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दिल्ली मैराथन में कीनियाई एथलीट छाए | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दिल्ली हच हाफ़ मैराथन की दोनों ही श्रेणियों में कीनिया के एथलीट छाए रहे. पुरुष वर्ग में केन्या के फ़्रांसिस किबीवोट ने एक घंटा एक मिनट और 35 सेकेंड में 21 किलोमीटर की दौड़ पूरी करते हुए ख़िताब जीता. जिम्बाब्वे के कचबर्ट न्यासंगो दूसरे और कीनिया के ही जॉन कोरिर तीसरे स्थान पर रहे. भारत के राम सिंह एक घंटा तीन मिनट और 56 सेकेंड में दौड़ पूरी कर सके. महिला श्रेणी में कीनिया की लिनेथ चेपकिरुई एक घंटा 10 मिनट और 40 सेकेंड का समय निकालते हुए पहले स्थान पर रहीं. इथोपिया की एरकेसो टेरिबा दूसरे और कीनिया की ही डायर ट्यून तीसरे स्थान पर रहीं. डेढ़ लाख डॉलर इनाम वाली इस प्रतियोगिता में 27 हज़ार से भी अधिक एथलीटों ने भाग लिया. तपती धूप के बावजूद मैराथन में हज़ारों बच्चों, महिलाओं, खेल और फ़िल्म जगत से जुड़ी हस्तियों ने हिस्सा लिया. मुख्य दौड़ के अतिरिक्त आम लोगों और शारीरिक रुप से अक्षम लोगों के लिए अलग से प्रतियोगिता आयोजित की गई. उधर रविवार को ही बीजिंग मैराथन में भी कीनिया का दबदबा रहा. पुरुष वर्ग में कीनिया के जेम्स क्वांबी और महिला श्रेणी में चीन की सन विवि विजयी रहे. | इससे जुड़ी ख़बरें उड़ीसा छोड़ना पड़ेगा बुधिया को?29 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस नन्हे मैराथन धावक की बड़ी उपलब्धि02 मई, 2006 | खेल लाहौर मैराथन शांति से पूरी हुई29 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस लाहौर मैराथन का ज़ोरदार विरोध27 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस प्रेम की तलाश में शार्क की मैराथन07 अक्तूबर, 2005 | विज्ञान नन्हें पाँवों में ज़ोर ग़ज़ब का14 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस पाबंदी के बावजूद महिलाओं ने दौड़ लगाई21 मई, 2005 | भारत और पड़ोस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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