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क्या फिर लहराएगा तिरंगा? | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सट्टेबाजों की सुनें तो भारत एक बार फिर टी- 20 विश्व कप के ख़िताब का सबसे मज़बूत दावेदार है. भारत के बाद दक्षिण अफ़्रीका और ऑस्ट्रेलिया पर सबसे ज़्यादा दांव लगाए जा रहे हैं. आम अनुमान यही है कि इन्हीं तीन टॉप टीमों से कोई एक दूसरे टी- 20 विश्व कप का विजेता बनेगी. हालांकि पाकिस्तान, श्रीलंका और न्यूज़ीलैंड की टीमें भी वहां मौजूद हैं और उनमें कौन कब सबको हैरत में डाल दे, इसका अंदाज़ा कोई नहीं लगा सकता. दक्षिण अफ्रीका की टीम संतुलित है. ऑलराउंडर एल्बी मॉर्केल टी- 20 मैचों में तुरुप का पत्ता बन कर उभरे हैं, जबकि हर्शल गिब्स और मार्क बाउचर ने अपनी बल्लेबाज़ी से आईपीएल में जैसा फ़ॉर्म दिखाया, उससे उनकी टीम का भरोसा ज़रूर बढ़ा होगा.
साथ ही योहान बोथा हैं, जो अपनी स्पिन गेंदबाज़ी से मैचों का रुख़ पलटने का कारनामा दिखा चुके हैं. ऑस्ट्रेलिया की उम्मीद ख़ास तौर पर सलामी बल्लेबाज़ डेविड वॉर्नर और ऑलराउंडर एंड्रूयू साइमंड्स पर टिकी होगी. नाथन ब्रैकन इस वक्त दुनिया के सबसे किफ़ायती गेंदबाज़ों में शामिल हैं, और जाहिर है टी- 20 वर्ल्ड कप में कंगारुओं की टीम में उनकी ख़ास भूमिका होगी. तेज़ गेंदबाज़ मिचेल जॉनसन टेस्ट से लेकर टी- 20 तक में अपना जलवा दिखा चुके हैं. इसके अलावा रिकी पोंटिंग और डेविड हसी जैसे खिलाड़ी जिस टीम में हों, उसे आखिर कौन कम करके आंक सकता है. भारतीय दावेदारी जहां तक भारत का दावा मज़बूत मानने की बात है, तो इसके पीछे कई ठोस तर्क हैं. कप्तान धोनी ने कहा है कि भारत के पास ऐसे खिलाड़ी हैं, जो टी- 20 फॉर्मेट के हिसाब से बिल्कुल फिट हैं. टीम में विशेषज्ञ गेंदबाज़ हैं, और ऐसे पार्ट टाइम बॉलर हैं, जिन्होंने आईपीएल में बेहतरीन फॉर्म दिखाया.
खासकर पार्ट टाइम स्पिनर्स के उपलब्ध होने से टीम के पास यह मौका है कि वह चाहे तो एक अतिरिक्त तेज़ गेंदबाज़ मैदान पर उतार सकती है. आईपीएल में जितने भारतीय खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया, उतने किसी और देश के नहीं. यानी भारतीय खिलाड़ियों के पास टी-20 का फिलहाल सबसे ज्यादा अनुभव है, और वे आईपीएल टूर्नामेंट से सीधे विश्व कप में पहुंचे हैं, यानी वो टी-20 मोड में भी हैं. भारतीय खिलाड़ियों में सुरेश रैना, रोहित शर्मा और यूसुफ़ पठान पर सबकी निगाहें होंगी. रैना एक मैच जिताने वाले ऑलराउंडर के रूप में उभरे हैं, रोहित शर्मा अपना हाथ पिछले टी-20 वर्ल्ड कप में भी दिखा चुके हैं और इस साल आईपीएल में बेहतरीन फॉर्म में दिखे, तो यूसुफ पठान आईपीएल के पिछले दो संस्करणों में टी-20 के खास खिलाड़ी के रूप में विकसित हुए हैं. गेंदबाज़ी आक्रमण भारतीय आक्रमण की ज़िम्मेदारी मुख्य रूप से आरपी सिंह, हरभजन सिंह और प्रज्ञान ओझा के कंधों पर होगी. आरपी सिंह हाल ही में आईपीएल में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले खिलाड़ी रहे.
उधर टी-20 क्रिकेट जिस रूप में विकसित हुआ है, उसमें स्पिनरों ने अपनी ख़ास भूमिका बना ली है. ऐसे में भज्जी और ओझा दूसरी टीमों के लिए अगर कहर साबित हों तो आश्चर्य की कोई बात नहीं होगी. और फिर सबसे ऊपर कप्तान महेंद्र सिंह धोनी हैं, जिनका लोहा आज दुनिया बतौर खिलाड़ी और कप्तान दोनों ही रूपों में मान रही है. बहरहाल, भारत की कुछ चिंताएं भी हैं. और इनमें सबसे बड़ी चिंता ओपनिंग बल्लेबाजों का फॉर्म में नहीं होना है. आईपीएल में गौतम गंभीर ने बेहद कमज़ोर प्रदर्शन किया और वीरेंद्र सहवाग भी दो पारियों को छोड़ कर कोई बेहतर हाथ नहीं दिखा सके. फिर ज़हीर खान पूरी तरह फिट नहीं हैं. वो कंधे की चोट के साथ इंग्लैंड पहुंचे हैं. इंग्लैंड के माहौल में जहां गेंद तेज़ी से स्विंग करती है, जहीर खान भारत के लिए तुरुप का पत्ता हो सकते हैं, बशर्ते वो फिटनेस की समस्या से उबर सकें. खिलाड़ियों के फॉर्म, टी- 20 मैचों के अनुभव और टीम के गठन के लिहाज से निस्संदेह भारत दूसरे टी-20 वर्ल्ड कप का सबसे मज़बूत दावेदार लगता है. मगर दूसरी टीमें भी अपनी तैयारियों के साथ इंग्लैंड पहुंची हैं, इसलिए भारतीय टीम अपने दावे को तभी हक़ीकत में बदल पाएगी, अगर वह मैदान पर भी उतनी ही मज़बूत साबित हो, जितनी कागज पर दिख रही है. (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और खेल की दुनिया पर पैनी नज़र रखते हैं) |
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