|
शतरंज चैंपियन बॉबी फ़िशर का निधन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विवादों से घिरे रहे पूर्व विश्व शतरंज चैंपियन बॉबी फ़िशर का 64 वर्ष की आयु में निधन हो गया है. अमरीका में जन्मे फ़िशर 1972 में तत्कालीन सोवियत संघ के खिलाड़ी बोरिस स्पास्की को हराने के बाद सुर्ख़ियों में आ गए थे. इस मैच के साथ ही शतरंज पर सोवियत रूस के प्रभुत्व का अंत हो गया था. फ़िशर की जीत को अमरीका में शीत युद्ध में जीत के तौर पर देखा गया था. दोनों के बीच 1992 में एक बार फिर मुक़ाबला आयोजित किया गया. और अमरीकी आर्थिक प्रतिबंधों का उल्लंघन करते हुए फ़िशर ने यूगोस्लाविया में आयोजित इस मुक़ाबले में भाग लिया और जीत भी हासिल की. अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद मैच खेलने पर उन्हें गिरफ़्तार कर अमरीका भेजने का निर्देश था लेकिन वह फ़रार हो गए और 2005 में उन्होंने आइसलैंड की नागरिकता ले ली. अमरीका ने फ़िशर को आइसलैंड की नागरिकता देने पर नाराज़गी जताई थी और विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा था, "बॉबी फ़िशर एक भगोड़े हैं". उन्होंने यहूदियों के ख़िलाफ़ अपने बयानों और न्यूयॉर्क में 11 सितंबर को हुए हमलों का समर्थन करके बड़ी तादाद में अपने देशवासियों को स्वयं से दूर कर लिया था. सबसे अलग-थलग रहने वाले बॉबी फ़िशर आइसलैंड जाने से पहले कई साल अज्ञात तरीक़े से जापान में रहे. | इससे जुड़ी ख़बरें चेस चैंपियन मुकाबले का भारत में स्वागत16 मई, 2005 | खेल की दुनिया फ़िशर को आइसलैंड की नागरिकता मिली21 मार्च, 2005 | खेल की दुनिया फ़िशर को जापान छोड़ने की अनुमति23 मार्च, 2005 | खेल की दुनिया फ़िशर ने आइसलैंड की राह ली24 मार्च, 2005 | खेल की दुनिया | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||