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'मालियों को नहीं मिल रहा मेहनत का फल' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कोलकाता के मशहूर ईडन गार्डन की गिनती विश्व के बेहतरीन क्रिकेट मैदानों में होती है. मैदान को बड़े मैचों के लिए तैयार करने के लिए कई माली यहाँ मेहनत करते हैं. लेकिन इस ग्राउंड पर काम करने वाले करीब 20 मालियों ने अब आत्महत्या करने की धमकी दी है. इन लोगों ने चिट्ठी लिखकर कहा है कि उनका आर्थिक भविष्य इतना अंधकरमय है कि उनके पास जान देने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है. ऐसे समय जब भारत के कई अमीर लोग क्रिकेट में लाखों रुपए निवेश कर रहे हैं और खिलाड़ी प्रति हफ़्ते लाखों डॉलर कमाते हैं, इन मालियों का कहना है कि उनका आर्थिक भविष्य अंधेरे में डूबा हुआ है. ईडन क्रिकेट ग्राउंड में काम करने वाले अशोक बताते हैं, "मेरे दिन की कमाई 105 रुपए है. क्रिकेट में इतना पैसा है, हमें भी बेहतर वेतन चाहिए और सेवानिवृत्ती फंड भी हो." अभी तक उनकी माँगों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. पिछले पाँच महीनों से माली अपना वेतन लेने से इनकार करते आए हैं. अब मालियों ने चिठ्ठी लिखी है कि उनकी स्थिति इनती खराब है कि उन्हें आत्महत्या करने पर मजबूर होना पड़ सकता है. अधिकारियों ने कहा है कि वे मामले की जाँच करेंगे लेकिन साथ ही उनका कहना है कि आत्महत्या करने की चेतावनी केवल भावनात्मक है. तेज़ आर्थिक प्रगति का फ़ायदा जहाँ समाज के उच्च वर्ग को मिल रहा है वहीं निचले तबके के लोग अब भी संघर्ष कर रहे हैं. जब मैं मालियों से बात करके ईडन गार्डन से निकला तो मूसलाधार बारिश के बीच भी ये लोग कम में लीन थे. उनमें से एक भागता हुए मेरे पीछे आया और मुझे चिट्ठी की एक प्रति दी. इस चिट्ठी की आख़िरी पंक्ति में लिखा है कि जब क्रिकेट मे लाखों रुपए आ रहे हैं तो क्यों हमारी ज़िंदगी की कोई भी कीमत नहीं है....मैने पूछा कि क्या हालात वाकई इतने खराब हैं कि आप अपनी जान दे देंगे तो जबाव में उसने केवल सर हिलाया और काम में लग गया. |
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