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शुक्रवार, 29 जून, 2007 को 15:36 GMT तक के समाचार
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'भारत में पेशेवर टेनिस प्रशिक्षण की कमी'
पेस और डैम
पेस अपने जोड़ीदार मार्टिन डैम के साथ यूएस ओपन जीत चुके हैं
टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस का कहना है कि भारतीय खिलाड़ियों में प्रतिभा तो है लेकिन पेशेवर प्रशिक्षण की कमी की वजह से प्रतिभाशाली खिलाड़ी उभरकर सामने नहीं आ पा रहे हैं.

अंतरराष्ट्रीय टेनिस में भारत की तरफ से कई एकल और युगल मुक़ाबले जीत चुके लिंएडर पेस इस बार विंबलडन में मार्टिन डैम के साथ जोड़ी बनाकर खेल रहे हैं.

विंबलडन के चौथे दिन गुरूवार को डबल्स में भारत के लिएंडर पेस और चेक गणराज्य के मार्टिन डैम की जोड़ी ने 7-6, 6-3, 7-5 से जीत हासिल की.

बीबीसी संवाददाता पंकज प्रियदर्शी ने मैच के बाद लिएंडर पेस से विंबलडन मे उनके प्रदर्शन, साथी खिलाड़ियों और भारत में टेनिस के भविष्य जैसे विषयों पर बातचीत की.

आपके ख़याल से क्या आपने जैसा चाहा था वैसा ही मैच हुआ?

बहुत ही मुश्किल दिन था. यहाँ की हवा और बारिश से खेलने में बहुत दिक्कत आ रही है. बारिश की वजह से अभ्यास का मौका भी नहीं मिल पा रहा है. हमारी ताक़त, हमारी मेहनत और हमारी जोड़ी है. हमारी जोड़ी आज दुनिया में नंबर तीन पर है. हम लोगों ने बढ़िया खेला और 3-0 से मैच जीता.

 ये बहुत दुख की बात है कि रमेश कृष्णन जैसे खिलाड़ी की प्रतिभा का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है. इसकी वजह शायद कोई खिलाड़ी या टेनिस संगठन भी हो सकता हैं. उनके अनुभवों का फ़ायदा प्रशिक्षु खिलाड़ियों को हो सकता है
लिएंडर पेस

पहला सेट ट्राईब्रेकर तक गया था और मुझे ऐसा लग रहा था कि आपकी सर्विस भी मार्टिन डैम के मुक़ाबले थोड़ा धीमी थी.

विपक्षी टीम ने पहले सेट में अच्छा खेल दिखाया जो कि बहुत महत्वपूर्ण भी होता है. लेकिन हमने बाद में संभाल लिया और ट्राईब्रेकर में जाकर 7-4 से सेट जीत लिया. टीम में समन्वय करके खेलना होता है. हम और मार्टिन लंबे समय से खेल रहे हैं. ये टीम वर्क की बात है. कभी वो सर्व मारते हैं तो कभी मैं मारता हूँ.

आपके हिसाब से इस बार बिंबलडन में आपको किससे सबसे अधिक चुनौती मिल सकती है?

यहाँ हर मैच कठिन है क्योंकि यहाँ की बारिश और हवा की वजह से खेलने में परेशानी आ रही है. अभ्यास करने में भी दिक्कत हो रही है.

लिएंडर पेस
लिएंडर पेस ओलंपिक में भारत के लिए पदक भी हासिल कर चुके हैं

युगल टेनिस मुक़ाबलों में आपके कई पार्टनर रहे हैं. इन सभी में मार्टिन डैम को कहाँ रखेंगे?

व्यक्तिगत चरित्र और मेहनत के बारे में वो नंबर एक हैं लेकिन स्मार्ट हार्डवर्क दोनों खिलाड़ियों पर निर्भर करता है. मैंने कई खिलाड़ियों के साथ खेलकर बहुत अनुभव हासिल किया है. मार्टिना नवरातिलोवा से सीखा. महेश भूपति के साथ खेलते हुए उसे बहुत कुछ सिखाया है. डेविड रिकल के साथ यूएस ओपन में फ़ाइनल खेला है और नंबर दो तक पहुँच चुके हैं. जितने पार्टनर रहे हैं उनसे बहुत कुछ सीखा और सिखाया है.

पाकिस्तान के एसाम कुरैशी के बारे में क्या कहेंगे?

एसाम के साथ मैं एकल और युगल दोनों में खेल चुका हूँ. वो बहुत अच्छा खिलाड़ी है. उसकी ताक़त है सर्व और वॉली जो ग्रास कोर्ट के लिए बहुत बढ़िया है. इस हफ़्ते एसाम ने बहुत बढ़िया खेल दिखाया. उसने पहले तीन राउंड में क्वालीफ़ाइंग जीता. फिर मेन ड्रॉ में पहला राउंड जीता. ये आसान बात नहीं है.

एसाम मुझसे कह रहे थे कि भारतीय उपमहाद्वीप के बेहतरीन खिलाड़ियों लिएंडर पेस, महेश भूपति और सानिया मिर्ज़ा के साथ उनका भी नाम लिया जा रहा है.

बहुत विनम्र हैं वो.

आप लोगों के बाद भारतीय टेनिस से कोई बड़ा नाम सामने नहीं आ रहा. आप भारतीय टेनिस के भविष्य को कहाँ देखते हैं?

खिलाड़ियों में प्रतिभा है और वो मेहनत भी कर रहे हैं लेकिन पुरुष टेनिस में किसी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम बनाने में बहुत मेहनत करनी पड़ेगी. अभी इनकी रैंकिंग 200 के आसपास है. मुझे बहुत अच्छा लगता है जब भारतीय खिलाड़ी आगे आकर एकल मैचों में ज़िम्मेदारी लेते हैं.

भारत में महिला टेनिस का क्या भविष्य नज़र आता है?

सानिया मिर्ज़ा बहुत अच्छा खेल रही हैं. वो भारतीय महिला टेनिस को अंतरराष्ट्रीय टेनिस में जगह दिलाई है. उनकी रैंकिंग भी 40 के क़रीब है. सानिया भारत का नाम रौशन कर रही हैं.

लेकिन सानिया के बाद कोई और नाम दिखाई नहीं देता.

ओबराय बहनें युगल टेनिस खेलती हैं लेकिन हमारे यहाँ पेशेवर प्रशिक्षण का स्तर अच्छा नहीं है. भारत के लोगों में प्रतिभा की कमी नहीं है मगर भारत के खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ेगी.

ये बहुत दुख की बात है कि रमेश कृष्णन जैसे खिलाड़ी की प्रतिभा का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है. इसकी वजह शायद कोई खिलाड़ी या टेनिस संगठन भी हो सकता हैं. उनके अनुभवों का फ़ायदा नए खिलाड़ियों को हो सकता है.

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