|
'मुझे पद्मभूषण तो सचिन को सर क्यों नहीं?' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मैं नाइटहुड दिए जाने के इस प्रस्ताव से बहुत खुश हूँ क्योंकि सचिन तेंदुलकर एक बेहतरीन और मशहूर क्रिकेटर हैं. उन्होंने दुनिया में क्रिकेट के लिए और भारत में क्रिकेट के लिए बहुत कुछ किया है इसलिए अगर गॉर्डन ब्राउन उन्हें सम्मानित करने की सोच रहे हैं तो ये बहुत अच्छी बात है. कुछ लोग इस बात को संवेदनशील मुद्दा मानते हैं कि भारत के एक नागरिक को सर की उपाधि क्यों लेनी चाहिए, लेकिन मैं ऐसा नहीं मानता हूँ. यह पहला मामला है नहीं है, रविशंकर को भी सर की उपाधि दी जा चुकी है, भारत में एक ही दिक़्कत है कि लोग हर मुद्दे को संवेदनशील मुद्दा बनाना चाहते हैं लेकिन यह तो ख़ुशी की बात है, इस पर लोगों को ख़ुश होना चाहिए और कोई विवाद नहीं होना चाहिए. मेरा तो मानना है कि अगर भारत सरकार मुझे सम्मानित कर सकती है तो इंग्लैंड की सरकार क्यों एक भारतीय को सम्मानित नहीं कर सकती. रविशंकर को मानद नाइटहुड दिया गया इसलिए यह पहली बार नहीं होगा, इसके अलावा बहुत सारे भारतीय लोग हैं जिन्हें ऑर्डर ऑफ़ ब्रिटिश एम्पायर, मेंबर ऑफ़ ब्रिटिश एम्पायर जैसे सम्मान दिए गए हैं. इसके अलावा मानद नाइटहुड न सिर्फ़ भारतीय बल्कि अन्य देशों के लोगों को भी दिया जाता रहा है. नाइटहुड खिलाड़ियों को भी दिया जाता रहा है और इयन बॉथम जैसे उदाहरण हैं, मुझे लगता है कि सचिन तेंदुलकर, सुनील गावस्कर, कपिलदेव और नवाब पटौदी इस सम्मान को पाने के हक़दार हो सकते हैं. नवाब पटौदी भारतीय क्रिकेट टीम के एक बहुत अच्छे और सफल कप्तान थे. यह खुशी की बात है, लोगों को ख़ुश होना चाहिए, अगर कोई कहता है कि यह अवार्ड ब्रिटिश राज की याद दिलाता है तो यह ग़लत बात है, ब्रिटिश राज को ख़त्म हुए बहुत साल हो गए, भारत और ब्रिटेन ने नए सिरे से एक रिश्ता बनाया है. भारत और ब्रिटेन के रिश्ते अब बराबरी के आधार पर हैं और इस अवार्ड से उस पर सकारात्मक प्रभाव ही पड़ेगा. (बीबीसी संवाददाता मानक गुप्ता से बातचीत पर आधारित) | इससे जुड़ी ख़बरें इस बार नहीं चूका शतकों का शहंशाह04 जनवरी, 2008 | खेल की दुनिया 'घरेलू मैदान पर हराना ख़ास होगा'23 दिसंबर, 2007 | खेल की दुनिया सचिन ने कप्तानी से मना किया06 नवंबर, 2007 | खेल की दुनिया भारतीय क्रिकेट सुरक्षित हाथों में है: सचिन25 सितंबर, 2007 | खेल की दुनिया 'मैं सचिन को अपना आदर्श मानता हूँ'28 जनवरी, 2006 | खेल की दुनिया | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||