनाम, बीबीसी कैपिटल
दुनिया का कमोबेश हर देश बड़े-बड़े अमीर लोगों को अपने यहां आने, रहने और निवेश करने का न्यौता देता है. सोच ये है कि बड़े लोग इन देशों में पैसे लगाएंगे, तो उनकी तरक़्क़ी होगी.
मगर एक देश ऐसा भी है, जिसका रईसों और रईसी से जी भर गया है.
आप एक ऐसे देश का तसव्वुर करें, जो किसी मुहल्ले से भी छोटा हो. जिसका आकार महज़ 2 वर्ग किलोमीटर हो. जहां की सड़कें खुली और शांत हों. गलियों में गंदगी न हो. और वहां के बाशिंदों को कोई इनकम टैक्स भी न देना पड़े.
एक ऐसी जगह जहां कार रेसिंग और नौका दौड़ लोगों का शगल हों. कहीं जाने के लिए लोग टैक्सी के बजाय हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल करते हों.
ये एक ऐसा देश हो, जहां हर दूसरा आदमी करोड़पति हो. बल्कि अरबपति हो. ग़रीबी से जूझ रही दुनिया में ऐसी छोटी सी जन्नत है मोनाको. एक शहर के बराबर का मुल्क, जो फ्रांस के भूमध्य सागर के तट वाले इलाक़े में आबाद है. दुनिया भर के अमीर यहां अपना ठिकाना बनाने को बेताब रहते हैं. इसके ख़ूबसूरत समुद्री तट तमाम रईसों को अपनी तरफ़ खींचते हैं.
अमीरों की राजधानी
इस शहर सरीख़े मुल्क़ मोनाको में जगह की इतनी कमी हो गई है कि अब अमीर लोगों को बसाने के लिए समंदर में द्वीप बनाए जा रहे हैं. मोनाको को दुनिया के अमीरों की राजधानी कहा जाता है. यहां आबादी के लिहाज़ से दुनिया के सबसे ज़्यादा अमीर रहते हैं. इसलिए यहां की औसत आमदनी भी करोड़ों में है.
अगर आप फ्रांस के भूमध्य सागर के तट के किनारे-किनारे चलें, तो कंकड़-पत्थर वाले समुद्री किनारों के बीच-बीच में सूरज की तपिश से बचाने के लिए छाते लगे दिखेंगे. और बीच में दिखेंगे साइप्रस के दरख़्त.
आगे बढ़ेगे तो अचानक ही आप ऊंची-ऊंची इमारतों के जंगल से घिरे नज़र आएंगे. उनींदे से पड़े समुद्री किनारों से थोड़ी ही दूर पर चमचमाती ये इमारतें आप को अलग ही दुनिया में होने का एहसास कराती हैं. इनके बीच सड़कों पर फर्राटे भरती बुगाती, रॉल्स रॉयस और मेबाख जैसी करोड़ों की कारें भी आपको दिख जाएंगी. यहीं पर आपको दुनिया का सबसे मशहूर कसीनो भी दिखेगा.
मोनाको सबसे कम जगह में सबसे ज़्यादा आबादी वाला देश है. इसे दुनिया भर के अमीरों का खेल का मैदान कहा जाता है. हर रईस यहां बसना चाहता है. नतीजा ये कि यहां प्रॉपर्टी के दाम बेतहाशा बढ़ रहे हैं.
मोनाको में इस वक़्त मकान की कीमत 67 हज़ार प्रति वर्ग मीटर से लेकर 1 लाख 42 हज़ार वर्ग मीटर के बीच है.
टैक्स बचाने के लिए जन्नत
आप ये सोचें कि यहां पर दुनिया भर के अमीर लोग इसलिए बसना चाहते हैं कि यहां का सी-व्यू शानदार है, तो ऐसा नहीं है. असल में ये देश टैक्स बचाने के लिए जन्नत जैसा है. जानकार कहते हैं कि लोग मोनाको में इसलिए आना चाहते हैं, क्योंकि वो टैक्स बचाना चाहते हैं.
मोनाको में न तो इनकम टैक्स लगता है, न कॉरपोरेशन टैक्स. यही वजह है कि दुनिया के तमाम देशों के अमीर यहां ठिकाना बनाना चाहते हैं.
मोनाको की कुल आबादी 38 हज़ार है. इसकी एक तिहाई आबादी अरबपतियों की है. अरबपतियों के मामले में स्विटज़रलैंड के शहरों जेनेवा और ज्यूरिख का नंबर मोनाको के बाद ही आता है. जानकार कहते हैं कि अगले दस सालों में यहां 16 हज़ार से ज़्यादा अरबपति आकर बसने की सोच सकते हैं.
दिक़्क़त ये है कि मोनाको में अब और रईसों के लिए जगह ही नहीं बची है.
मोनाको के विस्तार की महत्वाकांक्षी योजना
मोनाको का इलाक़ा महज़ 2.02 वर्ग किलोमीटर है. ये वेटिकन सिटी के बाद दुनिया का दूसरा सबसे छोटा देश है. यहां इमारतें बनाने के लिए जिनती जगह है, सब का इस्तेमाल हो चुका है. यहां तक कि पहाड़ों के ऊपर, ज़मीन के भीतर और आधे आसमान तक इमारतें बन गई हैं.
लेकिन, मोनाको में बसने की अमीरों की चाहत बढ़ती जा रही है. अब इन लोगों के रहने के लिए मोनाको के शासक प्रिंस अल्बर्ट ने बहुत बड़ी योजना बनाई है. अब समंदर में इमारतें बनाकर लोगों के रहने का इंतज़ाम किया जा रहा है.
समंदर से ज़मीन छीनने की इस योजना में पैसा तो निजी निवेशकों का लगा है. मगर, मोनाको की सरकार इस प्रोजेक्ट की निगरानी कर रही है. ये प्रोजेक्ट 2.1 अरब डॉलर का है. जिससे मोनाको के इलाक़े में 15 एकड़ का इज़ाफ़ा होगा. इसमें 30 जहाज़ खड़े करने लायक़ बंदरगाह, एक शानदार पार्क और चमचमाती इमारतें बनेंगी. इनमें 120 घर होंगे.
मगर, समंदर से ज़मीन छीनना इतना आसान काम तो है नहीं. इसके लिए उफ़नती लहरों के बीच कंक्रीट की दीवारें खड़ी करनी होंगी, जो कि बहुत बड़ी चुनौती है. फिर इन दीवारों के बीच जमा पानी को निकालकर ख़ाली जगह पर बालू भरनी होगी. ये बालू इटली में सिसिली से मंगाया जा रहा है.
समुद्री जन-जीवन को नुकसान
इस तरह के विस्तार की भारी क़ीमत चुकानी पड़ती है. इस काम को करने वाली फ्रेंच कंपनी का कहना है कि वो समंदर से छीनी जाने वाली ज़मीन के सभी जीव-जंतुओं को पूरी सुरक्षा से दूसरी जगह ले जाएगी. इसके बाद ज़मीन के नीचे थ्री-डी प्रिंटेड मूंगे की चट्टानें बनाई जाएंगी. लेकिन, इस काम में इलाक़े के समुद्री जन-जीवन को नुक़सान होगा, ये तय है.
माना जा रहा है कि मोनाको के इस प्रोजेक्ट से बड़ी तादाद में जीव मारे जाएंगे. इनकी जगह सूखी बालू ले लेगी.
वैसे मोनाको का समंदर में विस्तार का ये कोई पहला प्रोजेक्ट नहीं है. 1861 से लेकर अब तक मोनाको समंदर में अपना इलाक़ा 20 फ़ीसदी तक बढ़ा चुका है. ऐसा ज़मीन की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए किया गया.
हालांकि, मोनाको के शासक प्रिंस अल्बर्ट द्वितीय पर्यावरण को लेकर काफ़ी गंभीर हैं. वो ख़ुद इलेक्ट्रिक कार से चलते हैं. साथ ही प्रिंस अल्बर्ट ने पर्यावरण से जुड़े मामलों के लिए काफ़ी रक़म दान में भी दी है. प्रिंस अल्बर्ट मानते हैं कि उनके देश को ऐसे प्रोजेक्ट को सावधानी से लागू करना चाहिए, ताकि पर्यावरण को नुक़सान न हो.
समंदर पर ज़मीन का दायरा बढ़ाने की योजना पर काम कर रहे बिल्डरों के लिए बड़ी चुनौती अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करना है. उन्हें ये साबित करना होगा कि ये प्रोजेक्ट धरती के लिए नुक़सानदेह नहीं होगा. बंदरगाह से पर्यावरण को हानि नहीं होगी.
उम्मीद यही है कि ये प्रोजेक्ट दुनिया भर के लिए इस बात की मिसाल बनेगा कि किस तरह बिना धरती को नुक़सान पहुंचाए तरक़्क़ी के प्रोजेक्ट लागू किए जा सकते हैं.