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विश्व कप: भारत की उम्मीदें लगभग ख़त्म | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका ने भारत को हरा कर उसके विश्व कप अभियान को लगभग ध्वस्त कर दिया है. जीत के लिए 255 रनों का पीछा करते हुए भारतीय पारी 44 वें ओवर में महज़ 185 रनों पर सिमट गई. विश्व कप के अगले चरण यानी सुपर आठ में जगह पक्का बनाने के लिए भारत को यह मैच हर हाल में जीतना था लेकिन घटिया बल्लेबाज़ी ने भारतीय टीम की उम्मीदों पर पानी फेर दिया. भारतीय बल्लेबाज़ शुरू से ही दबाव में दिखे और रनरेट बढ़ाने के चक्कर में सलामी जोड़ी के पैवेलियन लौटते ही मध्यक्रम भी दबाव में बिखर गया. मैच के बाद कप्तान राहुल द्रविड़ ने माना कि उनकी टीम बढ़िया नहीं खेल पाई. उनका कहना था, "दूसरी पारी में विकेट अच्छा था. हालाँकि थोड़ा टर्न मिल रहा था. ख़राब बात यही रही कि हम साझीदारी नहीं कर पाए और लगातार विकेट गँवाते गए." 1996 की विश्व चैंपियन श्रीलंका की जीत में मुथैया मुरलीधरन की अहम भूमिका रही जिन्होंने दस ओवरों में सिर्फ़ 41 रन देकर तीन विकेट चटकाए. अब भारत को किस्मत ही सुपर आठ में पहुँचा सकती है. ऐसा तभी संभव है जब 25 मार्च को होने वाले मुक़ाबले में बरमूडा की टीम बांग्लादेश को भारी अंतर से मात दे दे. लेकिन बांग्लादेशी खिलाड़ियों के बेहतरीन फॉर्म को देखते हुए ऐसा मुश्किल लगता है. पोर्ट ऑफ स्पेन के क्वींस पार्क ओवल मैदान पर जब भारतीय कप्तान राहुल द्रविड़ ने टॉस जीत कर पहले फ़ील्डिंग का फ़ैसला किया तो माना जा रहा था भारतीय टीम इसका पूरा फ़ायदा उठाएगी. जब एक समय श्रीलंका के तीन बल्लेबाज़ 24 वें ओवर में महज 92 के योग पर पैवेलियन लौट चुके थे, तो पहले फ़ील्डिंग करने का फ़ैसला सही नज़र आया लेकिन उपुल थरंगा (64) एक छोड़ से टिके रहे. इसके बाद चमारा सिल्वा (59) और तिलकरत्ने दिलशान ने (38) शानदार साझीदारी की. अंत में रसेल आर्नोल्ड और चामिंडा वास ने फटाफट शैली में कुछ ज़ोरदार स्ट्रोक लगाए जिसकी बदौलत श्रीलंका ने निर्धारित 50 ओवरों में 254 रनों का स्कोर खड़ा कर दिया. भारतीय पारी भारतीय पारी की शुरुआत सौरभ गांगुली और रॉबिन उथप्पा ने की लेकिन दोनों ही चल नहीं सके.
उथप्पा को सातवें ओवर में वास ने अपनी ही गेंद पर लपक लिया. वो सिर्फ़ 18 रन बना सके. उनके बाद सौरभ गांगुली को चमिंडा वास की गेंद पर मुरलीधरन ने लपक लिया, सौरभ गांगुली ने 23 गेंद खेलकर 7 रन बनाए. भारत के स्टार बल्लेबाज़ सचिन तेंदुलकर बिना खाता खोले दिलहारा फर्नांडो की गेंद पर क्लीन बोल्ड हो गए हैं. वीरेंदर सहवाग आउट होने वाले चौथे बल्लेबाज़ थे जिन्हें मुरलीधरन की गेंद पर जयवर्धने ने लपक लिया, वे 48 रन बनाकर आउट हुए. लय में दिख रहे युवारज सिंह (6) बड़े ही दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से रन आउट हो गए और यहीं से मैच का रूख़ पलट गया. अपनी ताबड़तोड़ बल्लेबाज़ी के लिए माहिर महेंद्र सिंह धोनी एक बार फिर फ्लॉप साबित हुए और बिना कोई रन बनाए मुरली की फिरकी का शिकार बने. इस बीच राहुल द्रविड़ एक छोड़ से टिके थे लेकिन अजित अगरकर उनके साथ साझीदारी आगे नहीं बढ़ा पाए और मालिंगा की गेंद पर ऑर्नल्ड के हाथों लपक लिए गए. उन्होंने दस रन बनाए. कप्तान राहुल द्रविड़ के आउट होते ही रही सही उम्मीद ख़्तम हो गई. जयसूर्या की गंद पर लपके जाने से पहले उन्होंने 60 रन बनाए. श्रीलंका की पारी श्रीलंका की शुरुआत भी अच्छी नहीं रही और 33 रनों पर जयसूर्या छह रन बना कर आउट हो गए. जयसूर्या की जगह आए माहेला जयवर्धने भी सिर्फ़ सात रन के निजी स्कोर पर आउट हो गए हैं. अगरकर की गेंद पर उनका कैच पकड़ा विकेट के पीछे महेंद्र सिंह धोनी ने.
आउट होने वाले तीसरे खिलाड़ी थे संगकारा जिनका विकेट सौरभ गांगुली ने लिया, उनकी गुड लेंग्थ गेंद को मारने के चक्कर में वे मिड ऑन पर मुनाफ़ पटेल को कैच दे बैठे, उनका निजी स्कोर था 15 रन. टिककर खेल रहे उपुल थरंगा सचिन की गेंद का शिकार बने, उन्होंने 64 रन बनाए. वे सचिन की घूमती हुई गेंद को नहीं समझ पाए और एलबीडब्ल्यू आउट हो गए. दिलशान के रूप में श्रीलंका का पाँचवा विकेट गिरा, उन्हें मुनाफ़ पटेल की गेंद पर धोनी ने लपका, उन्होंने 38 रन बनाए. चमारा सिल्वा 59 रन के निजी स्कोर पर आउट होने वाले छठे खिलाड़ी थे, उनका विकेट ज़हीर ख़ान ने लिया, उनका कैच लपका धोनी ने जो इस मैच में उनका तीसरा कैच है. भारत की ओर से ज़हीर ख़ान सबसे सफल गेंदबाज़ रहे जिन्होंने दो विकेट लिए. अगरकर, मुनाफ़ पटेल, सौरभ गांगुली और सचिन ने एक-एक विकेट लिए. |
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