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भारतीय एथलीट 'डोपिंग' की दोषी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हेलसिंकी में चल रही वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भारत की नीलम जसवंत सिंह प्रतिबंधित दवाओं के सेवन की दोषी पाई गई हैं. चक्का फेंक (डिस्कस थ्रो) की खिलाड़ी नीलम जसवंत सिंह फिनलैंड की राजधानी में चल रही चैंपियनशिप में दवा परीक्षण में पकड़ी जाने वाली पहली खिलाड़ी हैं. सात अगस्त को नीलम जसवंत सिंह का परीक्षण किया गया था, उन्हें प्रतिबंधित दवा पेमोलाइन के सेवन का दोषी पाया गया है. नीलम जसवंत सिंह पर वर्ल्ड चैंपियनशिप में हिस्सा लेने से दो साल तक की रोक लगाई जा सकती है. भारतीय एथलेटिक्स फ़ेडरेशन ने भी मामले की जाँच पूरी होने तक उन पर प्रतिबंध लगा दिया है. हेलसिंकी में नीलम जसवंत सिंह ने 56.7 मीटर की दूरी तक चक्का फेंका था और वे फ़ाइनल राउंड के लिए क्वालीफ़ाई भी नहीं कर सकी थीं. पुराने मामले 2002 में कॉमनवेल्थ खेलों में भारत के सतीश राय ने दो स्वर्ण और एक कांस्य पदक जीते थे लेकिन प्रतिबंधित दवाओं के दोषी पाए जाने के कारण उनके पदक छिन गए थे. इसके अलावा भारोत्तोलन मुक़ाबले में तीन रजत पदक जीतने वाले भारतीय कृष्णन मडासामी से तीनों पदक वापस ले लिए गए थे. जाँच से यह पता चला था कि उन्होंने भी ताकत बढ़ाने वाली दवा नैंड्रोलोन का इस्तेमाल किया था. भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने तीन महिला भारोत्तोलकों सानामाचा चानू, प्रतिमा कुमारी और सुकुमारी सुनयना पर आजीवन प्रतिबंध लगाया था. प्रतिमा कुमारी और सानामाचा चानू को एथेंस ओलंपिक के दौरान प्रतिबंधित दवा लेने का दोषी पाया गया था. |
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