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कई दिग्गजों ने लिया संन्यास | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ऑस्ट्रेलिया की हैटट्रिक के साथ ही एक लंबे और कभी कभी नीरस हो चले विश्व कप क्रिकेट का समापन हुआ और साथ ही समापन हुआ कई दिग्गजों के कैरियर का भी. ग्लेन मैकग्रा, ब्रायन लारा, इंज़माम उल हक, अनलि कुंबले कुछ ऐसे ही नाम हैं जबकि सचिन तेंदुलकर उन नामों में शामिल हैं जिन पर संन्यास लेने के लिए दबाव पड़ रहा है. सबसे बेहतरीन विदाई मिली मैकग्रा को विश्व कप के साथ. न केवल विश्व कप बल्कि उन्हें मैन ऑफ द टूर्नामेंट का अवार्ड भी मिला. क्यों न मिलता. उन्होंने टूर्नामेंट में 26 विकेट लिए और विश्व कप में उनके कुल विकेटों की संख्या 71 हो गई. यह अपने आप मे एक रिकार्ड है. टीम में पिजन के नाम से प्रसिद्ध मैकग्रा उन गेंदबाज़ों में थे जो सटीक गेंदबाज़ी के लिए जाने जाते हैं. 13 साल के लंबे कैरियर में उनके जैसा सधा हुआ प्रदर्शन कम खिलाड़ियों का ही है. 250 एकदिवसीय मैचों में 381 विकेट लेने वाले इस खिलाड़ी का सम्मान प्रतिद्वंद्वी टीमें हमेशा करती रही हैं.
टेस्ट मैचों में तो उनका रिकार्ड और भी बेहतरीन रहा जहां उन्होंने 563 विकेट लिए हैं. मैकग्रा के कैरियर की इससे बेहतरीन विदाई शायद ही संभव थी लेकिन बाकी खिलाड़ी इतने भाग्यशाली नहीं रहे. चुप्पी भरी विदाई अपनी गेंदों से कमाल दिखाने वाले अनिल कुंबले ने विश्व कप में भारतीय टीम के अत्यधिक ख़राब प्रदर्शन के बाद चुपचाप संन्यास लेने की घोषणा की. वर्षों तक अपनी घूमती गेंदों से बल्लेबाज़ों को परेशान करने वाले कुंबले को विश्व कप के मैचों में प्रदर्शन का कम ही मौका मिला और शायद यही कारण था उन्होंने रिटायर होने की घोषणा कर दी. 271 वनडे मैचों में 337 विकेट लेने वाले कुंबले का कहना था कि वो अब टेस्ट मैचों पर ध्यान देंगे. अच्छे प्रदर्शन के साथ विदाई की कुंबले की उम्मीद पूरी नहीं हुई. शायद टेस्ट मैचों में उनकी बेहतर विदाई हो सके. क़िस्मत की बात
पाकिस्तान के कप्तान इंज़माम उल हक़ 1992 में विश्व कप जीतने वाली टीम के सदस्य थे लेकिन 2007 में उनकी कप्तानी में पाकिस्तान की टीम पहले दौर में ही बाहर हो गई. आयरलैंड जैसी टीम से हारने के बाद इंज़माम ने एकदिवसीय मैचों से संन्यास लेने की घोषणा कर दी और कहा कि सभी की किस्मत अच्छी नहीं होती कि उसे बेहतरीन विदाई मिले. इंज़माम टेस्ट खेलते रहना चाहते हैं लेकिन ऐसा संभव नहीं लगता कि उन्हें आने वाले दिनों में पाकिस्तान की टेस्ट टीम में जगह मिल सकेगी. आराम करने का मन बाएं हाथ के इस दिग्गज ब्रायन लारा का नाम डॉन ब्रैडमैन के बाद सबसे बेहतरीन बल्लेबाज़ के रुप में लिया जाता है.
लारा की सबसे बड़ी विडंबना शायद यही होगी कि क्रिकेट की दुनिया के सबसे बड़े रिकार्ड अपने नाम कर लेने वाला यह खिलाड़ी कभी विश्व कप नहीं जीत सका. टेस्ट क्रिकेट में अकेले 400 रन और प्रथम श्रेणी में 501 नाबाद रनों का स्कोर किसी ने नहीं बनाया है. वेस्टइंडीज़ सुपर आठ में तो पहुँची लेकिन प्रदर्शन इतना ख़राब रहा कि लारा को संन्यास की घोषणा करनी पड़ी. पहले उन्होंने एकदिवसीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कि फिर साफ कहा कि अब वो आराम करना चाहेंगे और टेस्ट भी नहीं खेलेंगे. इनके अलावा न्यूज़ीलैंड के कप्तान स्टीफ़न फ्लेमिंग ने वनडे की कप्तानी छोड़ने की घोषणा की. ये तो हुई उनकी बात जिन्होंने रिटायर होने की घोषणा कर दी है लेकिन कई ऐसे खिलाड़ी भी है जिन पर उनके देशों में रिटायर होने के लिए दबाव बन गया है. भारत मे सचिन और गांगुली के नाम इस सूची में सबसे ऊपर हैं. हालांकि विश्व कप के बाद अगले कुछ महीनों में कई और खिलाड़ियों संन्यास की घोषणा कर सकते हैं लेकिन शायद उनका रिटायरमेंट इतनी बेहतरीन न हो. | इससे जुड़ी ख़बरें ऑस्ट्रेलिया ने न्यूज़ीलैंड को हराया21 अप्रैल, 2007 | खेल वेस्टइंडीज़ ने बांग्लादेश को हराया19 अप्रैल, 2007 | खेल 'ऑस्ट्रेलिया को श्रीलंका से डर नहीं'26 अप्रैल, 2007 | खेल मैकग्रॉ को एक शानदार विदाई की उम्मीद28 अप्रैल, 2007 | खेल मुरली को सबसे बड़ी उपलब्धि का इंतज़ार27 अप्रैल, 2007 | खेल बारिश के कारण मैच शुरू होने में देरी28 अप्रैल, 2007 | खेल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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