|
शांति का रजत पदक वापस माँगा गया | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दोहा एशियाई खेलों में महिलाओं के वर्ग में 800 मीटर की दौड़ में रजत पदक जीतने वाली एथलीट शांति सौंदरराजन से उनका पदक वापस लिया जा रहा है. लिंग परीक्षण में 'महिला वर्ग में शामिल होने के लिए उपयुक्त नहीं' पाए जाने के बाद अब आयोजकों ने भारतीय खेल अधिकारियों से कहा है कि रजत पदक लौटा दिया जाए. भारतीय एथलेटिक्स फ़ेडरेशन के सचिव ललित भनोट ने बीबीसी से एक विशेष बातचीत में इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि शांति लिंग परीक्षण में फेल हो गई हैं इसलिए तकनीकी आधार पर उनका मेडल वापस माँगा गया है और पदक लौटा दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि "एशियाई खेलों का आयोजन करने वाली ओलंपिक कमेटी ऑफ़ एशिया ने पदक वापस माँगा है, हम उनके नियमों से बंधे हैं इसलिए हम पदक लौटा देंगे लेकिन मामले की जाँच के बाद अगर कोई बात सामने आई तो हम मुद्दे को ज़रूर उठाएँगे."
भनोट ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है और कहा है कि भविष्य में ऐसी घटना नहीं हो इसके लिए एथलेटिक्स से जुड़े लोगों को ध्यान रखना चाहिए. भारतीय एथलेटिक्स फ़ेडरेशन के सचिव का कहना है कि "इसमें किसी को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता क्योंकि उसके जन्म-प्रमाण पत्र, स्कूल-कॉलेज के सर्टिफ़िकेट और पासपोर्ट तक पर उसे लड़की माना गया है फिर कोई शक क्यों करे." भनोट कहते हैं, "संभव है कि शांति में जन्म के समय से ही कोई असामान्यता हो लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि वह महिला नहीं हैं या पुरूष हैं, इस बारे में कुछ भी कहना अभी बहुत मुश्किल है." दूसरी ओर, तमिलनाडु सरकार ने इन विवादों को नज़रअंदाज़ करके सोमवार को ही शांति को उनकी ताज़ा उपलब्धि के लिए सम्मानित किया है, शांति के प्रशिक्षक ने भी ज़ोर देकर कहा है कि वह महिला ही हैं. लिंग परीक्षण अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने अब लिंग परीक्षण की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया है लेकिन आधिकारिक तौर पर शिकायत मिलने पर किसी भी महिला खिलाड़ी का लिंग परीक्षण किया जा सकता है.
भारतीय ओलंपिक दल में बतौर डॉक्टर शामिल रह चुके जवाहर जैन बताते हैं कि पहले महिला वर्ग में शामिल हर खिलाड़ी को इस जाँच से गुज़रना पड़ता था लेकिन बाद में इसे महिला विरोधी मानते हुए बंद कर दिया गया था. डॉक्टर जैन बताते हैं, "लिंग परीक्षण क्रोमोसोम (गुणसूत्र) के आधार पर किया जाता है, अगर थूक या रक्त के नमूनों में एक्स-एक्स क्रोमोसोम होते हैं तो खिलाड़ी को महिला और अगर एक्स-वाई हो तो पुरूष माना जाता है." डॉक्टर जैन ने कहा, "यह परीक्षण पूरी तरह फूलप्रूफ़ होता है इसमें पक्के तौर पर लिंग का पता चल जाता है, इसमें ग़लती की कोई संभावना नहीं है." बहरहाल, सिर्फ़ पदक ही नहीं छिन रहा है बल्कि भारतीय एथलेटिक्स बिरादरी की काफ़ी किरकिरी हुई है, इस घटना के बाद शांति के जीवन की शांति तो शायद हमेशा के लिए चली जाएगी क्योंकि वे एक परंपरावादी तमिल ग्रामीण समाज से आती हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें 'लिंग परीक्षण में ग़लत पाई गईं शांति'18 दिसंबर, 2006 | खेल दिल्ली मैराथन में कीनियाई एथलीट छाए15 अक्तूबर, 2006 | खेल समरेश राष्ट्रमंडल खेलों में सर्वश्रेष्ट एथलीट26 मार्च, 2006 | खेल भारतीय एथलीट 'डोपिंग' की दोषी13 अगस्त, 2005 | खेल औरत बनकर पदक जीतने के आरोप12 फ़रवरी, 2005 | खेल जोन्स का डोपिंग के आरोपों से इनकार04 दिसंबर, 2004 | खेल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||